सीधी बुवाई वाला धान (DSR): बुवाई से कटाई तक, दिन-दर-दिन
बिना कद्दू किए और रोपाई के धान उगाएँ। मिट्टी की जाँच, तर-वत्तर बुवाई, खरपतवार नियंत्रण, 21 दिन पर पहली सिंचाई और DSR की आम गलतियाँ (PAU सलाह)।

आम धान में आप खेत में पानी भरकर कीचड़ बनाते हैं (कद्दू करना) और नर्सरी के पौधे रोपते हैं। सीधी बुवाई वाला धान (DSR) में न कद्दू करना पड़ता है, न रोपाई। बीज सीधे ड्रिल मशीन से खेत में डाला जाता है, गेहूँ की तरह।
सुनने में आसान लगता है, पर DSR माफ़ नहीं करता। खरपतवार फसल के साथ ही उगते हैं, पहली सिंचाई का समय मायने रखता है, और गलत मिट्टी में पूरी फसल बिगड़ सकती है। इसलिए इस गाइड में फसल के साथ-साथ समय के हिसाब से चलेंगे, बुवाई से पहले मिट्टी की जाँच से लेकर कटाई से पहले आख़िरी सिंचाई तक।
नीचे की ज़्यादातर संख्याएँ पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) के खरीफ 2026 पैकेज ऑफ़ प्रैक्टिसेज़ से हैं, यानी पंजाब के लिए लिखी गई हैं। दूसरे राज्यों के किसानों के लिए अंत में एक हिस्सा है जो बताता है कि ICAR-केंद्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (CRRI) का राष्ट्रीय बुलेटिन कहाँ अलग सलाह देता है। तारीख़ और मात्रा अपने KVK या राज्य के कृषि विश्वविद्यालय से पक्की कर लें। धान की सामान्य जानकारी के लिए हमारा धान फसल पेज देखें।
शुरू करने से पहले: क्या आपका खेत DSR के लिए ठीक है?
पहले यह तालिका देखें। पहली दो पंक्तियों में "नहीं" हो तो रोपाई वाले धान पर ही रहें।
| सवाल | DSR के लिए ठीक | DSR के लिए ठीक नहीं |
|---|---|---|
| मिट्टी | मध्यम से भारी: बलुई दोमट, दोमट, गाद दोमट, चिकनी दोमट | हल्की रेतीली मिट्टी |
| समतलीकरण | खेत लेज़र से समतल है | ऊँचा-नीचा खेत |
| किस्म | कम या मध्यम अवधि की किस्म | लंबी अवधि की किस्म |
| मज़दूरी और खरपतवार नियंत्रण | सही समय पर छिड़काव और बाद में हाथ से निराई कर सकते हैं | छिड़काव का समय नहीं संभाल सकते |
PAU के अनुसार तर-वत्तर DSR बलुई दोमट से चिकनी दोमट मिट्टी में चलता है, जो पंजाब के लगभग 87% क्षेत्र में है। हल्की रेतीली मिट्टी में PAU लोहे की भारी कमी और कम पैदावार की चेतावनी देता है। अगर आपके दूसरे खेतों में लोहे की कमी से पीलापन दिखता है, तो DSR चुनने से पहले लोहे की कमी के बारे में पढ़ लें।
PAU के अनुसार फ़ायदे:
- सिंचाई के पानी में 10 से 20% बचत
- भूजल पुनर्भरण 10 से 12% ज़्यादा
- मज़दूरी की बचत (न नर्सरी, न रोपाई)
- शीथ ब्लाइट और फुट रॉट कम
- कद्दू करके रोपे धान की तुलना में अगली फसल गेहूँ में लगभग 100 किलो प्रति एकड़ ज़्यादा
ये विश्वविद्यालय के आँकड़े हैं; आपका नतीजा नीचे के कदम ठीक से अपनाने पर निर्भर करेगा।
ऑफ-सीज़न: लेज़र समतलीकरण और खेत की योजना
