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कुसुम (करडी)रबीकुसुम की किस्म (काँटेदार है या नहीं, सूची में नहीं लिखा)अंतिम अपडेट: 20 अक्टूबर 2026

Parbhani Kusum (PBNS-12)

कुसुम की अखिल भारतीय परियोजना के VNMKV परभणी केंद्र की केंद्रीय जारी किस्म, पूरे भारत के लिए सूचीबद्ध, सिंचित 1,900–2,000 किग्रा/हेक्टेयर और 29% तेल। PBNS-12 इसका कोड है; यह फुले चंद्रभागा से अलग किस्म है।

सीज़नरबी
पकने की अवधिपकने में 135–140 दिन; 50% फूल 83–90 दिन में (ICAR-IIOR)
अपेक्षित उपजक्षमता सिंचित 1,900–2,000 किग्रा/हेक्टेयर और बारानी 1,200–1,500 किग्रा/हेक्टेयर; बीज में 29% तेल (ICAR-IIOR)
उपयुक्त मिट्टीनमी जमा रखने वाली गहरी काली मिट्टी

ज़रूरी तथ्य

प्रकार
कुसुम की किस्म (काँटेदार है या नहीं, सूची में नहीं लिखा)
सीज़न
रबी
पकने की अवधि
पकने में 135–140 दिन; 50% फूल 83–90 दिन में (ICAR-IIOR)
बीज दर
अकेली फसल 45 सेमी कतारों में 10–12 किग्रा/हेक्टेयर; मेड़ या अंतर-फसल लगभग 5–6 किग्रा/हेक्टेयर (कुसुम की आम दर)
अपेक्षित उपज
क्षमता सिंचित 1,900–2,000 किग्रा/हेक्टेयर और बारानी 1,200–1,500 किग्रा/हेक्टेयर; बीज में 29% तेल (ICAR-IIOR)
उपयुक्त मिट्टी
नमी जमा रखने वाली गहरी काली मिट्टी
जारी
केंद्रीय जारी किस्म, साल 2001 (ICAR-IIOR); अधिसूचना S.O. 122(E), 6 फ़रवरी 2007; कुसुम की अखिल भारतीय परियोजना का VNMKV परभणी केंद्र; पूरे भारत के लिए सुझाई गई

इस किस्म के बारे में

परभणी कुसुम (PBNS-12) कुसुम की किस्म है, जो वसंतराव नाईक मराठवाडा कृषि विद्यापीठ (VNMKV), परभणी के कुसुम की अखिल भारतीय परियोजना केंद्र पर तैयार हुई। ICAR-IIOR इसकी वंशावली PBNS-9-97 x PI 248567 बताता है, जो वंशावली विधि से बनी, और इसे पूरे भारत के लिए केंद्रीय जारी किस्म दर्ज करता है, जारी होने का साल 2001 और अधिसूचना S.O. 122(E) दिनांक 6 फ़रवरी 2007। क्षमता सिंचित में 1,900 से 2,000 किग्रा/हेक्टेयर और बारानी में 1,200 से 1,500 किग्रा/हेक्टेयर है। बीज में तेल 29% है। 50% फूल 83 से 90 दिन में आते हैं और फसल 135 से 140 दिन में पकती है। रोग के बारे में बस इतना दर्ज है कि यह माहू और अल्टरनेरिया पत्ती झुलसा को मध्यम सह लेती है। सूची में उकठा या काँटों के बारे में कुछ नहीं है, इसलिए नीचे की खेती कुसुम की आम दिनचर्या है, इस किस्म पर नापी हुई संख्याएँ नहीं।

क्या यह किस्म आपके लिए ठीक है?

परभणी कुसुम तब चुनिए जब आप कम से कम एक सिंचाई दे सकें और आपकी बुवाई जल्दी हो। ICAR-IIOR सिंचित 1,900 से 2,000 किग्रा/हेक्टेयर और बारानी 1,200 से 1,500 किग्रा/हेक्टेयर, 29% तेल, और माहू और अल्टरनेरिया पत्ती झुलसा के प्रति मध्यम सहनशीलता दर्ज करता है। यह 135 से 140 दिन में पकती है, जो उसी केंद्र की PBNS-40 (118 से 128 दिन) से लंबी है। बिना काँटे वाली और उकठा की रेटिंग वाली फसल चाहिए तो PBNS-40 लीजिए, हालाँकि उसकी दर्ज उपज कम है (बारानी 937 किग्रा/हेक्टेयर, सिंचित 1,579)। परभणी कुसुम की सूची में उकठा की रेटिंग नहीं है और यह भी नहीं लिखा कि यह काँटेदार है या नहीं, इसलिए ख़रीदने से पहले बीज की दुकान पर पूछ लीजिए।

