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Technical Kisanखेती, तकनीक के साथ
फ्रेंच बीन (फरसबीन)रबीझाड़ी प्रकारअंतिम अपडेट: 20 अक्टूबर 2026

Arka Suvidha

ICAR-IIHR की बौनी बीन, जिसकी फलियाँ सीधी, अंडाकार, हल्की हरी, गूदेदार, कुरकुरी और बिना रेशे की हैं। राष्ट्रीय सूची में 19 टन/हेक्टेयर है; कर्नाटक के एक किसान को इसका दाम अर्का कोमल और अर्का अनूप से ज़्यादा मिला।

सीज़नरबी
पकने की अवधिपहली तुड़ाई लगभग 70–75 दिन में (IIHR किस्म-सूची)
अपेक्षित उपज19 टन/हेक्टेयर हरी फलियाँ
उपयुक्त मिट्टीदोमट

ज़रूरी तथ्य

प्रकार
झाड़ी प्रकार
सीज़न
रबी
पकने की अवधि
पहली तुड़ाई लगभग 70–75 दिन में (IIHR किस्म-सूची)
बीज दर
60–80 किग्रा/हेक्टेयर (लगभग 24–32 किग्रा/एकड़)
अपेक्षित उपज
19 टन/हेक्टेयर हरी फलियाँ
उपयुक्त मिट्टी
दोमट
रोग-प्रतिरोध
कोई विशेष प्रतिरोध दावा नहीं
जारी
ICAR-भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान (IIHR), बेंगलुरु ने जारी की। राष्ट्रीय सूची में हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर तथा उत्तर प्रदेश के पहाड़ों के लिए दर्ज है।

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता और फ़सल की देखभाल पर निर्भर करती है।

इस किस्म के बारे में

अर्का सुविधा ICAR-IIHR, बेंगलुरु की झाड़ीदार, प्रकाश-अवधि के प्रति असंवेदनशील फ्रेंच बीन है। फलियाँ सीधी, अंडाकार, हल्की हरी, गूदेदार, बिना रेशे की और कुरकुरी हैं। राष्ट्रीय सब्ज़ी सूची में फली की उपज 19 टन/हेक्टेयर है और इसे हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर तथा उत्तर प्रदेश के पहाड़ों के लिए सिफ़ारिश किया गया है। IIHR की सूची में पहली तुड़ाई लगभग 70–75 दिन में है। बेंगलुरु के पास कर्नाटक की एक किसान ने इसे तीन साल उगाया और औसत 16.7 टन/हेक्टेयर लिया। बिना रेशे की होने के कारण उन्होंने इसे 11 रुपये किलो में बेचा। वहीं अर्का कोमल और अर्का अनूप 10 रुपये किलो में बिकीं। और वे तुड़ाई को 5 दिन तक टाल सकती थीं बिना फली की गुणवत्ता गँवाए।

क्या यह किस्म आपके लिए ठीक है?

अर्का सुविधा तब चुनें जब आपके ख़रीदार बिना रेशे की, गूदेदार फलियों के ज़्यादा पैसे देते हों, या मज़दूर कम हों और हर 2 या 3 दिन में तुड़ाई न हो पाए। कर्नाटक की एक किसान ने बताया कि वे 5 दिन तक रुक सकती थीं। उपज 19 टन/हेक्टेयर है, जो अर्का कोमल या अर्का अनूप (दोनों 20 टन/हेक्टेयर) से थोड़ी कम है। सूची में इसे हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर तथा उत्तर प्रदेश के पहाड़ों के लिए सिफ़ारिश किया गया है, इसलिए इनके बाहर पहले छोटा प्लॉट आज़माएँ।

बुवाई और खेती

  • बुवाई का समयमैदानी रबी फ़सल को मध्य-अक्टूबर से नवंबर
  • बीज दर60–80 किग्रा/हेक्टेयर (लगभग 24–32 किग्रा/एकड़)
  • दूरीकतारें 30–45 सेमी दूर, पौधे कतार में 8–10 सेमी दूर

