Pusa Sweti
IARI की एशियाई (देसी) किस्म। जड़ें चिकनी, गोल, शुद्ध सफ़ेद और स्वाद हल्का। उत्तरी मैदानों के लिए बनी। जल्दी पकने वाली और रोज़ के बाज़ार के लिए भारी, भरोसेमंद उपज।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- शलगम
- प्रकार
- खुली-परागित
- सीज़न
- रबी
- पकने की अवधि
- 45–50 दिन
- बीज दर
- PAU पैकेज के अनुसार 2–3 किग्रा प्रति एकड़ (लगभग 5–7.5 किग्रा/हेक्टेयर); नीचे की दूरी तक जल्दी छाँट दें
- अपेक्षित उपज
- 20–30 टन/हेक्टेयर
- उपयुक्त मिट्टी
- दोमट
- रोग-प्रतिरोध
- कोई खास रोग-प्रतिरोध दर्ज नहीं
- जारी
- ICAR-IARI, नई दिल्ली ने जारी की
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता और फ़सल की देखभाल पर निर्भर करती है।
इस किस्म के बारे में
पूसा स्वेती ICAR-IARI, नई दिल्ली की जारी की हुई एशियाई (देसी) शलगम है; एक कोर्स-सामग्री 1976 बताती है और कहती है कि इसे पंजाब से इकट्ठे जर्मप्लाज़्म से छाँटा गया। NHB इसकी आकर्षक शुद्ध सफ़ेद जड़ें बताता है जो बुवाई के 45 से 50 दिन बाद तैयार होती हैं और औसत 20 से 30 टन/हेक्टेयर देती हैं। TNAU की व्याख्यान-टिप्पणी इसे मैदानों में अक्टूबर की बुवाई के लिए बहुत जल्दी वाली किस्म कहती है। जड़ें गोल से चपटी गोल, मध्यम आकार की और सफ़ेद गूदे के साथ मुलायम होती हैं, और हल्का स्वाद रोज़ के खाने में काम आता है। एशियाई किस्म यूरोपीय शलगम से ज़्यादा गर्मी सह लेती है, फिर भी यह ठंड के मौसम की फ़सल है। यह पीले गूदे वाली या यूरोपीय किस्म जितना नहीं टिकती, इसलिए उखाड़ने के कुछ ही दिन में बेच दीजिए।
क्या यह किस्म आपके लिए ठीक है?
पूसा स्वेती तब चुनिए जब आपको जल्दी तैयार होने वाली सफ़ेद देसी शलगम चाहिए और आप उसे ताज़ा बेचेंगे। राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) इसे अक्टूबर की बुवाई, कटाई तक 45 से 50 दिन और 20 से 30 टन/हेक्टेयर के लिए लिखता है। एक कोर्स-स्लाइड सामग्री कहती है कि IARI ने इसे 1976 में पंजाब के जर्मप्लाज़्म से छाँटकर जारी किया और यह अगस्त से सितंबर के लिए ठीक है। महीने पर स्रोत एक राय नहीं रखते, इसलिए महीना अपनी स्थानीय सलाह से लीजिए। हिमाचल प्रदेश के नेरी में 2020 के 12 शलगम जीनोटाइप के परीक्षण में पत्तियों समेत जड़ की सबसे अच्छी उपज (200.66 ग्राम प्रति पौधा) इसी ने दी, जबकि जाँच-किस्म पर्पल टॉप व्हाइट ग्लोब थी। अगर जड़ों को हफ़्तों रखना है तो पीले गूदे वाली या यूरोपीय किस्म ज़्यादा ठीक रहेगी।
बुवाई और खेती
- बुवाई का समयमैदानों में अक्टूबर (NHB, TNAU); PAU देसी शलगम के लिए अगस्त से सितंबर सुझाता है, इसलिए महीना स्थानीय सलाह से पक्का करें
- बीज दरPAU पैकेज के अनुसार 2–3 किग्रा प्रति एकड़ (लगभग 5–7.5 किग्रा/हेक्टेयर); नीचे की दूरी तक जल्दी छाँट दें
- दूरीकतारें 30 सेमी की दूरी पर; कतार में पौधे 8–10 सेमी पर छाँट दें
फ़ायदे और ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- जल्दी तैयार: 45 से 50 दिन (NHB), इसलिए दो मुख्य फ़सलों के बीच की फ़सल के रूप में काम आती है।
- चिकनी, गोल, शुद्ध सफ़ेद जड़ें और रोज़ के खाने के लिए हल्का स्वाद।
