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उत्तर प्रदेशअनुदानसक्रियअपडेट 26 सितंबर 2026

नंद बाबा दुग्ध मिशन

पूरे यूपी में देसी नस्ल की गायों की डेयरी इकाइयाँ बनाने का ₹1,000 करोड़ का मिशन — 2 गायों की घरेलू इकाई से लेकर 25 गायों के व्यावसायिक फ़ार्म तक — 40% सरकारी सब्सिडी सीधे किसान के खाते में।

संचालक: डेयरी विकास विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार

मिशन बजट
₹1,000 करोड़
सब्सिडी
इकाई लागत का 40%, DBT से
सीमा
₹80,000 (2 गायें) – ₹31.25 लाख (25 गायें)
नस्लें
केवल देसी — साहीवाल, गिर आदि

परिचय

उत्तर प्रदेश ने जून 2023 में ₹1,000 करोड़ के बजट से नंद बाबा दुग्ध मिशन शुरू किया। मिशन चार उप-योजनाओं से चलता है, हर एक अलग स्तर के किसान के लिए: मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना (2 देसी गायें, ₹80,000 सब्सिडी), मिनी नंदिनी कृषक समृद्धि योजना (5 गायें), नंदिनी कृषक समृद्धि योजना (10 गायें) और मुख्यमंत्री प्रगतिशील पशुपालक प्रोत्साहन योजना (25 गायें, ₹31.25 लाख तक सब्सिडी)। हर उप-योजना में सरकार इकाई लागत का 40% वहन करती है और डायरेक्ट बेनिफ़िट ट्रांसफ़र से भुगतान करती है।

मिशन पूरी तरह देसी नस्लों — साहीवाल, गिर, थारपारकर, हरियाणा, गंगातीरी — पर केंद्रित है। इसका मकसद दूध उत्पादन जितना ही देसी नस्लों को बचाना और ग्रामीण डेयरी अर्थव्यवस्था को मज़बूत करना है। पशुपालन, चारा प्रबंधन और साफ़-दूध उत्पादन की ट्रेनिंग भी पैकेज का हिस्सा है। कुछ उप-योजनाओं में कम से कम 50% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं, और छोटे-सीमांत किसानों को प्राथमिकता मिलती है। आवेदन और ट्रैकिंग nandbabadugdhmission.up.gov.in पोर्टल से होती है।

आपको क्या मिलता है

लाभ वैसा ही, जैसा राज्य ने अधिसूचित किया है — यहाँ कुछ भी अनुमान नहीं है।

  • डेयरी इकाई की लागत का 40% गैर-वापसी योग्य सरकारी सब्सिडी के रूप में, DBT से सीधे बैंक खाते में।
  • 2 गायों की घरेलू इकाई (₹80,000 सब्सिडी) से लेकर 25 गायों के व्यावसायिक फ़ार्म (₹31.25 लाख तक) तक का विकल्प।
  • पशु ख़रीद, शेड निर्माण, उपकरण और शुरुआती चारा — सिर्फ़ जानवर नहीं, पूरी इकाई कवर होती है।
  • पशुपालन, साफ़-दूध उत्पादन और चारा प्रबंधन की ट्रेनिंग शामिल।
  • चुनिंदा उप-योजनाओं में कम से कम 50% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित।

कौन पात्र है

राज्य योजनाएँ अपने मानदंड आमतौर पर सूची में नहीं, विवरण में लिखती हैं। यह वही विवरण खोलकर रखा गया है — अंतिम फ़ैसला विभाग के सत्यापन का होता है।

आप पात्र हैं अगर

  • उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी
  • छोटा, सीमांत या भूमिहीन किसान, या ग्रामीण डेयरी उद्यमी
  • देसी नस्ल की गायें (साहीवाल, गिर, थारपारकर, हरियाणा, गंगातीरी) पालनी होंगी
  • DBT के लिए आधार से जुड़ा बैंक खाता
  • महिला और SC/ST आवेदकों को प्राथमिकता

शामिल नहीं

  • क्रॉसब्रीड या विदेशी नस्ल की गायें — मिशन केवल देसी नस्लों के लिए है
  • जो आवेदक उसी इकाई पर किसी अन्य केंद्रीय या राज्य डेयरी योजना से पहले से सब्सिडी ले रहे हैं

ज़रूरी दस्तावेज़

शुरू करने से पहले ये तैयार रखें — ज़्यादातर आवेदन हक़ न होने से नहीं, कोई काग़ज़ छूट जाने से रद्द होते हैं।

