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सूरन (जिमीकंद)खरीफ़कंद / कंद का टुकड़ा (वानस्पतिक)अपडेट किया गया 23 सितंबर 2026

Sree Athira

ICAR-CTCRI की आनुवंशिक रूप से सुधारी किस्म (2006, Am-15 × Am-45 क्रॉस) — गुलाबी गूदे वाला गोल कंद, पकाने में बेहतरीन, और कॉलर रॉट व मोज़ेक दोनों के प्रति सहनशील।

सीज़नखरीफ़
पकने की अवधि9–10 महीने
अपेक्षित उपज40.5 टन/हेक्टेयर; क्षमता 45.6 टन/हेक्टेयर
उपयुक्त मिट्टीदोमट

ज़रूरी तथ्य

प्रकार
कंद / कंद का टुकड़ा (वानस्पतिक)
सीज़न
खरीफ़
पकने की अवधि
9–10 महीने
अपेक्षित उपज
40.5 टन/हेक्टेयर; क्षमता 45.6 टन/हेक्टेयर
उपयुक्त मिट्टी
दोमट
जारी
2006 में ICAR-केंद्रीय कंद फ़सल अनुसंधान संस्थान (CTCRI), तिरुवनंतपुरम द्वारा जारी

इस किस्म के बारे में

श्री अथिरा ICAR-केंद्रीय कंद फ़सल अनुसंधान संस्थान (CTCRI), तिरुवनंतपुरम द्वारा 2006 में जारी एक आनुवंशिक रूप से सुधारी सूरन (जिमीकंद) किस्म है, जो Am-15 × Am-45 के संकर क्रॉस से बनी। यह मध्यम ऊँचाई (85–110 सेमी) का पौधा है, छतरी भी इतनी ही चौड़ी, हल्के हरे डंठल पर हरे निशान, और गोल कंद भूरे छिलके व गुलाबी गूदे वाला है। इसे 9–10 महीने लगते हैं, व्यावसायिक प्रबंधन में लगभग 40.5 टन/हेक्टेयर देती है और क्षमता लगभग 45.6 टन/हेक्टेयर है। CTCRI इसे पकाने में बेहतरीन दर्ज करता है, और ख़ास बात है कॉलर रॉट (Sclerotium rolfsii) और मोज़ेक रोग दोनों के प्रति सहनशीलता — वे दो समस्याएँ जो सूरन उगाने वालों को सबसे ज़्यादा नुक़सान करती हैं।

मुख्य विशेषताएँ

    पौध प्रकारकंद / कंद का टुकड़ा (वानस्पतिक)
    अवधि9–10 महीने
    उपज क्षमता40.5 टन/हेक्टेयर; क्षमता 45.6 टन/हेक्टेयर
    रोग-प्रतिरोधकॉलर रॉट व मोज़ेक के प्रति सहनशील
    मिट्टीदोमट
    सीज़नखरीफ़

बुवाई व खेती

  • दूरीलगभग 90 × 90 सेमी पर 60 × 60 × 45 सेमी के गड्ढे
  • उर्वरक25–30 टन/हेक्टेयर गोबर की खाद और प्रति हेक्टेयर 80:60:100 किग्रा N:P₂O₅:K₂O दो खुराकों में
  • कटाईलगभग 9–10 महीने में तैयार, जब पत्ता और डंठल सूख जाएँ।

उपज व अवधि

पकने की अवधि

9–10 महीने

अपेक्षित उपज

40.5 टन/हेक्टेयर; क्षमता 45.6 टन/हेक्टेयर

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।

कीट व रोग संबंधी बातें

फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • कॉलर रॉट व मोज़ेक के प्रति सहनशील, जो सूरन उगाने वालों को सबसे ज़्यादा नुक़सान करने वाली दो समस्याएँ हैं
  • गुलाबी गूदे वाला गोल कंद, पकाने में बेहतरीन
  • लगभग 40.5 टन/हेक्टेयर की व्यावसायिक उपज, क्षमता लगभग 45.6 टन/हेक्टेयर

ध्यान रखने योग्य बातें

  • आम किस्मों में सबसे लंबी फ़सल (9–10 महीने), इसलिए खेत साल के ज़्यादातर हिस्से में बँधा रहता है
  • केरल के लिए अनुशंसित; कहीं और लगाने से पहले अपने KVK से पूछें

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।

  • केरल

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

गजेंद्र के बजाय श्री अथिरा क्यों चुनें?

अगर आपके खेतों में पहले कॉलर रॉट या मोज़ेक आया है और आप खेत 9–10 महीने दे सकते हैं, तो श्री अथिरा चुनें, क्योंकि यह दोनों के प्रति सहनशील है। गजेंद्र छोटी (लगभग 6–7 महीने) और बाज़ार की मानक किस्म है, पर उसके लिए कोई विशेष रोग-सहनशीलता नहीं बताई गई है।

स्रोत: ICAR-CTCRI — Sree Athira, India Science, Technology & Innovation portal — Sree Athira. संपादकीय नीति.