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शकरकंदखरीफ़बेल कलम (उन्नत किस्म)अंतिम अपडेट: 19 अक्टूबर 2026

Sree Arun

2002 में जारी 90 दिन की CTCRI किस्म, जिसका छिलका बहुत हल्का गुलाबी और गूदा क्रीम रंग का है। CTCRI के अनुसार उपज 20–28 टन/हेक्टेयर (क्षमता 30 टन/हेक्टेयर) है और क्षेत्र केरल के ऊँचे इलाक़े हैं।

सीज़नखरीफ़
पकने की अवधि90 दिन
अपेक्षित उपज20–28 टन/हेक्टेयर (क्षमता 30 टन/हेक्टेयर)
उपयुक्त मिट्टीबलुई / हल्की मिट्टी

ज़रूरी तथ्य

प्रकार
बेल कलम (उन्नत किस्म)
सीज़न
खरीफ़
पकने की अवधि
90 दिन
अपेक्षित उपज
20–28 टन/हेक्टेयर (क्षमता 30 टन/हेक्टेयर)
उपयुक्त मिट्टी
बलुई / हल्की मिट्टी
रोग-प्रतिरोध
CTCRI ने कोई ख़ास प्रतिरोध दर्ज नहीं किया
जारी
2002 में ICAR-केंद्रीय कंद फ़सल अनुसंधान संस्थान (CTCRI), तिरुवनंतपुरम ने बहु-परागण (पॉलीक्रॉस) बीजों के आवर्ती चयन से निकले पौधे के रूप में जारी की। CTCRI ने केरल के ऊँचे इलाक़ों को इसका सुझाया क्षेत्र बताया है।

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता और फ़सल की देखभाल पर निर्भर करती है।

इस किस्म के बारे में

श्री अरुण कम अवधि वाली शकरकंद है, जिसे ICAR-CTCRI ने 2002 में श्री वरुण के साथ जारी किया। यह फैलने वाला पौधा है, बेल हरी है और फूल कम आते हैं। कंद छोटे, तर्कुरूप से गोल, बहुत हल्के गुलाबी छिलके और क्रीम गूदे वाले हैं, और स्टार्च लगभग 19.7–20.4% है। CTCRI इसे जल्दी पकने वाली और पकाने में अच्छी बताता है, और 90 दिन तथा 20–28 टन/हेक्टेयर दर्ज करता है, क्षमता 30 टन/हेक्टेयर। सुझाया क्षेत्र केरल के ऊँचे इलाक़े हैं।

क्या यह किस्म आपके लिए ठीक है?

श्री अरुण तब चुनें जब आपको 90 दिन में तैयार होने वाली और 20–28 टन/हेक्टेयर देने वाली शकरकंद चाहिए, जैसे केरल के ऊँचे इलाक़ों में दो फ़सलों के बीच। यह श्री वरुण की लगभग जुड़वाँ है, फ़र्क़ यह कि इसका छिलका बहुत हल्का गुलाबी है जबकि वरुण का क्रीम। नारंगी गूदे के लिए भू सोना (105–110 दिन), बैंगनी गूदे के लिए भू कृष्णा (110–120 दिन), और सूत्रकृमि-जाल वाले फ़सल-चक्र के लिए श्री भद्रा (90 दिन) चुनें।

बुवाई और खेती

फ़ायदे और ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • जल्दी पकने वाली: 90 दिन, जो दो फ़सलों के बीच की छोटी खिड़की में बैठती है।
  • कम अवधि की किस्म से 20–28 टन/हेक्टेयर दर्ज, और क्षमता 30 टन/हेक्टेयर।
  • CTCRI के अनुसार पकाने में अच्छी।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • CTCRI केरल के ऊँचे इलाक़े सुझाता है। किसी दूसरे राज्य के लिए पहले छोटा प्लॉट लगाएँ।
  • इसके लिए घुन या सूखे की सहनशीलता दर्ज नहीं है। साफ़ बेल-कलमें लें और मेड़ों पर मिट्टी चढ़ाएँ।
  • गूदा क्रीम रंग का है और CTCRI ने इसका कैरोटीन का आँकड़ा नहीं दिया। विटामिन ए के लिए नारंगी गूदा चाहिए तो भू सोना चुनें।

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है। स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में सुझाया इलाक़ा एक से ज़्यादा हो सकता है।

  • केरल

90 दिन की कैच-क्रॉप: अगली बुवाई से पीछे गिनें

90 दिन में श्री अरुण सबसे जल्दी तैयार होने वाली शकरकंदों में है। इसलिए यह तब काम की है जब खेत एक तय तारीख़ तक ख़ाली करना हो।

उस तारीख़ से शुरू करें जब आपको ज़मीन चाहिए। अगर अगली फ़सल 15 अक्टूबर को बोनी है, तो कलमें 15 जुलाई तक लगा दें। 15 जुलाई को लगाने पर कंद लगभग 13 अक्टूबर को तैयार होते हैं, यानी खोदने और सफ़ाई के लिए दो दिन बचते हैं।

यह गुंजाइश कम है। कंद ठीक 90वें दिन नहीं खुदते, और बारिश खुदाई टाल सकती है। सुरक्षित योजना यह है कि 10 दिन पहले, 5 जुलाई तक, लगाएँ, जिससे लगभग पखवाड़े की ढील मिल जाती है। सारा खोदने से पहले कुछ पौधे खोदकर कंद का आकार देख लें।

क्या अपनी रोपाई सामग्री ख़ुद रख सकते हैं?

