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बाहर से लाई गई हरी-पीली अंजीर, हल्के गूदे वाली। पुरंदर अंजीर GI आवेदन में दिए राहुरी परीक्षण में इसने 797.66 फल और 21.33 किलो प्रति पेड़ दिया, जो पाँच नामी किस्मों में सबसे कम है।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- अंजीर
- प्रकार
- पकी लकड़ी की कलम से उगने वाली किस्म
- सीज़न
- सभी सीज़न
- पकने की अवधि
- बारहमासी पेड़; 2–3 साल से फल देने लगता है
- अपेक्षित उपज
- राहुरी में 21.33 किलो प्रति पेड़, पूना के 44.69 किलो के मुक़ाबले
- उपयुक्त मिट्टी
- सभी मिट्टी
- जारी
- बाहर से लाई गई; भारत में जारी होने का रिकॉर्ड नहीं मिला
इस किस्म के बारे में
एक्सेल बाहर से लाई गई अंजीर का नाम है जो भारतीय परीक्षणों में पूना, दिनकर, कोनाड्रिया और डीना के साथ आता है। 2025 का एक शोध-पत्र, गावडे और वास्कर (2005) का हवाला देकर, फल का वज़न 24.72 ग्राम और व्यास 3.80 से 4.50 सेमी बताता है, छिलका हरा से हरा-पीला और गूदा कोनाड्रिया से हल्का। उसी तालिका में कुल शर्करा 16.48 ग्राम प्रति 100 ग्राम है। राहुरी में इसने 797.66 फल और 21.33 किलो प्रति पेड़ दिया। PAU लुधियाना में, 2012 से 2014 में कीटों के लिए परखी गई 11 किस्मों में, इसके फल में 75 अंजीर ततैया मिलीं, टेक्सास की 80 के बाद सबसे ज़्यादा।
क्या यह किस्म आपके लिए ठीक है?
एक्सेल को सिर्फ़ पूना या दिनकर के पास एक छोटे परीक्षण-टुकड़े के तौर पर चुनिए, अपनी मुख्य अंजीर के तौर पर नहीं। पुरंदर अंजीर GI आवेदन में दिए सात किस्मों के राहुरी परीक्षण में एक्सेल ने 797.66 फल और 21.33 किलो प्रति पेड़ दिया। यह पाँच नामी किस्मों में सबसे कम है, जबकि पूना का 44.69 किलो, दिनकर का 37.50, कोनाड्रिया का 37.43 और डीना का 37.19 है। उस तालिका में इसका फल भी छोटा है, 26.61 ग्राम। एक्सेल पुरंदर इलाक़े में उगाई जाती है। आंध्र प्रदेश के एक परीक्षण-पत्र ने इसे डीना और कोनाड्रिया के साथ उन विदेशी किस्मों में गिना है जो 1995 में बेंगलुरु में अच्छी चलीं। इसलिए यह ख़राब अंजीर नहीं है, बस कम उपज वाली है। हमें इसका कोई जारी होने का रिकॉर्ड नहीं मिला, और ऐसा कोई परीक्षण भी नहीं जो इसे फटने, सुखाने या जैम के लिए परखे।
मुख्य विशेषताएँ
बुवाई और खेती
उपज और अवधि
पकने की अवधि
बारहमासी पेड़; 2–3 साल से फल देने लगता है
अपेक्षित उपज
राहुरी में 21.33 किलो प्रति पेड़, पूना के 44.69 किलो के मुक़ाबले
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता और फ़सल की देखभाल पर निर्भर करती है।