- एशियाई किस्म है, इसलिए यूरोपीय शलगम से ज़्यादा गर्म बुवाई सह लेती है; सही महीने के लिए स्थानीय सलाह चाहिए।
ध्यान रखने योग्य बातें
- एशियाई प्रकार होने से यह यूरोपीय (ठंडे इलाके की) शलगम किस्म जितना भंडारण में नहीं टिकती। उखाड़ने के कुछ ही दिन में ताज़ी बेचना और खाना सबसे अच्छा है।
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है। स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में सुझाया इलाक़ा एक से ज़्यादा हो सकता है।
- उत्तर प्रदेश
- बिहार
- पंजाब
- हरियाणा
कौन-सा महीना? पूसा स्वेती की बुवाई पर चार स्रोत क्या कहते हैं
NHB की किस्म-पत्रिका कहती है कि पूसा स्वेती अक्टूबर की बुवाई के लिए ठीक है। TNAU eAgri की व्याख्यान-टिप्पणी भी यही कहती है: मैदानों में अक्टूबर की बुवाई के लिए बहुत जल्दी वाली किस्म। एक कोर्स-स्लाइड सामग्री 40 से 45 दिन के साथ अगस्त से सितंबर देती है। PAU का पैकेज पूसा स्वेती का नाम नहीं लेता पर कहता है कि देसी (एशियाई) शलगम अगस्त से सितंबर में और यूरोपीय किस्में अक्टूबर से नवंबर में बोना सबसे ठीक है।
फ़र्क क्यों? शलगम को 10 से 15 डिग्री सेल्सियस सबसे अच्छा लगता है। लंबे दिन और ऊँचा तापमान जल्दी फूल (बोल्टिंग) ला देते हैं, और गर्मी में जड़ रेशेदार, सख़्त और तीखी हो जाती है (PAU, TNAU)। पंजाब के ठंडे सितंबर में जो बुवाई सुरक्षित है, बिहार के मैदानों में वही बहुत गर्म हो सकती है। इसलिए महीना इस पर निर्भर है कि आपके यहाँ गर्मी कब टूटती है, किस्म पर नहीं। एक व्यावहारिक जाँच है: तीन छोटी पट्टियाँ पखवाड़े के अंतर पर बोइए और लिखिए कि कौन-सी पट्टी 5 से 10 सेमी चौड़ाई पर साफ़, हल्की जड़ें देती है।
क्या अपनी रोपाई सामग्री ख़ुद रख सकते हैं?
यह खुली-परागित किस्म है, इसलिए अपनी अच्छी फ़सल का बीज दोबारा बोया जा सकता है। बीज सिर्फ़ रोग-मुक्त पौधों से लीजिए, ठीक से सुखाइए, ठंडी-सूखी जगह रखिए, और हर तीन-चार साल में नया प्रमाणित बीज ले आइए ताकि किस्म बिगड़े नहीं।
दूसरी किस्मों से तुलना
शलगम की वे सभी किस्में, जिनका पेज इस साइट पर है, एक साथ देखें। जो किस्म आप अभी देख रहे हैं, उसकी पंक्ति रंग से अलग दिखती है।
| किस्म | किसके लिए ठीक | पकने की अवधि | उपज | राज्य |
|---|---|---|---|---|
| Golden Ball | ठंडे इलाक़ों के किसान और किचन गार्डनर जो बढ़िया स्वाद वाली पीले गूदे की शलगम चाहते हैं, सबसे जल्दी या सबसे बड़ी जड़ नहीं | 60–70 दिन | कोर्स-सामग्री में 20–25 टन/हेक्टेयर | हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश |
| Punjab Safed-4 | पंजाब और हरियाणा के किसान जो सादी सफ़ेद जल्दी वाली शलगम चाहते हैं और विक्रेता से पूछेंगे कि बीज कहाँ से आया | जल्दी पकने वाली; दिन प्रकाशित नहीं | इस किस्म का कोई आँकड़ा प्रकाशित नहीं | पंजाब, हरियाणा |
| Purple Top White Globe | पहाड़ी इलाक़ों और देर से बुवाई करने वाले मैदानी किसान जो बड़ी, सख़्त गोल शलगम चाहते हैं जो टिकती हो, और जो असली ठंड का इंतज़ार कर सकते हैं | 60–70 दिन | 25–30 टन/हेक्टेयर | हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू और कश्मीर, उत्तर प्रदेश |
