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Technical Kisanखेती, तकनीक के साथ
अरबी (घुइयाँ)खरीफ़कॉर्म / कॉर्मेल (वानस्पतिक)अंतिम अपडेट: 20 अक्टूबर 2026

Sree Pallavi

CTCRI की जारी की हुई किस्म। पौधा लंबा है और कल्ले कम निकलते हैं। हर पौधे पर 20–25 छोटे कंद बनते हैं। जिन खेतों में पत्ती झुलसा और मोज़ेक दोनों की समस्या रही है, वहाँ यह काम की है।

सीज़नखरीफ़
पकने की अवधि7 महीने (लगभग 210 दिन)
अपेक्षित उपजआम उपज 16 टन/हेक्टेयर, संभावित 18 टन/हेक्टेयर (CTCRI)
उपयुक्त मिट्टीदोमट

ज़रूरी तथ्य

प्रकार
कॉर्म / कॉर्मेल (वानस्पतिक)
सीज़न
खरीफ़
पकने की अवधि
7 महीने (लगभग 210 दिन)
बीज दर
60 x 45 सेमी पर प्रति हेक्टेयर लगभग 1 टन कंद, या 45 x 30 सेमी पर 1.5 से 2 टन। कंद का सबसे अच्छा वज़न 35 से 45 ग्राम (CTCRI अरबी पुस्तिका)।
अपेक्षित उपज
आम उपज 16 टन/हेक्टेयर, संभावित 18 टन/हेक्टेयर (CTCRI)
उपयुक्त मिट्टी
दोमट
रोग-प्रतिरोध
खेत में पत्ती झुलसा और मोज़ेक दोनों सह लेती है
जारी
1987 में तिरुवनंतपुरम के ICAR-केंद्रीय कंद फसल अनुसंधान संस्थान (CTCRI) ने जारी की, मेघालय के जर्मप्लाज़्म संग्रह में से छाँटी हुई

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता और फ़सल की देखभाल पर निर्भर करती है।

इस किस्म के बारे में

श्री पल्लवी अरबी (Colocasia esculenta) की किस्म है, जिसे तिरुवनंतपुरम के ICAR-केंद्रीय कंद फसल अनुसंधान संस्थान (CTCRI) ने मेघालय से जुटाए जर्मप्लाज़्म संग्रह में से छाँटा और 1987 में जारी किया। पौधा लंबा (1 से 1.5 मी), सीधा और कम कल्लों वाला है। इसमें एक बड़ा शंकु जैसा माँ-कंद और 20 से 25 छोटे, गदा जैसे कंद बनते हैं, छिलका भूरा और गूदा सफ़ेद। यह पकने में 7 महीने लेती है। CTCRI के किस्म-पन्ने पर आम उपज 16 टन/हेक्टेयर और संभावित 18 टन/हेक्टेयर है, और उसकी अरबी पुस्तिका में 15 से 17 टन/हेक्टेयर, 24.5% स्टार्च और 2.5% प्रोटीन है। पकाने में अच्छी है। इसकी मुख्य बात रोग है: CTCRI इसे अरबी के पत्ती झुलसा (फ़ाइटोफ्थोरा कोलोकेसिए) और डेसहीन मोज़ेक वायरस के लिए खेत में सहनशील बताता है। सहनशील का मतलब रोधी नहीं है, और पुस्तिका दूसरी किस्मों को झुलसा-रोधी बताती है।

क्या यह किस्म आपके लिए ठीक है?

