मुख्यमंत्री भावांतर भुगतान योजना
जब सोयाबीन मंडी में MSP से कम पर बिकता है, तो अंतर की रकम सरकार सीधे किसान के बैंक खाते में भेजती है।
संचालक: मंडी बोर्ड / कृषि विभाग, मध्य प्रदेश सरकार
- तंत्र
- MSP माइनस बाज़ार भाव → DBT
- सोयाबीन MSP
- ₹5,328/क्विंटल (2025–26)
- पंजीकृत किसान
- ~10 लाख (2025–26)
- मान्यता
- SKOCH गोल्ड अवार्ड 2026
परिचय
मध्य प्रदेश भारत का सबसे बड़ा सोयाबीन उत्पादक राज्य है, और एक सीज़न का ख़राब भाव छोटे किसान का पूरा मुनाफ़ा ख़त्म कर सकता है। भावांतर भुगतान योजना इसी को सँभालती है: अगर किसान अधिसूचित मंडी में सोयाबीन बेचता है और भारित औसत बाज़ार भाव MSP से नीचे जाता है, तो राज्य सरकार अंतर की रकम DBT से सीधे किसान के बैंक खाते में भेजती है।
योजना पहली बार 2017 में शुरू हुई थी, बीच में बंद रही, और अक्टूबर 2025 में अहम सुधारों के साथ दोबारा लॉन्च हुई। सबसे बड़ा बदलाव: "मॉडल रेट" — जिसके आधार पर अंतर गिना जाता है — अब सिर्फ़ मध्य प्रदेश की अपनी विनियमित मंडियों के 14 दिन के भारित औसत बिक्री मूल्य पर आधारित है। पुराने तरीके में तीन राज्यों के भाव मिलाए जाते थे जिससे बेंचमार्क ऊँचा और मुआवज़ा कम आता था। 2025–26 सोयाबीन सीज़न के लिए लगभग 10 लाख किसानों ने पंजीकरण कराया।
2025–26 खरीफ में सोयाबीन MSP ₹5,328 प्रति क्विंटल तय थी और योजना से लगभग ₹1,300 प्रति क्विंटल सहायता मिली। अधिसूचित मंडियों के सभी लेन-देन अब e-मंडी प्रणाली से होते हैं — CCTV निगरानी और डिजिटल रिकॉर्डिंग के साथ। यह पारदर्शिता सुधार पुरानी भाव-हेरफेर की शिकायतों के बाद लाया गया। 2026 में योजना को गवर्नेंस इनोवेशन के लिए SKOCH गोल्ड अवार्ड मिला।
आपको क्या मिलता है
लाभ वैसा ही, जैसा राज्य ने अधिसूचित किया है — यहाँ कुछ भी अनुमान नहीं है।
- अधिसूचित मंडी में सोयाबीन MSP से कम पर बिकने पर अंतर की रकम सीधे बैंक खाते में।
- किसान से कोई प्रीमियम या खर्च नहीं — पंजीकृत विक्रेताओं को अपने-आप सुरक्षा मिलती है।
- e-मंडी से पारदर्शिता — CCTV निगरानी और डिजिटल रूप से दर्ज भाव।
- सीज़न के बीच भाव गिरने से बचाव — जो सिर्फ़ MSP खरीद से संभव नहीं।
कौन पात्र है
राज्य योजनाएँ अपने मानदंड आमतौर पर सूची में नहीं, विवरण में लिखती हैं। यह वही विवरण खोलकर रखा गया है — अंतिम फ़ैसला विभाग के सत्यापन का होता है।
आप पात्र हैं अगर
- मध्य प्रदेश का स्थायी निवासी और कृषक
- अंतिम तिथि से पहले e-उपार्जन पोर्टल पर पंजीकृत
- अधिसूचित फ़सल (2025–26 में सोयाबीन) तय अवधि में अधिसूचित मंडी में बेचना ज़रूरी
- DBT के लिए आधार-लिंक्ड बैंक खाता
शामिल नहीं
- अधिसूचित मंडी के बाहर बेचने वाले किसान (निजी बिक्री, खेत पर बिक्री)
- बिना पंजीकरण वाले किसान — तय तिथि तक e-उपार्जन पर पंजीकरण अनिवार्य
- अधिसूचित बिक्री खिड़की के बाहर की बिक्री
ज़रूरी दस्तावेज़
शुरू करने से पहले ये तैयार रखें — ज़्यादातर आवेदन हक़ न होने से नहीं, कोई काग़ज़ छूट जाने से रद्द होते हैं।
- आधार कार्ड (बैंक खाते से जुड़ा)
- भू-अभिलेख (खसरा / B-1 / राजस्व रिकॉर्ड)
