VL Gahat-15 (VLG-15)
ICAR-VPKAS अल्मोड़ा की 2009 की केंद्रीय किस्म, उत्तर और मध्य भारत के लिए। 90 से 100 दिन, VPKAS की गहतों में सबसे छोटी, एन्थ्रेक्नोज़ और पत्ती धब्बे की मध्यम प्रतिरोधी, और तीनों में सबसे कम उपज की सूची (600 से 700 किग्रा/हेक्टेयर)।
ज़रूरी तथ्य
- प्रकार
- खुली-परागित
- सीज़न
- खरीफ़
- पकने की अवधि
- 90 से 100 दिन (DPD की शुष्क दलहन तालिका)
- बीज दर
- दाने की फ़सल के लिए क़तार में बुआई में 25 से 30 किलो/हेक्टेयर, दाना और चारा दोनों के लिए छिटकवाँ बोने पर लगभग 40 किलो/हेक्टेयर (DPD की सिफ़ारिश); VL Gahat-15 के लिए अलग दर नहीं छपी। बीज को पहले कार्बेन्डाज़िम 2 ग्राम प्रति किलो से, फिर राइज़ोबियम और PSB कल्चर 5 से 7 ग्राम प्रति किलो से उपचारित कीजिए।
- अपेक्षित उपज
- 600 से 700 किग्रा/हेक्टेयर (DPD); औसत उपज क्षमता 7.75 क्विंटल/हेक्टेयर (ICAR-VPKAS की शीट)
- उपयुक्त मिट्टी
- हल्की से भारी मिट्टी जिसमें क्षारीयता न हो; आम तौर पर ख़राब, अच्छी निकासी वाली ज़मीन
- जारी
- 2009 में केंद्रीय किस्म विमोचन समिति द्वारा जारी; अधिसूचना S.O. 454(E), 11 फ़रवरी 2009 · ICAR-VPKAS, अल्मोड़ा
इस किस्म के बारे में
VL Gahat-15 (VLG-15) ICAR-VPKAS (विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान), अल्मोड़ा की गहत (कुल्थी) है। VPKAS इसे केंद्रीय किस्म विमोचन समिति द्वारा 2009 में उत्तर और मध्य भारत के लिए, समय पर बोई बारानी हालत में, जारी बताता है। राष्ट्रीय अधिसूचित सूची 11 फ़रवरी 2009 की अधिसूचना S.O. 454(E) देती है। DPD 90 से 100 दिन और 600 से 700 किग्रा/हेक्टेयर देता है, एन्थ्रेक्नोज़ और पत्ती धब्बे की मध्यम प्रतिरोधी, और VPKAS की शीट औसत उपज क्षमता 7.75 क्विंटल/हेक्टेयर वही मध्यम प्रतिरोधकता के साथ देती है। नीचे की खेती DPD की सिफ़ारिश की आम खेती है।
क्या यह किस्म आपके लिए ठीक है?
छोटी गहत चाहिए और आपका इलाक़ा सिर्फ़ उत्तराखंड की पहाड़ियों का नहीं, उत्तर या मध्य भारत का है, तो VL Gahat-15 चुनिए। 90 से 100 दिन में यह VPKAS की गहतों में सबसे छोटी है, 2009 की केंद्रीय किस्म है, और DPD व VPKAS की शीट दोनों में एन्थ्रेक्नोज़ और पत्ती धब्बे की मध्यम प्रतिरोधी है। सौदा उपज का है: DPD 600 से 700 किग्रा/हेक्टेयर और शीट 7.75 क्विंटल/हेक्टेयर देती है, जो तीनों VPKAS किस्मों में सबसे कम है। यह मौसम और पहुँच के लिए चुनाव है, सबसे भारी फ़सल के लिए नहीं। पहाड़ में लंबे मौसम पर ज़्यादा बीज चाहिए तो VL Gahat-8 से तुलना कीजिए।
मुख्य विशेषताएँ
बुवाई और खेती
- बुवाई का समयउत्तरी हिस्सों में कुल्थी ख़रीफ़ की फ़सल है और मध्य प्रदेश में रबी की (DPD की सिफ़ारिश)। VPKAS: उत्तर और मध्य भारत की समय पर बोई बारानी हालत।