| Pusa Chandrima | मैदानी किसान जो पूसा स्वेती से बड़ी सफ़ेद शलगम चाहते हैं और उसके लिए 55 से 60 दिन रुक सकते हैं | 55–60 दिन | बताई गई उपज 30–40 टन/हेक्टेयर; कोई परीक्षण नहीं मिला | उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली |
| Pusa Kanchan | वे किसान जो लाल छिलके और क्रीमी-पीले गूदे वाली शलगम चाहते हैं, जो खेत में थोड़ा ज़्यादा टिक सके और स्पंजी न हो | 55–60 दिन | कोर्स-सामग्री में लगभग 25 टन/हेक्टेयर (250 क्विंटल) | उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली |
| Pusa Swetiयही पेज | मैदानी किसान जो स्थानीय ताज़े बाज़ार के लिए जल्दी तैयार होने वाली सादी सफ़ेद देसी शलगम चाहते हैं। और जो बुवाई का महीना अपनी स्थानीय सलाह के हिसाब से तय कर सकते हैं | 45–50 दिन | 20–30 टन/हेक्टेयर | उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, हरियाणा |
| Snowball | वे किसान जो ठंड के मौसम की बीच की फ़सल के लिए जल्दी तैयार होने वाली, हल्की, लगभग सफ़ेद यूरोपीय शलगम चाहते हैं और उसे छोटी उम्र में तोड़ेंगे | 50–60 दिन | कोर्स-सामग्री में 25–30 टन/हेक्टेयर | हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश |
इस फ़सल के कैलकुलेटर
आगे के हिसाब यहाँ कर लीजिए — कितना बीज ख़रीदें, बोरा अंकुरित होगा या नहीं, खाद का ख़र्च कितना बैठेगा, और शलगम का भाव क्या चल रहा है।
- बीज दर कैलकुलेटरआपके शलगम के खेत के लिए कितना बीज चाहिए — आपके बोरे के अंकुरण के हिसाब से सुधारा हुआ।
- अंकुरण कैलकुलेटरबुवाई से पहले बोरे के 100 बीज जाँचिए और देखिए कि बीज बोने लायक है या नहीं।
- बीज किस्म खोजकइस साइट की हर शलगम किस्म को राज्य, सीज़न, अवधि और मिट्टी से छानिए।
- खाद कैलकुलेटरशलगम की एनपीके सिफ़ारिश को अपने खेत के हिसाब से यूरिया, डीएपी और एमओपी के बोरों में बदलिए।
- फ़सल कैलेंडरआपके राज्य में शलगम की बुवाई, निराई, सिंचाई और कटाई के महीने।
- फ़सल लाभ कैलकुलेटरबीज, मज़दूरी और लागत को इस किस्म से मिलने वाली उपज के सामने रखकर देखिए।
- मंडी भाव जाँचकव्यापारी से भाव तय करने से पहले अपनी नज़दीकी मंडी में शलगम का आज का रेट देखिए।
सब्सिडी और सरकारी मदद
शलगम के बीज या रोपण सामग्री की लागत में मदद करने वाली योजनाएँ। नियम और आवेदन का तरीक़ा हर योजना के पेज पर है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पूसा स्वेती अगस्त से सितंबर में बोऊँ या अक्टूबर में?
स्रोत अलग-अलग कहते हैं। NHB और TNAU eAgri की व्याख्यान-टिप्पणी मैदानों में अक्टूबर की बुवाई बताती हैं। एक कोर्स-स्लाइड सामग्री अगस्त से सितंबर कहती है। PAU कहता है कि देसी शलगम अगस्त से सितंबर में और यूरोपीय किस्में अक्टूबर से नवंबर में बोना ठीक है। शलगम को 10 से 15 डिग्री सेल्सियस भाता है; लंबे दिन और ऊँचा तापमान जल्दी फूल (बोल्टिंग) ला देते हैं, और गर्मी में जड़ें रेशेदार, सख़्त और तीखी हो जाती हैं (PAU, TNAU)। इसलिए तब बोइए जब आपके इलाक़े में गर्मी टूट चुकी हो, और अपने कृषि विज्ञान केंद्र से वही महीना पूछिए जिस पर वे भरोसा करते हैं।
कितने दिन और कितनी उपज मानकर चलूँ?
