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इलायचीसभी सीज़नप्रकंद / चूसक की रोपण-सामग्री (वाझुक्का प्रकार)अंतिम अपडेट: 20 अक्टूबर 2026

MCC-12

मसाला बोर्ड के ICRI, मायलादुम्पारा (इडुक्की) की वाझुक्का प्रकार की किस्म। KAU अर्ध-खड़ी मंजरियाँ और गहरी हरी लंबोतरी फलियाँ बताता है, केरल में हल्की छाया के लिए, क्षमता 620 किग्रा/हेक्टेयर।

सीज़नसभी सीज़न
पकने की अवधिMCC-12 की फलन-उम्र नहीं दी गई; TNAU आम इलायची के लिए रोपाई के लगभग 2 साल बाद पहली फ़सल बताता है
अपेक्षित उपजक्षमता 620 किग्रा/हेक्टेयर (KAU किस्म-तालिका); वर्षा-आधारित या सिंचाई का अलग आँकड़ा नहीं
उपयुक्त मिट्टीदोमट

ज़रूरी तथ्य

प्रकार
प्रकंद / चूसक की रोपण-सामग्री (वाझुक्का प्रकार)
सीज़न
सभी सीज़न
पकने की अवधि
MCC-12 की फलन-उम्र नहीं दी गई; TNAU आम इलायची के लिए रोपाई के लगभग 2 साल बाद पहली फ़सल बताता है
अपेक्षित उपज
क्षमता 620 किग्रा/हेक्टेयर (KAU किस्म-तालिका); वर्षा-आधारित या सिंचाई का अलग आँकड़ा नहीं
उपयुक्त मिट्टी
दोमट
जारी
ICRI (मसाला बोर्ड), मायलादुम्पारा, इडुक्की · किसी पढ़े स्रोत में साल नहीं

इस किस्म के बारे में

MCC-12 वाझुक्का प्रकार की छोटी इलायची है, जो केरल कृषि विश्वविद्यालय (KAU) की ऊँची उपज वाली किस्मों और चयनों की तालिका में दर्ज है। KAU इसका स्रोत मसाला बोर्ड का भारतीय इलायची अनुसंधान संस्थान (ICRI), मायलादुम्पारा, इडुक्की बताता है। वह अर्ध-खड़ी मंजरियाँ और गहरी हरी लंबोतरी फलियाँ बताता है, जो केरल में हल्की छाया के लिए ठीक हैं, और क्षमता 620 किग्रा/हेक्टेयर। KAU वाझुक्का समूह को मलबार और मैसूर प्रकारों का प्राकृतिक संकर कहता है। इसके पौधे मज़बूत, मंजरियाँ अर्ध-खड़ी और फलियाँ मोटी गोलाकार या अंडाकार होती हैं। यह केरल और तमिलनाडु में 900 से 1,200 मी पर उगती हैं। पढ़े गए किसी स्रोत में MCC-12 की वर्षा-आधारित या सिंचाई की उपज, सूखने की वापसी, तेल का प्रतिशत, रोग का दर्जा, जारी होने का साल या माता-पिता नहीं हैं।

क्या यह किस्म आपके लिए ठीक है?

आपके केरल के खेत में छाया कम हो और आप मसाला बोर्ड के अपने संस्थान की वाझुक्का किस्म चाहते हों, तो MCC-12 चुनिए। KAU इसके बारे में जो एक बात कहता है, हल्की छाया में ठीक बैठना, वह इसकी दोनों बहनों में नहीं है। MCC-16 सिंचित या दलदली ज़मीन के लिए है। और MCC-40 जल्दी फलने के लिए। MCC-12 की KAU क्षमता 620 किग्रा/हेक्टेयर है, जो MCC-16 की 650 से थोड़ी कम है। जो नहीं है वह भी जान लीजिए। पढ़े गए किसी स्रोत में रोग का दर्जा, तेल या सूखने की वापसी, जारी होने का साल और माता-पिता नहीं हैं। परीक्षण-खंड से ज़्यादा लगाने से पहले ICRI मायलादुम्पारा से केंद्र का नतीजा पूछिए।

