ICRI-1
मसाला बोर्ड के भारतीय इलायची अनुसंधान संस्थान (मायलादुम्पारा) की जारी मलबार प्रकार की किस्म। KAU इसे जल्दी पकने वाली, खूब फूलने वाली बताता है, जिसकी फलियाँ बहुत मोटी, गहरी हरी और गोल हैं। सिंचाई में लगभग 650 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर, वर्षा-आधारित में 325।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- इलायची
- प्रकार
- प्रकंद / चूसक की रोपण-सामग्री (मलबार प्रकार)
- सीज़न
- सभी सीज़न
- पकने की अवधि
- जल्दी पकने वाली (KAU); पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU)
- अपेक्षित उपज
- वर्षा-आधारित में 325 किग्रा और सिंचाई में 650 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर (TNAU eAgri); KAU की सूची में क्षमता 656 किग्रा/हेक्टेयर
- उपयुक्त मिट्टी
- दोमट
- जारी
- ICRI (मसाला बोर्ड), मायलादुम्पारा, इडुक्की, केरल ने जारी की · किसी पढ़े स्रोत में साल नहीं
इस किस्म के बारे में
ICRI-1 मलबार प्रकार की छोटी इलायची है, जिसे मसाला बोर्ड के भारतीय इलायची अनुसंधान संस्थान (ICRI), मायलादुम्पारा, इडुक्की ने जारी किया। KAU इसे जल्दी पकने वाली, खूब फूलने वाली किस्म बताता है, जिसकी बाली मध्यम आकार की है और फलियाँ गोल, बहुत मोटी और गहरी हरी हैं। यह केरल के दक्षिण इडुक्की इलाक़े के लिए है जहाँ बारिश ठीक से बँटी रहती है। TNAU की eAgri सामग्री वर्षा-आधारित में 325 किग्रा और सिंचाई में 650 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर देती है, सूखने पर 22.9% वापसी और 8.3% उड़नशील तेल के साथ। KAU की तालिका में क्षमता 656 किग्रा/हेक्टेयर है, जो सिंचाई वाले आँकड़े से कुछ ही किलो अलग है। किसी स्रोत में जारी होने का साल, माता-पिता या रोग का दर्जा नहीं है। मसाला बोर्ड ICRI-1 को ICRI-2, 5, 6 और 7 के साथ केरल क्षेत्र की अपनी किस्मों में गिनता है।
क्या यह किस्म आपके लिए ठीक है?
दक्षिण इडुक्की में बाग हो, साल भर बारिश ठीक से बँटी हो, और आप जल्दी और खूब फूलने वाली, बहुत मोटी फली की मलबार किस्म चाहते हों, तो ICRI-1 चुनिए। केरल के बाग के लिए यह उन IISR किस्मों से बेहतर बैठती है जो मुख्यतः कर्नाटक के लिए सुझाई गई हैं। आँकड़े IISR से पुराने हैं: सिंचाई में 650 किग्रा/हेक्टेयर और वर्षा-आधारित में 325, और रोग का कोई दर्जा नहीं। आपके इलाक़े में कट्टे का डर हो तो मसाला बोर्ड से ऐसी किस्म पूछिए जिसका दर्जा मिला हो (IISR की विजेता या अप्पांगला 2)। और 1,000 मी से ऊपर सिंचाई वाला बाग हो तो ICRI-2 देखिए।
मुख्य विशेषताएँ
बुवाई और खेती
- बुवाई का समयरोपाई का सबसे अच्छा समय जून से दिसंबर (TNAU)
- दूरीICRI-1 के लिए कोई दूरी नहीं दी गई। TNAU बड़े प्रकारों के लिए 2.5 x 2 मी और छोटे प्रकारों के लिए 2 x 1.5 मी देता है, 60 x 60 x 60 सेमी के गड्ढों में। मलबार प्रकार और बहुत मोटी फली को देखते हुए ICRI मायलादुम्पारा से पूछिए कि वह कौन-सी दूरी सुझाता है।
- उर्वरकICRI-1 के लिए अलग खाद-मात्रा नहीं दी गई। TNAU 25 टन/हेक्टेयर कंपोस्ट के साथ 75 किग्रा N, 75 किग्रा P और 150 किग्रा K प्रति हेक्टेयर देता है, 2 बार में: जून-जुलाई और अक्टूबर-नवंबर।
