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रोगVenturia inaequalisसमीक्षा 27 सितंबर 2026

सेब पपड़ी रोग (स्कैब)

एक फफूँद रोग जो वसंत में ज़मीन पर पड़ी पुरानी संक्रमित पत्तियों से हवा-जनित बीजाणुओं द्वारा फैलती, पत्तियों पर जैतूनी-काले मखमली धब्बे व फलों पर पपड़ीदार, फटे दाग़ बनाती जो फल बेचने लायक़ नहीं छोड़ते। हरी-कोंपल से आगे का छिड़काव कार्यक्रम भारत में व्यावसायिक सेब उत्पादन की रीढ़ है।

रोगकारक
Venturia inaequalis (एस्कोमाइसीट फफूँद)
फैलाव
वसंत में हवाई एस्कोस्पोर, बाद बारिश-छींटे कोनिडिया
सबसे ख़तरनाक समय
हरी-कोंपल से जून (प्राथमिक); बारिश के साथ कटाई तक जारी
सबसे अच्छा बचाव
समयबद्ध फफूँदनाशी छिड़काव + पत्ती-कूड़ा सफ़ाई + प्रतिरोधी किस्में

परिचय

सेब स्कैब, एस्कोमाइसीट फफूँद Venturia inaequalis से होने वाला, भारत की उत्तर-पश्चिमी हिमालयी सेब पट्टी — जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश व उत्तराखंड — में सेब का सबसे बड़ा आर्थिक नुक़सान पहुँचाने वाला रोग है। अनियंत्रित स्कैब एक गीले सीज़न में 70–100% बिकाऊ फ़सल तबाह कर सकता। फफूँद बाग़ान के ज़मीन पर गिरी संक्रमित पत्तियों में स्यूडोथीशिया (छोटे फलन-निकाय) के रूप में सर्दी गुज़ारती, व हरी-कोंपल से पंखुड़ी-गिरान तक जब भी बारिश कूड़े को पर्याप्त समय तक भिगोती, हवा में एस्कोस्पोर छोड़ती — छिड़काव कार्यक्रम इसी प्राथमिक-संक्रमण खिड़की को लक्षित करता।

एक बार प्राथमिक-संक्रमण किसी पत्ती या छोटे फल पर जम जाए, यह कोनिडिया (अलैंगिक बीजाणु) पैदा करती जो बढ़वार-सीज़न भर बारिश से आसपास की पत्तियों व फलों पर छींटे जाते, द्वितीयक-संक्रमण कर महामारी बढ़ाते। पंखुड़ी-गिरान के बाद हर छिड़काव इन्हीं द्वितीयक-चक्रों का पीछा करता। दिखने वाला लक्षण पत्ती की ऊपरी सतह पर मखमली, जैतूनी-हरे से काले धब्बे व फल-छिलके पर पपड़ीदार, खुरदरे, फटे घाव हैं — हल्का संक्रमण भी फल A-ग्रेड से प्रोसेसिंग या कल्ल में गिरा देता, व भारी संक्रमण से समय-पूर्व पत्ती-गिरान होती, अगले सीज़न के लिए पेड़ कमज़ोर पड़ता।

पहचान कैसे करें

  • युवा पत्तियों की ऊपरी सतह पर जैतूनी-हरे से गहरे-भूरे या काले मखमली धब्बे दिखते, अक्सर शिराओं के साथ — मखमली बनावट नंगी आँख से दिखने वाला बीजाणु-उत्पादन है।
  • ज़्यादा संक्रमित पत्तियाँ मुड़ती, पीली पड़ती व बीच-सीज़न ही गिर जातीं, छत्र पतला करतीं।
  • फल-घाव छोटे, गहरे, खुरदरे धब्बों से शुरू होते जो पपड़ीदार, कॉर्की चकत्तों में बड़े होते — फल बढ़ने पर छिलका फट जाता, भले नीचे का गूदा ठीक हो, फल बिकाऊ नहीं रहता।
  • देर-सीज़न या भंडारण स्कैब फलों पर छोटे काले बिंदु-धब्बों (पिन-पॉइंट स्कैब) के रूप में दिखती — तोड़ने से ठीक पहले उतरी कोनिडिया से जो ठंडे भंडारण में धीरे विकसित हुईं।
  • युवा टहनियों व शाखाओं पर छोटे उभरे फफोले या कैंकर बन सकते, फफूँद को अगले सीज़न में ले जाते।

होता क्यों है

  • फफूँद बाग़ान के ज़मीन पर गिरी संक्रमित पत्तियों में सर्दी गुज़ारती — ज़मीन पर छोड़ी हर संक्रमित पत्ती अगली वसंत के लिए बीजाणु-स्रोत है।
  • हरी-कोंपल-से-पंखुड़ी-गिरान खिड़की में जब भी बारिश पत्ती-कूड़े को कुछ घंटे भिगोती, एस्कोस्पोर निकलते व हवा विकसित होती पत्तियों-फूलों तक ले जाती।
  • ठंडा, गीला वसंत मौसम — ठीक वही जो मार्च-मई में भारत की सेब-पट्टी में होता — संक्रमण-काल बढ़ाता व प्राथमिक-संक्रमण चलाता।
  • घने, बिना-छँटे छत्र नमी फँसाते व पत्ती-सुखाना धीमा करते, द्वितीयक-चक्रों भर कोनिडिया को अंकुरण व संक्रमण की लंबी नमी देते।
  • बिना छिड़काव कार्यक्रम के लगाई संवेदनशील किस्में — ख़ासतौर रेड डेलिशस व इसकी स्पोर्ट जो भारतीय बाग़ानों पर हावी हैं व कोई स्कैब-प्रतिरोध नहीं रखतीं — गंभीर महामारी का नुस्ख़ा है।

