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कुल्थी (हॉर्स ग्राम)खरीफ़खुली-परागितअंतिम अपडेट: 20 अक्टूबर 2026

VL Gahat-8

ICAR-VPKAS अल्मोड़ा की पहाड़ी गहत, उत्तराखंड की पहाड़ियों की समय पर बोई बारानी ज़मीन के लिए, ख़ासकर जून की बुआई। तना सड़न और एन्थ्रेक्नोज़ की प्रतिरोधी, और 115 से 135 दिन की लंबी अवधि।

सीज़नखरीफ़
पकने की अवधि115 से 135 दिन (DPD की शुष्क दलहन तालिका)
अपेक्षित उपज900 से 1,000 किग्रा/हेक्टेयर (DPD); औसत उपज क्षमता 12.33 क्विंटल/हेक्टेयर (ICAR-VPKAS की शीट)
उपयुक्त मिट्टीहल्की से भारी मिट्टी जिसमें क्षारीयता न हो; आम तौर पर ख़राब, अच्छी निकासी वाली ज़मीन

ज़रूरी तथ्य

प्रकार
खुली-परागित
सीज़न
खरीफ़
पकने की अवधि
115 से 135 दिन (DPD की शुष्क दलहन तालिका)
बीज दर
दाने की फ़सल के लिए क़तार में बुआई में 25 से 30 किलो/हेक्टेयर, दाना और चारा दोनों के लिए छिटकवाँ बोने पर लगभग 40 किलो/हेक्टेयर (DPD की सिफ़ारिश); VL Gahat-8 के लिए अलग दर नहीं छपी। बीज को पहले कार्बेन्डाज़िम 2 ग्राम प्रति किलो से, फिर राइज़ोबियम और PSB कल्चर 5 से 7 ग्राम प्रति किलो से उपचारित कीजिए।
अपेक्षित उपज
900 से 1,000 किग्रा/हेक्टेयर (DPD); औसत उपज क्षमता 12.33 क्विंटल/हेक्टेयर (ICAR-VPKAS की शीट)
उपयुक्त मिट्टी
हल्की से भारी मिट्टी जिसमें क्षारीयता न हो; आम तौर पर ख़राब, अच्छी निकासी वाली ज़मीन
जारी
2006 में राज्य किस्म विमोचन समिति (VPKAS) द्वारा जारी; अधिसूचित सूची: साल 2005, 25 अप्रैल 2006 की S.O. 599(E) · ICAR-VPKAS, अल्मोड़ा

इस किस्म के बारे में

VL Gahat-8 कुल्थी है, जिसे पहाड़ों में गहत कहते हैं, और यह ICAR-VPKAS (विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान), अल्मोड़ा की है। VPKAS इसे राज्य किस्म विमोचन समिति द्वारा 2006 में उत्तराखंड की पहाड़ियों के लिए जारी बताता है, ख़ासकर बारानी हालत में जून की बुआई के लिए। राष्ट्रीय अधिसूचित सूची जारी होने का साल 2005 देती है, जिसमें 25 अप्रैल 2006 (S.O. 599(E)) और 1 जनवरी 2007 की प्रविष्टियाँ हैं, और DPD उत्तर भारत के लिए 2005 देता है। DPD 115 से 135 दिन और 900 से 1,000 किग्रा/हेक्टेयर देता है, तना सड़न और एन्थ्रेक्नोज़ की प्रतिरोधी। VPKAS की एक-पन्ने की शीट समय पर बोई बारानी ज़मीन के लिए औसत उपज क्षमता 12.33 क्विंटल/हेक्टेयर देती है, वही तना सड़न और एन्थ्रेक्नोज़ की प्रतिरोधकता। नीचे की खेती DPD की सिफ़ारिश की आम खेती है।

क्या यह किस्म आपके लिए ठीक है?