श्री पल्लवी तब चुनिए जब आपकी अरबी पर पहले पत्ती झुलसा और मोज़ेक, दोनों आ चुके हों। CTCRI इसे दोनों के लिए खेत में सहनशील दर्ज करता है। सहनशील का मतलब सुरक्षित नहीं है। झुलसा को सँभाला न जाए तो उपज का 25 से 50% चला जाता है, और पुस्तिका की झुलसा-रोधी किस्मों की सूची में मुक्तकेशी, भू श्री और भू कृपा हैं, पल्लवी नहीं। जिसके ख़रीदार को कुछ बड़े कंद चाहिए, वह इसे न चुने। पल्लवी 20 से 25 छोटे, गदा जैसे कंद देती है और औसत उपज 16 टन/हेक्टेयर है। बाज़ार की शिकायत खुजली की हो तो श्री रश्मि देखिए, जिसे CTCRI खुजली-रहित बताता है।

बुवाई और खेती

  • बुवाई का समयकेरल: बारानी अप्रैल से जून, सिंचित जनवरी से मार्च (CTCRI अरबी पुस्तिका)।
  • बीज दर60 x 45 सेमी पर प्रति हेक्टेयर लगभग 1 टन कंद, या 45 x 30 सेमी पर 1.5 से 2 टन। कंद का सबसे अच्छा वज़न 35 से 45 ग्राम (CTCRI अरबी पुस्तिका)।
  • दूरी60 x 45 सेमी, कंद 5 से 10 सेमी गहरे लगाइए। दूसरी बार मिट्टी चढ़ाते समय हर पौधे पर 3 स्वस्थ कल्ले रखिए।
  • उर्वरककेरल के लिए: 12 टन/हेक्टेयर गोबर की खाद और 80:25:100 किग्रा/हेक्टेयर N:P2O5:K2O। फ़ॉस्फ़ोरस पूरा रोपाई पर; नाइट्रोजन और पोटाश का 1/3 हिस्सा अंकुरण के 2 हफ़्ते बाद और बाक़ी 2 बराबर खुराक में एक महीने के अंतर पर (CTCRI)।
  • कटाई7 महीने। खुदाई से लगभग 1 महीना पहले कल्लों को तने के चारों ओर लपेटिए, मिट्टी चढ़ाइए और सिंचाई बंद कर दीजिए (CTCRI)।

मिट्टी और जलवायु

मिट्टी

pH
5.5–7.0

जलवायु

तापमान
21–27°C mean

फ़ायदे और ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • खेत में पत्ती झुलसा और मोज़ेक दोनों सह लेती है। एक ही किस्म में यह जोड़ कम मिलता है।
  • हर पौधे पर कई छोटे कंद बनते हैं। जिस बाज़ार में एक झुंड से ज़्यादा संख्या में कंद पसंद किए जाते हैं, वहाँ काम आती है।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • आम उपज (16 टन/हेक्टेयर) श्री किरण की संभावित उपज और श्री रश्मि की 18 से 20 टन/हेक्टेयर से कम है। रोग सहने की ताकत की यही कीमत है
  • कुछ बड़े कंद की जगह छोटे और ज़्यादा कंद हर बाज़ार में नहीं बिकते। बड़े पैमाने पर लगाने से पहले खरीदार की पसंद पूछ लें।

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है। स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में सुझाया इलाक़ा एक से ज़्यादा हो सकता है।

  • केरल

सहनशील का मतलब बचा हुआ नहीं: पल्लवी के लिए हफ़्ते की दिनचर्या

CTCRI श्री पल्लवी को पत्ती झुलसा और डेसहीन मोज़ेक वायरस के लिए खेत में सहनशील बताता है। यह मदद करता है, पर पत्ती झुलसा (फ़ाइटोफ्थोरा कोलोकेसिए) का इलाज न किया जाए तो अरबी की उपज का 25 से 50% चला जाता है। पुस्तिका की झुलसा-रोधी किस्मों की सूची में पल्लवी नहीं है। सहनशीलता को थोड़ा अतिरिक्त समय समझिए, गारंटी नहीं।

