बिरसा मुंडा कृषी क्रांती योजना (आदिवासी उपयोजना)
आदिवासी किसानों के लिए सिंचाई सुविधा — नई विहीर के लिए ₹4 लाख तक, साथ ही मरम्मत, सूक्ष्म सिंचाई और पंप सेट अनुदान, MahaDBT से आवेदन।
संचालक: कृषि विभाग, महाराष्ट्र सरकार
- नई विहीर
- ₹4 लाख तक
- विहीर मरम्मत
- ₹1 लाख तक
- प्लास्टिक लाइनिंग
- ₹2 लाख तक
- किसके लिए
- सिर्फ़ ST किसान
परिचय
यह योजना बिरसा मुंडा के नाम पर है और सिर्फ़ अनुसूचित जनजाति के किसानों के लिए है। मकसद सीधा है: आदिवासी किसान के खेत पर पक्का पानी का स्रोत दो — कुआँ, पुराने कुएँ की मरम्मत, प्लास्टिक-लाइन्ड फार्म पॉन्ड, पंप और पाइप — ताकि बारिश पर टिकी ज़मीन सिंचित हो जाए। यह राज्य कृषि बजट के आदिवासी उपयोजना (Tribal Sub Plan) आवंटन से चलती है।
आवेदन MahaDBT पोर्टल (mahadbt.maharashtra.gov.in) से होता है। पहले लॉटरी से चयन होता था; 2025-26 से पहले-आओ-पहले-पाओ का तरीका लागू किया गया है। योजना मुंबई, सिंधुदुर्ग, रत्नागिरी, सातारा, सांगली और कोल्हापुर को छोड़कर बाकी सभी ज़िलों में लागू है — ये ज़िले कम आदिवासी आबादी वाले हैं। हर ज़िले में ज़िला परिषद कृषि विभाग जाँच और वितरण करता है।
आपको क्या मिलता है
लाभ वैसा ही, जैसा राज्य ने अधिसूचित किया है — यहाँ कुछ भी अनुमान नहीं है।
- नई सिंचाई विहीर (नवीन विहीर): ₹4 लाख तक अनुदान।
- पुरानी विहीर मरम्मत (जुनी विहीर दुरुस्ती): ₹1 लाख तक अनुदान।
- इनवेल बोरिंग: ₹40,000 तक।
- पंप सेट: ₹40,000 तक; पंप के लिए बिजली कनेक्शन: ₹20,000 तक।
- फार्म पॉन्ड प्लास्टिक लाइनिंग: ₹2 लाख तक।
- ड्रिप सिंचाई सेट: ₹97,000 तक; स्प्रिंकलर सिंचाई सेट: ₹47,000 तक।
- PVC पाइप: ₹50,000 तक।
कौन पात्र है
राज्य योजनाएँ अपने मानदंड आमतौर पर सूची में नहीं, विवरण में लिखती हैं। यह वही विवरण खोलकर रखा गया है — अंतिम फ़ैसला विभाग के सत्यापन का होता है।
आप पात्र हैं अगर
- महाराष्ट्र का निवासी, अनुसूचित जनजाति (ST) से
- सालाना पारिवारिक आय ₹1.5 लाख से कम
- ज़मीन 0.20 हेक्टेयर से 6 हेक्टेयर के बीच (नई विहीर के लिए कम-से-कम 0.40 हेक्टेयर)
- बाहर रखे ज़िलों (मुंबई, सिंधुदुर्ग, रत्नागिरी, सातारा, सांगली, कोल्हापुर) में नहीं
शामिल नहीं
- ग़ैर-आदिवासी श्रेणी के किसान
- 6 हेक्टेयर से ज़्यादा या 0.20 हेक्टेयर से कम ज़मीन
- मुंबई, सिंधुदुर्ग, रत्नागिरी, सातारा, सांगली और कोल्हापुर ज़िलों के किसान
ज़रूरी दस्तावेज़
शुरू करने से पहले ये तैयार रखें — ज़्यादातर आवेदन हक़ न होने से नहीं, कोई काग़ज़ छूट जाने से रद्द होते हैं।
- आधार कार्ड
- जाति प्रमाणपत्र (अनुसूचित जनजाति)
- आय प्रमाणपत्र (सालाना ₹1.5 लाख से कम)
- 7/12 उतारा और 8-A (ज़मीन का रिकॉर्ड)
- बैंक पासबुक (IFSC सहित)
- पासपोर्ट साइज़ फ़ोटो
आवेदन कैसे करें
केंद्रीय योजना से कम कदम, और आमतौर पर पोर्टल नहीं, एक कार्यालय।
- 1
MahaDBT पर रजिस्टर करें