पहाड़ की बारानी ज़मीन पर गहत उगाते हों और जून में बोते हों, तो VL Gahat-8 चुनिए। VPKAS की एक-पन्ने की शीट में VPKAS की किस्मों में इसकी उपज क्षमता सबसे ज़्यादा, 12.33 क्विंटल/हेक्टेयर, है, और यह तना सड़न और एन्थ्रेक्नोज़ की प्रतिरोधी आँकी गई है। विकासपीडिया, दलहन विकास निदेशालय का हवाला देकर, इसे VL Gahat-10 के साथ उत्तराखंड की सुझाई किस्मों में गिनता है। क़ीमत समय है: DPD 115 से 135 दिन देता है, जो VPKAS की गहतों में सबसे लंबी है, जबकि VL Gahat-10 की 113 से 117 और VL Gahat-15 की 90 से 100। DPD का अपना उपज दायरा कम है, 900 से 1,000 किग्रा/हेक्टेयर, इसलिए शीट की क्षमता पर नहीं, इसी आँकड़े पर योजना बनाइए।

मुख्य विशेषताएँ

    पौध प्रकारखुली-परागित
    अवधि115 से 135 दिन (DPD की शुष्क दलहन तालिका)
    उपज क्षमता900 से 1,000 किग्रा/हेक्टेयर (DPD); औसत उपज क्षमता 12.33 क्विंटल/हेक्टेयर (ICAR-VPKAS की शीट)
    रोग-प्रतिरोधतना सड़न और एन्थ्रेक्नोज़ की प्रतिरोधी (DPD और VPKAS)
    मिट्टीहल्की से भारी मिट्टी जिसमें क्षारीयता न हो; आम तौर पर ख़राब, अच्छी निकासी वाली ज़मीन
    सीज़नखरीफ़

बुवाई और खेती

  • बुवाई का समयVPKAS: उत्तराखंड की पहाड़ियों में बारानी हालत में जून की बुआई के लिए ख़ासकर ठीक। उत्तरी हिस्सों में कुल्थी ख़रीफ़ की फ़सल है (DPD की सिफ़ारिश)।
  • बीज दरदाने की फ़सल के लिए क़तार में बुआई में 25 से 30 किलो/हेक्टेयर, दाना और चारा दोनों के लिए छिटकवाँ बोने पर लगभग 40 किलो/हेक्टेयर (DPD की सिफ़ारिश); VL Gahat-8 के लिए अलग दर नहीं छपी। बीज को पहले कार्बेन्डाज़िम 2 ग्राम प्रति किलो से, फिर राइज़ोबियम और PSB कल्चर 5 से 7 ग्राम प्रति किलो से उपचारित कीजिए।
  • दूरीख़रीफ़ में क़तारों के बीच 40 से 45 सेमी और रबी में 25 से 30 सेमी, पौधों के बीच लगभग 5 सेमी (DPD की सिफ़ारिश)।
  • सिंचाईज़्यादातर बारानी। पानी हो तो फूल आने से पहले और फली बनते समय सिंचाई कीजिए (DPD की सिफ़ारिश)।
  • उर्वरकबुआई के समय आधार खुराक में 20 किलो नाइट्रोजन और 30 किलो P2O5 प्रति हेक्टेयर, बीज से 2 से 5 सेमी नीचे और बग़ल में (DPD की सिफ़ारिश)। मिट्टी की जाँच से घटाइए-बढ़ाइए।
  • कटाईDPD 115 से 135 दिन देता है। ज़्यादातर फलियाँ पीली-भूरी हो जाएँ तब काटिए; जून की बुआई अक्टूबर में तैयार होती है।

मिट्टी और जलवायु

मिट्टी

उपयुक्त मिट्टी
हल्की से भारी मिट्टी जिसमें क्षारीयता न हो; आम तौर पर ख़राब, अच्छी निकासी वाली ज़मीन पर उगाई जाती है (DPD की सिफ़ारिश)

जलवायु

जलवायु
गर्म, सूखा मौसम, 25 से 30 °C, इसे सूट करता है; ऊँचाई वाली ठंडी, नम जगहों पर यह ठीक नहीं बढ़ती, और शुरू में भारी बारिश गाँठें बनने में नुक़सान करती है (DPD की सिफ़ारिश)।

उपज और अवधि

पकने की अवधि

115 से 135 दिन (DPD की शुष्क दलहन तालिका)

अपेक्षित उपज

900 से 1,000 किग्रा/हेक्टेयर (DPD); औसत उपज क्षमता 12.33 क्विंटल/हेक्टेयर (ICAR-VPKAS की शीट)

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता और फ़सल की देखभाल पर निर्भर करती है।

