उत्तर प्रदेश गोपालक योजना
डेयरी यूनिट शुरू करने या बढ़ाने के लिए ₹9 लाख तक का बैंक लोन — सरकार 4% ब्याज देती है, आप सिर्फ़ 3% चुकाते हैं।
संचालक: डेयरी विकास विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार
- लोन सीमा
- ₹9 लाख तक
- ब्याज सब्सिडी
- 4% राज्य सरकार से
- असल ब्याज दर
- ~3% किसान को
- यूनिट आकार
- 5–20 दुधारू पशु
परिचय
उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा दूध उत्पादक है, लेकिन ज़्यादातर दूध दो-तीन जानवर रखने वाले छोटे किसानों से आता है। दस-बीस गायों की डेयरी यूनिट बनाने के लिए जो पूँजी चाहिए वो गाँव के परिवार के पास अमूमन नहीं होती, और बाज़ार ब्याज दर पर लोन लेना फ़ायदे का सौदा नहीं रहता। गोपालक योजना यही कमी पूरी करती है: ₹9 लाख तक का बैंक लोन, जिसमें राज्य सरकार 4% ब्याज खुद भरती है — किसान को असल में सिर्फ़ 3% ब्याज देना पड़ता है।
यह योजना डेयरी विकास विभाग चलाता है और दो तरह के लोगों के लिए है: बेरोज़गार नौजवान जो आजीविका तलाश रहे हैं, और मौजूदा पशुपालक जो अपना काम बढ़ाना चाहते हैं। कम से कम पाँच दुधारू पशु (गाय या भैंस) रखने ज़रूरी हैं, दस-बीस तक बढ़ा सकते हैं। लोन से जानवर ख़रीद, शेड बनवाना, चारे का इंतज़ाम और ज़रूरी उपकरण — सब कवर होता है। आवेदन ज़िला डेयरी विकास अधिकारी के दफ़्तर में जाता है और बैंक से लोन मिलता है।
यह लोन है, अनुदान नहीं — मूलधन लौटाना होगा। सरकार जो देती है वो ब्याज सब्सिडी है, जिससे उधार लेने की लागत किसान क्रेडिट कार्ड जैसी हो जाती है। जो किसान पहले से दूध के लिए पशु रखते हैं — या रखने की सोच रहे हैं — वे नंद बाबा दुग्ध मिशन भी देखें, जो एक अलग योजना है और देसी नस्ल की डेयरी यूनिट पर सीधा अनुदान (लोन नहीं) देती है। दोनों एक-दूसरे की पूरक हैं, विकल्प नहीं।
आपको क्या मिलता है
लाभ वैसा ही, जैसा राज्य ने अधिसूचित किया है — यहाँ कुछ भी अनुमान नहीं है।
- डेयरी यूनिट लगाने या बढ़ाने के लिए ₹9 लाख तक बैंक लोन।
- सरकार 4% ब्याज सब्सिडी देती है — असल उधारी लागत करीब 3%।
- जानवर ख़रीद, शेड निर्माण, चारा व्यवस्था और उपकरण सब कवर।
- बेरोज़गार नौजवान और मौजूदा पशुपालक दोनों के लिए खुला।
कौन पात्र है
राज्य योजनाएँ अपने मानदंड आमतौर पर सूची में नहीं, विवरण में लिखती हैं। यह वही विवरण खोलकर रखा गया है — अंतिम फ़ैसला विभाग के सत्यापन का होता है।
आप पात्र हैं अगर
- उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी
- उम्र 18 साल या उससे ज़्यादा
- बेरोज़गार युवा या मौजूदा पशुपालक
- पशुओं को रखने के लिए पर्याप्त जगह या शेड हो
- कम से कम पाँच दुधारू पशु (गाय या भैंस) रखने होंगे
- सरकारी कर्मचारी या पेंशनभोगी नहीं
शामिल नहीं
- सरकारी कर्मचारी और पेंशनभोगी
- जिनका उसी बैंक में डेयरी क्षेत्र का बकाया लोन पहले से हो
- पाँच से कम दुधारू पशुओं वाली यूनिट
ज़रूरी दस्तावेज़
शुरू करने से पहले ये तैयार रखें — ज़्यादातर आवेदन हक़ न होने से नहीं, कोई काग़ज़ छूट जाने से रद्द होते हैं।
- आधार कार्ड
- उत्तर प्रदेश का निवास / मूल निवास प्रमाणपत्र
- बैंक पासबुक (राष्ट्रीयकृत या सहकारी बैंक का बचत खाता)
- प्रस्तावित डेयरी यूनिट की प्रोजेक्ट रिपोर्ट
- आय प्रमाणपत्र
- पासपोर्ट साइज़ फ़ोटो
- ज़मीन या शेड का मालिकाना / लीज़ दस्तावेज़
आवेदन कैसे करें