- कटाईKAU इसे जल्दी पकने वाली कहता है पर दिन नहीं देता। TNAU: पकी फलियाँ हर 15 से 25 दिन में तोड़ें, चरम अक्टूबर-नवंबर में।
मिट्टी और जलवायु
मिट्टी
- उपयुक्त मिट्टी
- छाया में जंगल की दोमट मिट्टी; अम्लीय और अच्छी निकासी वाली
- pH
- 5.0 to 6.5 (TNAU)
जलवायु
- जलवायु
- KAU इसे दक्षिण इडुक्की में रखता है, जहाँ बारिश साल भर ठीक से बँटी रहती है। वह छाया की सलाह नहीं देता, इसलिए इलायची के आम आँकड़े के तौर पर TNAU की 50 से 60% छाया लीजिए।
उपज और अवधि
पकने की अवधि
जल्दी पकने वाली (KAU); पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU)
अपेक्षित उपज
वर्षा-आधारित में 325 किग्रा और सिंचाई में 650 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर (TNAU eAgri); KAU की सूची में क्षमता 656 किग्रा/हेक्टेयर
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता और फ़सल की देखभाल पर निर्भर करती है।
कीट और रोग संबंधी बातें
मुख्य रोग
प्रबंधन सुझाव
- कट्टे: TNAU के अनुसार यह केले के माहू से फैलता है, इसलिए माहू पर वह कीटनाशक चलाएँ जो आपका KVK या मसाला बोर्ड सुझाए।
- पत्ती की नसों के साथ हल्के धब्बे या धारियाँ दिखाने वाला झुंड निकाल दें। उससे चूसक न लें।
- अझुकल: TNAU अगस्त की शुरुआत में मानसून से पहले और फिर सितंबर में 1% बोर्डो मिश्रण, 0.25% कॉपर ऑक्सीक्लोराइड या 0.2% मैंकोज़ेब के 3 छिड़काव देता है। ICRI-1 का कोई सहनशीलता दर्जा नहीं है, इसलिए इन्हें छोड़िए मत।
फ़ायदे और ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- जल्दी पकने वाली और खूब फूलने वाली (KAU)।
- बहुत मोटी, गहरी हरी, गोल फलियाँ (KAU)।
- सिंचाई में 650 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर, जो TNAU के बताए आम खेत-उपज 200 से 250 किग्रा/हेक्टेयर से काफ़ी ऊपर है।
ध्यान रखने योग्य बातें
- पढ़े गए किसी स्रोत में रोग-दर्जा, जारी होने का साल या माता-पिता नहीं।
- वर्षा-आधारित में उपज सिंचाई की आधी, 325 किग्रा/हेक्टेयर, रहती है।
- बराबर बारिश वाले दक्षिण इडुक्की के लिए ठीक; KAU इसके बाहर कोई इलाक़ा नहीं देता।
उपयुक्त क्षेत्र
KAU केरल के दक्षिण इडुक्की इलाक़े का नाम लेता है, जहाँ बारिश साल भर ठीक से बँटी रहती है।
- केरल
ICRI-1 या ICRI-2: मायलादुम्पारा की कौन-सी किस्म किस बाग के लिए
ICRI-1 और ICRI-2 एक ही संस्थान की हैं और केरल क्षेत्र के लिए साथ गिनी जाती हैं, पर दोनों अलग प्रकार की हैं। ICRI-1 मलबार प्रकार की है, दक्षिण इडुक्की के लिए, जहाँ बारिश ठीक से बँटी रहती है। ICRI-2 मैसूर प्रकार की है जो KAU के अनुसार सिंचाई और ज़्यादा ऊँचाई पर अच्छा करती है। KAU केरल के वंडनमेडु और नेल्लियमपथी तथा तमिलनाडु के अन्नामलाई और मेघमलाई का नाम लेता है।
उपज में दोनों पास हैं, ICRI-2 थोड़ी आगे: 375 वर्षा-आधारित और 760 सिंचाई में, जबकि 325 और 650। तेल ICRI-2 में 9% और ICRI-1 में 8.3% है, और सूखने पर वापसी 22.5% के मुक़ाबले 22.9%। ICRI-2 के साथ अझुकल सहने की टिप्पणी भी है, जबकि ICRI-1 के साथ रोग की कोई टिप्पणी नहीं।
इसलिए नियम ऊँचाई और पानी का है। बराबर बारिश वाला कम ऊँचाई का दक्षिण इडुक्की का बाग ICRI-1 को सूट करता है। ऊँचाई वाला या सिंचित बाग ICRI-2 को।
क्या इसका बीज अपने पास रख सकते हैं?