मुख्य विशेषताएँ

    पौध प्रकारकुसुम की किस्म (काँटेदार है या नहीं, सूची में नहीं लिखा)
    अवधिपकने में 135–140 दिन; 50% फूल 83–90 दिन में (ICAR-IIOR)
    उपज क्षमताक्षमता सिंचित 1,900–2,000 किग्रा/हेक्टेयर और बारानी 1,200–1,500 किग्रा/हेक्टेयर; बीज में 29% तेल (ICAR-IIOR)
    रोग-प्रतिरोधमाहू और अल्टरनेरिया पत्ती झुलसा के प्रति मध्यम सहनशील; उकठा की कोई रेटिंग प्रकाशित नहीं
    मिट्टीनमी जमा रखने वाली गहरी काली मिट्टी
    सीज़नरबी

बुवाई और खेती

  • बुवाई का समयसितंबर के अंत से अक्टूबर के अंत तक, लौटते मानसून की नमी में ड्रिल करें; 135–140 दिन की इस किस्म के लिए इस दायरे में जल्दी बुवाई ठीक रहती है
  • बीज दरअकेली फसल 45 सेमी कतारों में 10–12 किग्रा/हेक्टेयर; मेड़ या अंतर-फसल लगभग 5–6 किग्रा/हेक्टेयर (कुसुम की आम दर)
  • दूरी45 सेमी कतारें; कतार में लगभग 20 सेमी पर छँटाई
  • बुवाई विधिनम काली मिट्टी में हल के पीछे 4–6 सेमी गहरा ड्रिल करें
  • सिंचाईजमा नमी पर बारानी; रोज़ेट से शाखा फूटने के समय एक सिंचाई सबसे बड़ा असर देती है, और ICAR-IIOR की सिंचित क्षमता 1,900–2,000 किग्रा/हेक्टेयर है जबकि बारानी 1,200–1,500
  • उर्वरकबारानी में लगभग 25:25:0 किग्रा N:P2O5:K2O/हेक्टेयर बीज के नीचे; सिंचाई में 40–60 किग्रा N/हेक्टेयर बाँटकर (कुसुम की आम खुराक)
  • कटाई135–140 दिन में जब पौधे भूसे जैसे सूख जाएँ तब काटें। फसल काँटेदार निकले तो ठंडी सुबह जल्दी दस्ताने और पूरी बाँह के कपड़ों के साथ काटें

मिट्टी और जलवायु

मिट्टी

उपयुक्त मिट्टी
पूरी जमा-नमी वाली गहरी काली मिट्टी
pH
6.5–8.0

जलवायु

जलवायु
बारानी रबी फसल। रिकॉर्ड में मध्यम सहनशीलता होने पर भी फूल के समय गीला मौसम रहे तो अल्टरनेरिया पर नज़र रखनी पड़ती है

उपज और अवधि

पकने की अवधि

पकने में 135–140 दिन; 50% फूल 83–90 दिन में (ICAR-IIOR)

अपेक्षित उपज

क्षमता सिंचित 1,900–2,000 किग्रा/हेक्टेयर और बारानी 1,200–1,500 किग्रा/हेक्टेयर; बीज में 29% तेल (ICAR-IIOR)

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता और फ़सल की देखभाल पर निर्भर करती है।

कीट और रोग संबंधी बातें

प्रबंधन सुझाव

  • दायरे में जल्दी बोइए। 135 से 140 दिन की यह लंबी किस्म है, और देर से बुवाई में दाना भरना मार्च की गर्मी में पहुँच जाता है।
  • हो सके तो रोज़ेट से शाखा फूटने के समय एक सिंचाई दीजिए: सिंचित 1,900–2,000 किग्रा/हेक्टेयर बनाम बारानी 1,200–1,500।
  • माहू और अल्टरनेरिया पर पहले धब्बे से नज़र रखिए; मध्यम सहनशीलता का मतलब बचाव पूरा नहीं है।