कीट और रोग संबंधी बातें
मुख्य रोग
- एक्सेल का अलग से कोई रोग रिकॉर्ड नहीं मिला; PAU लुधियाना में प्रति फल 75 अंजीर ततैया, 11 किस्मों में दूसरी सबसे ज़्यादा
फ़ायदे और ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- पुरंदर तालुका में उगाई जाने वाली किस्मों में गिनी गई है, जो महाराष्ट्र का मुख्य अंजीर इलाक़ा है।
- प्रति पेड़ फल काफ़ी, राहुरी में 797.66, डीना के 824.66 के क़रीब।
- हरा-पीला छिलका और हल्का गूदा, पूना से अलग दिखता है, अगर आप कुछ नया बेचना चाहते हैं।
ध्यान रखने योग्य बातें
- राहुरी में पाँच नामी किस्मों में सबसे कम उपज: 21.33 किलो प्रति पेड़, जबकि पूना की 44.69 किलो।
- छोटा फल: राहुरी में 26.61 ग्राम और 2025 के शोध-पत्र में 24.72 ग्राम, जबकि राहुरी में पूना का 40.86 ग्राम।
- PAU लुधियाना में प्रति फल 75 अंजीर ततैया, 11 किस्मों में दूसरी सबसे ज़्यादा; जारी होने का रिकॉर्ड या फटने का परीक्षण नहीं मिला।
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है। स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में सुझाया इलाक़ा एक से ज़्यादा हो सकता है।
- महाराष्ट्र
- पंजाब
कई छोटे फल: एक्सेल के आँकड़े क्या कहते हैं
राहुरी की तालिका, जो पुरंदर अंजीर GI आवेदन में केंद्रीय शुष्क बागवानी संस्थान की एक समीक्षा से ली गई है। यह हर किस्म के लिए दो आँकड़े देती है: प्रति पेड़ फल और प्रति पेड़ किलो। एक्सेल में 797.66 फल और 21.33 किलो हैं। पूना में 1,382.66 फल और 44.69 किलो, और दिनकर में 1,156.33 और 37.50। फल-गिनती में डीना एक्सेल के क़रीब है, 824.66, पर उसने 37.19 किलो दिया, क्योंकि उसका फल भारी है।
उसी आवेदन की फल-वज़न तालिका दूसरा पहलू दिखाती है: एक्सेल का 26.61 ग्राम, पूना का 40.86 ग्राम और दिनकर का 36.59 ग्राम। 2025 का एक शोध-पत्र, गावडे और वास्कर (2005) का हवाला देकर, एक्सेल का 24.72 ग्राम बताता है। यानी दोनों रिपोर्ट मानती हैं कि एक्सेल छोटे फल वाली अंजीर है, और ऊपर से उसमें पूना से कम फल हैं।
आपके लिए इसका मतलब वह आकार-दर्जा है जिसमें आप बेचते हैं। फल का आकार ख़रीदार के लिए मायने रख सकता है, इसलिए छोटी हरी-पीली अंजीर को अपनी जगह स्वाद या अलग तरह के ख़रीदार से बनानी पड़ती है। हमें एक्सेल का कोई स्वाद-परीक्षण या भाव का रिकॉर्ड नहीं मिला, इसलिए कुछ पेड़ से ज़्यादा लगाने से पहले किसी स्थानीय ख़रीदार से पूछिए कि भाव क्या मिलेगा।
क्या इसका बीज अपने पास रख सकते हैं?
