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Technical Kisanखेती, तकनीक के साथ
पालकरबीखुली-परागितअंतिम अपडेट: 20 अक्टूबर 2026

All Green

सितंबर की बुवाई के लिए जल्दी वाली खुले परागण की पालक, एक-से, कोमल हरे पत्तों और बिना कटे किनारों के साथ। पूसा ज्योति इसी की संतति से चुनी गई।

सीज़नरबी
पकने की अवधिपहली कटाई लगभग 30 दिन में; बोने के लगभग 75 दिन बाद बीज के डंठल बनते हैं
अपेक्षित उपजहरी पत्तियों की 125 क्विंटल/हेक्टेयर
उपयुक्त मिट्टीदोमट

ज़रूरी तथ्य

फसल
पालक
प्रकार
खुली-परागित
सीज़न
रबी
पकने की अवधि
पहली कटाई लगभग 30 दिन में; बोने के लगभग 75 दिन बाद बीज के डंठल बनते हैं
बीज दर
सर्दी की फ़सल 10–15 किलो प्रति हेक्टेयर; गर्मी की फ़सल 25–30 किलो प्रति हेक्टेयर; बीज रात भर भिगोएँ (पाठ्य-नोट)
अपेक्षित उपज
हरी पत्तियों की 125 क्विंटल/हेक्टेयर
उपयुक्त मिट्टी
दोमट
रोग-प्रतिरोध
कोई खास रोग-प्रतिरोध नहीं। पत्ती धब्बा और माहू पर नज़र रखें

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता और फ़सल की देखभाल पर निर्भर करती है।

इस किस्म के बारे में

ऑल ग्रीन खुले परागण वाली पालक (पालक-चुकंदर) है और सितंबर की बुवाई के लिए जल्दी वाली किस्म है। इसके पत्ते हरे, एक-से और कोमल होते हैं, किनारे बिना कटे। बोने के लगभग 75 दिन बाद पौधों में बीज के डंठल निकल आते हैं, इसलिए पत्तों की फ़सल उससे पहले काटनी होती है। एक विश्वविद्यालय के पाठ्य-नोट में हरी पत्तियों की औसत उपज 125 क्विंटल/हेक्टेयर दी गई है। ICAR-CIARI पोर्ट ब्लेयर के बुलेटिन ने, जिसने इसे द्वीपों की परिस्थिति में परखा, 3–5 महीने में 15–20 दिन के अंतर पर ली गई 6–7 कटाइयों से 9–12 टन/हेक्टेयर बताया है — लगभग वही आँकड़ा। पूसा ज्योति ऑल ग्रीन की कोल्चिसिन से उपचारित संतति में चयन से बनी।

क्या यह किस्म आपके लिए ठीक है?

सितंबर की बुवाई के लिए जल्दी वाली पालक चाहिए जिसके पत्ते एक-से और कोमल हों, तो ऑल ग्रीन चुनिए। एक विश्वविद्यालय का पाठ्य-नोट औसत उपज 125 क्विंटल/हेक्टेयर बताता है और कहता है कि बोने के लगभग 75 दिन बाद बीज के डंठल बनते हैं। इसलिए कटाइयाँ उससे काफ़ी पहले की योजना में रखिए। यह राष्ट्रीय चेकलिस्ट में पूसा भारती (500 क्विंटल/हेक्टेयर), पूसा ज्योति (425 क्विंटल/हेक्टेयर) और पूसा हरित (260 क्विंटल/हेक्टेयर) के आँकड़ों से कम है, हालाँकि स्रोत अलग ढंग से नापते हैं। उपज ही लक्ष्य है तो पूसा भारती या पूसा ज्योति, और देर से बीज पर चढ़ने वाली, PAU की सलाह वाली पालक चाहिए तो पंजाब ग्रीन चुनिए।

बुवाई और खेती

  • बुवाई का समयइस जल्दी वाली किस्म के लिए सितंबर। पालक आम तौर पर मैदानों में मुख्य फ़सल के रूप में सितंबर–नवंबर में, और शुरुआती वसंत और बरसात की शुरुआत में भी बोई जाती है
  • बीज दरसर्दी की फ़सल 10–15 किलो प्रति हेक्टेयर; गर्मी की फ़सल 25–30 किलो प्रति हेक्टेयर; बीज रात भर भिगोएँ (पाठ्य-नोट)
  • दूरीकतारें 25–30 सेमी की दूरी पर; पौधों के बीच 5–10 सेमी तक छँटाई
  • उर्वरकप्रति हेक्टेयर: 250–300 क्विंटल गोबर की खाद, 80–100 किलो N, 60 किलो P और 60 किलो K। सारा P और K और चौथाई N बोते समय; बाक़ी N हर कटाई के बाद 20–25 किलो/हेक्टेयर की तीन खुराकों में (पाठ्य-नोट)