- बीज दरदाने की फ़सल के लिए क़तार में बुआई में 25 से 30 किलो/हेक्टेयर, दाना और चारा दोनों के लिए छिटकवाँ बोने पर लगभग 40 किलो/हेक्टेयर (DPD की सिफ़ारिश); VL Gahat-15 के लिए अलग दर नहीं छपी। बीज को पहले कार्बेन्डाज़िम 2 ग्राम प्रति किलो से, फिर राइज़ोबियम और PSB कल्चर 5 से 7 ग्राम प्रति किलो से उपचारित कीजिए।
- दूरीख़रीफ़ में क़तारों के बीच 40 से 45 सेमी और रबी में 25 से 30 सेमी, पौधों के बीच लगभग 5 सेमी (DPD की सिफ़ारिश)।
- सिंचाईज़्यादातर बारानी। पानी हो तो फूल आने से पहले और फली बनते समय सिंचाई कीजिए (DPD की सिफ़ारिश)।
- उर्वरकबुआई के समय आधार खुराक में 20 किलो नाइट्रोजन और 30 किलो P2O5 प्रति हेक्टेयर, बीज से 2 से 5 सेमी नीचे और बग़ल में (DPD की सिफ़ारिश)। मिट्टी की जाँच से घटाइए-बढ़ाइए।
- कटाईDPD 90 से 100 दिन देता है। ज़्यादातर फलियाँ पीली-भूरी हो जाएँ तब काटिए।
मिट्टी और जलवायु
मिट्टी
- उपयुक्त मिट्टी
- हल्की से भारी मिट्टी जिसमें क्षारीयता न हो; आम तौर पर ख़राब, अच्छी निकासी वाली ज़मीन पर उगाई जाती है (DPD की सिफ़ारिश)
जलवायु
- जलवायु
- गर्म, सूखा मौसम, 25 से 30 °C, इसे सूट करता है; ऊँचाई वाली ठंडी, नम जगहों पर यह ठीक नहीं बढ़ती, और शुरू में भारी बारिश गाँठें बनने में नुक़सान करती है (DPD की सिफ़ारिश)।
उपज और अवधि
पकने की अवधि
90 से 100 दिन (DPD की शुष्क दलहन तालिका)
अपेक्षित उपज
600 से 700 किग्रा/हेक्टेयर (DPD); औसत उपज क्षमता 7.75 क्विंटल/हेक्टेयर (ICAR-VPKAS की शीट)
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता और फ़सल की देखभाल पर निर्भर करती है।
कीट और रोग संबंधी बातें
प्रबंधन सुझाव
- निराई: फ़सल घनी बढ़ती है इसलिए एक शुरुआती निराई-गुड़ाई काफ़ी है; उगने से पहले पेंडीमेथालिन 0.75 से 1 किलो प्रति हेक्टेयर, फिर 20 से 25 दिन पर एक हाथ की निराई (DPD की सिफ़ारिश)।
- संक्रमित मिट्टी में जल्दी मत बोइए: जड़ सड़न के लिए बीज को कैप्टान या कार्बेन्डाज़िम 2 ग्राम प्रति किलो से उपचारित कीजिए और संक्रमित खेत में जल्दी बुआई से बचिए।
फ़ायदे और ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- VPKAS की गहतों में सबसे छोटी, 90 से 100 दिन।
- उत्तर और मध्य भारत के लिए केंद्रीय किस्म, सिर्फ़ उत्तराखंड की पहाड़ियों के लिए नहीं।
- दो स्रोतों में एन्थ्रेक्नोज़ और पत्ती धब्बे की मध्यम प्रतिरोधकता।
ध्यान रखने योग्य बातें
- तीनों VPKAS किस्मों में सबसे कम उपज की सूची: 600 से 700 किग्रा/हेक्टेयर (DPD) और 7.75 क्विंटल/हेक्टेयर (VPKAS)।
- सिर्फ़ मध्यम प्रतिरोधी, जबकि VL Gahat-8 तना सड़न और एन्थ्रेक्नोज़ की प्रतिरोधी सूचीबद्ध है।
- मध्य प्रदेश या उत्तर प्रदेश की कोई राज्य-स्तर की सिफ़ारिश नहीं मिली; अनुकूलन क्षेत्र उत्तर और मध्य भारत दिया गया है।
उपयुक्त क्षेत्र
उत्तर और मध्य भारत के लिए जारी (ICAR-VPKAS); राज्यों की कोई सूची नहीं छपी, और मूल केंद्र उत्तराखंड में है।
- उत्तराखंड
छोटे मौसम के लिए छोटी गहत: 90 से 100 दिन कब जीतते हैं