इसे बीज से नहीं उगाते। KAU के अनुसार कम से कम 3 कल्लों वाले प्रकंद लिए जाते हैं, और चूसक की रोपाई से कट्टे फैल सकता है। जहाँ कट्टे बहुत फैला हो वहाँ KAU के अनुसार बीज से बनी पौध ज़्यादा सुरक्षित है, क्योंकि विषाणु बीज से नहीं आता। चूसक उन्हीं झुंडों से लें जिनमें पूरे मौसम मोज़ेक नहीं दिखा।
दूसरी किस्मों से तुलना
इलायची की वे सभी किस्में, जिनका पेज इस साइट पर है, एक साथ देखें। जो किस्म आप अभी देख रहे हैं, उसकी पंक्ति रंग से अलग दिखती है।
| किस्म | किसके लिए ठीक | फल कब से | उपज | राज्य |
|---|---|---|---|---|
| Appangala 2 | कट्टे वाले इलाक़े; सबसे ज़्यादा केंद्र-उपज | फूल आने से पकी फली तक 120 दिन (IISR); पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU) | औसत 927 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर; क्षमता 1,393 किग्रा/हेक्टेयर (IISR) | कर्नाटक, केरल |
| Appangala-1 (Suvasini) | मोटी फलियाँ और ज़्यादा तेल; घनी रोपाई | फूल आने से पकी फली तक 112 दिन (IISR); पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU) | औसत 745 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर; क्षमता 1,322 किग्रा/हेक्टेयर (IISR) | कर्नाटक, केरल |
| CCS-1 | जल्दी फ़सल; घनी रोपाई | जल्दी पकने वाली (KAU); पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU) | क्षमता 1,156 किग्रा/हेक्टेयर (KAU तालिका); CCS-1 नाम से औसत उपज प्रकाशित नहीं | कर्नाटक, केरल |
| ICRI-1यही पेज | दक्षिण इडुक्की के बाग जहाँ बारिश बराबर होती है और मोटी फली वाली मलबार किस्म चाहिए | जल्दी पकने वाली (KAU); पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU) | वर्षा-आधारित में 325 किग्रा और सिंचाई में 650 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर (TNAU eAgri); KAU की सूची में क्षमता 656 किग्रा/हेक्टेयर | केरल |
| ICRI-2 | वंडनमेडु, नेल्लियमपथी, अन्नामलाई और मेघमलाई के सिंचित, ऊँचाई वाले बाग | पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU); पकने के दिन नहीं दिए गए | वर्षा-आधारित में 375 किग्रा और सिंचाई में 760 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर (TNAU eAgri); KAU की सूची में क्षमता 766 किग्रा/हेक्टेयर | केरल, तमिलनाडु |
| ICRI-3 | कर्नाटक के इलायची इलाक़े जहाँ प्रकंद सड़न की चिंता है | जल्दी पकने वाली (KAU); पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU) | क्षमता 790 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर (KAU किस्म-तालिका); वर्षा-आधारित या सिंचाई का अलग आँकड़ा नहीं | कर्नाटक |
| IISR Avinash | प्रकंद सड़न वाले खेत और घाटियाँ | फूल आने से पकी फली तक 115 दिन (IISR); पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU) | औसत 847 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर; क्षमता 1,483 किग्रा/हेक्टेयर (IISR) | कर्नाटक, केरल |