हफ़्ते में एक बार खेत में घूमिए, गीले दौर में और ज़्यादा बार। पत्तों पर छोटे, पानी जैसे भीगे, हल्के भूरे धब्बे देखिए, कभी-कभी नारंगी-लाल बूँदों के साथ। जो पत्ते मिलें, तोड़कर जला दीजिए। मेड़ों पर धान की पराली की पलवार रखिए, जिसे CTCRI झुलसा नियंत्रण का हिस्सा बताता है, और अरबी को एक ही खेत में साल-दर-साल मत लगाइए। पुस्तिका अंतर-फसल के लिए भिंडी का नाम लेती है।

मोज़ेक अलग तरह से काम करता है। चितकबरे, पंख जैसे पत्तों वाला पौधा ठीक नहीं होता, और वायरस कंदों के साथ चलता है। ऐसे पौधे उखाड़ दीजिए और उनके कंद लगाने के लिए कभी मत रखिए। दूसरी बार मिट्टी चढ़ाते समय हर पौधे पर 3 कल्ले रखिए, इससे पल्लवी के छोटे कंदों का आकार भी बचा रहता है।

क्या अपनी रोपाई सामग्री ख़ुद रख सकते हैं?

यह कंद से लगती है, इसलिए अगले सीज़न की रोपाई सामग्री आपके खेत से निकल सकती है। स्वस्थ पौधों के मँझोले, कसे कंद रखिए, ठंडी और अँधेरी जगह भंडारण कीजिए, और जो कंद नरम या सड़ा हो उसे हटा दीजिए — रोग कंद के भीतर ही सफ़र करता है। हर कुछ सीज़न बाद प्रमाणित रोपाई सामग्री ले आइए, क्योंकि विषाणु साल दर साल चुपचाप जमा होता रहता है।

दूसरी किस्मों से तुलना

अरबी (घुइयाँ) की वे सभी किस्में, जिनका पेज इस साइट पर है, एक साथ देखें। जो किस्म आप अभी देख रहे हैं, उसकी पंक्ति रंग से अलग दिखती है।

किस्मकिसके लिए ठीकपकने की अवधिउपजराज्य
Panchamukhiउन किसानों के लिए जिनके ख़रीदार छोटे कंद की जगह बड़े माँ-कंद के पैसे देते हैंप्रकाशित नहीं (आम अरबी: 5 से 8 महीने, CTCRI)40 किस्मों के परीक्षण में 20.00 टन/हेक्टेयर कंद-उपज (माँ-कंद, छोटे कंद की उपज नहीं)पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश, ओडिशा
Punjab Arvi-1पंजाब के उन किसानों के लिए जिन्हें जल्दी पकने वाली अरबी चाहिए और जो भारी बीज-कंद ख़रीद सकते हैं176 दिनलगभग 225 क्विंटल/हेक्टेयर (22.5 टन/हेक्टेयर), PAU का जारी करते समय का आँकड़ापंजाब
Sree Hiraओडिशा के उन किसानों के लिए जिनकी बारानी ऊँची या सिंचित मध्यम और नीची ज़मीन पर पत्ती झुलसा आता हैलगभग 180 दिन (6 महीने)लगभग 18 टन/हेक्टेयर (पर्चा); 18 से 20 टन/हेक्टेयर (CTCRI पुस्तिका)ओडिशा
Sree Kiranकेरल के उन किसानों के लिए जो पूरी फसल एक हफ़्ते में नहीं बेच पाते और टिकने वाली अरबी चाहते हैं190–210 दिनआम उपज 17.5 टन/हेक्टेयर, संभावित 28.5 टन/हेक्टेयर (CTCRI)केरल
Sree Pallaviयही पेजकेरल के उन किसानों के लिए जिनके खेत में पत्ती झुलसा या मोज़ेक रहा है और जो छोटे कंद बेचते हैं7 महीने (लगभग 210 दिन)आम उपज 16 टन/हेक्टेयर, संभावित 18 टन/हेक्टेयर (CTCRI)केरल
Sree Rashmiकेरल के छोटे किसानों के लिए जो बिना भारी खर्च के खुजली-रहित अरबी चाहते हैं210–240 दिनआम उपज 18 से 20 टन/हेक्टेयर, संभावित 32 टन/हेक्टेयर (CTCRI)केरल