केंद्रीय योजना से कम कदम, और आमतौर पर पोर्टल नहीं, एक कार्यालय।
- 1
प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करें
डेयरी यूनिट की रूपरेखा बनाएँ: कितने जानवर, शेड का नक्शा, चारा योजना और अनुमानित दूध उत्पादन। ज़िला डेयरी विकास अधिकारी इसमें मदद कर सकते हैं।
- 2
ज़िला डेयरी विकास कार्यालय में आवेदन करें
दस्तावेज़ों के साथ ज़िला डेयरी विकास अधिकारी के कार्यालय में आवेदन जमा करें। अधिकारी पात्रता जाँचकर बैंक को भेजते हैं।
- 3
बैंक जाँच और मंज़ूरी
बैंक प्रोजेक्ट रिपोर्ट जाँचता है, प्रस्तावित जगह का निरीक्षण करता है और लोन मंज़ूर करता है। ब्याज सब्सिडी अपने आप लागू होती है — अलग से कोई आवेदन नहीं।
- 4
यूनिट शुरू करें और किश्तें चुकाएँ
लोन से जानवर ख़रीदें, शेड बनाएँ और काम शुरू करें। किश्तें बैंक की तय अनुसूची पर सब्सिडी वाली ब्याज दर से चुकानी होंगी।
अगर कुछ गड़बड़ हो
नाम सूची में न हो, या भुगतान अटका हो — विभाग ने ख़ुद जो रास्ता बताया है, वह यहाँ है।
- देरी या अस्वीकृत आवेदन के लिए पहले ब्लॉक पशुचिकित्सा अधिकारी, फिर ज़िला डेयरी विकास अधिकारी से बात करें। आवेदन की रसीद की कॉपी अपने पास रखें।
- विभाग से आगे, UP जनसुनवाई पोर्टल — jansunwai.up.nic.in — या CM हेल्पलाइन 1076 पर शिकायत दर्ज करें। ट्रैक करने के लिए रेफ़रेंस नंबर संभालकर रखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
यह नंद बाबा दुग्ध मिशन से कैसे अलग है?
गोपालक योजना लोन स्कीम है: बैंक पैसा उधार देता है, सरकार ब्याज सब्सिडी देती है। नंद बाबा दुग्ध मिशन सीधा अनुदान है: सरकार यूनिट लागत का हिस्सा DBT से देती है जो वापस नहीं करना होता। दोनों एक-दूसरे की पूरक हैं, विकल्प नहीं।
किस नस्ल की गाय-भैंस चलेगी?
गाय और भैंस दोनों कवर हैं। देसी, संकर या विदेशी — किसी भी दुधारू नस्ल पर रोक नहीं। हालाँकि नंद बाबा की उप-योजनाएँ खासतौर पर देसी नस्ल (साहीवाल, गिर, थारपारकर) को बढ़ावा देती हैं — अगर देसी रखने का इरादा है तो वो भी देखें।
क्या बिना खेती के अनुभव वाला बेरोज़गार भी आवेदन कर सकता है?
हाँ। योजना में बेरोज़गार युवा साफ़ तौर पर एक लाभार्थी वर्ग हैं। एक ठोस प्रोजेक्ट रिपोर्ट और पशुओं के लिए जगह दिखानी होगी, लेकिन पहले से डेयरी का अनुभव होना ज़रूरी शर्त नहीं।
क्या गारंटी या ज़मानत देनी पड़ती है?
बैंक के नियम लागू होते हैं। RBI दिशानिर्देशों के तहत छोटी रकम (आमतौर पर ₹1.6 लाख तक) पर कोई गारंटी नहीं चाहिए। बड़ी रकम पर बैंक गारंटी या ज़मानत माँग सकता है — यह बैंक की नीति पर निर्भर करता है, योजना पर नहीं।
पूरे ₹9 लाख लौटाने होंगे या सिर्फ़ मूलधन?
मूलधन और ब्याज दोनों चुकाने होंगे, लेकिन असल ब्याज दर करीब 3% रहती है क्योंकि राज्य सरकार बैंक दर का 4% खुद चुकाती है। सब्सिडी लोन अवधि भर लागू रहती है — अलग से दावा नहीं करना पड़ता।
क्या गाय की जगह सिर्फ़ भैंस रखी जा सकती है?
हाँ। योजना में गाय और भैंस दोनों शामिल हैं। पश्चिमी UP में मुर्रा भैंस ज़्यादा फ़ैट वाले दूध के लिए आम पसंद है।
मेरे पास पहले से तीन पशु हैं — क्या पाँच और के लिए लोन मिलेगा?
हाँ, योजना नई यूनिट के साथ-साथ मौजूदा यूनिट के विस्तार को भी कवर करती है। विस्तार के बाद कुल मिलाकर कम से कम पाँच दुधारू पशु होने ज़रूरी हैं।
तथ्य 26 सितंबर 2026 को updairydevelopment.gov.in से जाँचे गए। संपादकीय नीति.
