क्लस्टर में बागवानी योजना (“गाँव की बागवानी, हमारे गौरव की कहानी” के तहत)
गाँव के जो किसान मिलकर फल या सुगंधित फ़सल लगाते हैं, उन्हें प्रति एकड़ ₹1 लाख तक, और ड्रैगन फ्रूट पर ₹2 लाख तक मिलता है।
संचालक: उद्यान निदेशालय, कृषि विभाग, बिहार सरकार
- फल और सुगंधित फ़सलें
- प्रति एकड़ ₹1 लाख तक
- ड्रैगन फ्रूट
- प्रति एकड़ ₹2 लाख तक
- क्लस्टर का आकार
- गाँव में 25 एकड़ (ड्रैगन फ्रूट के लिए 15)
- मंज़ूर लागत 2025-26 से 2027-28
- ₹1,480 लाख
परिचय
फल की खेती में तब ज़्यादा फ़ायदा होता है जब एक गाँव के कई किसान एक ही फ़सल उगाते हैं, क्योंकि ख़रीदार, ढुलाई और सलाह उन तक पहुँचती है। यह योजना बिहार के किसानों को क्लस्टर में बाग लगाने में मदद करती है। यह कृषि विभाग की “गाँव की बागवानी, हमारे गौरव की कहानी” नाम की मुहिम का हिस्सा है।
कृषि विभाग के 18 फ़रवरी 2026 के आदेश से योजना तीन साल, 2025-26 से 2027-28 तक, ₹1,480 लाख (₹14.80 करोड़) की लागत पर मंज़ूर हुई। यह राज्य के सभी 38 ज़िलों में चलेगी। अमरूद, नींबू, एप्पल बेर, बेल, कटहल, आँवला, अनार और सुगंधित पौधों (तुलसी, लेमनग्रास, पामारोज़ा और जावा सिट्रोनेला) पर प्रति एकड़ ₹1 लाख तक मिलता है। ड्रैगन फ्रूट पर प्रति एकड़ ₹2 लाख तक। इस रकम में पौधे शामिल हैं। इसमें खेत की तैयारी, खाद, कीटनाशी, सिंचाई और घेराबंदी का ख़र्च, और शुरुआती सालों के लिए मदद भी गिनी जाती है, जब बाग से कमाई नहीं होती।
क्लस्टर का मतलब है एक राजस्व गाँव में कम से कम 25 एकड़, और ड्रैगन फ्रूट के लिए 15 एकड़। हर किसान 0.25 एकड़ से 10 एकड़ तक का लाभ ले सकता है। 2025-26 में इस योजना में सिर्फ़ पपीता लगाया गया। बाक़ी फ़सलें जून-जुलाई 2026 यानी 2026-27 में लगाई जाती हैं, और विभाग ने 2026-27 का ऑनलाइन फ़ॉर्म खोल दिया है।
पैसा दो हिस्सों में, 65% और 35%, आता है। पहला हिस्सा मिलने से पहले अधिकारी आपके ज़मीन के कागज़ और रोपण की जाँच करते हैं। पौधे मान्यता-प्राप्त नर्सरी से ही लेने हैं — कृषि विश्वविद्यालय की नर्सरी, विभागीय नर्सरी, या ज़िला उद्यान पदाधिकारी और स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र की सलाह से मान्य नर्सरी। दूसरा हिस्सा पौधों की जाँच के बाद मिलता है, जब कम से कम 75% पौधे बचे हों। चयन “पहले आओ, पहले पाओ” के आधार पर होता है, इसलिए जल्दी आवेदन करने वाले को फ़ायदा है।
आपको क्या मिलता है
लाभ वैसा ही, जैसा राज्य ने अधिसूचित किया है — यहाँ कुछ भी अनुमान नहीं है।
- अमरूद, नींबू, एप्पल बेर, बेल, कटहल, आँवला, अनार और सुगंधित पौधों पर प्रति एकड़ ₹1 लाख तक।
- ड्रैगन फ्रूट पर प्रति एकड़ ₹2 लाख तक। रकम में पौधों का ख़र्च शामिल है।
- पैसा दो हिस्सों, 65% और 35%, में सीधे आपके बैंक खाते में आता है।
- सूक्ष्म सिंचाई, ढुलाई का वाहन, भंडारण, छँटाई, ग्रेडिंग और पैकेजिंग जैसी विभाग की दूसरी मदद में प्राथमिकता।
- क्लस्टर का दौरा करने और किसानों को सलाह देने के लिए स्थानीय कृषि अधिकारी तय किया जाता है।
कौन पात्र है
राज्य योजनाएँ अपने मानदंड आमतौर पर सूची में नहीं, विवरण में लिखती हैं। यह वही विवरण खोलकर रखा गया है — अंतिम फ़ैसला विभाग के सत्यापन का होता है।
आप पात्र हैं अगर
- बिहार के किसी भी 38 ज़िलों का किसान, जो राज्य के DBT (प्रत्यक्ष लाभ अंतरण) पोर्टल पर पंजीकृत हो।
- लाभ के लिए 0.25 से 10 एकड़ ज़मीन। ज़मीन के मालिकाना हक़ का प्रमाण या राजस्व रसीद चाहिए। कागज़ों में नाम साफ़ न हो तो वंशावली चाहिए।
- आपका रोपण कम से कम 25 एकड़ के क्लस्टर का हिस्सा हो, एक राजस्व गाँव में (ड्रैगन फ्रूट के लिए 15 एकड़)।
- पपीते के लिए ऐसा किसान भी आवेदन कर सकता है जिसके नाम ज़मीन नहीं है, एकरारनामे के साथ।
- DBT पोर्टल पर पंजीकृत बैंक खाता।
शामिल नहीं
