Sree Varun
2002 में जारी 90 दिन की CTCRI किस्म, जिसका छिलका और गूदा क्रीम रंग का है और कंद चिकने, तर्कुरूप से गोल हैं। CTCRI के अनुसार उपज 20–28 टन/हेक्टेयर (क्षमता 30 टन/हेक्टेयर) है और क्षेत्र केरल के ऊँचे इलाक़े हैं।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- शकरकंद
- प्रकार
- बेल कलम (उन्नत किस्म)
- सीज़न
- खरीफ़
- पकने की अवधि
- 90 दिन
- अपेक्षित उपज
- 20–28 टन/हेक्टेयर (क्षमता 30 टन/हेक्टेयर)
- उपयुक्त मिट्टी
- बलुई / हल्की मिट्टी
- रोग-प्रतिरोध
- CTCRI ने कोई ख़ास प्रतिरोध दर्ज नहीं किया
- जारी
- 2002 में ICAR-केंद्रीय कंद फ़सल अनुसंधान संस्थान (CTCRI), तिरुवनंतपुरम ने जारी की। यह पेरू के CIP से मिले बीज (बीज-लॉट CIP 490056, 1991) से चुनी गई पौध-किस्म है। CTCRI ने केरल के ऊँचे इलाक़ों को इसका सुझाया क्षेत्र बताया है।
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता और फ़सल की देखभाल पर निर्भर करती है।
इस किस्म के बारे में
श्री वरुण कम अवधि वाली शकरकंद है, जिसे ICAR-CTCRI ने 2002 में श्री अरुण के साथ जारी किया। यह 1991 में पेरू के CIP से मिले बीज से चुनी गई पौध-किस्म है। पौधा फैलने वाला है और खूब फूलता है, पत्ते थोड़े पाँच-पालियों वाले हैं। कंद तर्कुरूप, छोटे से गोल, क्रीम छिलके, क्रीम परत और क्रीम गूदे वाले हैं, और स्टार्च 20.6–21.5% है। CTCRI पकाने में अच्छी बताता है और 90 दिन तथा 20–28 टन/हेक्टेयर दर्ज करता है, क्षमता 30 टन/हेक्टेयर। सुझाया क्षेत्र केरल के ऊँचे इलाक़े हैं।
क्या यह किस्म आपके लिए ठीक है?
श्री वरुण तब चुनें जब आपको क्रीम छिलके और गूदे वाली 90 दिन की शकरकंद चाहिए, जिसमें श्री अरुण (19.7–20.4%) से थोड़ा ज़्यादा स्टार्च (20.6–21.5%) हो। दोनों 20–28 टन/हेक्टेयर देती हैं, इसलिए अपनी मंडी को पसंद छिलके के रंग से चुनें। CTCRI ने क्षेत्र केरल के ऊँचे इलाक़े बताए हैं। नारंगी गूदे के लिए भू सोना, बैंगनी के लिए भू कृष्णा चुनें।
बुवाई और खेती
फ़ायदे और ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- कम अवधि: 90 दिन, इसलिए खेत जल्दी ख़ाली होता है।
- 20–28 टन/हेक्टेयर दर्ज, और क्षमता 30 टन/हेक्टेयर।
- श्री अरुण के जोड़े में सबसे ज़्यादा स्टार्च (20.6–21.5%), और पकाने में अच्छी।
ध्यान रखने योग्य बातें
- CTCRI केरल के ऊँचे इलाक़े सुझाता है। कहीं और पहले छोटा प्लॉट लगाएँ।
- इसके लिए घुन या सूत्रकृमि की सहनशीलता दर्ज नहीं है। साफ़ बेल-कलमें लें और मेड़ों पर मिट्टी चढ़ाएँ।
- क्रीम गूदा है और कैरोटीन का आँकड़ा नहीं दिया गया, इसलिए यह विटामिन-ए वाली किस्म नहीं है। उसके लिए भू सोना चुनें।
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है। स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में सुझाया इलाक़ा एक से ज़्यादा हो सकता है।
- केरल
दो लगभग-जुड़वाँ किस्में: कैसे पक्का करें कि कौन-सी है
श्री वरुण और श्री अरुण 2002 में साथ जारी हुईं और एक-सी दिखती हैं: 90 दिन, 20–28 टन/हेक्टेयर, फैलने वाली बेल, क्रीम गूदा। कलमें बिना लेबल के हाथ बदलती हैं, इसलिए गड़बड़ हो जाती है।
CTCRI कंद पर दो जाँचें देता है। श्री वरुण का छिलका और परत क्रीम रंग की है। श्री अरुण का छिलका बहुत हल्का गुलाबी है। स्टार्च भी अलग है: वरुण में 20.6–21.5% और अरुण में 19.7–20.4%, पर यह बिना जाँच के दिखता नहीं।
बड़ा क्षेत्र लगाने से पहले, जो कलमें आपको बेची गईं उनके एक नमूना प्लॉट से दो-तीन कंद खोदें और छिलके का रंग देखें। अगर छिलके का रंग वह नहीं जिसके पैसे दिए, तो नर्सरी के पास वापस जाएँ। उपज के आँकड़े पास-पास हैं, इसलिए असली ख़तरा उपज का नहीं, ऐसे कंद का है जिसे आपकी मंडी पहचानती न हो।
क्या अपनी रोपाई सामग्री ख़ुद रख सकते हैं?