मिट्टी और जलवायु

मिट्टी

pH
5.5–6.8

जलवायु

तापमान
20–25°C for growth and pod yield

फ़ायदे और ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • बिना रेशे की, गूदेदार, कुरकुरी फलियाँ। कर्नाटक की उस किसान को बाक़ी दोनों अर्का बीन से प्रति किलो लगभग 10% ज़्यादा दाम मिला।
  • उसी किसान के अनुसार तुड़ाई को 5 दिन तक टाला जा सकता है और फली की गुणवत्ता नहीं गिरती। मज़दूर कम हों तो यह काम आता है।
  • उस किसान के खेत में तीनों अर्का बीन में सबसे ज़्यादा शुद्ध आमदनी।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • सूची में इसे सिर्फ़ हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर तथा उत्तर प्रदेश के पहाड़ों के लिए सिफ़ारिश किया गया है। बाक़ी जगह, दक्षिण समेत, प्रमाण कर्नाटक के एक किसान का अनुभव है।
  • कोई रोग-प्रतिरोध दर्ज नहीं है। रतुआ और जीवाणु झुलसा अर्का अनूप में कवर हैं।
  • इसकी दर्ज उपज (19 टन/हेक्टेयर) अर्का कोमल और अर्का अनूप (दोनों 20 टन/हेक्टेयर) से थोड़ी कम है। बेहतर फली के लिए आप थोड़ा उपज-अंतर चुकाते हैं।

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है। स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में सुझाया इलाक़ा एक से ज़्यादा हो सकता है।

  • हिमाचल प्रदेश
  • जम्मू और कश्मीर

तुड़ाई के दिन 5 दिन की गुंजाइश के साथ तय करें

फ्रेंच बीन में सबसे बड़ा मज़दूरी का ख़र्च तुड़ाई का है। IIHR की कहानी में कर्नाटक की एक किसान कहती हैं कि अर्का सुविधा की फलियों की गुणवत्ता तुड़ाई 5 दिन तक टालने पर भी बनी रहती है।

इससे आपको योजना बनाने की गुंजाइश मिलती है। रोज़ तुड़ाई करने के बजाय हफ़्ते में दो दिन तय कर सकते हैं, जैसे सोमवार और शुक्रवार, यानी 3 और 4 दिन का अंतर। दोनों उनके बताए 5 दिन के भीतर हैं।

5 दिन को सीमा मानें, लक्ष्य नहीं, क्योंकि यह एक किसान का अनुभव है। किसी भी बीन में फलियाँ ज़्यादा देर छोड़ने पर मोटी हो जाती हैं और पौधे की रफ़्तार धीमी पड़ती है। मौसम गरम हो जाए तो अंतर फिर घटा दें।

क्या अपनी रोपाई सामग्री ख़ुद रख सकते हैं?

यह खुली-परागित किस्म है, इसलिए अपनी अच्छी फ़सल का बीज दोबारा बोया जा सकता है। बीज सिर्फ़ रोग-मुक्त पौधों से लीजिए, ठीक से सुखाइए, ठंडी-सूखी जगह रखिए, और हर तीन-चार साल में नया प्रमाणित बीज ले आइए ताकि किस्म बिगड़े नहीं।

दूसरी किस्मों से तुलना

फ्रेंच बीन (फरसबीन) की वे सभी किस्में, जिनका पेज इस साइट पर है, एक साथ देखें। जो किस्म आप अभी देख रहे हैं, उसकी पंक्ति रंग से अलग दिखती है।