mahadbt.maharashtra.gov.in पर जाएँ और आधार नंबर से अकाउंट बनाएँ। अपनी किसान प्रोफ़ाइल पूरी करें।
- 2
योजना के लिए आवेदन करें
लॉग इन करें, कृषि विभाग की योजनाओं में "बिरसा मुंडा कृषी क्रांती योजना" ढूँढें, आवेदन फ़ॉर्म भरें और कागज़ात अपलोड करें।
- 3
जाँच और चयन
ज़िला परिषद कृषि अधिकारी आपकी ज़मीन और पात्रता जाँचता है। 2025-26 से पहले-आओ-पहले-पाओ का तरीका है, पहले वाली लॉटरी की जगह।
- 4
अनुदान का वितरण
मंज़ूरी के बाद, काम (कुआँ खुदाई, उपकरण ख़रीद आदि) पूरा होने और निरीक्षण के बाद अनुदान राशि आपके बैंक खाते में आती है।
अगर कुछ गड़बड़ हो
नाम सूची में न हो, या भुगतान अटका हो — विभाग ने ख़ुद जो रास्ता बताया है, वह यहाँ है।
- आवेदन की स्थिति, MahaDBT लॉगिन की समस्या या अनुदान में देरी के लिए अपने ज़िले के ज़िला परिषद कृषि अधिकारी या तालुका कृषि अधिकारी से संपर्क करें। MahaDBT हेल्पडेस्क 022-49150150 / [email protected] पर उपलब्ध है।
- विभाग से आगे, आपले सरकार शिकायत पोर्टल (grievances.maharashtra.gov.in) या CM हेल्पलाइन 1800 120 8040 (टोल-फ्री, सुबह 8 से रात 8 बजे) पर शिकायत दर्ज करें। महाराष्ट्र में पोर्टल शिकायतों के लिए 21 कार्य-दिवस का निपटान नियम है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या यह योजना सिर्फ़ अनुसूचित जनजाति किसानों के लिए है?
हाँ। यह आदिवासी उपयोजना आवंटन से चलती है और सिर्फ़ वैध ST जाति प्रमाणपत्र वाले किसानों के लिए है। SC किसानों के लिए इसी तरह की योजना — डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर कृषि स्वावलंबन योजना — अलग से है।
क्या एक ही योजना में नई विहीर और सूक्ष्म सिंचाई दोनों के लिए आवेदन कर सकते हैं?
हाँ। योजना में कई घटक हैं — किसान नई विहीर के साथ-साथ ड्रिप/स्प्रिंकलर सिंचाई, पंप सेट और PVC पाइप के लिए भी आवेदन कर सकता है। हर घटक की अपनी अनुदान सीमा है।
कम-से-कम कितनी ज़मीन चाहिए?
सामान्य न्यूनतम 0.20 हेक्टेयर है। नई विहीर के लिए कम-से-कम 0.40 हेक्टेयर — सोच यह है कि बहुत छोटी ज़मीन पर कुआँ उतना फ़ायदेमंद नहीं।
कौन-से ज़िले बाहर हैं?
मुंबई, सिंधुदुर्ग, रत्नागिरी, सातारा, सांगली और कोल्हापुर। इन ज़िलों में आदिवासी खेतिहर आबादी कम है, और योजना का बजट ज़्यादा-आदिवासी-घनत्व वाले ज़िलों पर केंद्रित है।
चयन कैसे होता है — लॉटरी या पहले-आओ-पहले-पाओ?
2025-26 से पहले-आओ-पहले-पाओ (पहले आवेदन को पहले प्राथमिकता) लागू है, पहले वाली लॉटरी प्रणाली की जगह।
अनुदान काम से पहले मिलता है या बाद में?
बाद में। काम (कुआँ खुदाई, उपकरण लगाना आदि) पूरा होने और ज़िला परिषद कृषि अधिकारी के निरीक्षण के बाद अनुदान राशि खाते में आती है।
क्या आय की सीमा है?
हाँ। MahaDBT पर पात्रता शर्तों के अनुसार आवेदक की सालाना पारिवारिक आय ₹1.5 लाख से कम होनी चाहिए।
तथ्य 26 सितंबर 2026 को mahadbt.maharashtra.gov.in से जाँचे गए। संपादकीय नीति.
