IISR Viswashree
2001 में ICAR-भारतीय मसाला अनुसंधान संस्थान (IISR), कोझिकोड द्वारा जारी। कोझिकोड ज़िले के मन्नूर से उत्कृष्ट पेड़ (A-9/4) के क्लोनल चयन से। झाड़ीदार, सघन बढ़वार। मादा किस्म — परागण के लिए पास नर पेड़ चाहिए।
ज़रूरी तथ्य
- प्रकार
- कलमी पौधा (उन्नत किस्म)
- सीज़न
- सभी सीज़न
- पकने की अवधि
- पहली फ़सल लगभग वर्ष 6; वर्ष 15–25 तक पूरा फलन
- बीज दर
- 8 × 8 मी दूरी पर लगभग 50–60 कलमी पौधे/एकड़; हर 10–12 मादा कलमों पर एक नर पेड़ रखें
- अपेक्षित उपज
- 8 वर्ष पर लगभग 3,122 किग्रा सूखी गिरी + 480 किग्रा जावित्री/हेक्टेयर (360 ग्राफ्ट/हेक्टेयर)
- उपयुक्त मिट्टी
- गहरी, अच्छी निकासी वाली चिकनी दोमट, लैटेराइट या जंगल की मिट्टी
- जारी
- ICAR-IISR, कोझिकोड, 2001 — A-9/4, मन्नूर, केरल से क्लोनल चयन
इस किस्म के बारे में
IISR विश्वश्री भारत में जारी पहली जायफल किस्म थी (2001), जिसे ICAR-भारतीय मसाला अनुसंधान संस्थान, कोझिकोड ने केरल के कोझिकोड ज़िले के मन्नूर से एकत्रित उत्कृष्ट मातृ-पेड़ (A-9/4) के क्लोनल चयन से विकसित किया। इसकी बढ़वार झाड़ीदार, सघन है जो बगीचे व मिश्रित बाग़ों में फिट बैठती। 360 ग्राफ्ट/हेक्टेयर पर 8 वर्ष की उम्र में इसने लगभग 1,000 फल/पेड़ दिए, यानी लगभग 3,122 किग्रा सूखी गिरी व 480 किग्रा सूखी जावित्री/हेक्टेयर। सूखी गिरी रिकवरी लगभग 70% व जावित्री लगभग 35%। तेल-मात्रा गिरी में लगभग 7.14% व जावित्री में 7.13%। डिप्लोडिया फल-सड़न कम दर्ज। मादा किस्म होने से हवा-परागण के लिए लगभग 50–100 मी के भीतर कम-से-कम एक नर पेड़ चाहिए।
मुख्य विशेषताएँ
बुवाई व खेती
- बुवाई का समयबरसात (जून–दिसंबर); छाया-पौधे 6–12 महीने पहले लगे हुए
- बीज दर8 × 8 मी दूरी पर लगभग 50–60 कलमी पौधे/एकड़; हर 10–12 मादा कलमों पर एक नर पेड़ रखें
- दूरीलगभग 8 × 8 मी
- बुवाई विधिहर तैयार गड्ढे (60 × 60 × 60 सेमी) में एक कलमी पौधा, ऊपरी मिट्टी व गोबर खाद से भरा, फिर छाया व पानी दें
- सिंचाईगर्मियों में हर 5–7 दिन; ड्रिप या थाला सिंचाई
- उर्वरकछोटा पेड़: 20:20:60 ग्राम N:P₂O₅:K₂O + 15 किग्रा गोबर खाद/वर्ष; फलदार पेड़: लगभग 300:300:960 ग्राम + 50 किग्रा गोबर खाद (TNAU सारणी)
- कटाईबाहरी छिलका फटने पर फल तोड़ें जब लाल जावित्री दिखे; जावित्री उतारकर अलग सुखाएँ, गिरी छिलके सहित सुखाकर फिर छीलकर ग्रेड करें
मिट्टी व जलवायु
मिट्टी
- उपयुक्त मिट्टी
- गहरी, अच्छी निकासी वाली चिकनी दोमट, लैटेराइट या जैविक-पदार्थ-भरपूर जंगल की मिट्टी
जलवायु
- अवधि
- About 20–30°C mean
- सिंचाई
- About 1,500–2,500 mm a year, well distributed
- जलवायु