किस्मकिसके लिए ठीकपकने की अवधिउपजराज्य
Arka Anoopरोग-प्रतिरोधी अर्का बीन: रतुआ और जीवाणु झुलसापहली तुड़ाई तक के दिनों का अलग आँकड़ा प्रकाशित नहीं है20 टन/हेक्टेयर हरी फलियाँकर्नाटक
Arka Komalचपटी फलियों वाली बौनी बीन जो ढुलाई में टिकती है, और सूखे बीज का विकल्प भीपहली तुड़ाई लगभग 70–75 दिन में (IIHR किस्म-सूची)20 टन/हेक्टेयर फलियाँ, या 1,500 किलो/हेक्टेयर सूखा बीजहिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल
Arka Suvidhaयही पेजबिना रेशे की, गूदेदार फली वाली बीन, जिसका दाम बेहतर मिलता हैपहली तुड़ाई लगभग 70–75 दिन में (IIHR किस्म-सूची)19 टन/हेक्टेयर हरी फलियाँहिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर
Contenderमैदानों की पतझड़ बुवाई के लिए जल्दी तैयार होने वाली, हर जगह चलने वाली बौनी बीनपहली तुड़ाई लगभग 50 दिन में20 टन/हेक्टेयर हरी फलियाँ (200 क्विंटल/हेक्टेयर)उत्तर प्रदेश, पंजाब, कर्नाटक
Kentucky Wonderउन बाग़ों के लिए चढ़ने वाली पुरानी बीन जिनमें सहारे पहले से होंबीज बेचने वाले पहली तुड़ाई 58–72 दिन में बताते हैं; उसके बाद कई हफ़्ते तुड़ाई चलती हैकोई भारतीय सार्वजनिक परीक्षण का आँकड़ा प्रकाशित नहीं हैहिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, कर्नाटक
Pant Anupamaपहाड़ों और तराई की प्रतिरोधी बौनी बीन, जो उपज के लिए नहीं बल्कि फली की गुणवत्ता के लिए उगाई जाती हैबुवाई के 55–65 दिन बाद पहली तुड़ाई9 टन/हेक्टेयर हरी फलियाँ (90 क्विंटल/हेक्टेयर)उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड
Pusa Parvatiयहाँ की सबसे ज़्यादा उपज वाली भारतीय बौनी बीन, मोज़ेक और चूर्णिल आसिता के प्रति प्रतिरोधीपहली तुड़ाई लगभग 50 दिन में22.5 टन/हेक्टेयर हरी फलियाँ (225 क्विंटल/हेक्टेयर)उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा

इस फ़सल के कैलकुलेटर

आगे के हिसाब यहाँ कर लीजिए — कितना बीज ख़रीदें, बोरा अंकुरित होगा या नहीं, खाद का ख़र्च कितना बैठेगा, और फ्रेंच बीन (फरसबीन) का भाव क्या चल रहा है।

सब्सिडी और सरकारी मदद

फ्रेंच बीन (फरसबीन) के बीज या रोपण सामग्री की लागत में मदद करने वाली योजनाएँ। नियम और आवेदन का तरीक़ा हर योजना के पेज पर है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या बिना रेशे की बीन सच में ज़्यादा दाम पर बिकती है?

IIHR की सफलता-कहानी में कर्नाटक की एक किसान ने अर्का सुविधा 11 रुपये किलो में और अर्का कोमल और अर्का अनूप 10 रुपये किलो में बेचीं। यानी लगभग 10% ज़्यादा, क्योंकि यह बिना रेशे की है। यह एक किसान का एक मंडी में अनुभव है। इस पर योजना बनाने से पहले अपने ख़रीदार का भाव देख लें।

अर्का सुविधा की तुड़ाई कितनी टाल सकते हैं?

IIHR की कहानी में कर्नाटक की किसान कहती हैं कि तुड़ाई 5 दिन तक टाली जा सकती है और फली की गुणवत्ता नहीं गिरती। यह उनकी रिपोर्ट है, परीक्षण का नतीजा नहीं, इसलिए इसे आपात-गुंजाइश मानें, रोज़ की आदत नहीं।

अर्का सुविधा की उपज कितनी है?

राष्ट्रीय सूची में फलियों की उपज 19 टन/हेक्टेयर है। कर्नाटक की किसान का तीन साल का औसत 16.7 टन/हेक्टेयर रहा, और शुद्ध आमदनी लगभग 1,58,700 रुपये प्रति हेक्टेयर, जो उनकी तीनों अर्का बीन में सबसे ज़्यादा थी।

अर्का सुविधा कहाँ के लिए सिफ़ारिश की गई है?

राष्ट्रीय सूची में हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर तथा उत्तर प्रदेश के पहाड़ दर्ज हैं। कर्नाटक की किसान का अनुभव दिखाता है कि यह बेंगलुरु के पास भी चलती है, पर वह एक ही खेत है।

स्रोत: Checklist of Commercial Varieties of Vegetables — TNAU Agritech Portal (national bulletin), Success story of an innovative vegetable farmer, Karnataka — ICAR-IIHR. संपादकीय नीति.