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चीकू (सपोटा)सभी सीज़नकलमी किस्म (खिरनी रूटस्टॉक पर)अंतिम अपडेट: 20 अक्टूबर 2026

Pala

आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु की लोकप्रिय, ज़्यादा पैदावार वाली चीकू, छोटे अंडाकार या अंडे जैसे फल गुच्छों में लगते हैं और गूदा बहुत मीठा (NHB)। आंध्र के परीक्षण में इसके फल का औसत वज़न सिर्फ़ 32.09 ग्राम रहा, 11 किस्मों में सबसे छोटा, और फल लगभग 195 दिन में तैयार हुआ।

सीज़नसभी सीज़न
फल कब सेफल लगभग साल 3 से लगते हैं; फ़ायदे की पैदावार साल 7 से (NHB, सभी चीकू)
अपेक्षित उपजज़्यादा पैदावार वाली (NHB); प्रति पेड़ किलो का आँकड़ा प्रकाशित नहीं
उपयुक्त मिट्टीदोमट

ज़रूरी तथ्य

प्रकार
कलमी किस्म (खिरनी रूटस्टॉक पर)
सीज़न
सभी सीज़न
फल कब से
फल लगभग साल 3 से लगते हैं; फ़ायदे की पैदावार साल 7 से (NHB, सभी चीकू)
अपेक्षित उपज
ज़्यादा पैदावार वाली (NHB); प्रति पेड़ किलो का आँकड़ा प्रकाशित नहीं
उपयुक्त मिट्टी
दोमट
रोग-प्रतिरोध
कोई खास रोग-प्रतिरोध का दावा नहीं

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता और फ़सल की देखभाल पर निर्भर करती है।

इस किस्म के बारे में

पाला आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु की लोकप्रिय, ज़्यादा पैदावार वाली चीकू है (NHB)। फल अंडाकार या अंडे जैसे, पतले छिलके वाले, गुच्छों में लगते हैं, सिरा चौड़ा नुकीला और गूदा बहुत मीठा और अच्छे स्वाद का। ये छोटे हैं। आंध्र के 11 किस्मों के परीक्षण में पाला के फल का औसत वज़न 32.09 ग्राम रहा, सबसे छोटा, और बीज भी सबसे छोटा, 2.11 ग्राम। यह सबसे जल्दी तैयार होने वालों में भी थी, फल लगने से तुड़ाई तक लगभग 195 दिन, जबकि क्रिकेट बॉल में 258। पाला चीकू की कलम के लिए इस्तेमाल होने वाले खिरनी रूटस्टॉक (मैनिलकारा हेक्सैंड्रा) का स्थानीय नाम भी है, इसलिए नर्सरी से पूछ लीजिए कि वह किसकी बात कर रही है।

क्या यह किस्म आपके लिए ठीक है?

आंध्र प्रदेश या तमिलनाडु में बेचते हैं और बहुत मीठा फल चाहिए जो जल्दी आए, फल लगने से लगभग 195 दिन में, तो पाला चुनिए। NHB इसे लोकप्रिय और ज़्यादा पैदावार वाली कहता है। छोटे फल मानकर चलिए, आंध्र के परीक्षण में 32 ग्राम, इसलिए प्रति किलो तुड़ाई और छँटाई का ख़र्च ज़्यादा बैठेगा। बड़ा फल (123–135 ग्राम) चाहिए तो क्रिकेट बॉल लीजिए, या पश्चिम भारत की मंडियों के मुलायम गूदे के लिए कालीपत्ती।