NHB 45 से 50 दिन और औसत 20 से 30 टन/हेक्टेयर देता है। एक कोर्स-सामग्री 40 से 45 दिन और लगभग 250 क्विंटल प्रति हेक्टेयर देती है, यानी 25 टन/हेक्टेयर। इसलिए 45 से 50 दिन और 20 से 30 टन/हेक्टेयर मानकर चलिए। और कटाई कैलेंडर से नहीं, जड़ के आकार से कीजिए। TNAU कहता है कि 5 से 10 सेमी चौड़ी होने पर तोड़ें, इंतज़ार करने पर जड़ें सख़्त और रेशेदार हो जाती हैं। मैदानों का ऐसा कोई खेत-परीक्षण नहीं मिला जो पूसा स्वेती को टन/हेक्टेयर में नापता हो।
पूसा स्वेती और पूसा चंद्रिमा में क्या फ़र्क है?
दोनों की जड़ें सफ़ेद हैं। पूसा स्वेती जल्दी तैयार होती है: 45 से 50 दिन (NHB)। पूसा चंद्रिमा में 55 से 60 दिन लगते हैं (NHB), और TNAU इसकी जड़ें मध्यम से बड़ी, औसत उपज 400 क्विंटल प्रति हेक्टेयर और बुवाई अक्टूबर से दिसंबर बताता है। अगर पतले बाज़ार के लिए सबसे जल्दी वाली सफ़ेद शलगम चाहिए तो स्वेती लीजिए। अगर 10 दिन रुककर बड़ी जड़ें चाहिए तो चंद्रिमा देखिए।
क्या मैं अपनी पूसा स्वेती फ़सल से बीज बचा सकता हूँ?
यह खुले परागण वाली किस्म है, और TNAU कहता है कि एशियाई शलगम मैदानों में बीज बना लेती है। अपने जैसी दिखने वाली जड़ें चुनिए, जड़ की नोक काटिए, लगभग एक-तिहाई शीर्ष रखिए, और 45 x 35 सेमी पर रोपिए। शलगम पर-परागण वाली फ़सल है, इसलिए दूसरी शलगम, चाइनीज़ गोभी और सरसों से 1,000 से 1,600 मीटर दूरी रखिए। TNAU बीज उपज 5 से 6 क्विंटल प्रति हेक्टेयर बताता है और कहता है कि 70% फलियाँ हल्की पीली पड़ें तब काटिए। पास में सरसों के खेत हों तो यह मुश्किल होता है, इसलिए कई किसान हर साल नया बीज ख़रीदते हैं।
क्या पूसा स्वेती का कोई स्वतंत्र परीक्षण हुआ है?
एक परीक्षण मिला: डॉ. वाई.एस. परमार विश्वविद्यालय, नेरी (हमीरपुर), हिमाचल प्रदेश की 2021 की एम.एससी. थीसिस, जिसमें 2020 की रबी में 12 शलगम जीनोटाइप उगाए गए। पत्तियों समेत जड़ की औसत उपज सबसे अच्छी पूसा स्वेती की रही, 200.66 ग्राम, और लाइन T-COHF-NERI-5 (185.77 ग्राम) सांख्यिकीय रूप से बराबर रही। यह एक मौसम और पहाड़ के एक स्थान का नतीजा है और ग्राम प्रति पौधा बताता है, टन प्रति हेक्टेयर नहीं। इसे इस बात का संकेत मानिए कि किस्म ठीक है, मैदानों के लिए उपज का वादा नहीं।
स्रोत: National Horticulture Board (NHB), turnip varieties sheet, TNAU eAgri, HORT281 lecture 29: Origin, area, production, varieties and package of practices for turnip, PAU, Package of Practices for Cultivation of Vegetables 2021 (radish and turnip chapter), Turnip course slide deck (Pusa Sweti 1976 release, selection from Punjab germplasm; secondary source), Assessment of genetic variability and correlation studies in turnip, Neri (Hamirpur) thesis abstract, KrishiKosh, ICAR-Indian Agricultural Research Institute (IARI), New Delhi. संपादकीय नीति.