जैविक व सांस्कृतिक नियंत्रण

  • कटाई बाद गिरी संक्रमित पत्तियाँ इकट्ठा कर नष्ट करें — रेक करना, खाद बनाना, या फ्लेल-मोअर से कूड़ा काटना अगली वसंत का एस्कोस्पोर-भार अच्छी तरह किया जाए तो 80–90% घटाता।
  • देर पतझड़ में (पत्तियाँ गिरने के बाद) बाग़ान के ज़मीन-कूड़े पर 5% यूरिया छिड़काव करें ताकि सड़न तेज़ हो व स्यूडोथीशिया बनना कम।
  • बारिश बाद तेज़ हवा-प्रवाह व पत्ती-सुखाव देने वाला खुला छत्र बनाएँ — गीली पत्ती ही संक्रमण-घटना है।
  • स्कैब-प्रतिरोधी किस्में (SKUAST-कश्मीर से फ़िरदौस, शिरीन, अकबर) जहाँ हो सके लगाएँ, ख़ासतौर नई रोपाइयों में — प्रतिरोध अधिकांश छिड़काव कार्यक्रम की ज़रूरत ख़त्म करता।
  • हरी-कोंपल पर ताँबा-आधारित छिड़काव (बोर्डो मिश्रण) कुछ शुरुआती-सीज़न सुरक्षा देते व जैविक-अनुकूल हैं, हालाँकि अकेले सिंथेटिक फफूँदनाशियों से कमज़ोर।

रासायनिक नियंत्रण

  • छिड़काव कार्यक्रम हरी-कोंपल (जब कली में पहला हरा पत्ती-ऊतक दिखे) से शुरू होकर पंखुड़ी-गिरान व कवर-छिड़काव अवधि तक जारी — यह एक छिड़काव नहीं बल्कि सीज़न-भर 8–12 फफूँदनाशी छिड़कावों की समय-सारणी है।
  • बहार-पूर्व छिड़काव (हरी-कोंपल, गुलाबी-कली, पूर्ण-फूल, पंखुड़ी-गिरान) प्राथमिक एस्कोस्पोर-संक्रमण लक्षित करते — ये सीज़न के सबसे अहम छिड़काव हैं; गीले साल हरी-कोंपल छिड़काव चूकना कठिन-पुनर्प्राप्ति योग्य है।
  • बहार-बाद कवर-छिड़काव 10–15 दिन अंतराल पर विकसित होते फलों पर द्वितीयक कोनिडिया-संक्रमण लक्षित करते।
  • प्रतिरोध टालने को फफूँदनाशी समूह बदलें: स्पर्श फफूँदनाशी (मैंकोजेब, कैप्टान) को प्रणालीगत/ट्रांसलैमिनर (माइक्लोब्यूटैनिल, पेनकोनाज़ोल, फ्लूसिलाज़ोल + कार्बेंडाज़िम, डाइफ़ेनोकोनाज़ोल) के साथ बारी-बारी इस्तेमाल करें, एक ही सक्रिय तत्व न दोहराएँ।
  • मौजूदा अनुशंसित छिड़काव समय-सारणी व उत्पाद SKUAST-कश्मीर, YSPUHF नौनी (हिमाचल प्रदेश), या स्थानीय KVK से पक्का करें — समय-सारणी हर सीज़न मौसम आधारित समायोजित होती।

सबसे ज़्यादा जोखिम वाली फसलें

हमारी फसल गाइडों में जहाँ यह समस्या बताई गई है — पूरी पैकेज-ऑफ-प्रैक्टिसेज़ के लिए कोई फसल खोलें।

विचार करने योग्य किस्में

नामी बीज किस्में जिनकी इस समस्या के प्रति प्रतिरोधकता या संवेदनशीलता उनके अपने किस्म पेज पर बताई गई है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या फल पर स्कैब दिखने के बाद ठीक हो सकती?

नहीं — एक बार फल-छिलके पर पपड़ीदार घाव बन जाए, कोई छिड़काव इसे हटा नहीं सकता। फल स्थायी रूप से ग्रेड-डाउन हो जाता। छिड़काव कार्यक्रम रोकथाम है: यह नए संक्रमण जमने से रोकता, मौजूदा को पलट नहीं सकता।

क्या गिरी पत्तियाँ हटाने से सच में स्कैब कम होगी?

हाँ — कटाई बाद पूरी तरह पत्ती-कूड़ा हटाना या नष्ट करना अगली वसंत का एस्कोस्पोर-भार 80–90% घटा सकता। यह सेब स्कैब के ख़िलाफ़ सबसे प्रभावी सांस्कृतिक अभ्यास है, क्योंकि फफूँद लगभग पूरी तरह गिरी पत्तियों में ही सर्दी गुज़ारती।

लक्षण और नियंत्रण उपाय ICAR, KVK और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों की पैकेज-ऑफ-प्रैक्टिसेज़ पर आधारित हैं; नाम लिया गया हर रसायन पंजीकृत उपयोग है। हमेशा उत्पाद का लेबल पढ़ें और अपनी फसल व क्षेत्र के लिए मात्रा पक्की करें। संपादकीय नीति.