मुख्य सामग्री पर जाएँ
Technical Kisanखेती, तकनीक के साथ
इलायचीसभी सीज़नप्रकंद / चूसक की रोपण-सामग्री (मलबार प्रकार)अंतिम अपडेट: 19 अक्टूबर 2026

Appangala-1 (Suvasini)

CL-37 की खुले-परागित संतति से IISR की 1997 की मलबार प्रकार की चुनी किस्म, जिसे IISR सुवासिनी और कोडगु कार्डमम-सुवासिनी भी कहा जाता है। IISR 745 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर, 89% मोटी फलियाँ और 8.7% उड़नशील तेल बताता है, और यह थ्रिप्स और छेदक को सहती है।

सीज़नसभी सीज़न
पकने की अवधिफूल आने से पकी फली तक 112 दिन (IISR); पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU)
अपेक्षित उपजऔसत 745 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर; क्षमता 1,322 किग्रा/हेक्टेयर (IISR)
उपयुक्त मिट्टीदोमट

ज़रूरी तथ्य

प्रकार
प्रकंद / चूसक की रोपण-सामग्री (मलबार प्रकार)
सीज़न
सभी सीज़न
पकने की अवधि
फूल आने से पकी फली तक 112 दिन (IISR); पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU)
अपेक्षित उपज
औसत 745 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर; क्षमता 1,322 किग्रा/हेक्टेयर (IISR)
उपयुक्त मिट्टी
दोमट
जारी
1997 में जारी · ICAR-IISR, क्षेत्रीय केंद्र, अप्पांगला, कर्नाटक

इस किस्म के बारे में

अप्पांगला-1 मलबार प्रकार की इलायची है, जिसे कर्नाटक के अप्पांगला में ICAR-IISR के क्षेत्रीय केंद्र ने CL-37 की खुले-परागित संतति से चुनकर 1997 में जारी किया। IISR की किस्म-पेज का शीर्षक कोडगु कार्डमम-सुवासिनी है, और उसकी तालिका इसे अप्पांगला 1 या IISR सुवासिनी कहती है। झुंड 205 सेमी ऊँचा है, 41 कल्ले, प्रति झुंड 37 गुच्छे और हर गुच्छे में 129 फूल, और एक गुच्छे में 60 फलियाँ। फलियाँ फूल आने के 112 दिन बाद पकती हैं, और 89% मोटी हैं, 7.2 मिमी और उससे ऊपर। उड़नशील तेल 8.7%, सूखी निकासी 22%, अल्फा टर्पिनिल एसीटेट 37% और 1,8-सिनिओल 42% है। IISR इसे बहुत अनुकूलित, ऊँची उत्पादन तकनीक के लिए ठीक और खाद-पानी पर अच्छा जवाब देने वाली कहता है, और थ्रिप्स और तना, गुच्छा और फली छेदक को सहने वाली बताता है। वह 2 लाइसेंस दिए जाने की बात लिखता है।

क्या यह किस्म आपके लिए ठीक है?

IISR की लंबे समय से परखी मलबार किस्म चाहिए जो मोटी फलियाँ देती है और खाद-पानी पर अच्छा जवाब देती है, तो अप्पांगला-1 (सुवासिनी) चुनिए। यह अकेली या दूसरी फ़सलों के साथ घनी रोपाई के लिए है। IISR इसे 7.2 मिमी और उससे ऊपर की 89% मोटी फलियाँ देता है, जो उसकी इलायची सूची में सबसे ज़्यादा हिस्सा है, जबकि विजेता में 77% और अविनाश में 51%, और उड़नशील तेल 8.7%। फलियाँ फूल आने के 112 दिन बाद पकती हैं। क़ीमत उपज और रोग-बचाव में है: औसत 745 किग्रा/हेक्टेयर, जबकि अविनाश की 847 और अप्पांगला 2 की 927, और IISR कट्टे या प्रकंद सड़न का कोई दर्जा नहीं देता। आपके खेत में कट्टे है तो विजेता या अप्पांगला 2 चुनिए, और प्रकंद सड़न परेशानी हो तो अविनाश।