VL Gahat-15 की उपज सूची VL Gahat-8 और 10 से कम है, और इसे चुनने की वजह समय है। 1 जुलाई को बोने पर 90 से 100 दिन की फ़सल लगभग 30 सितंबर से 9 अक्टूबर के बीच कटाई पर आ जाती है। उसी तारीख़ से VL Gahat-8 के 115 से 135 दिन लगभग 24 अक्टूबर से 13 नवंबर तक पहुँचते हैं। जिस साल बारिश जल्दी रुके या पाला जल्दी आए, उस साल तीन से पाँच हफ़्ते पहले निपटना काग़ज़ के 100 किलो ज़्यादा बीज से ज़्यादा मायने रख सकता है।
मध्य प्रदेश में कुल्थी रबी की फ़सल है और उत्तरी हिस्सों में ख़रीफ़ की (DPD की सिफ़ारिश), और VL Gahat-15 उत्तर और मध्य भारत दोनों के लिए जारी VPKAS की किस्म है। इससे आपके ज़िले का परीक्षण नहीं मिलता, इसलिए अपनी गहत के पास एक परीक्षण-पट्टी बोइए, कटाई तक के दिन नापिए और बीज तौलिए। साफ़ जल्दी निपटे और अपनी किस्म के लगभग 100 किलो के भीतर रहे, तो यह खेत की हक़दार है।
क्या इसका बीज अपने पास रख सकते हैं?
यह जारी की गई खुले-परागण वाली किस्म है, संकर नहीं, और कुल्थी अपना बीज ख़ुद बनाती है, इसलिए स्वस्थ पौधों का रखा बीज उसी तरह का निकलता है। इसे दूसरी कुल्थी से अलग रखिए और ज़्यादातर फलियाँ पीली-भूरी होते ही एक साथ तोड़िए।
दूसरी किस्मों से तुलना
कुल्थी (हॉर्स ग्राम) की वे सभी किस्में, जिनका पेज इस साइट पर है, एक साथ देखें। जो किस्म आप अभी देख रहे हैं, उसकी पंक्ति रंग से अलग दिखती है।
| किस्म | किसके लिए ठीक | फल कब से | उपज | राज्य |
|---|---|---|---|---|
| Birsa Kulthi-1 (Strain-43) | बिहार के कुल्थी किसान जो पत्ती झुलसा की श्रेणी वाली छोटी, क्रीम दाने की किस्म चाहते हैं | 92 से 97 दिन (DPD की शुष्क दलहन तालिका) | 800 से 1,000 किग्रा/हेक्टेयर (DPD) | बिहार |
| CRHG-19 | CRIDA की सबसे नई किस्म (2014) | 100 दिन (DPD की शुष्क दलहन तालिका, जहाँ इसे क्रीडाहर्ष नाम से दिया गया है) | जगहों पर औसत 760 से 1,300 किग्रा/हेक्टेयर, सबसे अच्छी तुलना-किस्म से 20.22% ज़्यादा; किसानों के खेतों में स्थानीय से 65% ज़्यादा; DPD की शुष्क दलहन तालिका में 900 किग्रा/हेक्टेयर | आंध्र प्रदेश, तेलंगाना |
| CRHG-4 (CRIDA Latha) | काला दाना, फली नहीं चटकती | 110 दिन (DPD की शुष्क दलहन तालिका, जहाँ इसे क्रीडालता नाम से दिया गया है) | जगहों पर औसत 785 किग्रा/हेक्टेयर (सीमा 700 से 1,100), सबसे अच्छी तुलना-किस्म से 33.1% ज़्यादा | आंध्र प्रदेश, तेलंगाना |
| CRIDA-18R | रोग सहने वाली, 85 से 87 दिन | 85 से 87 दिन (ICAR जारी करने का नोट); 90 से 100 दिन (DPD की शुष्क दलहन तालिका) | परीक्षणों में 750 से 1,150 किग्रा/हेक्टेयर; आंध्र प्रदेश के किसानों के खेतों में 912 किग्रा/हेक्टेयर; DPD की शुष्क दलहन तालिका में 800 से 850 किग्रा/हेक्टेयर | आंध्र प्रदेश, तेलंगाना |