यह खुली-परागित किस्म है, इसलिए अपनी अच्छी फ़सल का बीज दोबारा बोया जा सकता है। बीज सिर्फ़ रोग-मुक्त पौधों से लीजिए, ठीक से सुखाइए, ठंडी-सूखी जगह रखिए, और हर तीन-चार साल में नया प्रमाणित बीज ले आइए ताकि किस्म बिगड़े नहीं।
दूसरी किस्मों से तुलना
अंजीर की वे सभी किस्में, जिनका पेज इस साइट पर है, एक साथ देखें। जो किस्म आप अभी देख रहे हैं, उसकी पंक्ति रंग से अलग दिखती है।
| किस्म | किसके लिए ठीक | फल कब से | उपज | राज्य |
|---|---|---|---|---|
| Bellary | कर्नाटक की सूखी पट्टी; स्थानीय नाम, छपे आँकड़े कम | बारहमासी पेड़; 2–3 साल से फल देने लगता है | कोई छपा हुआ उपज आँकड़ा नहीं मिला | कर्नाटक |
| Brown Turkey | कम कीट वाले बाग; बैंगनी-भूरी ताज़ी अंजीर | बारहमासी पेड़; 2–3 साल से फल देने लगता है | प्रति पेड़ उपज का कोई भारतीय आँकड़ा नहीं मिला | महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, उत्तर प्रदेश |
| Conadria | सूखे मौसम में पकने वाली हरी-पीली ताज़ी या जैम वाली अंजीर | बारहमासी पेड़; 2–3 साल से फल देने लगता है | राहुरी में 37.43 किलो प्रति पेड़, पूना के 44.69 किलो से पीछे | महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात |
| Daulatabad | महाराष्ट्र का पारंपरिक नाम; कलमों की पहचान पक्की करें | बारहमासी पेड़; 2–3 साल से फल देने लगता है | कोई छपा हुआ उपज आँकड़ा नहीं मिला | महाराष्ट्र |
| Deanna | बड़ा सुनहरा फल; टहनी छेदक पर नज़र ज़रूरी | बारहमासी पेड़; 2–3 साल से फल देने लगता है | राहुरी में 37.19 किलो प्रति पेड़; आंध्र प्रदेश में फल 60.43 ग्राम | महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात |
| Dinkar | महाराष्ट्र के बाग; ताज़ा बिक्री और प्रोसेसिंग | बारहमासी पेड़; 2–3 साल से फल देने लगता है | राहुरी में 37.50 किलो प्रति पेड़, पूना के 44.69 किलो से पीछे | महाराष्ट्र |
| Excelयही पेज | छोटा परीक्षण-टुकड़ा; सूखे मौसम में पकने वाला ताज़ा फल | बारहमासी पेड़; 2–3 साल से फल देने लगता है | राहुरी में 21.33 किलो प्रति पेड़, पूना के 44.69 किलो के मुक़ाबले | महाराष्ट्र, पंजाब |
| Poona Fig | महाराष्ट्र में ताज़े फल के लिए; भारत की सबसे ज़्यादा परखी हुई अंजीर | बारहमासी पेड़; 2–3 साल से फल देने लगता है, लगभग 5 साल तक पूरी उपज | राहुरी में 44.69 किलो प्रति पेड़, सात किस्मों में सबसे अच्छी | महाराष्ट्र |
इस फ़सल के कैलकुलेटर
आगे के हिसाब यहाँ कर लीजिए — कितना बीज ख़रीदें, बोरा अंकुरित होगा या नहीं, खाद का ख़र्च कितना बैठेगा, और अंजीर का भाव क्या चल रहा है।
- बीज दर कैलकुलेटरआपके अंजीर के खेत के लिए कितना बीज चाहिए — आपके बोरे के अंकुरण के हिसाब से सुधारा हुआ।
- अंकुरण कैलकुलेटरबुवाई से पहले बोरे के 100 बीज जाँचिए और देखिए कि बीज बोने लायक है या नहीं।
- बीज किस्म खोजकइस साइट की हर अंजीर किस्म को राज्य, सीज़न, अवधि और मिट्टी से छानिए।
- खाद कैलकुलेटरअंजीर की एनपीके सिफ़ारिश को अपने खेत के हिसाब से यूरिया, डीएपी और एमओपी के बोरों में बदलिए।
- फ़सल कैलेंडरआपके राज्य में अंजीर की बुवाई, निराई, सिंचाई और कटाई के महीने।
- फ़सल लाभ कैलकुलेटरबीज, मज़दूरी और लागत को इस किस्म से मिलने वाली उपज के सामने रखकर देखिए।
- मंडी भाव जाँचकव्यापारी से भाव तय करने से पहले अपनी नज़दीकी मंडी में अंजीर का आज का रेट देखिए।
सब्सिडी और सरकारी मदद
अंजीर के बीज या रोपण सामग्री की लागत में मदद करने वाली योजनाएँ। नियम और आवेदन का तरीक़ा हर योजना के पेज पर है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या एक्सेल महाराष्ट्र के किसानों के लिए अच्छी अंजीर है?