लेज़र समतलीकरण से पानी बराबर फैलता है, जमाव बेहतर होता है और सिंचाई ज़्यादा कारगर होती है। PAU का तरीका है: डिस्क हैरो से जुताई, फिर कल्टीवेटर, पटेला और आख़िर में लेज़र लेवलर। हमारा लेज़र भूमि समतलीकरण पेज देखें।
बुवाई से एक दिन पहले से बुवाई तक: बीज उपचार और बुवाई
बीज दर। PAU प्रति एकड़ 8 से 10 किलो बीज बताता है।
बीज उपचार (PAU के अनुसार):
- बीज को 2% पोटैशियम नाइट्रेट के घोल में 12 घंटे भिगोएँ। 8 किलो बीज के लिए 10 लीटर पानी में 200 ग्राम पोटैशियम नाइट्रेट घोलें।
- बीज को छाँव में सुखाएँ।
- प्रति किलो बीज 3 ग्राम स्प्रिंट 75 WS (मैन्कोज़ेब + कार्बेन्डाज़िम) से उपचारित करें।
बुवाई का समय। पंजाब में जून का पहला पखवाड़ा (1 से 15 जून)। PAU की पहले की सलाह यह भी थी कि मई में बहुत जल्दी बुवाई से सिंचाई का पानी ज़्यादा लगता है और खरपतवार भी ज़्यादा आते हैं।
बुवाई के तीन तरीके। PAU तीन तरीके बताता है:
| तरीका | कैसे होता है | ध्यान रखें |
|---|---|---|
| तर-वत्तर, समतल | लेज़र समतलीकरण के बाद खेत को क्यारियों (कियारे) में बाँटें और रौनी (बुवाई से पहले सिंचाई) दें। मिट्टी काम लायक नम हो तो हल्की जुताई करें, 2 से 3 बार पटेला फेरें और तुरंत बोएँ। बीज 3 से 4 सेमी गहरा, कतारें 20 सेमी दूर | दोपहर में खेत तैयार करने और बुवाई से बचें। लकी सीड ड्रिल सबसे अच्छी, क्योंकि वह बुवाई और खरपतवारनाशी का छिड़काव साथ-साथ करती है |
| तर-वत्तर, ऊँची क्यारियाँ | 67.5 सेमी चौड़ी क्यारियाँ बनाएँ (37.5 सेमी समतल ऊपरी भाग और 30 सेमी नाली), रौनी सिर्फ़ नालियों में दें, फिर मिट्टी तर-वत्तर आने पर क्यारियाँ दोबारा ठीक कर प्रति क्यारी दो कतारें बोएँ | PAU के अनुसार इसमें दूसरे तरीकों से ज़्यादा सिंचाई-पानी बचता है |
| सूखे खेत में | उपचारित बीज 2 से 3 सेमी गहरा, 20 सेमी की कतारों में सूखे खेत में डालें और तुरंत सिंचाई करें | खरपतवारनाशी तब डालें जब खेत वत्तर में आ जाए, आमतौर पर 1 से 2 दिन में |
तर-वत्तर क्या है? यह मिट्टी की वह हालत है जब नमी इतनी हो कि मिट्टी काम में आ सके पर चिपचिपा कीचड़ न बने। आप उसे आकार दे सकते हैं, पर खेत भरा हुआ नहीं होता। बुवाई के बाद बारिश हो तो सख़्त पपड़ी (क्रंड) बन सकती है जो अंकुर रोकती है; PAU के अनुसार प्रेस व्हील वाली लकी सीड ड्रिल इसमें मदद करती है।
दिन 0 से 2: पहला खरपतवारनाशी
बुवाई के तुरंत बाद, नम मिट्टी पर अंकुरण-पूर्व खरपतवारनाशी छिड़कें। PAU प्रति एकड़ 1 लीटर पेंडीमेथालिन 30 EC (स्टॉम्प या बंकर नाम से), या 1 लीटर PEPE 25 SE (पेनॉक्सुलम + पेंडीमेथालिन) 200 लीटर पानी में घोलकर डालने की सलाह देता है। जिस खेत में घास, चौड़ी पत्ती और मोथा सब मिले हों, वहाँ PAU PEPE को तरजीह देता है।
आम राइस ड्रिल हो तो बुवाई के तुरंत बाद छिड़कें; लकी सीड ड्रिल दोनों काम साथ करती है। सिर्फ़ पंजीकृत दवा लें, लेबल का पालन करें और सुरक्षा के साधन पहनें।