फ़ायदे और ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • अधिसूचना संख्या (S.O. 122(E)) और ICAR-IIOR की प्रविष्टि वाली केंद्रीय जारी किस्म, इसलिए इसका रिकॉर्ड जाँचा जा सकता है
  • सिंचित और बारानी दोनों उपज, 29% तेल और माहू और अल्टरनेरिया की मध्यम सहनशीलता के साथ दर्ज है

ध्यान रखने योग्य बातें

  • रिकॉर्ड में उकठा की रेटिंग नहीं है और यह भी नहीं लिखा कि फसल काँटेदार है या नहीं
  • 135–140 दिन में यह PBNS-40 (118–128) और SSF-708 (115–120) से लंबी है, इसलिए जल्दी बुवाई चाहिए

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है। स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में सुझाया इलाक़ा एक से ज़्यादा हो सकता है।

  • महाराष्ट्र

अपनी बुवाई की तारीख़ से 135 से 140 दिन गिनिए

बीज ख़रीदने से पहले यह हिसाब लगा लीजिए। 1 अक्टूबर को बोने पर परभणी कुसुम में 50% फूल लगभग 23 से 30 दिसंबर को आते हैं (83 से 90 दिन) और फसल लगभग 13 से 18 फ़रवरी को पकती है (135 से 140 दिन)। 15 अक्टूबर को बोने पर यह लगभग 27 फ़रवरी से 4 मार्च को पकती है। हर पंद्रह दिन की देरी से कटाई पंद्रह दिन आगे खिसकती है, उस गर्म मौसम में जब दाना भर रहा होता है।

उसी परभणी केंद्र की PBNS-40 118 से 128 दिन में और SSF-708 115 से 120 दिन में पकती है (ICAR-IIOR)। अगर आपकी बारिश देर तक चलती है, या आख़िरी अच्छी नमी अक्टूबर के बीच में बचती है, तो काग़ज़ वाले 29% तेल से ज़्यादा छोटी अवधि की किस्म ठीक बैठ सकती है। अक्टूबर के पहले दिनों में बो सकते हैं और एक सिंचाई दे सकते हैं तो लंबी अवधि सँभालना आसान है।

परभणी कुसुम, शारदा और PBNS-40: परभणी के तीन नाम

परभणी केंद्र ने कुसुम की एक से ज़्यादा किस्में जारी की हैं। शारदा पुरानी राज्य किस्म है (1990, मराठवाड़ा के लिए), बारानी 1,000 से 1,200 किग्रा/हेक्टेयर और सिंचित 1,600 से 1,800। परभणी कुसुम 2001 की केंद्रीय किस्म है, सिंचित 1,900 से 2,000 और बारानी 1,200 से 1,500। PBNS-40 (2006) बिना काँटे वाली है, उकठा, अल्टरनेरिया और माहू को मध्यम सहने वाली, और इसकी दर्ज उपज कम है।

इन्हें तीन अलग काम के रूप में पढ़िए। शारदा मराठवाड़ा का पुराना जाना-पहचाना नाम है। परभणी कुसुम तब है जब सिंचाई दे सकें और उपज और तेल चाहिए। PBNS-40 उस खेत के लिए है जहाँ उकठा का इतिहास हो और बिना काँटे की फसल चाहिए। उपज अलग-अलग परीक्षणों से आई है, इसलिए एक सूची को दूसरी से घटाकर उसे बढ़त मत मानिए। KVK से पूछिए कि इस मौसम में आपके ज़िले में तीनों में से किसका प्रमाणित बीज है।

क्या इसका बीज अपने पास रख सकते हैं?

यह खुली-परागित किस्म है, इसलिए अपनी अच्छी फ़सल का बीज दोबारा बोया जा सकता है। बीज सिर्फ़ रोग-मुक्त पौधों से लीजिए, ठीक से सुखाइए, ठंडी-सूखी जगह रखिए, और हर तीन-चार साल में नया प्रमाणित बीज ले आइए ताकि किस्म बिगड़े नहीं।

दूसरी किस्मों से तुलना

कुसुम (करडी) की वे सभी किस्में, जिनका पेज इस साइट पर है, एक साथ देखें। जो किस्म आप अभी देख रहे हैं, उसकी पंक्ति रंग से अलग दिखती है।