यह बीज से नहीं, कलम से तैयार होती है, इसलिए रोपाई सामग्री आप ख़ुद ले सकते हैं। कलम सिर्फ़ स्वस्थ, अच्छी बढ़त वाले और सही किस्म के पौधों से लीजिए, रोगी पौधे से कभी नहीं — कलम अपने मातृ पौधे को साथ ले जाती है। नर्सरी या सरकारी फ़ार्म से साफ़ रोपाई सामग्री मिल जाए, तो शुरुआत वहीं से सुरक्षित है।
दूसरी किस्मों से तुलना
शकरकंद की वे सभी किस्में, जिनका पेज इस साइट पर है, एक साथ देखें। जो किस्म आप अभी देख रहे हैं, उसकी पंक्ति रंग से अलग दिखती है।
| किस्म | किसके लिए ठीक | पकने की अवधि | उपज | राज्य |
|---|---|---|---|---|
| Bhu Krishna | ओडिशा में प्रसंस्करण के लिए बैंगनी गूदा और प्राकृतिक रंग | 110–120 दिन | 18–22 टन/हेक्टेयर | ओडिशा |
| Bhu Sona | ओडिशा में विटामिन ए और प्रसंस्करण के लिए गहरा नारंगी गूदा | 105–110 दिन | 20–24 टन/हेक्टेयर | ओडिशा |
| Rajendra Shakarkand-5 | बिहार की व्यावसायिक किस्म, जिसे श्री भद्रा के साथ परखना है; अभी कोई सरकारी आँकड़ा नहीं | कोई सरकारी आँकड़ा नहीं मिला | कोई सरकारी आँकड़ा नहीं मिला | बिहार |
| Sree Arun | दो फ़सलों के बीच की छोटी खिड़की के लिए 90 दिन की खाने वाली शकरकंद | 90 दिन | 20–28 टन/हेक्टेयर (क्षमता 30 टन/हेक्टेयर) | केरल |
| Sree Bhadra | कई राज्यों के लिए सिफ़ारिश की गई 90 दिन की खाने वाली शकरकंद, जो सूत्रकृमि वाले फ़सल-चक्र में फ़िट बैठती है | 90 दिन | 27 टन/हेक्टेयर | केरल, महाराष्ट्र, बिहार, मध्य प्रदेश |
| Sree Vardhini | बैंगनी छिलके और पीले गूदे वाली खाने की शकरकंद, एक पुरानी भरोसेमंद किस्म | 100–105 दिन | 20–25 टन/हेक्टेयर (क्षमता 25 टन/हेक्टेयर) | केरल |
| Sree Varunयही पेज | क्रीम छिलके वाली, ज़्यादा स्टार्च की 90 दिन की खाने वाली शकरकंद | 90 दिन | 20–28 टन/हेक्टेयर (क्षमता 30 टन/हेक्टेयर) | केरल |
इस फ़सल के कैलकुलेटर
आगे के हिसाब यहाँ कर लीजिए — कितना बीज ख़रीदें, बोरा अंकुरित होगा या नहीं, खाद का ख़र्च कितना बैठेगा, और शकरकंद का भाव क्या चल रहा है।
- बीज दर कैलकुलेटरआपके शकरकंद के खेत के लिए कितना बीज चाहिए — आपके बोरे के अंकुरण के हिसाब से सुधारा हुआ।
- बीज किस्म खोजकइस साइट की हर शकरकंद किस्म को राज्य, सीज़न, अवधि और मिट्टी से छानिए।
- खाद कैलकुलेटरशकरकंद की एनपीके सिफ़ारिश को अपने खेत के हिसाब से यूरिया, डीएपी और एमओपी के बोरों में बदलिए।
- फ़सल लाभ कैलकुलेटरबीज, मज़दूरी और लागत को इस किस्म से मिलने वाली उपज के सामने रखकर देखिए।
- मंडी भाव जाँचकव्यापारी से भाव तय करने से पहले अपनी नज़दीकी मंडी में शकरकंद का आज का रेट देखिए।
सब्सिडी और सरकारी मदद
शकरकंद के बीज या रोपण सामग्री की लागत में मदद करने वाली योजनाएँ। नियम और आवेदन का तरीक़ा हर योजना के पेज पर है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
श्री वरुण कहाँ से आई?
CTCRI इसे 1991 में पेरू के CIP (अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र) से मिले बीज (बीज-लॉट CIP 490056) से चुनी गई पौध-किस्म बताता है। इसे 2002 में श्री अरुण के साथ जारी किया गया।
श्री वरुण की उपज और अवधि क्या है?
CTCRI के अनुसार 90 दिन और 20–28 टन/हेक्टेयर, क्षमता 30 टन/हेक्टेयर। क्षमता सबसे अच्छी हालत का आँकड़ा है, इसलिए हिसाब निचले आँकड़ों पर लगाएँ।
कंद कैसा दिखता है?
CTCRI के अनुसार कंद तर्कुरूप, छोटे से गोल हैं, जिनका छिलका, परत और गूदा क्रीम रंग का है। स्टार्च 20.6–21.5% है और पकाने में अच्छी है।
श्री वरुण या श्री भद्रा?
दोनों में लगभग 90 दिन लगते हैं। श्री भद्रा 27 टन/हेक्टेयर पर दर्ज है, चार राज्यों (केरल, महाराष्ट्र, बिहार और मध्य प्रदेश) के लिए, और CTCRI इसे जड़-गाँठ सूत्रकृमि के लिए जाल-फ़सल बताता है। श्री वरुण केरल के ऊँचे इलाक़ों के लिए 20–28 टन/हेक्टेयर पर दर्ज है। अगर समस्या सूत्रकृमि है, तो श्री भद्रा देखें।
स्रोत: Sree Varun — ICAR-Central Tuber Crops Research Institute variety datasheet. संपादकीय नीति.