बुवाई और खेती

  • बुवाई का समयमानसून की शुरुआत में रोपाई करें (NHB)। TNAU जून से दिसंबर बताता है।
  • दूरी10 × 10 मीटर, या 6 × 6 मीटर जब तक छत्र मिल न जाएँ और फिर एक छोड़कर एक पेड़ हटा दें (NHB)। TNAU 8 × 8 मीटर (156 पौधे प्रति हेक्टेयर) बताता है, या घनी रोपाई के लिए 8 × 4 मीटर (312 पौधे)।
  • बुवाई विधिकलमी पौधा लगाइए, बीज वाला नहीं। TNAU खिरनी (मैनिलकारा हेक्सैंड्रा) रूटस्टॉक पर अप्रोच ग्राफ्टिंग करता है, जिसमें कलम का जोड़ ज़मीन से कम से कम 15 सेंटीमीटर ऊपर रहता है। गड्ढा हर तरफ़ लगभग 1 मीटर, जिसमें पहले ऊपरी मिट्टी, फिर गोबर की खाद, 1 किलो सुपरफॉस्फेट और 500 ग्राम सल्फ़ेट ऑफ़ पोटाश मिली नीचे की मिट्टी भरें (NHB)। कलम को खूँटे से बाँधिए, छाया दीजिए, और जोड़ के नीचे रूटस्टॉक की फूटन हटाते रहिए।
  • सिंचाईथाला विधि अपनाइए और छत्र बढ़ने के साथ थाला चौड़ा करते जाइए। पौधे जमते समय गर्मी में हर 6–7 दिन और सर्दी में हर 8–10 दिन पर पानी दें। ड्रिप से 40% पानी बचता है और पैदावार बढ़ती है: पहले 2 साल पेड़ से 50 सेंटीमीटर दूर 4 लीटर प्रति घंटे वाले दो ड्रिपर, फिर दो और (NHB)।
  • उर्वरकप्रति पेड़ (महाराष्ट्र कृषि विभाग, NHB के हवाले से): साल 1: 20 किलो गोबर की खाद, 300 ग्राम N, 150 ग्राम P, 100 ग्राम K। साल 2: 30 किलो, 450 ग्राम, 225 ग्राम, 200 ग्राम। साल 3: 40 किलो, 600 ग्राम, 300 ग्राम, 300 ग्राम। साल 4: 50 किलो, 750 ग्राम, 375 ग्राम, 300 ग्राम। साल 5: 60 किलो, 900 ग्राम, 450 ग्राम, 400 ग्राम। साल 6 से: 70 किलो गोबर की खाद, 1000 ग्राम N, 500 ग्राम P, 500 ग्राम K। बारानी: मानसून की शुरुआत में दें। सिंचित: पूरी गोबर की खाद और आधा उर्वरक मानसून की शुरुआत में, बाक़ी सितंबर–अक्टूबर में, छत्र के नीचे।
  • कटाईफल साल 3 से लगना शुरू होता है और फ़ायदे की पैदावार साल 7 से आती है। तब तोड़िए जब भूरी पपड़ी की जगह पीला-सा कॉर्क जैसा भूरा रंग आ जाए और खुरचने पर न हरापन दिखे न दूध। चीकू तोड़ने के बाद पकता है, पर बहुत जल्दी तोड़ा फल ख़राब निकलता है और देर से तोड़ा फल जल्दी नरम पड़ता है। हाथ से तोड़िए या डंडे पर जाली-थैले वाले हार्वेस्टर से (NHB)।

मिट्टी और जलवायु

मिट्टी

उपयुक्त मिट्टी
गहरी जलोढ़ मिट्टी, बलुई दोमट या अच्छे जल-निकास वाली मध्यम काली मिट्टी। कठोर परत के ऊपर की उथली चिकनी मिट्टी या ज़्यादा चूने वाली मिट्टी ठीक नहीं (NHB)।
pH
6.0–8.0

जलवायु

तापमान
10–38°C
बारिश
1,250–2,500 mm
जलवायु
गर्म, नम मौसम (70% से ऊपर नमी) ठीक है, और तटीय जलवायु सबसे अच्छी। यह 1,000 मीटर की ऊँचाई तक उगता है। 43°C से ऊपर फूल झड़ते हैं (NHB)।

फ़ायदे और ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में लोकप्रिय और ज़्यादा पैदावार वाली (NHB)
  • बहुत मीठा, अच्छे स्वाद का गूदा, और फल गुच्छों में (NHB)
  • फल लगने से तुड़ाई तक जल्दी: लगभग 195 दिन, जबकि क्रिकेट बॉल में 258

ध्यान रखने योग्य बातें

  • फल छोटा है, आंध्र के परीक्षण में 32.09 ग्राम, यानी एक किलो में लगभग 31 फल तोड़ने और छाँटने पड़ते हैं।
  • वहाँ बीज फल के वज़न का 6.6% है, जो क्रिकेट बॉल (4.7%) के हिस्से से बड़ा है।
  • NHB और परीक्षण इसके लिए प्रति पेड़ किलो का आँकड़ा नहीं देते।

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है। स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में सुझाया इलाक़ा एक से ज़्यादा हो सकता है।