दिन 15 से 25: दूसरा खरपतवारनाशी
जो खरपतवार पहले छिड़काव से बच गए, उनके लिए बुवाई के 15 से 25 दिन पर दूसरा छिड़काव चाहिए, जब खरपतवार 1 से 4 पत्ती की अवस्था में हों। प्रति एकड़ 150 लीटर पानी में दवा घोलें। PAU के उदाहरण:
- बिसपाइरीबैक सोडियम (जैसे नॉमिनी गोल्ड 10 SC), 100 मिली प्रति एकड़। निशाना: सवांक (बार्नयार्ड घास) और धान का मोथा। बुवाई के 15 से 25 दिन बाद, जब खरपतवार 2 से 4 पत्ती के हों।
- फेनॉक्साप्रॉप-पी-एथिल (जैसे राइसस्टार 6.7 EC), 400 मिली प्रति एकड़। निशाना: मधाना, चीनी घा, चिड़ी घा, टकरी घा (घास वाले खरपतवार)। बुवाई के 20 से 25 दिन बाद।
अलग-अलग खरपतवारों के लिए PAU और भी विकल्प देता है, इसलिए दवा अपने खेत के खरपतवार के हिसाब से चुनें। सवांक घास और दूसरे धान के खरपतवारों के लिए पहले देखें कि खेत में असल में क्या उगा है।
PAU के नियम: सही पत्ती-अवस्था पर, नम खेत में छिड़कें और एक हफ़्ते तक वत्तर बनाए रखें; बचे खरपतवार बीज बनने से पहले उखाड़ दें।
दिन 21: पहली सिंचाई (तर-वत्तर DSR)
तर-वत्तर DSR में पहली सिंचाई बुवाई के लगभग 21 दिन बाद दी जाती है। PAU के अनुसार इससे ज़्यादा पानी बचता है, जड़ें बेहतर बनती हैं, लोहे की कमी कम होती है और खरपतवार भी कम आते हैं।
उसके बाद मिट्टी के हिसाब से हर 5 से 7 दिन में सिंचाई करें और बारिश के अनुसार अंतर बदलें।
अगर आपने सूखे खेत में बोया है तो बुवाई के तुरंत बाद सिंचाई करें, 4 से 5 दिन बाद दूसरी सिंचाई दें और फिर हर 5 से 7 दिन में दें।
सप्ताह 4 से 9: फसल को खुराक
यूरिया पर PAU की सलाह:
- बुवाई के समय यूरिया नहीं।
- सामान्य योजना: प्रति एकड़ 130 किलो यूरिया तीन बराबर हिस्सों में, बुवाई के 4, 6 और 9 सप्ताह बाद।
- कम मात्रा: अगर सनई की हरी खाद पलटी है या प्रति एकड़ 6 टन गोबर की खाद डाली है तो 90 किलो प्रति एकड़; अगर गर्मी की मूँग की फलियाँ तोड़कर अवशेष खेत में मिलाए हैं तो 110 किलो प्रति एकड़।
- फॉस्फोरस और पोटाश: मिट्टी जाँच के आधार पर डालें।
- ज़िंक और लोहा: कमी हो तो कद्दू वाले रोपित धान के लिए PAU की सिफ़ारिश के अनुसार करें।
पत्ती रंग चार्ट वाला तरीका। यूरिया की बर्बादी से बचने के लिए PAU चार सप्ताह पर 25 किलो यूरिया प्रति एकड़ डालने, फिर छह सप्ताह से हर 7 दिन पर 10 पौधों की सबसे ऊपर की पूरी खुली पत्ती का रंग PAU पत्ती रंग चार्ट से मिलाने की सलाह देता है। 10 में से 6 या ज़्यादा पत्तियाँ शेड 4 से हल्की हों तो 30 किलो यूरिया प्रति एकड़ डालें, वरना न डालें। फूल आने पर बंद कर दें। चार्ट KVK और PAU केंद्रों पर मिलता है। देखें यूरिया और नाइट्रोजन प्रबंधन।
कटाई का समय: पानी जल्दी बंद करें