कीट और रोग संबंधी बातें

प्रबंधन सुझाव

  • निराई: फ़सल घनी बढ़ती है इसलिए एक शुरुआती निराई-गुड़ाई काफ़ी है; उगने से पहले पेंडीमेथालिन 0.75 से 1 किलो प्रति हेक्टेयर, फिर 20 से 25 दिन पर एक हाथ की निराई (DPD की सिफ़ारिश)।
  • संक्रमित मिट्टी में जल्दी मत बोइए: जड़ सड़न के लिए बीज को कैप्टान या कार्बेन्डाज़िम 2 ग्राम प्रति किलो से उपचारित कीजिए और संक्रमित खेत में जल्दी बुआई से बचिए।

फ़ायदे और ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • DPD और VPKAS की शीट के अनुसार तना सड़न और एन्थ्रेक्नोज़ दोनों की प्रतिरोधी।
  • VPKAS की गहतों में शीट पर सबसे ज़्यादा उपज क्षमता, 12.33 क्विंटल/हेक्टेयर।
  • DPD और विकासपीडिया उत्तराखंड के लिए इसका नाम लेते हैं, इसलिए राज्य का दफ़्तर इसे जानता होगा।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • VPKAS की गहतों में सबसे लंबी अवधि, 115 से 135 दिन।
  • DPD की 900 से 1,000 किग्रा/हेक्टेयर शीट की 12.33 क्विंटल/हेक्टेयर क्षमता से काफ़ी कम है।
  • कुल्थी ऊँचाई वाली ठंडी, नम जगहों पर ठीक नहीं बढ़ती (DPD की सिफ़ारिश)।

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है। स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में सुझाया इलाक़ा एक से ज़्यादा हो सकता है।

  • उत्तराखंड

पहाड़ में जून की बुआई: 115 से 135 दिन गिनिए

VPKAS कहता है कि VL Gahat-8 बारानी हालत में जून की बुआई के लिए ख़ासकर ठीक है। DPD 115 से 135 दिन देता है। हिसाब लगाइए: 15 जून को बोई फ़सल लगभग 8 से 28 अक्टूबर के बीच तैयार होती है। 15 जुलाई की बुआई, यानी एक महीना देर से, लगभग 7 से 27 नवंबर के बीच तैयार होती है। पहाड़ में वह दूसरी तारीख़ ठंड और जल्दी पाले के जोखिम में जा पहुँचती है, इसलिए शीट की सुरक्षित पढ़त जून की बुआई है।

लंबा मौसम इसलिए भी है कि शीट की 12.33 क्विंटल/हेक्टेयर क्षमता है, वादा नहीं। चार महीने खेत में रहने वाली फ़सल को ख़राब मौसम से मिलने के ज़्यादा मौक़े मिलते हैं। जून की बुआई जुलाई तक खिसक जाए तो VPKAS या अपने KVK से पूछिए कि छोटी VL Gahat-15 (90 से 100 दिन) आपकी ऊँचाई के लिए ठीक है या नहीं। फ़सल को उस ऊँचाई से नीचे रखिए जहाँ मौसम ठंडा और नम हो जाता है, क्योंकि DPD कहता है कि कुल्थी वहाँ ठीक नहीं बढ़ती।

क्या इसका बीज अपने पास रख सकते हैं?

यह जारी की गई खुले-परागण वाली किस्म है, संकर नहीं, और कुल्थी अपना बीज ख़ुद बनाती है, इसलिए स्वस्थ पौधों का रखा बीज उसी तरह का निकलता है। इसे दूसरी कुल्थी से अलग रखिए और ज़्यादातर फलियाँ पीली-भूरी होते ही एक साथ तोड़िए।

दूसरी किस्मों से तुलना

कुल्थी (हॉर्स ग्राम) की वे सभी किस्में, जिनका पेज इस साइट पर है, एक साथ देखें। जो किस्म आप अभी देख रहे हैं, उसकी पंक्ति रंग से अलग दिखती है।