किस्मकिसके लिए ठीकफल कब सेउपजराज्य
A-1 (Annigeri 1)कर्नाटक और आसपास के राज्यों की बारानी काली मिट्टी, जहाँ काँटेदार फ़सल के लिए मज़दूर मिल जाएँ125–130 दिनऔसत 1,200 किग्रा/हे., क्षमता 1,500 किग्रा/हे.; लगभग 28% तेल (ICAR-IIOR)कर्नाटक, बिहार, ओडिशा, राजस्थान
Bhimaपश्चिमी महाराष्ट्र की बारानी काली मिट्टी, जल्दी बोई गई; 135 से 140 दिन की लंबी फ़सल135–140 दिनऔसत 1,400 किग्रा/हे., क्षमता 1,600 किग्रा/हे.; 28–30% तेल (ICAR-IIOR)महाराष्ट्र
DSH-129सिंचित या अच्छे प्रबंधन वाली ज़मीन, जहाँ हर साल नया संकर बीज ख़रीदा जा सके120–125 दिन (50% फूल 70–80 दिन में)सिंचाई में औसत 2,200 किग्रा/हे.; लगभग 30% तेल (ICAR-IIOR)। बारानी औसत नहीं मिलाकर्नाटक, महाराष्ट्र, तेलंगाना
Manjiraतेलंगाना और आंध्र प्रदेश की बारानी काली मिट्टी, जहाँ स्थानीय बीज उपलब्ध हो120–125 दिनऔसत 1,000 किग्रा/हे., क्षमता 1,100 किग्रा/हे.; लगभग 28% तेल (ICAR-IIOR)आंध्र प्रदेश, तेलंगाना
NARI-57तेल-प्रतिशत के हिसाब से कुसुम बीज बेचना; मध्य और पश्चिम भारत के सिंचित या अच्छे प्रबंधन वाले रबी खेत118–151 दिन; 50% फूल लगभग 75 दिन में (ICAR-IIOR)ICAR-IIOR की तालिका में क्षमता 1,500 किग्रा/हे. और 29–30% तेल; NARI की 2018 की तालिका औसत 1,519 किग्रा/हे., बीज उपज A-1 के बराबर, लगभग 36.6% तेल और A-1 से प्रति हेक्टेयर 18.36% ज़्यादा तेल बताती हैमहाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, उत्तर प्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल
NARI-6बारानी या हल्की सिंचाई वाली काली मिट्टी, जहाँ मज़दूर की दिक़्क़त काँटे हैंलगभग 126 दिनऔसत लगभग 1,074 किग्रा/हे. (NARI); 2012-13 के बारानी परीक्षण में 1,175 किग्रा/हे.; तेल 35% (NARI), लगभग 30% (AICRP)महाराष्ट्र, कर्नाटक
NARI-NH-1सिंचित खेत, जहाँ काँटों से मज़दूर की दिक़्क़त हो और नया संकर बीज ख़रीदा जा सकेलगभग 127 दिन (ICAR-IIOR)औसत 1,936 किग्रा/हे., A-1 से 10% ऊपर (NARI); तेल 35% (NARI) या 30% (ICAR-IIOR); 2012-13 के बारानी परीक्षण में 1,175 किग्रा/हे.महाराष्ट्र, कर्नाटक
Parbhani Kusum (PBNS-12)यही पेजमहाराष्ट्र की सिंचित या सुरक्षित सिंचाई वाली रबी ज़मीन, जिसे 29% तेल वाली, राजपत्र में अधिसूचित और माहू और अल्टरनेरिया को कुछ सहने वाली किस्म चाहिएपकने में 135–140 दिन; 50% फूल 83–90 दिन में (ICAR-IIOR)क्षमता सिंचित 1,900–2,000 किग्रा/हेक्टेयर और बारानी 1,200–1,500 किग्रा/हेक्टेयर; बीज में 29% तेल (ICAR-IIOR)महाराष्ट्र
Phule Chandrabhagaसिर्फ़ उन किसानों के लिए जो जिस बीज को ख़रीद रहे हैं उसका जारी-रिकॉर्ड देख सकें; महाराष्ट्रहमें मिले स्रोतों में प्रकाशित नहींकोई उपज नहीं मिली; लगभग 29% तेल (कोर्स स्लाइड-सामग्री)महाराष्ट्र
Phule Kusumaमहाराष्ट्र और आसपास की बारानी या सिंचित रबी ज़मीन, जिसे रिकॉर्ड वाली केंद्रीय जारी काँटेदार किस्म चाहिए125–140 दिन (AICRP)क्षमता सिंचित 2,000–2,200 किग्रा/हे. और बारानी 1,200–1,500 किग्रा/हे. (ICAR-IIOR); 28–29% तेल (AICRP)महाराष्ट्र, कर्नाटक
Shardaमराठवाड़ा की बारानी और सिंचित काली मिट्टी; परभणी की 1990 की राज्य जारी किस्म125–130 दिन; 50% फूल 90–92 दिन में (ICAR-IIOR)क्षमता बारानी 1,000–1,200 किग्रा/हे. और सिंचित 1,600–1,800 किग्रा/हे.; 29% तेल (ICAR-IIOR)महाराष्ट्र