वहाँ उगती है, पर सबसे अच्छा चुनाव नहीं है। पुरंदर अंजीर GI आवेदन एक्सेल को पुरंदर तालुका में उगाई जाने वाली किस्मों में गिनता है। राहुरी की परीक्षण-तालिका में यह 21.33 किलो प्रति पेड़ पर है। वहीं वहाँ की व्यावसायिक किस्म पूना की 44.69 किलो। पूना या दिनकर के पीछे ज़्यादा आँकड़े हैं। हरी-पीली अंजीर चाहिए तो ही कुछ पेड़ पर एक्सेल आज़माइए।
एक्सेल, पूना और कोनाड्रिया से कैसे अलग है?
राहुरी में एक्सेल ने 26.61 ग्राम के 797.66 फलों से 21.33 किलो प्रति पेड़ दिया। पूना ने 40.86 ग्राम के 1,382.66 फलों से 44.69 किलो दिया, और कोनाड्रिया ने 930 फलों से 37.43 किलो। 2025 का एक शोध-पत्र एक्सेल और कोनाड्रिया को हरा से हरा-पीला बताता है, जिसमें कोनाड्रिया का गूदा गहरा गुलाबी और एक्सेल का हल्का है। यानी तीनों में एक्सेल छोटी, हल्के गूदे वाली और कम उपज वाली है।
क्या उत्तर भारत में एक्सेल को कीट की समस्या है?
PAU लुधियाना के बाग में (11 किस्में, 2012 से 2014; सिंह और कौर, Acta Horticulturae 1173) एक्सेल के फल में 75 अंजीर ततैया मिलीं, टेक्सास की 80 के बाद सबसे ज़्यादा, जबकि ब्राउन टर्की में 30। सार में पत्ता लपेटक, तना छेदक, बालदार सुंडी और फल मक्खी के लिए कोनाड्रिया, पूना और टेक्सास के नाम हैं, एक्सेल के नहीं, इसलिए इनमें एक्सेल सबसे ऊपर नहीं थी। यह एक ही बाग है, इसलिए इसे कीट-अंक नहीं, बल्कि यह देखने का इशारा समझिए कि किस पर नज़र रखनी है।
क्या एक्सेल में फल लगने के लिए अंजीर की ततैया या दूसरा पेड़ चाहिए?
हमें कोई स्रोत नहीं मिला जो बताए कि एक्सेल किस परागण-प्रकार की है। लुधियाना में एक्सेल के फल के अंदर अंजीर ततैया मिलने की बात आती है, पर इससे यह साबित नहीं होता कि फल को बढ़ने के लिए उनकी ज़रूरत है। पुरंदर आवेदन परागण के हिसाब से अंजीर के चार प्रकार बताता है। अपनी नर्सरी से पूछिए कि वह जो एक्सेल की कलमें बेचती है वे सामान्य प्रकार की हैं या नहीं। और पहले एक पेड़ लगाकर देखिए कि वह अकेला फल देता है या नहीं।
स्रोत: GI application for Purandar Fig (Rahuri varietal trial: Excel 21.33 kg a tree, 26.61 g a fruit), Evaluation of fig germplasm against insect and mite pests in North-West India — Acta Horticulturae 1173 (Singh and Kaur, PAU), Nutritional composition of Deanna fig, compared with other cultivars incl. Excel — Plant Archives 26(S1), 2026, Evaluation of Fig Varieties in Southern Zone of Telangana — Int. J. Pure and Applied Biosciences 2(6), 2014. संपादकीय नीति.
