सुभिक्ष केरलम
कृषि सामग्री पर 50–100% सब्सिडी, परती ज़मीन की खेती और एकीकृत कृषि — COVID-19 के दौरान शुरू केरल का खाद्य सुरक्षा अभियान।
संचालक: कृषि विकास एवं किसान कल्याण विभाग, केरल सरकार
- परती ज़मीन लक्ष्य
- 25,000 हेक्टेयर
- सब्सिडी (सामान्य)
- लागत का 50%
- सब्सिडी (SC / ST)
- 75% / 100%
- शुरुआत
- 18 मई 2020
परिचय
सुभिक्ष केरलम 18 मई 2020 को शुरू हुआ — सरकारी आदेश S.U (M.S) 14/2020/A.S.V — COVID-19 से पैदा हुए खाद्य सुरक्षा ख़तरे के जवाब में। केरल अपने चावल, सब्ज़ियों और दालों का बड़ा हिस्सा बाहर से मँगाता है; महामारी ने दिखा दिया कि यह आपूर्ति श्रृंखला कितनी नाज़ुक है। इस कार्यक्रम का मकसद परती ज़मीन को खेती में लाना, मनरेगा मज़दूरों को खेती में लगाना और सस्ती सामग्री देकर राज्य के अंदर ज़्यादा अनाज उगाना है।
शुरुआती लक्ष्य 25,000 हेक्टेयर परती ज़मीन को खेत में बदलना था। पहले चरण के अंत तक 19,555 हेक्टेयर ज़मीन खेती में आ चुकी थी और 14,000 नई समन्वित कृषि इकाइयाँ बनीं, जिनसे 10,000 से ज़्यादा लोगों को रोज़गार मिला। सरकार ने पहले साल के लिए ₹3,000 करोड़ का पैकेज घोषित किया।
सब्सिडी सामाजिक श्रेणी के हिसाब से है: सामान्य किसानों को सामग्री लागत का 50%, अनुसूचित जाति को 75% और अनुसूचित जनजाति को 100%। कार्यक्रम में धान, सब्ज़ियाँ, दालें, कंद और मसाले शामिल हैं, साथ ही डेयरी, मुर्गीपालन, मछलीपालन और किचन गार्डन जैसी सहायक गतिविधियाँ भी। पंजीकरण aims.kerala.gov.in पर कृषि सूचना प्रबंधन प्रणाली से होता है, जहाँ किसान, किसान समूह और संस्थाएँ नामांकन करा सकते हैं और सब्सिडी सीधे बैंक खाते में पा सकते हैं।
आपको क्या मिलता है
लाभ वैसा ही, जैसा राज्य ने अधिसूचित किया है — यहाँ कुछ भी अनुमान नहीं है।
- सब्सिडी पर बीज, खाद, कृषि उपकरण और रोपण सामग्री — सामान्य किसानों को 50%, SC को 75% और ST को 100%।
- परती ज़मीन को समन्वित सहायता — तकनीकी मार्गदर्शन, सामग्री आपूर्ति और बाज़ार जुड़ाव — से खेती में लाना।
- फसल, डेयरी, मुर्गीपालन और मछलीपालन को मिलाकर एकीकृत खेती मॉडल से आमदनी बढ़ाना।
- मनरेगा मज़दूरों को खेती के कामों में लगाना, जिससे किसान की मज़दूरी का खर्च कम हो।
- नई जोती गई परती ज़मीन पर फसल बीमा कवरेज बढ़ाना।
कौन पात्र है
राज्य योजनाएँ अपने मानदंड आमतौर पर सूची में नहीं, विवरण में लिखती हैं। यह वही विवरण खोलकर रखा गया है — अंतिम फ़ैसला विभाग के सत्यापन का होता है।
आप पात्र हैं अगर
- केरल का निवासी किसान
- aims.kerala.gov.in पर सुभिक्ष केरलम पोर्टल पर पंजीकृत
- व्यक्तिगत किसान, किसान समूह (पदशेखरा समिति, कुडुम्बश्री यूनिट आदि) या कृषि संस्था
- परती या कम इस्तेमाल वाली ज़मीन पर खेती करने या मौजूदा खेती बढ़ाने को तैयार
ज़रूरी दस्तावेज़