मुख्य विशेषताएँ

    पौध प्रकारप्रकंद / चूसक की रोपण-सामग्री (मलबार प्रकार)
    अवधिफूल आने से पकी फली तक 112 दिन (IISR); पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU)
    उपज क्षमताऔसत 745 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर; क्षमता 1,322 किग्रा/हेक्टेयर (IISR)
    रोग-प्रतिरोधथ्रिप्स और तना, गुच्छा और फली छेदक को सहने वाली (IISR); कट्टे या प्रकंद सड़न का कोई दर्जा नहीं
    मिट्टीदोमट
    सीज़नसभी सीज़न

बुवाई और खेती

  • बुवाई का समयरोपाई का सबसे अच्छा समय जून से दिसंबर (TNAU)
  • दूरीIISR अप्पांगला-1 (सुवासिनी) के लिए दूरी नहीं देता। TNAU बड़े प्रकारों के लिए 2.5 x 2 मी और छोटे प्रकारों के लिए 2 x 1.5 मी देता है, 60 x 60 x 60 सेमी के गड्ढों में। अप्पांगला केंद्र से पूछिए कि इस किस्म के लिए वह कौन-सी दूरी सुझाता है।
  • उर्वरकIISR अप्पांगला-1 (सुवासिनी) के लिए अलग खाद-मात्रा नहीं देता। TNAU 25 टन/हेक्टेयर कंपोस्ट के साथ 75 किग्रा N, 75 किग्रा P और 150 किग्रा K प्रति हेक्टेयर देता है, 2 बार में: जून-जुलाई और अक्टूबर-नवंबर।
  • कटाईफलियाँ फूल आने के लगभग 112 दिन बाद पकती हैं। TNAU: पकी फलियाँ हर 15 से 25 दिन में तोड़ें, चरम अक्टूबर-नवंबर में।

मिट्टी और जलवायु

मिट्टी

उपयुक्त मिट्टी
छाया में जंगल की दोमट मिट्टी; अम्लीय और अच्छी निकासी वाली
pH
5.0 to 6.5 (TNAU)

जलवायु

जलवायु
IISR अप्पांगला-1 के लिए छाया की सलाह नहीं देता। TNAU इलायची के लिए आम तौर पर 50 से 60% छाया को मध्यम बताता है और ऊँचाई 600 से 1,500 मी।

उपज और अवधि

पकने की अवधि

फूल आने से पकी फली तक 112 दिन (IISR); पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU)

अपेक्षित उपज

औसत 745 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर; क्षमता 1,322 किग्रा/हेक्टेयर (IISR)

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता और फ़सल की देखभाल पर निर्भर करती है।

कीट और रोग संबंधी बातें

प्रबंधन सुझाव

  • कट्टे: TNAU के अनुसार यह केले के माहू से फैलता है, इसलिए माहू पर वह कीटनाशक चलाएँ जो आपका KVK या मसाला बोर्ड सुझाए।
  • पत्ती की नसों के साथ हल्के धब्बे या धारियाँ दिखाने वाला झुंड निकाल दें। उससे चूसक न लें।
  • अझुकल: TNAU अगस्त की शुरुआत में मानसून से पहले और फिर सितंबर में 1% बोर्डो मिश्रण, 0.25% कॉपर ऑक्सीक्लोराइड या 0.2% मैंकोज़ेब के 3 छिड़काव देता है।

फ़ायदे और ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • 7.2 मिमी और उससे ऊपर की 89% मोटी फलियाँ, IISR की इलायची सूची में सबसे ज़्यादा हिस्सा।
  • 8.7% उड़नशील तेल, विजेता (7.9%), अविनाश (6.7%) और अप्पांगला 2 (6.3%) से ऊपर।
  • थ्रिप्स और तना, गुच्छा और फली छेदक को सहने वाली; खाद-पानी पर अच्छा जवाब देती है।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • अविनाश (847) और अप्पांगला 2 (927) से कम औसत उपज: 745 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर।
  • IISR कट्टे या प्रकंद सड़न का कोई दर्जा नहीं देता, इसलिए इनमें से किसी वाले खेत के लिए यह चुनाव नहीं है।