इस फ़सल के कैलकुलेटर

आगे के हिसाब यहाँ कर लीजिए — कितना बीज ख़रीदें, बोरा अंकुरित होगा या नहीं, खाद का ख़र्च कितना बैठेगा, और कुसुम (करडी) का भाव क्या चल रहा है।

सब्सिडी और सरकारी मदद

कुसुम (करडी) के बीज या रोपण सामग्री की लागत में मदद करने वाली योजनाएँ। नियम और आवेदन का तरीक़ा हर योजना के पेज पर है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या परभणी कुसुम और PBNS-12 एक ही हैं?

हाँ। PBNS-12 कोड है और परभणी कुसुम नाम, जो VNMKV के परभणी केंद्र की है। यह फुले चंद्रभागा नहीं है, जो एक अलग विश्वविद्यालय का अलग नाम है।

क्या परभणी कुसुम उकठा सह लेती है?

इसकी उकठा की कोई रेटिंग प्रकाशित नहीं है। ICAR-IIOR की प्रविष्टि सिर्फ़ माहू और अल्टरनेरिया पत्ती झुलसा की मध्यम सहनशीलता देती है। उकठा के इतिहास वाले खेत में 3 से 4 साल कुसुम से हटकर फसल-चक्र रखिए, या PBNS-40 देखिए, जो उकठा को मध्यम सहने वाली दर्ज है।

परभणी कुसुम सिंचित और बारानी में कितनी देती है?

ICAR-IIOR सिंचित में 1,900 से 2,000 किग्रा/हेक्टेयर और बारानी में 1,200 से 1,500 किग्रा/हेक्टेयर की क्षमता और 29% तेल देता है। ये परीक्षण की क्षमताएँ हैं, खेत के औसत नहीं। अंतर बड़ा है, इसलिए रोज़ेट से शाखा फूटने के समय एक सिंचाई की योजना बनाना फ़ायदेमंद है।

परभणी कुसुम के लिए अलग-अलग स्रोत अलग साल क्यों देते हैं?

ICAR-IIOR जारी होने का साल 2001 और अधिसूचना S.O. 122(E) दिनांक 6 फ़रवरी 2007 देता है। हमारी पढ़ी राष्ट्रीय अधिसूचित सूची साल 2006 देती है। 2001 में जारी होना और बाद में राजपत्र में छपना दोनों को समझा देता है, पर हमें ऐसी कोई सूचना नहीं मिली जो यह कहे। जो बात आप जाँच सकते हैं वह अधिसूचना संख्या है।

परभणी कुसुम या PBNS-40: कौन-सी बोऊँ?

परभणी कुसुम की दर्ज उपज ज़्यादा है (सिंचित 1,900–2,000) और तेल 29%, पर 135 से 140 दिन और उकठा की रेटिंग नहीं। PBNS-40 बिना काँटे वाली है, उकठा, अल्टरनेरिया और माहू को मध्यम सहने वाली, 118 से 128 दिन में पकती है, पर बारानी 937 किग्रा/हेक्टेयर, सिंचित 1,579 और तेल 27 से 28% दर्ज है। सिंचित और जल्दी बुवाई परभणी कुसुम के पक्ष में है; उकठा वाला खेत या हाथ से कटाई PBNS-40 के पक्ष में है।

स्रोत: ICAR-IIOR, Safflower cultivars and hybrids (Parbhani Kusum PBNS-12 and PBNS-40 descriptors: pedigree, release, notification, yield, oil, days, special attributes), ICAR-Indian Institute of Oilseeds Research (IIOR), Hyderabad, National notified varieties list (Safflower, Kusum/Kardi): notification numbers and dates, Vasantrao Naik Marathwada Krishi Vidyapeeth (VNMKV), Parbhani, Singh and Nimbkar, Safflower (Carthamus tinctorius L.), in Genetic Resources, Chromosome Engineering and Crop Improvement vol. 4, CRC Press, 2007. संपादकीय नीति.