मुख्य विशेषताएँ

    पौध प्रकारप्रकंद / चूसक की रोपण-सामग्री (वाझुक्का प्रकार)
    अवधिMCC-12 की फलन-उम्र नहीं दी गई; TNAU आम इलायची के लिए रोपाई के लगभग 2 साल बाद पहली फ़सल बताता है
    उपज क्षमताक्षमता 620 किग्रा/हेक्टेयर (KAU किस्म-तालिका); वर्षा-आधारित या सिंचाई का अलग आँकड़ा नहीं
    रोग-प्रतिरोधपढ़े गए किसी स्रोत में रोग का दर्जा नहीं
    मिट्टीदोमट
    सीज़नसभी सीज़न

बुवाई और खेती

  • बुवाई का समयरोपाई का सबसे अच्छा समय जून से दिसंबर (TNAU)
  • दूरीMCC-12 के लिए कोई दूरी नहीं दी गई। TNAU बड़े प्रकारों के लिए 2.5 x 2 मी और छोटे प्रकारों के लिए 2 x 1.5 मी देता है, 60 x 60 x 60 सेमी के गड्ढों में। वाझुक्का के पौधे मज़बूत होते हैं, इसलिए ICRI से पूछिए कि वह कौन-सी दूरी सुझाता है।
  • उर्वरकMCC-12 के लिए अलग खाद-मात्रा नहीं दी गई। TNAU 25 टन/हेक्टेयर कंपोस्ट के साथ 75 किग्रा N, 75 किग्रा P और 150 किग्रा K प्रति हेक्टेयर देता है, 2 बार में: जून-जुलाई और अक्टूबर-नवंबर।
  • कटाईMCC-12 की तुड़ाई का समय नहीं दिया गया। TNAU: पकी फलियाँ हर 15 से 25 दिन में तोड़ें, चरम अक्टूबर-नवंबर में।

मिट्टी और जलवायु

मिट्टी

उपयुक्त मिट्टी
जंगल की दोमट मिट्टी; अम्लीय और अच्छी निकासी वाली
pH
5.0 to 6.5 (TNAU)

जलवायु

जलवायु
KAU के अनुसार MCC-12 केरल में हल्की छाया में ठीक बैठती है। TNAU आम इलायची के लिए 50 से 60% छाया चाहता है, इसलिए हल्की छाया में सूखे महीनों में पत्ती झुलसने और मिट्टी की नमी पर क़रीबी नज़र चाहिए।

उपज और अवधि

पकने की अवधि

MCC-12 की फलन-उम्र नहीं दी गई; TNAU आम इलायची के लिए रोपाई के लगभग 2 साल बाद पहली फ़सल बताता है

अपेक्षित उपज

क्षमता 620 किग्रा/हेक्टेयर (KAU किस्म-तालिका); वर्षा-आधारित या सिंचाई का अलग आँकड़ा नहीं

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता और फ़सल की देखभाल पर निर्भर करती है।

कीट और रोग संबंधी बातें

प्रबंधन सुझाव

  • हल्की छाया: मिट्टी पर मल्च रखिए और सूखे दौर में पानी दीजिए, क्योंकि कम छाया में क्यारी जल्दी सूखती है।
  • कट्टे: केले के माहू पर वह कीटनाशक चलाएँ जो आपका KVK या मसाला बोर्ड सुझाए, और पत्ती की नसों के साथ हल्के धब्बे या धारियाँ दिखाने वाला झुंड निकाल दें।
  • अझुकल: TNAU अगस्त की शुरुआत में मानसून से पहले और फिर सितंबर में 1% बोर्डो मिश्रण, 0.25% कॉपर ऑक्सीक्लोराइड या 0.2% मैंकोज़ेब के 3 छिड़काव देता है।