उपयुक्त क्षेत्र

IISR की किस्म-पेज कर्नाटक के इलायची उगाने वाले सभी इलाक़े बताती है, और उसकी लैंडमार्क पेज केरल का वायनाड भी जोड़ती है।

  • कर्नाटक
  • केरल

एक किस्म, तीन नाम: अप्पांगला-1, सुवासिनी और कोडगु कार्डमम

यह किस्म तीन नर्सरियों में माँगें तो तीन नाम सुन सकते हैं। IISR की किस्म-पेज का शीर्षक कोडगु कार्डमम-सुवासिनी है। IISR की लैंडमार्क-टेक्नोलॉजीज़ पेज इसे अप्पांगला-1 कहती है, और उसकी किस्म-तालिका अप्पांगला 1 या IISR सुवासिनी। तीनों का वर्णन एक ही है: CL-37 की खुले-परागित संतति से चुनी हुई, 745 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर, फूल से 112 दिन, 89% मोटी फलियाँ।

इसे मिलते-जुलते नाम वाली किस्मों से न मिलाइए। अप्पांगला 2 अलग संकर किस्म है जिसमें कट्टे से बचाव है और जो इसके बाद जारी हुई। CCS-1 उसी अप्पांगला केंद्र की अलग लाइन है, जिसे KAU ने गिनाया है, और हमारी CCS-1 पेज बताती है कि उसका नाम क्यों पक्का नहीं है। कूर्ग कार्डमम-1 KAU की तालिका में सुवासिनी के बग़ल में उन्हीं तेल के आँकड़ों के साथ आती है, जो नाम जाँचने का एक और कारण है।

व्यावहारिक जाँच आसान है। नर्सरी से माँ-झुंड का स्रोत पूछिए। पूछिए कि क्या वह IISR के 89% मोटी फलियों और फूल से 112 दिन के वर्णन से मेल खाता है। और इसे दो नामों से माँगिए ताकि गड़बड़ी दिख जाए।

क्या इसका बीज अपने पास रख सकते हैं?

इसे बीज से नहीं उगाते। KAU के अनुसार कम से कम 3 कल्लों वाले प्रकंद लिए जाते हैं, और चूसक की रोपाई से कट्टे फैल सकता है। जहाँ कट्टे बहुत फैला हो वहाँ KAU के अनुसार बीज से बनी पौध ज़्यादा सुरक्षित है, क्योंकि विषाणु बीज से नहीं आता। अप्पांगला-1 (सुवासिनी) के लिए ख़ुद चूसक उन्हीं झुंडों से लें जिनमें पूरे मौसम मोज़ेक नहीं दिखा।

दूसरी किस्मों से तुलना

इलायची की वे सभी किस्में, जिनका पेज इस साइट पर है, एक साथ देखें। जो किस्म आप अभी देख रहे हैं, उसकी पंक्ति रंग से अलग दिखती है।