  • आंध्र प्रदेश
  • तमिलनाडु

किलो गिनने से पहले फल गिनिए

पाला छोटी चीकू है। आंध्र के परीक्षण में इसके फल का औसत वज़न 32.09 ग्राम रहा, जबकि क्रिकेट बॉल का 123.2 ग्राम। पाला का एक किलो लगभग 31 फल है। क्रिकेट बॉल का एक किलो लगभग 8।

इससे पैदावार से ज़्यादा आपकी लागत बदलती है। तुड़ाई, छँटाई, पैकिंग और गिनती सब फलों की संख्या के साथ बढ़ते हैं, इसलिए उतने ही वज़न के क्रेट पर पाला की हैंडलिंग क्रिकेट बॉल से लगभग चार गुना पड़ती है। आपके फल का आकार अलग हो सकता है, इसलिए 20 फल तौलिए।

खंड लगाने से पहले ख़रीदार से पूछिए कि वह वज़न से दाम देता है या गिनती से, और छोटे आकार के कितने पैसे देता है। प्रति किलो भाव चार गुना तुड़ाई और छँटाई की भरपाई न करे तो ज़्यादा मीठा फल भी मुनाफ़ा नहीं बचा सकता।

रोपाई सामग्री कहाँ से आती है

यह कलमी (ग्राफ़्टेड) पौधा है — ऊपर यह किस्म, नीचे मूलवृंत। इसके फल के बीज से यही किस्म नहीं उगती, इसलिए इसका बीज रखा नहीं जा सकता। कलमी पौधे पंजीकृत नर्सरी या सरकारी फ़ार्म से ख़रीदिए, तभी पौधा सही किस्म का और रोग-मुक्त मिलेगा।

दूसरी किस्मों से तुलना

चीकू (सपोटा) की वे सभी किस्में, जिनका पेज इस साइट पर है, एक साथ देखें। जो किस्म आप अभी देख रहे हैं, उसकी पंक्ति रंग से अलग दिखती है।

किस्मकिसके लिए ठीकफल कब सेउपजराज्य
Baramasiपारंपरिक चीकू, जिसे तभी लगाइए जब उसे फलते देख सकें; इसकी चयन CO-2 के पास आँकड़े हैंफल लगभग साल 3 से लगते हैं; फ़ायदे की पैदावार साल 7 से (NHB, सभी चीकू)बारामासी के लिए प्रति पेड़ किलो का आँकड़ा प्रकाशित नहीं (इसकी चयन CO-2: TNAU के अनुसार 175 किलो प्रति पेड़)पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश
CO-3तमिलनाडु की छोटे छत्र वाली, भारी फलने वाली चीकू, जो साल भर फूलती हैफल 4थे साल से शुरू होते हैं (NHB)प्रति पेड़ प्रति वर्ष 157 किग्रा तक (NHB, TNAU)तमिलनाडु
Cricket Ball (Calcutta Large)बड़ा, गोल, मीठा फल, जहाँ महीन गूदे से ज़्यादा आकार मायने रखता होफल लगभग साल 3 से लगते हैं; फ़ायदे की पैदावार साल 7 से (NHB, सभी चीकू)प्रति पेड़ किलो का आँकड़ा प्रकाशित नहीं; दो परीक्षणों में सबसे बड़ा फल (123.2 ग्राम और 135 ग्राम)तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश
DHS-1कर्नाटक के सूखे उत्तर के लिए बड़े फल वाली, भारी फलने वाली चीकू, जहाँ एक परीक्षण में प्रति पेड़ 156 किलो मिलाफल लगभग साल 3 से लगते हैं; फ़ायदे की पैदावार साल 7 से (NHB, सभी चीकू)उत्तरी कर्नाटक के शुष्क क्षेत्र के एक परीक्षण में पुराने पेड़ों पर 156.25 किग्रा/पेड़कर्नाटक
Guthiपारंपरिक मध्यम ऊँचाई की चीकू; ज़्यादातर किसानों के लिए इसकी सुधरी चयन PKM-1 बेहतर पौधा हैफल लगभग साल 3 से लगते हैं; फ़ायदे की पैदावार साल 7 से (NHB, सभी चीकू)प्रति पेड़ किलो का आँकड़ा प्रकाशित नहींआंध्र प्रदेश, तमिलनाडु
Kalipattiपश्चिम भारत की मंडियों के लिए मुलायम, मीठी खाने वाली चीकू, जो फलों की सबसे ज़्यादा गिनती के लिए नहीं बल्कि बाज़ार की पहचान के लिए लगाई जाती हैफल लगभग साल 3 से लगते हैं; फ़ायदे की पैदावार साल 7 से (NHB, सभी चीकू)पूरे बढ़े पेड़ पर 350–400 फल प्रति पेड़ (NHB)महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक
Palaयही पेजआंध्र प्रदेश और तमिलनाडु की स्थानीय मंडियों के लिए जल्दी तैयार होने वाली, बहुत मीठी छोटी चीकूफल लगभग साल 3 से लगते हैं; फ़ायदे की पैदावार साल 7 से (NHB, सभी चीकू)ज़्यादा पैदावार वाली (NHB); प्रति पेड़ किलो का आँकड़ा प्रकाशित नहींआंध्र प्रदेश, तमिलनाडु