| IISR Kaveri | कर्नाटक के बाग जिन्हें तेल से भरी फलियाँ और कुछ सूखे से बचाव चाहिए | पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU); IISR फूल से दिन नहीं देता | सिंचाई में 482 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर; नमी की कमी में 308 किग्रा/हेक्टेयर; क्षमता 562.5 किग्रा/हेक्टेयर (IISR, AICRPS 2024) | कर्नाटक |
| IISR Manushree | सूखे दौर या कम पानी वाले बाग | पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU); IISR फूल से दिन नहीं देता | सिंचाई में 550 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर; नमी की कमी में 360 किग्रा/हेक्टेयर; क्षमता 1,325 किग्रा/हेक्टेयर (IISR, AICRPS 2024) | केरल, कर्नाटक |
| IISR Vijetha | कट्टे वाले खेत; मोटी फलियाँ | फूल आने से पकी फली तक 105 दिन (IISR); पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU) | औसत 643 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर; क्षमता 979 किग्रा/हेक्टेयर (IISR) | कर्नाटक, केरल |
| MCC-12 | केरल के वे बाग़ जहाँ छायादार पेड़ कम हैं और आप नाम और रिकॉर्ड वाली वाझुक्का किस्म चाहते हैं | MCC-12 की फलन-उम्र नहीं दी गई; TNAU आम इलायची के लिए रोपाई के लगभग 2 साल बाद पहली फ़सल बताता है | क्षमता 620 किग्रा/हेक्टेयर (KAU किस्म-तालिका); वर्षा-आधारित या सिंचाई का अलग आँकड़ा नहीं | केरल |
| MCC-16 | केरल के कडमकुझी और उडुम्बनचोला इलाक़ों की सिंचित या गीली, दलदली इलायची ज़मीन | MCC-16 की फलन-उम्र नहीं दी गई; TNAU आम इलायची के लिए रोपाई के लगभग 2 साल बाद पहली फ़सल बताता है | क्षमता 650 किग्रा/हेक्टेयर (KAU किस्म-तालिका); वर्षा-आधारित या सिंचाई का अलग आँकड़ा नहीं | केरल |
| MCC-40 | केरल के वे बाग़ जो सिर्फ़ बारिश पर चलते हैं और जहाँ आप जल्दी फलने वाली वाझुक्का किस्म चाहते हैं | जल्दी फलने वाली (KAU), पर उम्र या महीने नहीं दिए; TNAU आम इलायची के लिए रोपाई के लगभग 2 साल बाद पहली फ़सल बताता है | क्षमता वर्षा-आधारित हाल में 443 किग्रा/हेक्टेयर (KAU किस्म-तालिका) | केरल |
| Mudigere-1 | छोटे कद का झुंड; मलनाड की पहाड़ियाँ | पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU, इलायची के लिए आम तौर पर) | स्रोत अलग-अलग हैं: क्षमता 1,000 किग्रा/हेक्टेयर (KAU तालिका) या 250 से 300 किग्रा/हेक्टेयर (मुडिगेरे कॉलेज की तालिका) | कर्नाटक |
| Mudigere-2 | कर्नाटक की पहाड़ियाँ; प्रकाशित औसत उपज | पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU, इलायची के लिए आम तौर पर) | औसत 475 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर (KAU, मुडिगेरे केंद्र) | कर्नाटक |
| Njallani (Green Gold) | इडुक्की की पहाड़ियाँ; बहुत मोटी फलियाँ | क्लोन की रोपाई से पहली फ़सल लगभग 2 साल में (NIF) | कोई आधिकारिक आँकड़ा नहीं। NIF 1,000 किग्रा/हेक्टेयर का दावा करता है; KAU के जैविक परीक्षण में 324 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर मिली | केरल |