- अपलोड किए ज़मीन के कागज़ या एकरारनामे में कोई भी ग़लती हो तो आवेदन रद्द हो जाता है, और कारण पोर्टल पर दर्ज किया जाता है।
ज़रूरी दस्तावेज़
शुरू करने से पहले ये तैयार रखें — ज़्यादातर आवेदन हक़ न होने से नहीं, कोई काग़ज़ छूट जाने से रद्द होते हैं।
- DBT पोर्टल का पंजीकरण नंबर
- ज़मीन का मालिकाना प्रमाणपत्र या राजस्व रसीद
- वंशावली, अगर ज़मीन के कागज़ों में आपका नाम साफ़ न हो
- एकरारनामा, अगर पपीता अपने नाम की ज़मीन पर नहीं उगा रहे
- DBT पोर्टल पर पंजीकृत बैंक खाते का ब्योरा
आवेदन कैसे करें
केंद्रीय योजना से कम कदम, और आमतौर पर पोर्टल नहीं, एक कार्यालय।
- 1
DBT पोर्टल पर पंजीकरण करें
dbtagriculture.bihar.gov.in पर आधार से पंजीकरण करें। क़रीब दो दिन रुकें, फिर 13 अंकों का पंजीकरण नंबर लेकर आवेदन करें।
- 2
अपना बैंक ब्योरा जाँच लें
फ़ॉर्म कहता है कि आवेदन से पहले DBT पोर्टल पर दिखने वाला बैंक खाता आप ख़ुद जाँच लें। भुगतान उसी खाते में जाएगा।
- 3
उद्यान निदेशालय की साइट पर ऑनलाइन आवेदन करें
horticulture.bihar.gov.in पर “क्लस्टर में बागवानी योजना 2026-27” का फ़ॉर्म खोलें, शर्तों से सहमति का निशान लगाएँ, अपनी फ़सल चुनें और ज़मीन के कागज़ अपलोड करें।
- 4
कार्यादेश पाएँ, पौधे लगाएँ और जाँच कराएँ
पौधे सिर्फ़ मान्यता-प्राप्त नर्सरी से लें। प्रखंड उद्यान पदाधिकारी रोपण की जाँच करते हैं और पैसे का पहला हिस्सा मिलता है, बाक़ी पौधों के बचने की जाँच के बाद।
अगर कुछ गड़बड़ हो
नाम सूची में न हो, या भुगतान अटका हो — विभाग ने ख़ुद जो रास्ता बताया है, वह यहाँ है।
- आवेदन या भुगतान की दिक़्क़त हो तो अपने ज़िला उद्यान पदाधिकारी या प्रखंड उद्यान पदाधिकारी के पास जाएँ। DBT पंजीकरण नंबर और आवेदन नंबर साथ रखें।
- हल न निकले तो बिहार लोक शिकायत lokshikayat.bihar.gov.in पर या 1800-345-6284 पर करें। बिहार क़ानून के तहत शिकायत निपटाने के लिए 60 कामकाजी दिन तय हैं, और अपील दो स्तर पर होती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या क्लस्टर का हिस्सा होना ज़रूरी है?
हाँ। योजना क्लस्टर को पैसा देती है — एक राजस्व गाँव में कम से कम 25 एकड़, या ड्रैगन फ्रूट के लिए 15 एकड़। क्लस्टर बनाने के लिए पड़ोसी किसानों और प्रखंड उद्यान पदाधिकारी से बात करें।
प्रति एकड़ कितना मिलता है?
अमरूद, नींबू, एप्पल बेर, बेल, कटहल, आँवला, अनार और सुगंधित पौधों पर प्रति एकड़ ₹1 लाख तक, और ड्रैगन फ्रूट पर ₹2 लाख तक। ये अधिकतम रकम हैं और इनमें पौधे शामिल हैं।
क्या यह ड्रैगन फ्रूट विकास योजना जैसी ही है?
नहीं। वह 23 ज़िलों में ड्रैगन फ्रूट के लिए मिशन की अलग योजना है। 2025-26 और 2026-27 के उसके आदेश में ₹6.75 लाख प्रति हेक्टेयर लागत का 40%, यानी ₹2.70 लाख प्रति हेक्टेयर, दो हिस्सों में मिलता है। कुछ वेबसाइटें अब भी पहले साल का पुराना ₹1.8 लाख दिखाती हैं। विभाग का अपना निर्देश देखें।
क्या आवेदन की अंतिम तारीख़ है?
विभाग के फ़ॉर्म में कोई अंतिम तारीख़ नहीं दिखती। चयन “पहले आओ, पहले पाओ” पर होता है और पैसा सीमित है, इसलिए जल्दी आवेदन करें।
पहले किसका चयन होता है?
आवेदन आने के क्रम में लिए जाते हैं। चुने गए किसान 78.537% सामान्य, 20% अनुसूचित जाति और 1.463% अनुसूचित जनजाति के अनुपात में होते हैं, और विभाग हर वर्ग में कम से कम 30% महिलाओं को देने की कोशिश करता है।
पैसे का दूसरा हिस्सा कब मिलता है?
जब अधिकारी जाँच लें कि कम से कम 75% पौधे बचे हैं। यह आपके रोपण के हिसाब से 2026-27 या 2027-28 में दिया जाता है।
2025-26 में कौन-सी फ़सलें लगीं?
सिर्फ़ पपीता। बाक़ी फ़सलें जून-जुलाई 2026 (2026-27) में लगाई जाती हैं।
तथ्य 26 सितंबर 2026 को horticulture.bihar.gov.in से जाँचे गए। संपादकीय नीति.
