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झारखंडआय सहायतासक्रियअपडेट 26 सितंबर 2026

मुख्यमंत्री कृषि आशीर्वाद योजना (MMKAY)

हर खरीफ में झारखंड छोटे-सीमांत किसानों के खाते में ₹5,000 प्रति एकड़ — 5 एकड़ तक अधिकतम ₹25,000 — सीधे भेजता है।

संचालक: कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग, झारखंड सरकार

प्रति एकड़
₹5,000 / साल
अधिकतम लाभ
₹25,000 (5 एकड़)
भुगतान
DBT से बैंक खाते में
कब से
2019 (खरीफ)

परिचय

झारखंड सरकार ने 2019 में मुख्यमंत्री कृषि आशीर्वाद योजना (MMKAY) शुरू की ताकि छोटे और सीमांत किसानों को खरीफ बुआई से पहले सीधी नकद मदद मिल सके। तरीका सीधा है: 5 एकड़ तक ज़मीन वाले किसान को हर एकड़ पर ₹5,000 मिलते हैं, सीधे बैंक खाते में। 3 एकड़ वाले को ₹15,000, 5 एकड़ वाले को अधिकतम ₹25,000। न कोई प्रीमियम, न लौटाना — पैसा DBT से भू-अभिलेख के आधार पर सीधे आता है।

यह योजना पीएम-किसान के ऊपर अलग से मिलती है। पीएम-किसान से केंद्र सरकार हर किसान को ₹6,000 साल भर में देती है — रकबे से कोई लेना-देना नहीं। मान लीजिए झारखंड के किसान के पास 4 एकड़ है, तो उसे MMKAY से ₹20,000 और पीएम-किसान से ₹6,000 — कुल ₹26,000 बीज डालने से पहले ही मिल जाते हैं। MMKAY का पूरा खर्च राज्य सरकार उठाती है।

योजना 2019-20 के राज्य बजट के साथ शुरू हुई और तब से लगातार चल रही है। 2025 की लाभार्थी सूची जारी हो चुकी है। पात्रता की जाँच झारखंड के भू-अभिलेख डेटाबेस से होती है — आधार से जुड़ा खतियान (अधिकार अभिलेख) मुख्य दस्तावेज़ है।

आपको क्या मिलता है

लाभ वैसा ही, जैसा राज्य ने अधिसूचित किया है — यहाँ कुछ भी अनुमान नहीं है।

  • हर साल ₹5,000 प्रति एकड़, खरीफ बुआई से पहले सीधे बैंक खाते में।
  • 5 एकड़ तक के किसान को अधिकतम ₹25,000 सालाना।
  • पीएम-किसान के साथ अलग मिलती है — 3 एकड़ वाले को MMKAY से ₹15,000 + पीएम-किसान से ₹6,000 = ₹21,000 सालाना।
  • न प्रीमियम, न वापसी — राज्य बजट से सीधा अनुदान।

कौन पात्र है

राज्य योजनाएँ अपने मानदंड आमतौर पर सूची में नहीं, विवरण में लिखती हैं। यह वही विवरण खोलकर रखा गया है — अंतिम फ़ैसला विभाग के सत्यापन का होता है।

आप पात्र हैं अगर

  • झारखंड का स्थायी निवासी
  • छोटा या सीमांत किसान — 5 एकड़ तक कृषि भूमि
  • ज़मीन किसान के अपने नाम पर झारखंड भू-अभिलेख में दर्ज हो
  • DBT के लिए आधार से जुड़ा बैंक खाता ज़रूरी

शामिल नहीं

  • 5 एकड़ से ज़्यादा कृषि भूमि वाले किसान
  • सरकारी कर्मचारी, आयकर दाता और संस्थागत भूस्वामी
  • जिनकी ज़मीन अपने नाम पर दर्ज नहीं (जैसे बिना दाखिल-खारिज वाली अविभाजित पारिवारिक ज़मीन)

ज़रूरी दस्तावेज़

शुरू करने से पहले ये तैयार रखें — ज़्यादातर आवेदन हक़ न होने से नहीं, कोई काग़ज़ छूट जाने से रद्द होते हैं।