इस फ़सल के कैलकुलेटर

आगे के हिसाब यहाँ कर लीजिए — कितना बीज ख़रीदें, बोरा अंकुरित होगा या नहीं, खाद का ख़र्च कितना बैठेगा, और चीकू (सपोटा) का भाव क्या चल रहा है।

सब्सिडी और सरकारी मदद

चीकू (सपोटा) के बीज या रोपण सामग्री की लागत में मदद करने वाली योजनाएँ। नियम और आवेदन का तरीक़ा हर योजना के पेज पर है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या पाला किस्म और पाला रूटस्टॉक एक ही हैं?

नहीं। TNAU चीकू की कलम के रूटस्टॉक का नाम मैनिलकारा हेक्सैंड्रा बताता है, जिसे स्थानीय व्यापार में पाला कहा जाता है (यह खिरनी का पेड़ है)। पाला किस्म चीकू (मैनिलकारा ज़ैपोटा) है, जिसके फल छोटे, अंडाकार और मीठे होते हैं। पौधे मँगवाते समय कहिए 'पाला किस्म, कलमी' और पूछिए कि कौन-सा रूटस्टॉक लगा है।

पाला के कितने फल एक किलो होते हैं, और यह क्यों मायने रखता है?

32.09 ग्राम प्रति फल पर लगभग 31 फल एक किलो बनाते हैं। 123.2 ग्राम की क्रिकेट बॉल के लिए यह लगभग 8 है। यानी हर किलो के लिए मज़दूर पाला के लगभग चार गुना फल तोड़ता, छाँटता और पैक करता है। यह एक परीक्षण के औसत से निकला हिसाब है। तुड़ाई की दर तय करने से पहले अपने फल गिनकर देखिए।

पाला में फल लगने से तुड़ाई तक कितना समय लगता है?

आंध्र के परीक्षण में लगभग 195 दिन (194.66), 11 किस्मों में सबसे जल्दी वाली तीन में से एक। PKM-1 को 189 दिन और सिंगापुर को 192 लगे। क्रिकेट बॉल को लगभग 258 लगे। टहनी पर कम समय का मतलब है कि आप उसी पेड़ पर जल्दी लौट सकते हैं, पर दिन गिनकर नहीं, पकने के लक्षण देखकर तोड़िए।

पाला के फल गुच्छों में लगना फ़ायदा है या नुक़सान?

NHB बताता है कि पाला का फल गुच्छों में लगता है, जबकि कालीपत्ती का अकेला। गुच्छे का मतलब छोटी जगह में बहुत फल हो सकता है, जो NHB की बताई ज़्यादा पैदावार से मेल खाता है। पर सटे हुए छोटे फल तोड़ने और छाँटने में धीमे पड़ते हैं। NHB तुड़ाई के समय का आँकड़ा नहीं देता, इसलिए कुछ पेड़ों पर ख़ुद समय नापिए।

क्या पाला को आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के बाहर उगा सकते हैं?

NHB सिर्फ़ ये दो राज्य गिनाता है, और कहीं और का कोई नतीजा नहीं देता। चीकू आम तौर पर 1,250–2,500 मिलीमीटर बारिश वाला गर्म, नम मौसम पसंद करता है, और 43°C से ऊपर फूल झड़ते हैं। कहीं और लगाना हो तो अपने कृषि विज्ञान केंद्र से पूछिए और पूरा खंड लगाने से पहले कुछ पेड़ लगाइए।

स्रोत: Varieties — NHB, Sapota, Planting — NHB, Sapota, Manuring and fertilization — NHB, Sapota, Irrigation — NHB, Sapota, Harvesting — NHB, Sapota, Soil and climate — NHB, Sapota, Sapota — TNAU Agritech Portal, Horticulture: Fruits, Sapota varieties — TNAU Agritech Portal. संपादकीय नीति.