- बैंक पासबुक या रद्द चेक
- e-उपार्जन पंजीकरण संख्या
- अधिसूचित मंडी का गेट पास या बिक्री रसीद
आवेदन कैसे करें
केंद्रीय योजना से कम कदम, और आमतौर पर पोर्टल नहीं, एक कार्यालय।
- 1
e-उपार्जन पोर्टल पर पंजीकरण करें
अंतिम तिथि से पहले MP e-उपार्जन पोर्टल पर आधार, भू-अभिलेख और बैंक विवरण से पंजीकरण करें। पंजीकरण संख्या नोट करें।
- 2
तय अवधि में अधिसूचित मंडी में बेचें
बिक्री खिड़की (2025–26 सीज़न के लिए 24 अक्टूबर 2025 से 31 जनवरी 2026) के भीतर अपना सोयाबीन अधिसूचित मंडी में ले जाएँ। बिक्री e-मंडी प्रणाली से होनी चाहिए।
- 3
अंतर भुगतान प्राप्त करें
अगर उस मंडी में भारित औसत बाज़ार भाव MSP से कम रहता है, तो आपने जितने क्विंटल बेचे उन पर अंतर की रकम DBT से बैंक खाते में आ जाती है।
अगर कुछ गड़बड़ हो
नाम सूची में न हो, या भुगतान अटका हो — विभाग ने ख़ुद जो रास्ता बताया है, वह यहाँ है।
- अंतर भुगतान न आने या ग़लत रकम पर, पहले जिस मंडी में बेचा वहाँ के मंडी सचिव से, फिर जिला मंडी अधिकारी से बात करें। e-उपार्जन पंजीकरण, मंडी गेट पास और बैंक पासबुक साथ रखें।
- मंडी बोर्ड से आगे, MP CM हेल्पलाइन — टोल-फ्री 181 या cmhelpline.mp.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। ट्रैक करने के लिए रेफ़रेंस नंबर संभालें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
कौन-कौन सी फ़सलें शामिल हैं?
2025–26 के पुनः लॉन्च में सोयाबीन मुख्य फ़सल है। सरकार आने वाले सीज़न में और फ़सलें अधिसूचित कर सकती है — ताज़ा सूची e-उपार्जन पोर्टल पर देखें।
"मॉडल रेट" (बेंचमार्क भाव) कैसे तय होता है?
2025 के पुनः लॉन्च से मॉडल रेट सिर्फ़ मध्य प्रदेश की अपनी विनियमित मंडियों के 14 दिन के भारित औसत बिक्री मूल्य पर आधारित है — पहले की तरह कई राज्यों का औसत नहीं।
अंतर भुगतान कैसे काम करता है?
अगर मॉडल रेट (वास्तविक औसत बिक्री भाव) ₹4,000 है और MSP ₹5,328 है, तो अंतर ₹1,328 प्रति क्विंटल होता है। यह रकम आपने अधिसूचित मंडी में जितने क्विंटल बेचे उन पर बैंक खाते में भेजी जाती है।
पंजीकरण की अंतिम तिथि क्या है?
2025–26 सोयाबीन सीज़न के लिए e-उपार्जन पर पंजीकरण अक्टूबर 2025 तक खुला था। तिथि हर सीज़न बदलती है — मौजूदा खिड़की e-उपार्जन पोर्टल या स्थानीय मंडी से पता करें।
अगर मंडी के बाहर बेचूँ तो?
सिर्फ़ e-मंडी प्रणाली से अधिसूचित मंडियों में हुई बिक्री शामिल है। खेत पर, निजी, या ग़ैर-अधिसूचित बाज़ार में बेचने पर अंतर भुगतान नहीं मिलता।
पैसा खाते में कब आता है?
बिक्री खिड़की बंद होने और भारित औसत मॉडल रेट तय होने के बाद अंतर भुगतान गिना जाता है। DBT आमतौर पर खिड़की बंद होने के कुछ हफ़्तों में आ जाती है।
केंद्र के PM-AASHA से क्या फ़र्क़ है?
PM-AASHA केंद्र का ढाँचा है जिसमें राज्य PSS, PDP, या निजी खरीद में से कोई रास्ता चुन सकते हैं। भावांतर भुगतान MP की अपनी राज्य-वित्तपोषित भावांतर योजना है, अपने मॉडल-रेट गणना और e-मंडी ढाँचे के साथ अलग से चलती है।
तथ्य 26 सितंबर 2026 को mpmandiboard.gov.in से जाँचे गए। संपादकीय नीति.