कटाई से लगभग 10 दिन पहले सिंचाई बंद कर दें। पूरे सीज़न की सभी सिंचाइयाँ गिनने पर PAU के अनुसार कद्दू वाले रोपित धान की तुलना में DSR में लगभग 10 से 20% पानी बचता है।
DSR की आम दिक़्क़तें और उनका हल
| क्या दिख रहा है | संभावित कारण | क्या करें |
|---|---|---|
| धब्बों में पीले, कमज़ोर पौधे | लोहे की कमी, आमतौर पर हल्की मिट्टी में या जल्दी सिंचाई से | मिट्टी का प्रकार जाँचें। PAU के अनुसार पहली सिंचाई 21 दिन देर से देने पर यह कम होती है। ICAR-CRRI जल्दी सुधार के लिए 1% फेरस सल्फेट का पत्तों पर छिड़काव सुझाता है |
| कमज़ोर या धब्बेदार जमाव | बारिश के बाद पपड़ी, बीज ज़्यादा गहरा, ऊबड़-खाबड़ खेत | प्रेस व्हील या लकी सीड ड्रिल लें; बीज की गहराई सिफ़ारिश के अनुसार रखें; खेत समतल करें |
| जगह-जगह अंकुर गायब | चूहे, जो जमाव की अवस्था में DSR को नुकसान करते हैं | PAU: खरपतवार नियंत्रित करें, बिल नष्ट करने के लिए मेड़ें दोबारा बनाएँ, और सूखे दौर (मई-जून) में बिलों में चारा रखें |
अगर आप पंजाब से बाहर हैं: ICAR-CRRI क्या कहता है
ICAR-केंद्रीय चावल अनुसंधान संस्थान का बुलेटिन "सीधी बुवाई वाले धान के लिए पैकेज और प्रैक्टिसेज़" (टेक्नोलॉजी बुलेटिन संख्या 250, 2025) उत्तराखंड की सिंचित तराई पट्टी को ध्यान में रखकर लिखा गया है, पर इसमें ICAR की सामान्य सलाह है। PAU से यह कहाँ अलग है:
| विषय | PAU (पंजाब, खरीफ 2026) | ICAR-CRRI बुलेटिन |
|---|---|---|
| बुवाई का समय | 1 से 15 जून | मानसून आने से लगभग 7 से 10 दिन पहले। बहुत जल्दी और बहुत देर से बुवाई से बचें |
| बीज दर | 8 से 10 किलो प्रति एकड़ | 20 से 25 किलो प्रति हेक्टेयर (लगभग 8 से 10 किलो प्रति एकड़), कतारें 20 सेमी दूर |
| शुरुआती सिंचाई | पहली सिंचाई लगभग 21 दिन तक रोकी जाती है (तर-वत्तर) | पहले 3 हफ़्ते जड़ क्षेत्र नम रखें; गर्म-सूखे मौसम में हर 3 से 5 दिन में सिंचाई करें |
| खरपतवार छिड़काव | बुवाई के तुरंत बाद पेंडीमेथालिन, दूसरा छिड़काव 15 से 25 दिन पर | बुवाई के 2 से 3 दिन में पेंडीमेथालिन (नम मिट्टी हो तो उसी दिन), दूसरा छिड़काव 15 से 25 दिन पर, प्रति एकड़ 150 से 200 लीटर पानी में |
| नाइट्रोजन | 4, 6 और 9 सप्ताह पर यूरिया | फॉस्फोरस और पोटाश पूरा बुवाई पर; नाइट्रोजन का लगभग एक-तिहाई 15 दिन पर, बाक़ी कल्ले फूटने और बाली बनने की शुरुआत पर |
बुलेटिन की और जानने लायक बातें:
- लोमी रेत और रेतीली मिट्टी में DSR की सलाह नहीं दी जाती। चारे वाली फसल उगे खेत में या जिस खेत में खरपतवार बहुत रहे हों, वहाँ DSR न करें।
- पानी की नली (पानी पाइप): 40 सेमी लंबी, 7 से 10 सेमी चौड़ी नली खेत में गाड़ें। नली के अंदर पानी 15 सेमी से नीचे जाए तब सिंचाई करें; फूल आने पर लगभग 5 सेमी पानी रखें।
- बुलेटिन 20 से 25% पानी की बचत बताता है, PAU 10 से 20%। नतीजे मिट्टी और राज्य के हिसाब से अलग होते हैं।