किस्मकिसके लिए ठीकफल कब सेउपजराज्य
Birsa Kulthi-1 (Strain-43)बिहार के कुल्थी किसान जो पत्ती झुलसा की श्रेणी वाली छोटी, क्रीम दाने की किस्म चाहते हैं92 से 97 दिन (DPD की शुष्क दलहन तालिका)800 से 1,000 किग्रा/हेक्टेयर (DPD)बिहार
CRHG-19CRIDA की सबसे नई किस्म (2014)100 दिन (DPD की शुष्क दलहन तालिका, जहाँ इसे क्रीडाहर्ष नाम से दिया गया है)जगहों पर औसत 760 से 1,300 किग्रा/हेक्टेयर, सबसे अच्छी तुलना-किस्म से 20.22% ज़्यादा; किसानों के खेतों में स्थानीय से 65% ज़्यादा; DPD की शुष्क दलहन तालिका में 900 किग्रा/हेक्टेयरआंध्र प्रदेश, तेलंगाना
CRHG-4 (CRIDA Latha)काला दाना, फली नहीं चटकती110 दिन (DPD की शुष्क दलहन तालिका, जहाँ इसे क्रीडालता नाम से दिया गया है)जगहों पर औसत 785 किग्रा/हेक्टेयर (सीमा 700 से 1,100), सबसे अच्छी तुलना-किस्म से 33.1% ज़्यादाआंध्र प्रदेश, तेलंगाना
CRIDA-18Rरोग सहने वाली, 85 से 87 दिन85 से 87 दिन (ICAR जारी करने का नोट); 90 से 100 दिन (DPD की शुष्क दलहन तालिका)परीक्षणों में 750 से 1,150 किग्रा/हेक्टेयर; आंध्र प्रदेश के किसानों के खेतों में 912 किग्रा/हेक्टेयर; DPD की शुष्क दलहन तालिका में 800 से 850 किग्रा/हेक्टेयरआंध्र प्रदेश, तेलंगाना
Gujarat Dantiwada Horsegram-1 (GHG-5)गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड या झारखंड के वे खेत जहाँ जड़ सड़न या चूर्णिल आसिता का इतिहास रहा है94 दिन (DPD की शुष्क दलहन तालिका)550 से 575 किग्रा/हेक्टेयर (DPD)गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, झारखंड
Horsegram CO 1मोटा दाना, पुरानी किस्म110 दिन (TNAU); 55 से 60 दिन पर 50% फूलबारानी में 560 किग्रा/हेक्टेयर (TNAU की तालिका)तमिलनाडु
Indira Kulthi-1 (IKGH-01-01)छत्तीसगढ़ के वे खेत जो काले दाने और लंबी फली वाली, पीले मोज़ेक की सहनशील कुल्थी चाहते हैं95 दिन (DPD की शुष्क दलहन तालिका)800 किग्रा/हेक्टेयर (DPD)छत्तीसगढ़
Madhuबिहार के वे खेत जो पुरानी, जानी-पहचानी, झाड़ीदार और मध्यम-बड़े दाने की कुल्थी चाहते हैं105 से 110 दिन (DPD की शुष्क दलहन तालिका)850 से 1,000 किग्रा/हेक्टेयर (DPD)बिहार
Paiyur 1बीच की किस्म, 650 किग्रा110 दिन (TNAU); 45 से 50 दिन पर 50% फूलबारानी में 650 किग्रा/हेक्टेयर (TNAU की तालिका)तमिलनाडु
Paiyur 2तमिलनाडु बारानी, नवंबर बुवाई100 से 105 दिन (TNAU); 45 से 50 दिन पर 50% फूलबारानी में 870 किग्रा/हेक्टेयर (TNAU)तमिलनाडु
PHG-9कर्नाटक के सूखे क्षेत्र100 से 105 दिन (ICAR JSS KVK, सुत्तूर)ठीक देखभाल में लगभग 3 से 4 क्विंटल प्रति एकड़ (लगभग 740 से 990 किग्रा/हेक्टेयर), एक KVK किसान दिवस के अनुसार; कोई परीक्षण-आँकड़ा नहीं मिलाआंध्र प्रदेश, कर्नाटक
VL Gahat-10उत्तराखंड के पहाड़ी खेत जो राज्य-सूची की दूसरी गहत चाहते हैं, जो VL Gahat-8 से थोड़ी छोटी है113 से 117 दिन (DPD की शुष्क दलहन तालिका)700 से 800 किग्रा/हेक्टेयर (DPD); औसत उपज क्षमता 9.40 क्विंटल/हेक्टेयर (ICAR-VPKAS की शीट)उत्तराखंड
VL Gahat-15 (VLG-15)उत्तर और मध्य भारत के वे खेत जिनका बारानी मौसम छोटा है और जिन्हें लगभग 90 से 100 दिन में निपटने वाली गहत चाहिए90 से 100 दिन (DPD की शुष्क दलहन तालिका)600 से 700 किग्रा/हेक्टेयर (DPD); औसत उपज क्षमता 7.75 क्विंटल/हेक्टेयर (ICAR-VPKAS की शीट)उत्तराखंड
VL Gahat-19उत्तराखंड की पहाड़ियाँ (गहत)100 से 105 दिन, मध्यम अवधि (DPD की शुष्क दलहन तालिका)850 से 900 किग्रा/हेक्टेयर (DPD की शुष्क दलहन तालिका)उत्तराखंड
VL Gahat-8यही पेजउत्तराखंड के पहाड़ी खेत जो जून में बारानी ज़मीन पर बोते हैं और रोग-प्रतिरोधी गहत चाहते हैं115 से 135 दिन (DPD की शुष्क दलहन तालिका)900 से 1,000 किग्रा/हेक्टेयर (DPD); औसत उपज क्षमता 12.33 क्विंटल/हेक्टेयर (ICAR-VPKAS की शीट)उत्तराखंड

