दूध न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) योजना, हिमाचल प्रदेश
हिमाचल गाँव की दूध सहकारी समितियों से गाय का दूध ₹61 और भैंस का दूध ₹71 प्रति लीटर ख़रीदता है — दूध पर समर्थन मूल्य तय करने वाला देश का पहला राज्य।
संचालक: हिमाचल प्रदेश सरकार, हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ (HP मिल्कफेड) के ज़रिए
- गाय के दूध का भाव (2026-27)
- ₹61 प्रति लीटर
- भैंस के दूध का भाव (2026-27)
- ₹71 प्रति लीटर
- रोज़ ख़रीद की सीमा
- 20 लीटर प्रति उत्पादक
- मासिक भुगतान (अप्रैल 2026)
- क़रीब ₹34 करोड़
परिचय
पहाड़ों में ज़्यादातर परिवार गाय या भैंस रखते हैं, और दूध नक़द पैसे का पक्का ज़रिया है। हिमाचल प्रदेश दूध पर न्यूनतम समर्थन मूल्य देने वाला देश का पहला राज्य बना। HP मिल्कफेड गाँव की दूध सहकारी समितियों से राज्य के तय भाव पर दूध ख़रीदता है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि मक़सद गाँव के परिवारों के हाथ में पैसा पहुँचाना है, क्योंकि राज्य की क़रीब 90% आबादी गाँवों में रहती है।
भाव धीरे-धीरे बढ़ा है। राज्य सरकार के मुताबिक़ 2024-25 में गाय का दूध ₹45 और भैंस का ₹55 प्रति लीटर मिल रहा था। जून 2025 तक भाव ₹51 और ₹61 थे। 21 मार्च 2026 के राज्य बजट में मुख्यमंत्री ने दोनों को ₹10-₹10 बढ़ाकर गाय का दूध ₹61 और भैंस का ₹71 कर दिया, और मिल्कफेड जून 2026 में यही भाव बता रहा है। दूध का दाम उसकी गुणवत्ता के हिसाब से मिलता है। अप्रैल 2026 में मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्पादकों को हर महीने औसतन क़रीब ₹34.18 करोड़ का भुगतान हो रहा है।
मिल्कफेड जहाँ हो सके किसान के दरवाज़े से दूध लेता है, और स्वचालित दूध संग्रह केंद्र बनाए हैं, ताकि फ़ैट और गुणवत्ता खुले में नापी जाए। 2025 की ख़बरों के मुताबिक़ जो उत्पादक घर से 2 किमी से ज़्यादा दूर के अधिसूचित केंद्र पर दूध लाते थे, उन्हें ढुलाई के लिए ₹2 प्रति लीटर अलग से दिए गए। भुगतान उत्पादक के बैंक खाते में होता है। राज्य ने यह भी कहा है कि मिल्कफेड डिजिटल व्यवस्था लाएगा, जिसमें किसान मोबाइल पर अपना दूध, गुणवत्ता का नतीजा और भुगतान देख सकेगा।
जून 2026 में मिल्कफेड ने सीमा तय की: समर्थन मूल्य पर वह हर उत्पादक से रोज़ ज़्यादा से ज़्यादा 20 लीटर दूध लेगा। उसने कारण बताया कि ज़्यादा छोटे किसान सहकारी व्यवस्था में आएँ और कुछ बड़े उत्पादक सारा फ़ायदा न ले जाएँ। इस फ़ैसले की तीखी आलोचना हुई और मिल्कफेड ने सार्वजनिक रूप से इसका बचाव किया। भाव और सीमा सरकार और मिल्कफेड तय करते हैं और बदल सकते हैं, इसलिए योजना बनाने से पहले अपनी समिति से पक्का कर लें।
आपको क्या मिलता है
लाभ वैसा ही, जैसा राज्य ने अधिसूचित किया है — यहाँ कुछ भी अनुमान नहीं है।
- गाय के दूध (₹61 प्रति लीटर) और भैंस के दूध (₹71 प्रति लीटर) का राज्य का तय भाव।
- दूध आपके गाँव से, अक्सर दरवाज़े से लिया जाता है और स्वचालित संग्रह केंद्र पर खुले में जाँचा जाता है।
- भुगतान सीधे आपके बैंक खाते में जाता है।
- संग्रह केंद्र 2 किमी से दूर हो तो ढुलाई के लिए ₹2 प्रति लीटर अलग, जैसा 2025 में बताया गया।
- जून 2025 में बकरी का दूध ₹70 प्रति लीटर पर ख़रीदने का प्रायोगिक काम बताया गया।
कौन पात्र है
राज्य योजनाएँ अपने मानदंड आमतौर पर सूची में नहीं, विवरण में लिखती हैं। यह वही विवरण खोलकर रखा गया है — अंतिम फ़ैसला विभाग के सत्यापन का होता है।
आप पात्र हैं अगर
- हिमाचल प्रदेश का दूध उत्पादक, जो HP मिल्कफेड से जुड़ी गाँव की दूध सहकारी समिति के ज़रिए दूध बेचता हो।