मात्रा पर एक सावधानी। CRRI बुलेटिन की अपनी तालिका और लिखित हिस्सा बिसपाइरीबैक की मात्रा पर अलग-अलग हैं (प्रति एकड़ 120 मिली बनाम 80 मिली), और PAU 100 मिली बताता है। एक राज्य की मात्रा दूसरे राज्य में न अपनाएँ। अपने राज्य के विश्वविद्यालय या KVK की तालिका देखें।
जल्दी की सूची
- मध्यम से भारी मिट्टी, खेत लेज़र से समतल, बीज उपचारित
- अपने राज्य की सिफ़ारिश के समय पर बुवाई और बुवाई के तुरंत बाद व 15 से 25 दिन पर खरपतवार छिड़काव
- यूरिया हिस्सों में, चूहों का इंतज़ाम जल्दी, कटाई से 10 दिन पहले पानी बंद
अपनी बुवाई की तारीख़, बीज का बिल और छिड़काव की तारीख़ें लिखकर रखें; देखें फार्म रिकॉर्ड कीपिंग। हमेशा दवा के लेबल और अपने राज्य के विश्वविद्यालय की ताज़ा सिफ़ारिश का पालन करें। यह गाइड सामान्य मार्गदर्शन है, स्थानीय सलाह का विकल्प नहीं।
Frequently asked questions
DSR के लिए कौन-सी मिट्टी ठीक है?
मध्यम से भारी मिट्टी (बलुई दोमट, दोमट, गाद दोमट, चिकनी दोमट)। PAU के अनुसार हल्की रेतीली मिट्टी में DSR न करें, क्योंकि वहाँ लोहे की भारी कमी और कम पैदावार होती है।
पंजाब में DSR की बुवाई कब करें?
PAU अपने खरीफ 2026 के पैकेज में 1 से 15 जून की सलाह देता है, और कम व मध्यम अवधि की किस्में। दूसरे राज्यों की अपनी विश्वविद्यालय सलाह है, इसलिए अपने KVK से पूछें।
तर-वत्तर DSR में पहली सिंचाई कब देते हैं?
बुवाई के लगभग 21 दिन बाद। उसके बाद मिट्टी के अनुसार हर 5 से 7 दिन में सिंचाई करें, बारिश के हिसाब से अंतर बदलें और कटाई से 10 दिन पहले सिंचाई बंद कर दें।
DSR में कितना पानी बचता है?
PAU के अनुसार कद्दू करके रोपे गए धान की तुलना में लगभग 10 से 20 प्रतिशत सिंचाई का पानी बचता है और भूजल पुनर्भरण 10 से 12 प्रतिशत ज़्यादा होता है।
क्या DSR में खरपतवारनाशी ज़रूरी है?
DSR में खरपतवार सबसे बड़ा ख़तरा हैं, इसलिए PAU बुवाई के तुरंत बाद एक छिड़काव और 15 से 25 दिन पर दूसरा छिड़काव बताता है। हमेशा पंजीकृत दवा, लेबल के अनुसार और नम खेत में छिड़कें।
लेखक
Vaibhav Dhama
संस्थापक, टेक्निकल किसान
वैभव धामा टेक्निकल किसान के संस्थापक हैं। वे बागपत, उत्तर प्रदेश से लिखते हैं — आईसीएआर और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों की सलाह, सरकारी योजना अधिसूचनाओं और लाइव मंडी भाव के आधार पर।
- बागपत, उत्तर प्रदेश से लिखते हैं
- पेशे से सॉफ़्टवेयर डेवलपर (BTech, 2021)
- कृषि विशेषज्ञ नहीं — अपने KVK से पुष्टि करें
Discussion is coming soon
We are building a comments section where you can ask a question about this guide and see what other farmers in your district are doing.
For now, write to us at support@technicalkisan.com — we read every message.