| Gujarat Dantiwada Horsegram-1 (GHG-5) | गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड या झारखंड के वे खेत जहाँ जड़ सड़न या चूर्णिल आसिता का इतिहास रहा है | 94 दिन (DPD की शुष्क दलहन तालिका) | 550 से 575 किग्रा/हेक्टेयर (DPD) | गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, झारखंड |
| Horsegram CO 1 | मोटा दाना, पुरानी किस्म | 110 दिन (TNAU); 55 से 60 दिन पर 50% फूल | बारानी में 560 किग्रा/हेक्टेयर (TNAU की तालिका) | तमिलनाडु |
| Indira Kulthi-1 (IKGH-01-01) | छत्तीसगढ़ के वे खेत जो काले दाने और लंबी फली वाली, पीले मोज़ेक की सहनशील कुल्थी चाहते हैं | 95 दिन (DPD की शुष्क दलहन तालिका) | 800 किग्रा/हेक्टेयर (DPD) | छत्तीसगढ़ |
| Madhu | बिहार के वे खेत जो पुरानी, जानी-पहचानी, झाड़ीदार और मध्यम-बड़े दाने की कुल्थी चाहते हैं | 105 से 110 दिन (DPD की शुष्क दलहन तालिका) | 850 से 1,000 किग्रा/हेक्टेयर (DPD) | बिहार |
| Paiyur 1 | बीच की किस्म, 650 किग्रा | 110 दिन (TNAU); 45 से 50 दिन पर 50% फूल | बारानी में 650 किग्रा/हेक्टेयर (TNAU की तालिका) | तमिलनाडु |
| Paiyur 2 | तमिलनाडु बारानी, नवंबर बुवाई | 100 से 105 दिन (TNAU); 45 से 50 दिन पर 50% फूल | बारानी में 870 किग्रा/हेक्टेयर (TNAU) | तमिलनाडु |
| PHG-9 | कर्नाटक के सूखे क्षेत्र | 100 से 105 दिन (ICAR JSS KVK, सुत्तूर) | ठीक देखभाल में लगभग 3 से 4 क्विंटल प्रति एकड़ (लगभग 740 से 990 किग्रा/हेक्टेयर), एक KVK किसान दिवस के अनुसार; कोई परीक्षण-आँकड़ा नहीं मिला | आंध्र प्रदेश, कर्नाटक |
| VL Gahat-10 | उत्तराखंड के पहाड़ी खेत जो राज्य-सूची की दूसरी गहत चाहते हैं, जो VL Gahat-8 से थोड़ी छोटी है | 113 से 117 दिन (DPD की शुष्क दलहन तालिका) | 700 से 800 किग्रा/हेक्टेयर (DPD); औसत उपज क्षमता 9.40 क्विंटल/हेक्टेयर (ICAR-VPKAS की शीट) | उत्तराखंड |
| VL Gahat-15 (VLG-15)यही पेज | उत्तर और मध्य भारत के वे खेत जिनका बारानी मौसम छोटा है और जिन्हें लगभग 90 से 100 दिन में निपटने वाली गहत चाहिए | 90 से 100 दिन (DPD की शुष्क दलहन तालिका) | 600 से 700 किग्रा/हेक्टेयर (DPD); औसत उपज क्षमता 7.75 क्विंटल/हेक्टेयर (ICAR-VPKAS की शीट) | उत्तराखंड |
| VL Gahat-19 | उत्तराखंड की पहाड़ियाँ (गहत) | 100 से 105 दिन, मध्यम अवधि (DPD की शुष्क दलहन तालिका) | 850 से 900 किग्रा/हेक्टेयर (DPD की शुष्क दलहन तालिका) | उत्तराखंड |
| VL Gahat-8 | उत्तराखंड के पहाड़ी खेत जो जून में बारानी ज़मीन पर बोते हैं और रोग-प्रतिरोधी गहत चाहते हैं | 115 से 135 दिन (DPD की शुष्क दलहन तालिका) | 900 से 1,000 किग्रा/हेक्टेयर (DPD); औसत उपज क्षमता 12.33 क्विंटल/हेक्टेयर (ICAR-VPKAS की शीट) | उत्तराखंड |
इस फ़सल के कैलकुलेटर
आगे के हिसाब यहाँ कर लीजिए — कितना बीज ख़रीदें, बोरा अंकुरित होगा या नहीं, खाद का ख़र्च कितना बैठेगा, और कुल्थी (हॉर्स ग्राम) का भाव क्या चल रहा है।