फ़ायदे और ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • केरल में हल्की छाया के हाल के लिए नाम से सुझाई गई (KAU), जो ज़्यादातर इलायची किस्मों के साथ नहीं है।
  • गहरी हरी लंबोतरी फलियाँ और अर्ध-खड़ी मंजरियाँ (KAU)।
  • क्षमता 620 किग्रा/हेक्टेयर (KAU)।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • कम आँकड़े: उपज का एक ही आँकड़ा, रोग का दर्जा, तेल, सूखने की वापसी, जारी होने का साल या माता-पिता नहीं।
  • सिर्फ़ केरल के लिए सुझाई गई; कर्नाटक या तमिलनाडु का कोई नतीजा नहीं।
  • हल्की छाया में सूखे महीनों में पानी और झुलसने का जोखिम बढ़ता है।

उपयुक्त क्षेत्र

KAU इसे केरल के लिए सुझाता है, हल्की छाया वाले बाग़ों के लिए।

  • केरल

हल्की छाया में MCC-12 लगाना: पहले क्या तय करें

KAU हल्की छाया को MCC-12 की जगह बताता है, और रोपण-सामग्री ख़रीदने से पहले यही सवाल तय करना है। इलायची को आम तौर पर 50 से 60% छाया चाहिए (TNAU)। पतली छाया वाले बाग़ में मिट्टी की नमी जल्दी उड़ती है। इसलिए पहला चूसक लगाने से पहले क्यारियों पर पत्तों का मल्च बिछाइए। और दिसंबर से अप्रैल के सूखे महीनों के लिए पानी की योजना बनाइए।

फिर आँकड़े को ज़मीन से मिलाइए। KAU की 620 किग्रा/हेक्टेयर केंद्र की क्षमता है। TNAU इलायची की आम खेत-उपज 200 से 250 किग्रा/हेक्टेयर बताता है, और ICRI-2 की सिंचित क्षमता 760 है। 620 के भरोसे क़र्ज़ का हिसाब मत बनाइए। जो किस्म आप अभी उगाते हैं उसके पास एक परीक्षण-खंड लगाइए, दो मौसम फलियाँ गिनिए, और तभी बढ़ाइए जब MCC-12 आपकी छाया में टिके।

क्या इसका बीज अपने पास रख सकते हैं?

इसे बीज से नहीं उगाते। KAU के अनुसार कम से कम 3 कल्लों वाले प्रकंद लिए जाते हैं, और चूसक की रोपाई से कट्टे फैल सकता है। जहाँ कट्टे बहुत फैला हो वहाँ KAU के अनुसार बीज से बनी पौध ज़्यादा सुरक्षित है, क्योंकि विषाणु बीज से नहीं आता। चूसक उन्हीं झुंडों से लें जिनमें पूरे मौसम मोज़ेक नहीं दिखा।

दूसरी किस्मों से तुलना

इलायची की वे सभी किस्में, जिनका पेज इस साइट पर है, एक साथ देखें। जो किस्म आप अभी देख रहे हैं, उसकी पंक्ति रंग से अलग दिखती है।