फ़ायदे और ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • सितंबर की बुवाई के लिए जल्दी वाली किस्म
  • एक-से, कोमल हरे पत्ते, किनारे बिना कटे
  • खुले परागण वाली है, इसलिए बीज बचाया जा सकता है

ध्यान रखने योग्य बातें

  • बोने के लगभग 75 दिन बाद बीज के डंठल बनते हैं, इसलिए कटाइयाँ उससे काफ़ी पहले पूरी कर लीजिए
  • 125 क्विंटल/हेक्टेयर का आँकड़ा राष्ट्रीय चेकलिस्ट में पूसा भारती (500 क्विंटल/हेक्टेयर), पूसा ज्योति (425 क्विंटल/हेक्टेयर) और पूसा हरित (260 क्विंटल/हेक्टेयर) के आँकड़ों से कम है, हालाँकि स्रोत अलग ढंग से नापते हैं
  • यह 125 क्विंटल/हेक्टेयर पाठ्य-नोट से है, किसी रिलीज़ पेपर से नहीं। ICAR-CIARI पोर्ट ब्लेयर का बुलेटिन द्वीपों की परिस्थिति में ऑल ग्रीन के लिए 9–12 टन/हेक्टेयर बताता है, जो इसी के क़रीब है, इसलिए लगभग 100–125 क्विंटल/हेक्टेयर को काम का दायरा मानिए
  • कोई खास रोग-रोधकता का दावा नहीं है, इसलिए पत्ती धब्बा और माहू पर नज़र रखिए

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है। स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में सुझाया इलाक़ा एक से ज़्यादा हो सकता है।

  • उत्तर प्रदेश
  • बिहार
  • पंजाब
  • हरियाणा
  • महाराष्ट्र
  • कर्नाटक

75 दिन पर बीज के डंठल से पहले कटाइयों की योजना बनाइए

ऑल ग्रीन में बोने के लगभग 75 दिन बाद बीज के डंठल बन जाते हैं। पहली कटाई लगभग एक महीने में आती है, इसलिए पत्ते के मोटे होने से पहले आपके पास कटाई के लगभग छह हफ़्ते हैं।

PAU पंजाब ग्रीन के लिए कटाइयों के बीच 20–25 दिन सुझाता है, और यही लय यहाँ भी ठीक अंदाज़ा है। 15 सितंबर की बुवाई से पहली कटाई लगभग 15 अक्टूबर, दूसरी लगभग 5–10 नवंबर और तीसरी लगभग 25–30 नवंबर को आती है, लगभग 29 नवंबर के डंठलों से ठीक पहले।

पाठ्य-नोट की सलाह के अनुसार हर कटाई के बाद 20–25 किलो प्रति हेक्टेयर नाइट्रोजन दीजिए और पट्टी में पानी दीजिए। फिर हर दो-तीन हफ़्ते में नई पट्टी बोइए ताकि एक पट्टी सबसे अच्छी अवस्था में रहे जब दूसरी बीज पर चढ़ रही हो।

क्या अपनी रोपाई सामग्री ख़ुद रख सकते हैं?

यह खुली-परागित किस्म है, इसलिए अपनी अच्छी फ़सल का बीज दोबारा बोया जा सकता है। बीज सिर्फ़ रोग-मुक्त पौधों से लीजिए, ठीक से सुखाइए, ठंडी-सूखी जगह रखिए, और हर तीन-चार साल में नया प्रमाणित बीज ले आइए ताकि किस्म बिगड़े नहीं।

दूसरी किस्मों से तुलना

पालक की वे सभी किस्में, जिनका पेज इस साइट पर है, एक साथ देखें। जो किस्म आप अभी देख रहे हैं, उसकी पंक्ति रंग से अलग दिखती है।