  • आधार कार्ड
  • बैंक पासबुक (आधार से जुड़ी)
  • शेड के लिए ज़मीन या परिसर का प्रमाण
  • पशु ख़रीद योजना या कोटेशन
  • जाति प्रमाण पत्र (SC/ST प्राथमिकता के लिए)
  • मान्यता प्राप्त डेयरी या पशुपालन संस्थान का प्रशिक्षण प्रमाण पत्र, यदि उपलब्ध हो

आवेदन कैसे करें

केंद्रीय योजना से कम कदम, और आमतौर पर पोर्टल नहीं, एक कार्यालय।

  1. 1

    मिशन पोर्टल पर रजिस्टर करें

    nandbabadugdhmission.up.gov.in पर जाएँ, खाता बनाएँ और अपनी इकाई के आकार के मुताबिक उप-योजना चुनें।

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    आवेदन भरें और दस्तावेज़ अपलोड करें

    ज़मीन/परिसर का विवरण, गाय की नस्ल की पसंद और बैंक खाता दर्ज करें। आधार, पासबुक और शेड प्रमाण अपलोड करें।

  3. 3

    सत्यापन और चयन

    ज़िला डेयरी विकास अधिकारी दस्तावेज़ और परिसर की जाँच करते हैं। चयन सूची तैयार कर पोर्टल पर प्रकाशित की जाती है।

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    इकाई स्थापित करें और सब्सिडी पाएँ

    चयन के बाद पशु ख़रीदें और शेड तैयार करें। फ़ील्ड सत्यापन के बाद 40% सब्सिडी DBT से सीधे बैंक खाते में आ जाती है।

अगर कुछ गड़बड़ हो

नाम सूची में न हो, या भुगतान अटका हो — विभाग ने ख़ुद जो रास्ता बताया है, वह यहाँ है।

  • आवेदन की स्थिति, अस्वीकृति की जानकारी या सब्सिडी ट्रांसफ़र में देरी के लिए ज़िला मुख्यालय में ज़िला डेयरी विकास अधिकारी से संपर्क करें। पोर्टल से मिला आवेदन ID पास रखें।
  • विभाग से आगे, UP जनसुनवाई पोर्टल — jansunwai.up.nic.in — या CM हेल्पलाइन टोल-फ्री 1076 पर शिकायत दर्ज करें। पोर्टल रेफ़रेंस नंबर से ट्रैक करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

इस मिशन में कौन-सी गाय की नस्लें मान्य हैं?

केवल देसी नस्लें — साहीवाल, गिर, थारपारकर, हरियाणा, गंगातीरी और अन्य मान्यता प्राप्त देसी नस्लें। क्रॉसब्रीड या विदेशी नस्लें जैसे HF या जर्सी मान्य नहीं हैं।

सबसे छोटी इकाई कितनी गायों से शुरू कर सकते हैं?

मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना उप-योजना के तहत 2 देसी गायों से। सरकार लगभग ₹2 लाख की इकाई लागत का 40% देती है, यानी करीब ₹80,000 सब्सिडी।

क्या सब्सिडी कर्ज़ है या अनुदान?

यह गैर-वापसी योग्य अनुदान है — इकाई लागत का 40%, DBT से सीधे बैंक खाते में। इसे लौटाना नहीं होता।

क्या महिलाएँ आवेदन कर सकती हैं?

हाँ, और उन्हें प्राथमिकता मिलती है। चुनिंदा उप-योजनाओं में कम से कम 50% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।

क्या आवेदन के लिए पहले से गायें होनी चाहिए?

नहीं। आवेदन ख़रीद योजना के साथ करें। चयन और सत्यापन के बाद गायें ख़रीदी जाती हैं।

क्या इसे किसान क्रेडिट कार्ड लोन के साथ जोड़ सकते हैं?

हाँ। KCC चारा और पशु-चिकित्सा जैसे चालू ख़र्चों के लिए कार्यशील पूंजी देता है; यह मिशन सेटअप सब्सिडी कवर करता है। दोनों अलग-अलग ख़र्चों के लिए हैं।

क्या प्रशिक्षण ज़रूरी है?

मिशन में पशुपालन और साफ़-दूध उत्पादन की ट्रेनिंग शामिल है। मान्यता प्राप्त संस्थान का प्रशिक्षण प्रमाण पत्र चयन में मदद करता है, हालाँकि हर उप-योजना में यह अनिवार्य अस्वीकृति मानदंड नहीं है।

तथ्य 26 सितंबर 2026 को nandbabadugdhmission.up.gov.in से जाँचे गए। संपादकीय नीति.