किस्मकिसके लिए ठीकफल कब सेउपजराज्य
Appangala 2कट्टे वाले इलाक़े; सबसे ज़्यादा केंद्र-उपजफूल आने से पकी फली तक 120 दिन (IISR); पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU)औसत 927 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर; क्षमता 1,393 किग्रा/हेक्टेयर (IISR)कर्नाटक, केरल
Appangala-1 (Suvasini)मोटी फलियाँ और ज़्यादा तेल; घनी रोपाईफूल आने से पकी फली तक 112 दिन (IISR); पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU)औसत 745 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर; क्षमता 1,322 किग्रा/हेक्टेयर (IISR)कर्नाटक, केरल
CCS-1जल्दी फ़सल; घनी रोपाईजल्दी पकने वाली (KAU); पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU)क्षमता 1,156 किग्रा/हेक्टेयर (KAU तालिका); CCS-1 नाम से औसत उपज प्रकाशित नहींकर्नाटक, केरल
ICRI-1दक्षिण इडुक्की के बाग जहाँ बारिश बराबर होती है और मोटी फली वाली मलबार किस्म चाहिएजल्दी पकने वाली (KAU); पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU)वर्षा-आधारित में 325 किग्रा और सिंचाई में 650 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर (TNAU eAgri); KAU की सूची में क्षमता 656 किग्रा/हेक्टेयरकेरल
ICRI-2वंडनमेडु, नेल्लियमपथी, अन्नामलाई और मेघमलाई के सिंचित, ऊँचाई वाले बागपहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU); पकने के दिन नहीं दिए गएवर्षा-आधारित में 375 किग्रा और सिंचाई में 760 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर (TNAU eAgri); KAU की सूची में क्षमता 766 किग्रा/हेक्टेयरकेरल, तमिलनाडु
ICRI-3कर्नाटक के इलायची इलाक़े जहाँ प्रकंद सड़न की चिंता हैजल्दी पकने वाली (KAU); पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU)क्षमता 790 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर (KAU किस्म-तालिका); वर्षा-आधारित या सिंचाई का अलग आँकड़ा नहींकर्नाटक
IISR Avinashप्रकंद सड़न वाले खेत और घाटियाँफूल आने से पकी फली तक 115 दिन (IISR); पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU)औसत 847 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर; क्षमता 1,483 किग्रा/हेक्टेयर (IISR)कर्नाटक, केरल
IISR Kaveriकर्नाटक के बाग जिन्हें तेल से भरी फलियाँ और कुछ सूखे से बचाव चाहिएपहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU); IISR फूल से दिन नहीं देतासिंचाई में 482 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर; नमी की कमी में 308 किग्रा/हेक्टेयर; क्षमता 562.5 किग्रा/हेक्टेयर (IISR, AICRPS 2024)कर्नाटक
IISR Manushreeसूखे दौर या कम पानी वाले बागपहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU); IISR फूल से दिन नहीं देतासिंचाई में 550 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर; नमी की कमी में 360 किग्रा/हेक्टेयर; क्षमता 1,325 किग्रा/हेक्टेयर (IISR, AICRPS 2024)केरल, कर्नाटक
IISR Vijethaकट्टे वाले खेत; मोटी फलियाँफूल आने से पकी फली तक 105 दिन (IISR); पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU)औसत 643 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर; क्षमता 979 किग्रा/हेक्टेयर (IISR)कर्नाटक, केरल
MCC-12यही पेजकेरल के वे बाग़ जहाँ छायादार पेड़ कम हैं और आप नाम और रिकॉर्ड वाली वाझुक्का किस्म चाहते हैंMCC-12 की फलन-उम्र नहीं दी गई; TNAU आम इलायची के लिए रोपाई के लगभग 2 साल बाद पहली फ़सल बताता हैक्षमता 620 किग्रा/हेक्टेयर (KAU किस्म-तालिका); वर्षा-आधारित या सिंचाई का अलग आँकड़ा नहींकेरल
MCC-16केरल के कडमकुझी और उडुम्बनचोला इलाक़ों की सिंचित या गीली, दलदली इलायची ज़मीनMCC-16 की फलन-उम्र नहीं दी गई; TNAU आम इलायची के लिए रोपाई के लगभग 2 साल बाद पहली फ़सल बताता हैक्षमता 650 किग्रा/हेक्टेयर (KAU किस्म-तालिका); वर्षा-आधारित या सिंचाई का अलग आँकड़ा नहींकेरल
MCC-40केरल के वे बाग़ जो सिर्फ़ बारिश पर चलते हैं और जहाँ आप जल्दी फलने वाली वाझुक्का किस्म चाहते हैंजल्दी फलने वाली (KAU), पर उम्र या महीने नहीं दिए; TNAU आम इलायची के लिए रोपाई के लगभग 2 साल बाद पहली फ़सल बताता हैक्षमता वर्षा-आधारित हाल में 443 किग्रा/हेक्टेयर (KAU किस्म-तालिका)केरल
Mudigere-1छोटे कद का झुंड; मलनाड की पहाड़ियाँपहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU, इलायची के लिए आम तौर पर)स्रोत अलग-अलग हैं: क्षमता 1,000 किग्रा/हेक्टेयर (KAU तालिका) या 250 से 300 किग्रा/हेक्टेयर (मुडिगेरे कॉलेज की तालिका)कर्नाटक
Mudigere-2कर्नाटक की पहाड़ियाँ; प्रकाशित औसत उपजपहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU, इलायची के लिए आम तौर पर)औसत 475 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर (KAU, मुडिगेरे केंद्र)कर्नाटक
Njallani (Green Gold)इडुक्की की पहाड़ियाँ; बहुत मोटी फलियाँक्लोन की रोपाई से पहली फ़सल लगभग 2 साल में (NIF)कोई आधिकारिक आँकड़ा नहीं। NIF 1,000 किग्रा/हेक्टेयर का दावा करता है; KAU के जैविक परीक्षण में 324 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर मिलीकेरल