इस फ़सल के कैलकुलेटर
आगे के हिसाब यहाँ कर लीजिए — कितना बीज ख़रीदें, बोरा अंकुरित होगा या नहीं, खाद का ख़र्च कितना बैठेगा, और इलायची का भाव क्या चल रहा है।
- बीज दर कैलकुलेटरआपके इलायची के खेत के लिए कितना बीज चाहिए — आपके बोरे के अंकुरण के हिसाब से सुधारा हुआ।
- बीज किस्म खोजकइस साइट की हर इलायची किस्म को राज्य, सीज़न, अवधि और मिट्टी से छानिए।
- खाद कैलकुलेटरइलायची की एनपीके सिफ़ारिश को अपने खेत के हिसाब से यूरिया, डीएपी और एमओपी के बोरों में बदलिए।
- फ़सल लाभ कैलकुलेटरबीज, मज़दूरी और लागत को इस किस्म से मिलने वाली उपज के सामने रखकर देखिए।
- मंडी भाव जाँचकव्यापारी से भाव तय करने से पहले अपनी नज़दीकी मंडी में इलायची का आज का रेट देखिए।
सब्सिडी और सरकारी मदद
इलायची के बीज या रोपण सामग्री की लागत में मदद करने वाली योजनाएँ। नियम और आवेदन का तरीक़ा हर योजना के पेज पर है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
ICRI-1 की उपज 650 है या 656 किग्रा/हेक्टेयर?
दो तालिकाएँ दो पास-पास संख्याएँ देती हैं। TNAU की eAgri सामग्री सिंचाई में 650 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर (वर्षा-आधारित में 325) कहती है। KAU की किस्म-तालिका क्षमता 656 किग्रा/हेक्टेयर देती है। दोनों कुछ ही किलो के फ़र्क़ से एक ही उपज हैं, और कोई भी खेत का औसत नहीं: TNAU आम खेत-उपज 200 से 250 किग्रा/हेक्टेयर बताता है।
क्या इडुक्की के बाहर ICRI-1 अच्छा चुनाव है?
KAU सिर्फ़ केरल के दक्षिण इडुक्की इलाक़े का नाम लेता है जहाँ बारिश ठीक से बँटी रहती है, और मसाला बोर्ड इसे केरल क्षेत्र के लिए गिनता है। कर्नाटक या तमिलनाडु का कोई नतीजा किसी स्रोत में नहीं। दूसरे इलाक़ों में उस इलाक़े के लिए सुझाई किस्म से शुरू कीजिए।
क्या ICRI-1 कट्टे या अझुकल को सहती है?
पढ़े गए किसी स्रोत ने ICRI-1 को कट्टे या अझुकल का दर्जा नहीं दिया। KAU ICRI-2 के लिए अझुकल सहनशीलता और ICRI-3 के लिए प्रकंद सड़न सहनशीलता लिखता है, पर ICRI-1 के आगे कुछ नहीं लिखता। मानसून से पहले और दौरान बोर्डो के आम छिड़काव कीजिए और केले के माहू पर क़ाबू रखिए।
"बहुत मोटी" का भाव पर क्या असर है?
KAU सिर्फ़ इतना कहता है कि फलियाँ बहुत मोटी, गहरी हरी और गोल हैं। IISR की किस्मों की तरह ICRI-1 के लिए मिलीमीटर में दर्जे का आकार नहीं देता। मोटी, हरी फलियों को नीलामी में आम तौर पर बेहतर दर्जा मिलता है। पर भाव नीलामी के दिन पर निर्भर है। इसलिए अपने ख़रीदार या मसाला बोर्ड के नीलामी केंद्र से पूछिए।
स्रोत: Varieties of cardamom — Kerala Agricultural University (CELKAU), Cardamom lecture, high-yielding varieties — TNAU eAgri, Research highlights, varieties by zone — Spices Board India, Cardamom — TNAU Agritech Portal. संपादकीय नीति.