किस्मकिसके लिए ठीकपकने की अवधिउपजराज्य
All Greenयही पेजसितंबर में बोई जाने वाली जल्दी पालक, कोमल, एक-से पत्तेपहली कटाई लगभग 30 दिन में; बोने के लगभग 75 दिन बाद बीज के डंठल बनते हैंहरी पत्तियों की 125 क्विंटल/हेक्टेयरउत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र, कर्नाटक
Hisar Selection-23 (HS-23)बार-बार कटाई के लिए तेज़ बढ़ने वाली पालकपहली कटाई लगभग 30 दिन में; 15 दिन के अंतर पर 6–8 कटाइयाँ बताई गई हैंअलग से कोई आँकड़ा प्रकाशित नहींहरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश
Jobner Greenक्षारीय मिट्टी, pH 7.0–10.5, के लिए पालकपहली कटाई लगभग 30 दिन में (पालक की आम सलाह)लगभग 300 क्विंटल/हेक्टेयर (विश्वविद्यालय का पाठ्य-नोट)राजस्थान, हरियाणा, पंजाब
Punjab Greenमीठी, देर से बीज पर चढ़ने वाली पालक, PAU की पूरी सलाह के साथबोने के लगभग 30 दिन बाद पहली कटाई125 क्विंटल/एकड़ (लगभग 310 क्विंटल/हेक्टेयर)पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश
Pusa Bharatiचेकलिस्ट की सबसे ऊँची उपज, चिकने कोमल पत्ते, पूरे भारत की पालकबोने के 30–40 दिन बाद पहली तुड़ाई500 क्विंटल/हेक्टेयरAll over India
Pusa Haritबीज पर बहुत देर से चढ़ने वाली, तेज़ दोबारा बढ़ने वाली पालक, पहाड़ों में अच्छीहर कटाई के बाद तेज़ दोबारा बढ़त; बीज पर बहुत देर से चढ़ती है260 क्विंटल/हेक्टेयरAll over India
Pusa Jyotiसितंबर की बुवाई के लिए विशाल पत्तों वाली, देर से बीज पर चढ़ने वाली पालकपहली कटाई लगभग 30 दिन में; 6–8 कटाइयाँ बताई गई हैं; देर से बीज पर चढ़ती है425 क्विंटल/हेक्टेयरAll over India

इस फ़सल के कैलकुलेटर

आगे के हिसाब यहाँ कर लीजिए — कितना बीज ख़रीदें, बोरा अंकुरित होगा या नहीं, खाद का ख़र्च कितना बैठेगा, और पालक का भाव क्या चल रहा है।

सब्सिडी और सरकारी मदद

पालक के बीज या रोपण सामग्री की लागत में मदद करने वाली योजनाएँ। नियम और आवेदन का तरीक़ा हर योजना के पेज पर है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

ऑल ग्रीन कब बोएँ?

यह सितंबर की बुवाई के लिए ठीक जल्दी वाली किस्म है। पालक आम तौर पर मैदानों में मुख्य फ़सल के रूप में सितंबर–नवंबर में, और शुरुआती वसंत और बरसात की शुरुआत में भी बोई जाती है।

कितना बीज चाहिए?

एक विश्वविद्यालय का पाठ्य-नोट सर्दी की फ़सल के लिए 10–15 किलो प्रति हेक्टेयर और गर्मी की फ़सल के लिए 25–30 किलो प्रति हेक्टेयर बीज बताता है। जमाव अच्छा करने के लिए बोने से पहले बीज रात भर पानी में भिगो दीजिए।

पौधे इतनी जल्दी बीज पर क्यों चढ़ जाते हैं?

ऑल ग्रीन में बोने के लगभग 75 दिन बाद बीज के डंठल बन जाते हैं। उससे पहले काट लीजिए और अगली खेप समय पर बो दीजिए। यही आपकी समस्या है तो पूसा ज्योति और पूसा हरित देर से बीज पर चढ़ने वाली सूचीबद्ध हैं।

पालक को कितनी खाद और उर्वरक चाहिए?

पाठ्य-नोट प्रति हेक्टेयर 250–300 क्विंटल गोबर की खाद, 80–100 किलो N, 60 किलो P और 60 किलो K बताता है। सारा P और K और चौथाई N बोते समय डालिए, और बाक़ी N हर कटाई के बाद 20–25 किलो प्रति हेक्टेयर की तीन खुराकों में ऊपर से दीजिए।

पूसा ज्योति का ऑल ग्रीन से क्या रिश्ता है?

पूसा ज्योति ऑल ग्रीन की कोल्चिसिन से उपचारित संतति से चुनी गई। राष्ट्रीय चेकलिस्ट इसे विशाल पत्तों वाली और देर से बीज पर चढ़ने वाली बताती है, उपज 425 क्विंटल/हेक्टेयर। ऑल ग्रीन पसंद है पर बड़े पत्ते और देर से बीज पर चढ़ना चाहिए तो पूसा ज्योति की एक पट्टी आज़माइए।

125 क्विंटल/हेक्टेयर का आँकड़ा कहाँ से आया है?

एक विश्वविद्यालय के पाठ्य-नोट से, किसी रिलीज़ पेपर से नहीं। सबसे नज़दीकी संस्थागत जाँच ICAR-CIARI पोर्ट ब्लेयर का बुलेटिन है, जो ऑल ग्रीन को 15–20 दिन के अंतर पर ली गई 6–7 कटाइयों से 9–12 टन/हेक्टेयर बताता है। दोनों आँकड़े क़रीब हैं, इसलिए लगभग 100–125 क्विंटल/हेक्टेयर की योजना रखिए और एक मौसम अपनी कटाइयाँ ख़ुद तौल लीजिए।

स्रोत: Palak production technology — ICAR-CIARI, Port Blair (2014), Palak (spinach beet) — university course notes, Rama University. संपादकीय नीति.