इस फ़सल के कैलकुलेटर

आगे के हिसाब यहाँ कर लीजिए — कितना बीज ख़रीदें, बोरा अंकुरित होगा या नहीं, खाद का ख़र्च कितना बैठेगा, और इलायची का भाव क्या चल रहा है।

सब्सिडी और सरकारी मदद

इलायची के बीज या रोपण सामग्री की लागत में मदद करने वाली योजनाएँ। नियम और आवेदन का तरीक़ा हर योजना के पेज पर है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

MCC-12 क्या है?

मसाला बोर्ड के ICRI, मायलादुम्पारा (इडुक्की) की वाझुक्का प्रकार की छोटी इलायची। KAU इसे अर्ध-खड़ी मंजरियों और गहरी हरी लंबोतरी फलियों के साथ, केरल में हल्की छाया के लिए, 620 किग्रा/हेक्टेयर क्षमता के साथ दर्ज करता है।

क्या MCC-12 को दूसरी इलायची से कम छाया चाहिए?

KAU कहता है कि यह हल्की छाया में ठीक बैठती है, पर प्रतिशत नहीं देता। TNAU आम इलायची के लिए 50 से 60% छाया माँगता है। इसलिए "हल्की" का मतलब सामान्य से कम छाया समझिए, बिना छाया नहीं, और सूखे महीनों में मिट्टी पर मल्च और पानी रखिए।

क्या MCC-12 कट्टे या फली सड़न को सहती है?

पढ़े गए किसी स्रोत ने MCC-12 को रोग का कोई दर्जा नहीं दिया। KAU ICRI-2 को अझुकल और ICRI-3 को प्रकंद सड़न का सहने वाला कहता है, पर MCC-12 के लिए ऐसा कुछ नहीं कहता। आम इलायची की तरह छिड़काव और रोगी झुंड हटाने का काम कीजिए, और चूसक उन्हीं झुंडों से लीजिए जिनमें मोज़ेक नहीं दिखा।

MCC-12, MCC-16 या MCC-40: मेरे लिए कौन-सी?

KAU हर एक को अलग काम देता है। MCC-12: हल्की छाया, 620 किग्रा/हेक्टेयर। MCC-16: कडमकुझी और उडुम्बनचोला इलाक़ों की सिंचित या दलदली ज़मीन, 650। MCC-40: जल्दी फलने वाली, केरल के सब इलायची इलाक़े, वर्षा-आधारित में 443। पहले अपनी ज़मीन से चुनिए, फिर उपज से।

स्रोत: Varieties of cardamom — Kerala Agricultural University (CELKAU), Research highlights, varieties by zone — Spices Board India, Cardamom — TNAU Agritech Portal. संपादकीय नीति.