- गाय या भैंस का दूध, जो गुणवत्ता के मानक पूरे करे। दाम गुणवत्ता के हिसाब से मिलता है।
- समर्थन मूल्य पर हर उत्पादक से रोज़ सिर्फ़ 20 लीटर तक ख़रीदा जाता है।
शामिल नहीं
- मिल्कफेड की जून 2026 की सीमा के तहत एक उत्पादक का रोज़ 20 लीटर से ऊपर का दूध।
- गुणवत्ता के मानक पूरे न करने वाला दूध।
ज़रूरी दस्तावेज़
शुरू करने से पहले ये तैयार रखें — ज़्यादातर आवेदन हक़ न होने से नहीं, कोई काग़ज़ छूट जाने से रद्द होते हैं।
- दूध सहकारी समिति की सदस्यता या पंजीकरण का ब्योरा
- आधार कार्ड
- उस खाते की बैंक पासबुक जिसमें भुगतान आएगा
- समिति या मिल्कफेड दफ़्तर जो और कागज़ माँगे — उसकी पूरी सूची पूछ लें
आवेदन कैसे करें
केंद्रीय योजना से कम कदम, और आमतौर पर पोर्टल नहीं, एक कार्यालय।
- 1
गाँव की दूध सहकारी समिति से जुड़ें
नज़दीकी HP मिल्कफेड दफ़्तर या ग्राम पंचायत से पूछें कि समिति कहाँ है। न हो तो हिमगंगा योजना के बारे में पूछें, जिसमें राज्य नई दूध समितियाँ बना रहा है।
- 2
सदस्य के रूप में पंजीकरण कराएँ
अपना ब्योरा और बैंक खाता समिति को दें, ताकि भुगतान आप तक पहुँचे।
- 3
संग्रह केंद्र पर या घर-घर वाले चक्कर में दूध दें
केंद्र पर आपका दूध नापा और जाँचा जाता है। पर्ची या रिकॉर्ड सँभालकर रखें।
- 4
बैंक खाते में भुगतान पाएँ
पर्ची पर भाव और गुणवत्ता का नतीजा देखें। भुगतान ग़लत लगे तो समिति के सचिव से पूछें।
अगर कुछ गड़बड़ हो
नाम सूची में न हो, या भुगतान अटका हो — विभाग ने ख़ुद जो रास्ता बताया है, वह यहाँ है।
- पहले अपनी दूध सहकारी समिति के सचिव से, फिर अपने इलाक़े के HP मिल्कफेड दफ़्तर से बात करें। पर्चियाँ और बैंक ब्योरा साथ रखें।
- हल न निकले तो राज्य का ई-समाधान पोर्टल (esamadhan.nic.in) या मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1100 इस्तेमाल करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या यह गेहूँ-धान के MSP जैसा है?
यह राज्य का दिया दूध का भाव है, केंद्र का MSP नहीं। राज्य इसे तय करता है और HP मिल्कफेड गाँव की दूध समितियों से ख़रीदते समय चुकाता है। कहीं भी बिका दूध इसमें नहीं आता। यह मिल्कफेड के ज़रिए बिके दूध पर लागू होता है।
अभी भाव क्या है?
गाय का दूध ₹61 प्रति लीटर और भैंस का ₹71, जैसा 21 मार्च 2026 के राज्य बजट में घोषित हुआ और मिल्कफेड ने जून 2026 में बताया। पहले 2025 में यह ₹51 और ₹61 था, और 2024-25 में ₹45 और ₹55।
रोज़ 20 लीटर की सीमा क्यों है?
मिल्कफेड का कहना है कि वह चाहता है कि ज़्यादा छोटे और सीमांत किसान समर्थन मूल्य पर बेचें और कुछ बड़े उत्पादक ज़्यादातर फ़ायदा न ले जाएँ। यह सीमा जून 2026 में लगी।
क्या भाव फ़ैट और गुणवत्ता पर निर्भर करता है?
हाँ। दूध का दाम गुणवत्ता के मानकों के हिसाब से मिलता है, इसलिए गाढ़ा और साफ़ दूध बेहतर भाव पाता है। अपनी समिति से पूछें कि फ़ैट और SNF का कौन-सा स्लैब लगता है।
क्या बकरी का दूध शामिल है?
जून 2025 में बकरी का दूध ₹70 प्रति लीटर पर ख़रीदने का एक प्रायोगिक काम बताया गया था। वह छोटा था। HP मिल्कफेड से पूछें कि आपके इलाक़े में है या नहीं।
ढुलाई का ₹2 कैसे मिलेगा?
2025 में सरकार ने कहा कि 2 किमी से ज़्यादा दूर के अधिसूचित केंद्र पर दूध देने वाले उत्पादकों को ₹2 प्रति लीटर अलग मिलता है। अपनी समिति से पूछें कि अभी मिलता है या नहीं और कैसे माँगते हैं।
HP मिल्कफेड कौन चलाता है?
यह दूध उत्पादकों की राज्य की शीर्ष सहकारी संस्था है, जो 1980 में पंजीकृत हुई। यह गाँव की दूध समितियाँ बनवाती है और उनका बचा दूध किसान के दरवाज़े से ख़रीदती है।
तथ्य 26 सितंबर 2026 को hpmilkfed.org से जाँचे गए। संपादकीय नीति.