शुरू करने से पहले ये तैयार रखें — ज़्यादातर आवेदन हक़ न होने से नहीं, कोई काग़ज़ छूट जाने से रद्द होते हैं।
- आधार कार्ड
- केरल निवास प्रमाण
- राशन कार्ड
- बैंक खाता पासबुक
- भूमि रिकॉर्ड या लीज़ एग्रीमेंट (परती ज़मीन की खेती के लिए)
आवेदन कैसे करें
केंद्रीय योजना से कम कदम, और आमतौर पर पोर्टल नहीं, एक कार्यालय।
- 1
सुभिक्ष केरलम पोर्टल पर पंजीकरण
aims.kerala.gov.in पर जाएँ, "सुभिक्ष केरलम" चुनें, व्यक्तिगत / समूह / संस्था में से अपनी श्रेणी चुनें और बैंक खाते सहित जानकारी भरें।
- 2
कृषि भवन से सत्यापन
स्थानीय कृषि भवन (पंचायत स्तर का कृषि कार्यालय) आपके पंजीकरण और ज़मीन के विवरण की जाँच करता है।
- 3
सामग्री आपूर्ति और सब्सिडी वितरण
मंज़ूर किसानों को सब्सिडी वाली सामग्री मिलती है और सब्सिडी राशि DBT से बैंक खाते में भेजी जाती है।
अगर कुछ गड़बड़ हो
नाम सूची में न हो, या भुगतान अटका हो — विभाग ने ख़ुद जो रास्ता बताया है, वह यहाँ है।
- पंजीकरण समस्या, सब्सिडी में देरी या सामग्री आपूर्ति के मुद्दों के लिए कृषि भवन (पंचायत स्तर कृषि कार्यालय) से संपर्क करें। कृषि विकास एवं किसान कल्याण विभाग तक keralaagriculture.gov.in या 0471-2304481 पर पहुँचें।
- विभाग से आगे, केरल CM की लोक शिकायत निवारण प्रकोष्ठ — cmo.kerala.gov.in या टोल-फ्री 1076 का इस्तेमाल करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या सिर्फ़ व्यक्तिगत किसान पंजीकरण कर सकता है?
नहीं। व्यक्तिगत किसान, किसान समूह (पदशेखरा समिति, कुडुम्बश्री यूनिट) और कृषि संस्थाएँ — सभी पंजीकरण कर सकते हैं। पोर्टल पर साइन-अप के समय अपनी श्रेणी चुनें।
क्या सब्सिडी सबके लिए एक जैसी है?
नहीं। सामान्य किसानों को सामग्री लागत का 50%, अनुसूचित जाति को 75% और अनुसूचित जनजाति को 100% सब्सिडी मिलती है। राशि सीधे बैंक खाते में जाती है।
क्या ज़मीन का मालिक होना ज़रूरी है?
ज़रूरी नहीं। अगर आप लीज़ पर परती ज़मीन जोत रहे हैं तो लीज़ एग्रीमेंट के साथ पंजीकरण कर सकते हैं। योजना का मकसद बेकार ज़मीन को उत्पादन में लाना है, इसलिए किरायेदार किसान भी पात्र हैं।
कौन-सी फसलें इसमें शामिल हैं?
धान, सब्ज़ियाँ, दालें, कंद और मसाले। साथ ही डेयरी, मुर्गीपालन और मछलीपालन जैसी सहायक गतिविधियाँ भी शामिल हैं।
क्या यह सिर्फ़ परती ज़मीन के लिए है?
परती ज़मीन को खेती में लाना मुख्य हिस्सा है, लेकिन कार्यक्रम उन किसानों का भी सहयोग करता है जो मौजूदा खेती बढ़ाना चाहते हैं या एकीकृत कृषि मॉडल अपनाना चाहते हैं।
पंजीकरण कैसे करें?
aims.kerala.gov.in पर जाएँ, सुभिक्ष केरलम चुनें, व्यक्तिगत / समूह / संस्था चुनें, जानकारी और बैंक विवरण भरें और जमा करें। कृषि भवन आपके आवेदन की जाँच करता है।
तथ्य 26 सितंबर 2026 को aims.kerala.gov.in से जाँचे गए। संपादकीय नीति.