- गर्म, नम उष्णकटिबंधीय; छोटे पौधों को आंशिक छाया, लगभग 1,000 मी ऊँचाई तक सुरक्षित स्थल।
उपज व अवधि
पकने की अवधि
पहली फ़सल लगभग वर्ष 6; वर्ष 15–25 तक पूरा फलन
अपेक्षित उपज
8 वर्ष पर लगभग 3,122 किग्रा सूखी गिरी + 480 किग्रा जावित्री/हेक्टेयर (360 ग्राफ्ट/हेक्टेयर)
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।
कीट व रोग संबंधी बातें
मुख्य कीट
- लोरैंथस (परजीवी पौधा)
प्रबंधन सुझाव
- सूखे महीनों के लिए भरोसेमंद पानी वाली सुरक्षित, अच्छी निकासी वाली जगह चुनें।
- रोपाई से 6–12 महीने पहले छाया (केला या तेज़ बढ़ने वाले पेड़) लगाएँ।
- परागण के लिए हर 10–12 मादा कलमों पर एक पक्का नर पेड़ रखें।
- हवा-संचार बेहतर करने व फल-सड़न घटाने को ओवरलैपिंग शाखाएँ छाँटें।
- रोग-चक्र तोड़ने को गिरा सड़ा फल तुरंत हटाकर नष्ट करें।
फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- भारत में जारी पहली जायफल किस्म — प्रदर्शन डेटा अच्छी तरह दर्ज
- झाड़ीदार, सघन बढ़वार बगीचे व मिश्रित बाग़ों में फिट
- डिप्लोडिया फल-सड़न कम दर्ज
- ऊँची सूखी गिरी रिकवरी (70%) व जावित्री रिकवरी (35%)
ध्यान रखने योग्य बातें
- मादा किस्म — परागण के लिए नर पेड़ रखने होंगे
- पहली काम की फ़सल लगभग वर्ष 6 से; पूरा फलन 15+ वर्ष
- मुख्य रूप से IISR कोझिकोड व KAU नर्सरियों से उपलब्ध — कलम की उपलब्धता पहले से जाँचें
- छाया, नियमित पानी व अच्छी निकासी चाहिए — सूखी या जलभरी जगह के लिए उपयुक्त नहीं
उपयुक्त क्षेत्र
केरल के जायफल-उत्पादक ज़िलों (इडुक्की, एर्नाकुलम, त्रिशूर, कोट्टायम) के लिए जारी। गर्म, नम मौसम वाले सभी पारंपरिक जायफल क्षेत्रों के लिए उपयुक्त।
- केरल
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
IISR विश्वश्री के कलमी पौधे कहाँ मिलेंगे?
ICAR-भारतीय मसाला अनुसंधान संस्थान (IISR), कोझिकोड, केरल, या केरल कृषि विश्वविद्यालय (KAU) नर्सरियों से। रोपाई-मौसम से पहले उपलब्धता पक्की करें, क्योंकि कलमी जायफल पौधों की माँग अक्सर आपूर्ति से ज़्यादा होती।
विश्वश्री और केरलश्री में क्या फ़र्क़ है?
विश्वश्री (2001) ज़्यादा झाड़ीदार, सघन बढ़वार वाली है और 8 वर्ष तक लगभग 3,122 किग्रा सूखी गिरी/हेक्टेयर उपज दर्ज। केरलश्री (2013) बाद की जारी किस्म है — मोटी गिरी, मोटी जावित्री और 10 वर्ष तक लगभग 7,560 किग्रा गिरी/हेक्टेयर ज़्यादा उपज। दोनों IISR की मादा किस्में। केरलश्री नई, ज़्यादा उपज वाली; विश्वश्री पुरानी, ज़्यादा खेत-परीक्षित।
स्रोत: ICAR-IISR Kozhikode — Nutmeg varieties, TNAU Agritech Portal — Nutmeg, Spices Board India — Nutmeg. संपादकीय नीति.