किस्मकिसके लिए ठीकफल कब सेउपजराज्य
Appangala 2कट्टे वाले इलाक़े; सबसे ज़्यादा केंद्र-उपजफूल आने से पकी फली तक 120 दिन (IISR); पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU)औसत 927 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर; क्षमता 1,393 किग्रा/हेक्टेयर (IISR)कर्नाटक, केरल
Appangala-1 (Suvasini)यही पेजमोटी फलियाँ और ज़्यादा तेल; घनी रोपाईफूल आने से पकी फली तक 112 दिन (IISR); पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU)औसत 745 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर; क्षमता 1,322 किग्रा/हेक्टेयर (IISR)कर्नाटक, केरल
CCS-1जल्दी फ़सल; घनी रोपाईजल्दी पकने वाली (KAU); पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU)क्षमता 1,156 किग्रा/हेक्टेयर (KAU तालिका); CCS-1 नाम से औसत उपज प्रकाशित नहींकर्नाटक, केरल
ICRI-1दक्षिण इडुक्की के बाग जहाँ बारिश बराबर होती है और मोटी फली वाली मलबार किस्म चाहिएजल्दी पकने वाली (KAU); पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU)वर्षा-आधारित में 325 किग्रा और सिंचाई में 650 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर (TNAU eAgri); KAU की सूची में क्षमता 656 किग्रा/हेक्टेयरकेरल
ICRI-2वंडनमेडु, नेल्लियमपथी, अन्नामलाई और मेघमलाई के सिंचित, ऊँचाई वाले बागपहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU); पकने के दिन नहीं दिए गएवर्षा-आधारित में 375 किग्रा और सिंचाई में 760 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर (TNAU eAgri); KAU की सूची में क्षमता 766 किग्रा/हेक्टेयरकेरल, तमिलनाडु
ICRI-3कर्नाटक के इलायची इलाक़े जहाँ प्रकंद सड़न की चिंता हैजल्दी पकने वाली (KAU); पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU)क्षमता 790 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर (KAU किस्म-तालिका); वर्षा-आधारित या सिंचाई का अलग आँकड़ा नहींकर्नाटक
IISR Avinashप्रकंद सड़न वाले खेत और घाटियाँफूल आने से पकी फली तक 115 दिन (IISR); पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU)औसत 847 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर; क्षमता 1,483 किग्रा/हेक्टेयर (IISR)कर्नाटक, केरल
IISR Kaveriकर्नाटक के बाग जिन्हें तेल से भरी फलियाँ और कुछ सूखे से बचाव चाहिएपहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU); IISR फूल से दिन नहीं देतासिंचाई में 482 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर; नमी की कमी में 308 किग्रा/हेक्टेयर; क्षमता 562.5 किग्रा/हेक्टेयर (IISR, AICRPS 2024)कर्नाटक
IISR Manushreeसूखे दौर या कम पानी वाले बागपहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU); IISR फूल से दिन नहीं देतासिंचाई में 550 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर; नमी की कमी में 360 किग्रा/हेक्टेयर; क्षमता 1,325 किग्रा/हेक्टेयर (IISR, AICRPS 2024)केरल, कर्नाटक
IISR Vijethaकट्टे वाले खेत; मोटी फलियाँफूल आने से पकी फली तक 105 दिन (IISR); पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU)औसत 643 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर; क्षमता 979 किग्रा/हेक्टेयर (IISR)कर्नाटक, केरल
MCC-12केरल के वे बाग़ जहाँ छायादार पेड़ कम हैं और आप नाम और रिकॉर्ड वाली वाझुक्का किस्म चाहते हैंMCC-12 की फलन-उम्र नहीं दी गई; TNAU आम इलायची के लिए रोपाई के लगभग 2 साल बाद पहली फ़सल बताता हैक्षमता 620 किग्रा/हेक्टेयर (KAU किस्म-तालिका); वर्षा-आधारित या सिंचाई का अलग आँकड़ा नहींकेरल
MCC-16केरल के कडमकुझी और उडुम्बनचोला इलाक़ों की सिंचित या गीली, दलदली इलायची ज़मीनMCC-16 की फलन-उम्र नहीं दी गई; TNAU आम इलायची के लिए रोपाई के लगभग 2 साल बाद पहली फ़सल बताता हैक्षमता 650 किग्रा/हेक्टेयर (KAU किस्म-तालिका); वर्षा-आधारित या सिंचाई का अलग आँकड़ा नहींकेरल
MCC-40केरल के वे बाग़ जो सिर्फ़ बारिश पर चलते हैं और जहाँ आप जल्दी फलने वाली वाझुक्का किस्म चाहते हैंजल्दी फलने वाली (KAU), पर उम्र या महीने नहीं दिए; TNAU आम इलायची के लिए रोपाई के लगभग 2 साल बाद पहली फ़सल बताता हैक्षमता वर्षा-आधारित हाल में 443 किग्रा/हेक्टेयर (KAU किस्म-तालिका)केरल
Mudigere-1छोटे कद का झुंड; मलनाड की पहाड़ियाँपहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU, इलायची के लिए आम तौर पर)स्रोत अलग-अलग हैं: क्षमता 1,000 किग्रा/हेक्टेयर (KAU तालिका) या 250 से 300 किग्रा/हेक्टेयर (मुडिगेरे कॉलेज की तालिका)कर्नाटक
Mudigere-2कर्नाटक की पहाड़ियाँ; प्रकाशित औसत उपजपहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU, इलायची के लिए आम तौर पर)औसत 475 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर (KAU, मुडिगेरे केंद्र)कर्नाटक
Njallani (Green Gold)इडुक्की की पहाड़ियाँ; बहुत मोटी फलियाँक्लोन की रोपाई से पहली फ़सल लगभग 2 साल में (NIF)कोई आधिकारिक आँकड़ा नहीं। NIF 1,000 किग्रा/हेक्टेयर का दावा करता है; KAU के जैविक परीक्षण में 324 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर मिलीकेरल