- बीज दर कैलकुलेटरआपके कुल्थी (हॉर्स ग्राम) के खेत के लिए कितना बीज चाहिए — आपके बोरे के अंकुरण के हिसाब से सुधारा हुआ।
- अंकुरण कैलकुलेटरबुवाई से पहले बोरे के 100 बीज जाँचिए और देखिए कि बीज बोने लायक है या नहीं।
- बीज किस्म खोजकइस साइट की हर कुल्थी (हॉर्स ग्राम) किस्म को राज्य, सीज़न, अवधि और मिट्टी से छानिए।
- खाद कैलकुलेटरकुल्थी (हॉर्स ग्राम) की एनपीके सिफ़ारिश को अपने खेत के हिसाब से यूरिया, डीएपी और एमओपी के बोरों में बदलिए।
- फ़सल कैलेंडरआपके राज्य में कुल्थी (हॉर्स ग्राम) की बुवाई, निराई, सिंचाई और कटाई के महीने।
- फ़सल लाभ कैलकुलेटरबीज, मज़दूरी और लागत को इस किस्म से मिलने वाली उपज के सामने रखकर देखिए।
- मंडी भाव जाँचकव्यापारी से भाव तय करने से पहले अपनी नज़दीकी मंडी में कुल्थी (हॉर्स ग्राम) का आज का रेट देखिए।
सब्सिडी और सरकारी मदद
कुल्थी (हॉर्स ग्राम) के बीज या रोपण सामग्री की लागत में मदद करने वाली योजनाएँ। नियम और आवेदन का तरीक़ा हर योजना के पेज पर है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
VL Gahat-15 क्या है?
ICAR-VPKAS अल्मोड़ा की गहत (कुल्थी), जो 2009 में केंद्रीय किस्म विमोचन समिति द्वारा उत्तर और मध्य भारत के लिए जारी हुई (VLG-15), और 11 फ़रवरी 2009 को S.O. 454(E) से अधिसूचित हुई। यह 90 से 100 दिन की है।
VL Gahat-15 और CRIDA-1-18R की अधिसूचना संख्या एक क्यों है?
राष्ट्रीय सूची दोनों को 11 फ़रवरी 2009 की S.O. 454(E) में अधिसूचित करती है। एक राजपत्र सूचना में कई किस्में आ सकती हैं। CRIDA-1-18R दक्षिण भारत की किस्म है; VL Gahat-15 उत्तर और मध्य भारत की। टैग पर नाम देखिए।
VL Gahat-15 की उपज कितनी है?
DPD 600 से 700 किग्रा/हेक्टेयर देता है। VPKAS की शीट औसत उपज क्षमता 7.75 क्विंटल/हेक्टेयर देती है। दोनों तीनों VPKAS गहतों में सबसे कम हैं (VL Gahat-8 DPD में 900 से 1,000 किग्रा/हेक्टेयर और शीट पर 12.33 क्विंटल/हेक्टेयर है)।
क्या मैं VL Gahat-15 मध्य प्रदेश में उगा सकता हूँ?
यह उत्तर और मध्य भारत के लिए जारी हुई, और मध्य प्रदेश मध्य भारत में है, पर हमें राज्य का कोई परीक्षण नहीं मिला। DPD बताता है कि मध्य प्रदेश में कुल्थी रबी की फ़सल है। अपने KVK से स्थानीय नतीजा पूछिए और पहले छोटी पट्टी आज़माइए।
स्रोत: Horse Gram varieties — ICAR-VPKAS, Almora (variety table and one-page sheets, read from archived copies), Popular varieties of arid legume crops (horse gram table) — Directorate of Pulses Development (dpd.gov.in), read from an archived copy, Notified varieties list (year of release, notification number and date) — Government of India, as hosted by Bihar DBT Agriculture, Horse gram package of practices (state variety lists, sowing, seed rate, fertiliser; source Directorate of Pulses Development) — Vikaspedia. संपादकीय नीति.
