NDA-9
NDUAT, फ़ैज़ाबाद (अयोध्या), उत्तर प्रदेश की जल्दी वाली किस्म, चिकने कंद और केंद्र पर बहुत ऊँची बताई उपज के साथ — पर एक तुलना में इसमें दूसरी किस्मों से ज़्यादा ऑक्सलेट मिला (कच्चा रहने पर ज़्यादा खुजली)।
ज़रूरी तथ्य
- प्रकार
- कंद / कंद का टुकड़ा (वानस्पतिक)
- सीज़न
- खरीफ़
- पकने की अवधि
- 180–200 दिन
- अपेक्षित उपज
- केंद्र के परीक्षणों में 60–85 टन/हेक्टेयर (खेत की उपज कम होती है)
- उपयुक्त मिट्टी
- दोमट
- जारी
- नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (NDUAT), कुमारगंज, फ़ैज़ाबाद (अयोध्या), उत्तर प्रदेश द्वारा विकसित (जारी करने का वर्ष उपलब्ध स्रोतों में दर्ज नहीं)
इस किस्म के बारे में
NDA-9 नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (NDUAT), कुमारगंज, फ़ैज़ाबाद (अयोध्या), उत्तर प्रदेश की जल्दी वाली सूरन (जिमीकंद) किस्म है। इसके कंद चिकने हैं और यह रोपाई के लगभग 180–200 दिन में पकती है, जो सूरन के लिए कम अवधि है। केंद्र के परीक्षणों में 60–85 टन/हेक्टेयर की बहुत ऊँची उपज बताई गई है, हालाँकि खेत की उपज आमतौर पर केंद्र के आँकड़ों से काफ़ी कम रहती है। किस्मों की एक छपी तुलना में NDA-9 में कुल ऑक्सलेट सबसे ज़्यादा मिला (रोपाई के समय लगभग 37.6 मिग्रा प्रति 100 ग्राम), यानी अगर कच्चा रह जाए तो यह कुछ दूसरी किस्मों से ज़्यादा खुजला सकती है, इसलिए इसे अच्छी तरह पकाएँ। यह उत्तर प्रदेश और आसपास के मैदानों में उगाई जाती है; इस पर योजना बनाने से पहले रोपण-सामग्री के बारे में NDUAT या अपने KVK से पूछें।
मुख्य विशेषताएँ
बुवाई व खेती
- दूरीलगभग 90 × 90 सेमी पर 60 × 60 × 45 सेमी के गड्ढे
- उर्वरक25–30 टन/हेक्टेयर गोबर की खाद और प्रति हेक्टेयर 80:60:100 किग्रा N:P₂O₅:K₂O दो खुराकों में (सूरन की सामान्य सिफ़ारिश)
- कटाईलगभग 6–7 महीने में तैयार, जब पत्ता और डंठल सूख जाएँ।
उपज व अवधि
पकने की अवधि
180–200 दिन
अपेक्षित उपज
केंद्र के परीक्षणों में 60–85 टन/हेक्टेयर (खेत की उपज कम होती है)
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।
कीट व रोग संबंधी बातें
फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- जल्दी वाली किस्म, लगभग 180–200 दिन में तैयार
- चिकने कंद और केंद्र पर बहुत ऊँची बताई गई उपज
ध्यान रखने योग्य बातें
- एक तुलना में दूसरी किस्मों से ज़्यादा ऑक्सलेट मिला, इसलिए कच्चा रहने पर ज़्यादा खुजला सकती है — अच्छी तरह पकाएँ
- केंद्र की उपज खेतों में आमतौर पर मिलने वाली उपज से ज़्यादा होती है; खेत के लिए कम आँकड़ों पर योजना बनाएँ
- जाँचे गए स्रोतों में रोग-प्रतिक्रिया दर्ज नहीं है, और रोपण-सामग्री NDUAT या अपने KVK के ज़रिए जुटानी होगी
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।
- उत्तर प्रदेश
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या NDA-9 सचमुच 60–85 टन/हेक्टेयर वाली किस्म है?
ये केंद्र के परीक्षणों में बताई गई उपज है, जहाँ फ़सल को आदर्श देखभाल मिलती है। खेत की उपज आमतौर पर कम होती है — सही प्रबंधन वाली सूरन फ़सल के लिए 30–40 टन/हेक्टेयर का दायरा मानकर चलें और उससे ऊपर जो मिले उसे बोनस समझें।
स्रोत: Acharya Narendra Deva University of Agriculture and Technology (NDUAT), Ayodhya, ICAR-CTCRI, Thiruvananthapuram. संपादकीय नीति.