इस फ़सल के कैलकुलेटर

आगे के हिसाब यहाँ कर लीजिए — कितना बीज ख़रीदें, बोरा अंकुरित होगा या नहीं, खाद का ख़र्च कितना बैठेगा, और इलायची का भाव क्या चल रहा है।

सब्सिडी और सरकारी मदद

इलायची के बीज या रोपण सामग्री की लागत में मदद करने वाली योजनाएँ। नियम और आवेदन का तरीक़ा हर योजना के पेज पर है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या अप्पांगला-1 और सुवासिनी एक ही हैं?

IISR इन्हें एक ही किस्म बताता है। उसकी किस्म-पेज का शीर्षक कोडगु कार्डमम-सुवासिनी है, लैंडमार्क पेज इसे अप्पांगला-1 कहती है, और तालिका अप्पांगला 1 या IISR सुवासिनी, उसी 745 किग्रा/हेक्टेयर और 89% मोटी फलियों के साथ। अपनी नर्सरी से नाम की पुष्टि कर लीजिए, क्योंकि कूर्ग कार्डमम-1 जैसे दूसरे नाम भी चलते हैं।

अप्पांगला-1 किस साल जारी हुई?

अप्पांगला-1 को कर्नाटक के अप्पांगला में ICAR-IISR के क्षेत्रीय केंद्र ने 1997 में जारी किया। IISR की किस्म-पेज और लैंडमार्क पेज दोनों 1997 देती हैं। IISR की किसी किस्म-तालिका में इस किस्म के आगे 1993 दिखे तो जारी होने का साल 1997 ही मानिए।

89% मोटी फलियों का क्या मतलब है?

IISR 7.2 मिमी और उससे ऊपर की फली को मोटी गिनता है, और कहता है कि इस किस्म की 89% फलियाँ इतनी होती हैं। विजेता के लिए वह 77% और अविनाश के लिए 51% देता है। मोटी फलियों का बड़ा हिस्सा आम तौर पर फ़सल का ज़्यादा भाग ऊँचे आकार-दर्जे में रखता है। IISR भाव नहीं देता, इसलिए अपने स्थानीय नीलामी केंद्र से पूछिए कि वह दर्जों का भाव कैसे लगाता है।

क्या अप्पांगला-1 कट्टे से बची रहती है?

IISR इसे कट्टे का कोई दर्जा नहीं देता। वह इस किस्म को सिर्फ़ थ्रिप्स और तना, गुच्छा और फली छेदक को सहने वाली गिनता है। कट्टे वाले खेत के लिए IISR विजेता और अप्पांगला 2 की ओर इशारा करता है, जिन्हें वह बचाव वाली बताता है।

स्रोत: Kodagu Cardamom-Suvasini (Small Cardamom) — ICAR-Indian Institute of Spices Research, Landmark Technologies: cardamom varieties — ICAR-IISR, Spice varieties: significant characteristics of cardamom varieties — ICAR-IISR (ITM-ABI), An appraisal of ICAR-IISR released varieties in spices — Indian Horticulture, July-August 2025 (Shivakumar and others), Cardamom — TNAU Agritech Portal, Production of quality planting materials — Kerala Agricultural University (CELKAU). संपादकीय नीति.