इस फ़सल के कैलकुलेटर

आगे के हिसाब यहाँ कर लीजिए — कितना बीज ख़रीदें, बोरा अंकुरित होगा या नहीं, खाद का ख़र्च कितना बैठेगा, और अरबी (घुइयाँ) का भाव क्या चल रहा है।

सब्सिडी और सरकारी मदद

अरबी (घुइयाँ) के बीज या रोपण सामग्री की लागत में मदद करने वाली योजनाएँ। नियम और आवेदन का तरीक़ा हर योजना के पेज पर है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या श्री पल्लवी सच में पत्ती झुलसा सह लेती है?

CTCRI के अनुसार यह पत्ती झुलसा (फ़ाइटोफ्थोरा कोलोकेसिए) और डेसहीन मोज़ेक वायरस के लिए खेत में सहनशील है। यह रोधी से नीचे का दर्जा है। भीगे मानसून में धब्बे फिर भी दिख सकते हैं। सामान्य बचाव रखिए: सिर्फ़ रोग-मुक्त कंद लगाइए, संक्रमित पत्ते तोड़कर जला दीजिए, धान की पराली की पलवार बिछाइए, और फसल-चक्र या भिंडी के साथ अंतर-फसल अपनाइए। चारों बातें CTCRI की पुस्तिका से हैं।

श्री पल्लवी कहाँ से आई है?

CTCRI ने इसे 1987 में जारी किया। इसे मेघालय से जुटाए गए जर्मप्लाज़्म संग्रह में से छाँटा गया, यानी यह चयन है, क्रॉस नहीं। CTCRI केरल को सुझाया हुआ राज्य बताता है। दूसरे राज्यों का कोई परीक्षण हमें नहीं मिला।

श्री पल्लवी कितने कंद देती है और वे कितने बड़े होते हैं?

हर पौधे पर लगभग 20 से 25 छोटे, गदा जैसे कंद और एक बड़ा शंकु जैसा माँ-कंद। पौधा लंबा (1 से 1.5 मी) है और कल्ले कम निकलते हैं। CTCRI कहता है कि दूसरी बार मिट्टी चढ़ाते समय हर पौधे पर सिर्फ़ 3 स्वस्थ कल्ले रखिए, क्योंकि बहुत कल्लों से कंद छोटे हो जाते हैं। जो किस्म पहले से छोटे कंद बनाती है, उसके लिए यह और ज़रूरी है।

श्री पल्लवी कब लगाऊँ और कब खोदूँ?

CTCRI की तालिका में केरल में बारानी अरबी के लिए अप्रैल से जून और सिंचित के लिए जनवरी से मार्च है। फसल 7 महीने लेती है, इसलिए अप्रैल से जून की रोपाई लगभग नवंबर से जनवरी में तैयार होती है। एक महीना सिंचाई रोकने के बाद, जब ज़्यादातर पत्ते पीले पड़ें तब खोदिए।

क्या श्री पल्लवी खाने में खुजली करती है?

CTCRI पकाने में इसे अच्छा बताता है और अपनी पुस्तिका में 24.5% स्टार्च व 2.5% प्रोटीन दर्ज करता है। श्री रश्मि के उलट, CTCRI के किसी पन्ने में पल्लवी को खुजली-रहित नहीं कहा गया, इसलिए इसे अच्छी तरह पकाइए। उबालना, भाप देना या तलना, सब चुभने वाले तत्व को घटाते हैं। खुजली अक्सर कच्चे या अधपके पत्ते और कंद से होती है।

स्रोत: Taro — ICAR-CTCRI technical bulletin (2025): varieties, planting, nutrition, storage, Sree Pallavi — ICAR-CTCRI variety page. संपादकीय नीति.