  • आधार कार्ड (बैंक खाते से जुड़ा)
  • बैंक पासबुक या रद्द चेक
  • भू-अभिलेख — खतियान (अधिकार अभिलेख) खाता नंबर सहित
  • झारखंड निवास प्रमाण

आवेदन कैसे करें

केंद्रीय योजना से कम कदम, और आमतौर पर पोर्टल नहीं, एक कार्यालय।

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    अपना भू-अभिलेख जाँचें

    अपना खतियान (अधिकार अभिलेख) अपने नाम पर और आधार से जुड़ा हुआ सुनिश्चित करें — स्थानीय राजस्व कार्यालय में। योजना इसी डेटाबेस से पात्रता जाँचती है।

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    MMKAY पोर्टल पर पंजीकरण जाँचें

    mmkay.jharkhand.gov.in पर जाएँ और आधार या ज़िले से खोजें कि आपका नाम लाभार्थी सूची में है या नहीं। न हो तो प्रखंड कृषि पदाधिकारी से संपर्क करें।

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    राशि प्राप्त करें

    सत्यापन के बाद रकम DBT से सीधे आधार-लिंक्ड बैंक खाते में आ जाती है। पासबुक या बैंक स्टेटमेंट में जमा देखें।

अगर कुछ गड़बड़ हो

नाम सूची में न हो, या भुगतान अटका हो — विभाग ने ख़ुद जो रास्ता बताया है, वह यहाँ है।

  • अगर पात्र होने के बावजूद नाम लाभार्थी सूची में नहीं है, या मंजूर रकम बैंक खाते में नहीं आई, तो पहले प्रखंड कृषि पदाधिकारी से मिलें, फिर जिला कृषि पदाधिकारी से। आधार, खतियान की कॉपी और बैंक पासबुक साथ रखें।
  • विभाग से आगे, झारखंड CM हेल्पलाइन — टोल-फ्री 181 या ऑनलाइन cmhelpline.jharkhand.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। ट्रैक करने के लिए शिकायत रेफ़रेंस नंबर संभालें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

MMKAY और पीएम-किसान में क्या फ़र्क़ है?

पीएम-किसान केंद्र सरकार की योजना है जो हर किसान को ₹6,000 सालाना देती है, रकबे से कोई संबंध नहीं। MMKAY झारखंड राज्य की योजना है जो ₹5,000 प्रति एकड़ देती है, 5 एकड़ की सीमा तक। दोनों अलग हैं — पात्र किसान दोनों पा सकता है।

क्या बटाईदार या किरायेदार किसान पात्र हैं?

नहीं। MMKAY के लिए ज़मीन किसान के अपने नाम पर झारखंड भू-अभिलेख में दर्ज होनी चाहिए। बिना दर्ज हक़ वाले बटाईदार और किरायेदार इसमें शामिल नहीं हैं।

DBT कैसे काम करता है?

राज्य सरकार रकम सीधे लाभार्थी के आधार-लिंक्ड बैंक खाते में भेजती है। न चेक, न नकद — जमा बैंक पासबुक में दिखता है।

साढ़े तीन एकड़ पर कितना मिलेगा?

लाभ ₹5,000 प्रति एकड़ है। 3.5 एकड़ पर ₹17,500 सालाना मिलेगा। एकड़ का हिस्सा भू-अभिलेख के अनुसार गिना जाता है।

लाभार्थी सूची में नाम कैसे देखें?

mmkay.jharkhand.gov.in पर जाएँ — आधार नंबर से या ज़िला, प्रखंड, गाँव चुनकर खोज सकते हैं।

अगर ज़मीन संयुक्त नाम पर है तो?

संयुक्त खतियान पर हर नाम अलग लाभार्थी माना जा सकता है, बशर्ते हरेक का अलग-अलग हिस्सा 5 एकड़ से ज़्यादा न हो। लाभ हर नाम के सामने दर्ज हिस्से पर गिना जाता है।

तथ्य 26 सितंबर 2026 को mmkay.jharkhand.gov.in से जाँचे गए। संपादकीय नीति.