इस फ़सल के कैलकुलेटर

आगे के हिसाब यहाँ कर लीजिए — कितना बीज ख़रीदें, बोरा अंकुरित होगा या नहीं, खाद का ख़र्च कितना बैठेगा, और कुल्थी (हॉर्स ग्राम) का भाव क्या चल रहा है।

सब्सिडी और सरकारी मदद

कुल्थी (हॉर्स ग्राम) के बीज या रोपण सामग्री की लागत में मदद करने वाली योजनाएँ। नियम और आवेदन का तरीक़ा हर योजना के पेज पर है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

VL Gahat-8 क्या है?

ICAR-VPKAS अल्मोड़ा की गहत (कुल्थी), जो 2006 में राज्य किस्म विमोचन समिति द्वारा उत्तराखंड की पहाड़ियों के लिए जारी हुई। यह तना सड़न और एन्थ्रेक्नोज़ की प्रतिरोधी है।

VL Gahat-8 के लिए स्रोत 2005 और 2006 क्यों देते हैं?

VPKAS राज्य किस्म विमोचन समिति के जारी करने का साल 2006 देता है। DPD और राष्ट्रीय अधिसूचित सूची 2005 देते हैं, और अधिसूचित सूची में 25 अप्रैल 2006 की अधिसूचना (S.O. 599(E)) भी है। अधिसूचना संख्या वह हिस्सा है जिसे आप जाँच सकते हैं।

VL Gahat-8 या VL Gahat-10?

VL Gahat-8: 115 से 135 दिन, DPD 900 से 1,000 किग्रा/हेक्टेयर, VPKAS क्षमता 12.33 क्विंटल/हेक्टेयर, तना सड़न और एन्थ्रेक्नोज़ की प्रतिरोधी। VL Gahat-10: 113 से 117 दिन, DPD 700 से 800, VPKAS 9.40 क्विंटल/हेक्टेयर। VL Gahat-8 ज़्यादा उपज और दो रोग-श्रेणियाँ गिनाती है, VL Gahat-10 थोड़ा कम समय।

VL Gahat-8 का बीज कैसे मिले?

VPKAS अल्मोड़ा प्रजनक बीज बनाता है, और उसकी एक-पन्ने की शीट में प्रजनक बीज 320 रुपये किलो लिखा है; शीट पर तारीख़ नहीं है, इसलिए अभी का भाव पूछिए। प्रमाणित बीज राज्य की बीज व्यवस्था से आता है, इसलिए अपने KVK या उत्तराखंड की बीज एजेंसी से पूछिए कि कौन-सा लॉट उपलब्ध है।

स्रोत: Horse Gram varieties — ICAR-VPKAS, Almora (variety table and one-page sheets, read from archived copies), Popular varieties of arid legume crops (horse gram table) — Directorate of Pulses Development (dpd.gov.in), read from an archived copy, Notified varieties list (year of release, notification number and date) — Government of India, as hosted by Bihar DBT Agriculture, Horse gram package of practices (state variety lists, sowing, seed rate, fertiliser; source Directorate of Pulses Development) — Vikaspedia. संपादकीय नीति.