यह बीज से नहीं, कलम से तैयार होती है, इसलिए रोपाई सामग्री आप ख़ुद ले सकते हैं। कलम सिर्फ़ स्वस्थ, अच्छी बढ़त वाले और सही किस्म के पौधों से लीजिए, रोगी पौधे से कभी नहीं — कलम अपने मातृ पौधे को साथ ले जाती है। नर्सरी या सरकारी फ़ार्म से साफ़ रोपाई सामग्री मिल जाए, तो शुरुआत वहीं से सुरक्षित है।

दूसरी किस्मों से तुलना

शकरकंद की वे सभी किस्में, जिनका पेज इस साइट पर है, एक साथ देखें। जो किस्म आप अभी देख रहे हैं, उसकी पंक्ति रंग से अलग दिखती है।

किस्मकिसके लिए ठीकपकने की अवधिउपजराज्य
Bhu Krishnaओडिशा में प्रसंस्करण के लिए बैंगनी गूदा और प्राकृतिक रंग110–120 दिन18–22 टन/हेक्टेयरओडिशा
Bhu Sonaओडिशा में विटामिन ए और प्रसंस्करण के लिए गहरा नारंगी गूदा105–110 दिन20–24 टन/हेक्टेयरओडिशा
Rajendra Shakarkand-5बिहार की व्यावसायिक किस्म, जिसे श्री भद्रा के साथ परखना है; अभी कोई सरकारी आँकड़ा नहींकोई सरकारी आँकड़ा नहीं मिलाकोई सरकारी आँकड़ा नहीं मिलाबिहार
Sree Arunयही पेजदो फ़सलों के बीच की छोटी खिड़की के लिए 90 दिन की खाने वाली शकरकंद90 दिन20–28 टन/हेक्टेयर (क्षमता 30 टन/हेक्टेयर)केरल
Sree Bhadraकई राज्यों के लिए सिफ़ारिश की गई 90 दिन की खाने वाली शकरकंद, जो सूत्रकृमि वाले फ़सल-चक्र में फ़िट बैठती है90 दिन27 टन/हेक्टेयरकेरल, महाराष्ट्र, बिहार, मध्य प्रदेश
Sree Vardhiniबैंगनी छिलके और पीले गूदे वाली खाने की शकरकंद, एक पुरानी भरोसेमंद किस्म100–105 दिन20–25 टन/हेक्टेयर (क्षमता 25 टन/हेक्टेयर)केरल
Sree Varunक्रीम छिलके वाली, ज़्यादा स्टार्च की 90 दिन की खाने वाली शकरकंद90 दिन20–28 टन/हेक्टेयर (क्षमता 30 टन/हेक्टेयर)केरल

इस फ़सल के कैलकुलेटर

आगे के हिसाब यहाँ कर लीजिए — कितना बीज ख़रीदें, बोरा अंकुरित होगा या नहीं, खाद का ख़र्च कितना बैठेगा, और शकरकंद का भाव क्या चल रहा है।

सब्सिडी और सरकारी मदद

शकरकंद के बीज या रोपण सामग्री की लागत में मदद करने वाली योजनाएँ। नियम और आवेदन का तरीक़ा हर योजना के पेज पर है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

श्री अरुण श्री वरुण से कैसे अलग है?

दोनों 2002 में साथ जारी हुईं और दिनों (90) तथा उपज (20–28 टन/हेक्टेयर) में बराबर हैं। श्री अरुण का छिलका बहुत हल्का गुलाबी है, स्टार्च 19.7–20.4% है, और यह बहु-परागण बीजों के आवर्ती चयन से आई। श्री वरुण का छिलका क्रीम है, स्टार्च 20.6–21.5% है, और यह पेरू के CIP से लाए बीज से आई।

15 जुलाई को रोपूँ तो श्री अरुण कब तैयार होगी?

CTCRI के अनुसार 90 दिन। 15 जुलाई को रोपने पर यह लगभग 13 अक्टूबर को तैयार होती है। पूरा प्लॉट खोदने से पहले कुछ पौधे खोदकर देख लें।

क्या श्री अरुण सूखा-सहनशील है?

CTCRI ने इसके लिए सूखा-सहनशीलता दर्ज नहीं की है। इसका फ़ायदा यह है कि यह 90 दिन में निपट जाती है और खेत जल्दी ख़ाली हो जाता है। सूखा-सहनशील शकरकंद चाहिए तो अपने KVK से पूछें कि आपके ज़िले में कौन-सी किस्म सिफ़ारिश की गई है।

श्री अरुण कहाँ के लिए सिफ़ारिश की गई है?

CTCRI केरल के ऊँचे इलाक़े बताता है। कहीं और, पहले किसी स्थानीय किस्म के बगल में एक छोटा प्लॉट लगाएँ और दोनों की तुलना करें।

स्रोत: Sree Arun — ICAR-Central Tuber Crops Research Institute variety datasheet. संपादकीय नीति.