राज्य पोषित नलकूप खनन योजना
SC/ST किसानों के लिए नलकूप खुदाई पर 75% सब्सिडी (₹25,000 तक) और पंप पर (₹15,000 तक) — कुल ₹40,000 तक DBT से।
संचालक: किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग, मध्य प्रदेश सरकार
- नलकूप सब्सिडी
- 75% या ₹25,000 तक
- पंप सब्सिडी
- 75% या ₹15,000 तक
- पात्र वर्ग
- केवल SC / ST किसान
- कब से
- 31 दिसंबर 2001
परिचय
मध्य प्रदेश के बड़े हिस्से में खेती बारिश पर निर्भर है, और अनुसूचित जाति-जनजाति के किसान — जो अक्सर छोटे, कम उपजाऊ खेत जोतते हैं — मानसून कमज़ोर रहने पर सबसे ज़्यादा प्रभावित होते हैं। राज्य पोषित नलकूप खनन योजना 31 दिसंबर 2001 से चल रही है और इन किसानों को नलकूप खुदाई और पंप लगाने पर 75% सब्सिडी देती है, ताकि वे अपनी ज़मीन के कम-से-कम एक हिस्से की सिंचाई बारिश पर निर्भर रहे बिना कर सकें।
सब्सिडी नलकूप खुदाई पर लागत का 75% या ₹25,000 (जो भी कम हो) और पंप पर 75% या ₹15,000 — मिलाकर अधिकतम ₹40,000 प्रति किसान। राशि DBT से सीधे बैंक खाते में जाती है। योजना 47 ज़िलों में लागू है, लेकिन केंद्रीय भूजल बोर्ड द्वारा गंभीर, अर्ध-गंभीर या अति-दोहित घोषित क्षेत्र बाहर हैं ताकि भूजल स्तर की रक्षा हो।
चयन पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर होता है: किसान सरकार-पंजीकृत एजेंसी या वेंडर से नलकूप खुदवाता है, GST बिल लेता है और उप-संभागीय अधिकारी (कृषि) के पास कागज़ात के साथ आवेदन जमा करता है। फिर सब्सिडी बैंक खाते में आ जाती है।
आपको क्या मिलता है
लाभ वैसा ही, जैसा राज्य ने अधिसूचित किया है — यहाँ कुछ भी अनुमान नहीं है।
- नलकूप खुदाई पर 75% सब्सिडी — ₹25,000 तक, भले ही नलकूप असफल हो।
- सफल नलकूप पर सबमर्सिबल पंप लगाने पर 75% सब्सिडी — ₹15,000 तक।
- प्रति किसान कुल ₹40,000 तक आर्थिक सहायता, सीधे DBT से बैंक खाते में।
- साल भर आवेदन खुले — कोई तय समय-सीमा नहीं; पहले आओ-पहले पाओ चयन।
कौन पात्र है
राज्य योजनाएँ अपने मानदंड आमतौर पर सूची में नहीं, विवरण में लिखती हैं। यह वही विवरण खोलकर रखा गया है — अंतिम फ़ैसला विभाग के सत्यापन का होता है।
आप पात्र हैं अगर
- अनुसूचित जाति (SC) या अनुसूचित जनजाति (ST) किसान
- मध्य प्रदेश में खेती-योग्य ज़मीन का मालिक
- ज़मीन उस ज़िले में हो जो केंद्रीय भूजल बोर्ड द्वारा गंभीर, अर्ध-गंभीर या अति-दोहित घोषित न हो
शामिल नहीं
- सामान्य और OBC वर्ग के किसान (इस योजना में शामिल नहीं)
- भूजल के लिए गंभीर, अर्ध-गंभीर या अति-दोहित घोषित क्षेत्र की ज़मीन
ज़रूरी दस्तावेज़
शुरू करने से पहले ये तैयार रखें — ज़्यादातर आवेदन हक़ न होने से नहीं, कोई काग़ज़ छूट जाने से रद्द होते हैं।
- SC / ST जाति प्रमाण पत्र
- भूमि रिकॉर्ड (खसरा-खतौनी)
- आधार कार्ड
- बैंक खाता पासबुक
- सरकार-पंजीकृत ड्रिलिंग एजेंसी का GST बिल
आवेदन कैसे करें
केंद्रीय योजना से कम कदम, और आमतौर पर पोर्टल नहीं, एक कार्यालय।
- 1
नलकूप खुदवाएँ
सरकार-पंजीकृत एजेंसी या वेंडर से नलकूप खुदवाएँ। काम का GST बिल लें।
- 2
उप-संभागीय अधिकारी (कृषि) के पास आवेदन दें
जाति प्रमाण पत्र, भूमि रिकॉर्ड, आधार, बैंक पासबुक और GST बिल के साथ उप-संभागीय अधिकारी (कृषि) कार्यालय में आवेदन करें।
- 3
सत्यापन और DBT से भुगतान
विभाग कागज़ात और नलकूप के काम की जाँच करता है, फिर सब्सिडी सीधे बैंक खाते में जारी करता है।
अगर कुछ गड़बड़ हो
नाम सूची में न हो, या भुगतान अटका हो — विभाग ने ख़ुद जो रास्ता बताया है, वह यहाँ है।
- आवेदन की स्थिति, सब्सिडी में देरी या अस्वीकृति पर ज़िला उप-संचालक, किसान कल्याण एवं कृषि विकास से संपर्क करें। अपील क्षेत्रीय संयुक्त संचालक के पास जाती है।
- विभाग से आगे, मध्य प्रदेश CM हेल्पलाइन — 181 (सुबह 7 से रात 11 बजे), पोर्टल cmhelpline.mp.gov.in का इस्तेमाल करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या यह योजना सिर्फ़ SC/ST किसानों के लिए है?
हाँ। राज्य पोषित नलकूप खनन योजना विशेष रूप से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के उन किसानों के लिए है जिनके पास खेती-योग्य ज़मीन है। सामान्य और OBC वर्ग इसमें शामिल नहीं हैं।
अगर नलकूप असफल रहे तो भी सब्सिडी मिलेगी?
हाँ। नलकूप खुदाई की ₹25,000 तक सब्सिडी सफल या असफल दोनों स्थिति में मिलती है। पंप की ₹15,000 सब्सिडी सिर्फ़ सफल नलकूप पर लागू होती है।
क्या कोई भी ड्रिलिंग एजेंसी चलेगी?
एजेंसी सरकार-पंजीकृत वेंडर होनी चाहिए। सब्सिडी लेने के लिए उनका वैध GST बिल ज़रूरी है।
आवेदन की कोई अंतिम तारीख़ है?
नहीं। योजना साल भर चलती है और चयन पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर है। नलकूप का काम पूरा होते ही आवेदन करें।
मेरी ज़मीन अति-दोहित भूजल क्षेत्र में है — क्या मैं आवेदन कर सकता हूँ?
नहीं। केंद्रीय भूजल बोर्ड द्वारा गंभीर, अर्ध-गंभीर या अति-दोहित घोषित क्षेत्र भूजल स्तर की सुरक्षा के लिए बाहर रखे गए हैं।
सब्सिडी कैसे मिलती है?
कागज़ात सत्यापन और कृषि विभाग के फ़ील्ड निरीक्षण के बाद Direct Benefit Transfer (DBT) से सीधे बैंक खाते में।
तथ्य 26 सितंबर 2026 को cmhelpline.mp.gov.in से जाँचे गए। संपादकीय नीति.
