MCC-40
मसाला बोर्ड के ICRI, मायलादुम्पारा (इडुक्की) की वाझुक्का प्रकार की किस्म। KAU इसे जल्दी फलने वाली, गोलाकार मोटी हरी फलियों वाली और केरल के सभी इलायची इलाक़ों के लिए ठीक बताता है। तालिका में इसका 443 किग्रा/हेक्टेयर का आँकड़ा वर्षा-आधारित लिखा है।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- इलायची
- प्रकार
- प्रकंद / चूसक की रोपण-सामग्री (वाझुक्का प्रकार)
- सीज़न
- सभी सीज़न
- पकने की अवधि
- जल्दी फलने वाली (KAU), पर उम्र या महीने नहीं दिए; TNAU आम इलायची के लिए रोपाई के लगभग 2 साल बाद पहली फ़सल बताता है
- अपेक्षित उपज
- क्षमता वर्षा-आधारित हाल में 443 किग्रा/हेक्टेयर (KAU किस्म-तालिका)
- उपयुक्त मिट्टी
- दोमट
- जारी
- ICRI (मसाला बोर्ड), मायलादुम्पारा, इडुक्की · किसी पढ़े स्रोत में साल नहीं
इस किस्म के बारे में
MCC-40 वाझुक्का प्रकार की छोटी इलायची है, जो केरल कृषि विश्वविद्यालय (KAU) की ऊँची उपज वाली किस्मों और चयनों की तालिका में दर्ज है। KAU इसका स्रोत मसाला बोर्ड का भारतीय इलायची अनुसंधान संस्थान (ICRI), मायलादुम्पारा, इडुक्की बताता है। वह इसे जल्दी फलने वाली किस्म बताता है, गोलाकार मोटी हरी फलियों वाली, केरल के सभी इलायची उगाने वाले इलाक़ों के लिए ठीक, और 443 किग्रा/हेक्टेयर की उपज जो वर्षा-आधारित लिखी है। KAU वाझुक्का समूह को मलबार और मैसूर प्रकारों का प्राकृतिक संकर कहता है। इसके पौधे मज़बूत, मंजरियाँ अर्ध-खड़ी और फलियाँ मोटी गोलाकार या अंडाकार होती हैं। यह केरल और तमिलनाडु में 900 से 1,200 मी पर उगती हैं। पढ़े गए किसी स्रोत में MCC-40 की सिंचाई वाली उपज, सूखने की वापसी, तेल का प्रतिशत, रोग का दर्जा, फलन-उम्र, जारी होने का साल या माता-पिता नहीं हैं।
क्या यह किस्म आपके लिए ठीक है?
वाझुक्का की ऐसी किस्म चाहिए जिसे KAU जल्दी फलने वाली कहता है और केरल के सभी इलायची इलाक़ों के लिए सुझाता है, किसी एक इलाक़े के लिए नहीं, तो MCC-40 चुनिए। यह MCC-12 (हल्की छाया) या MCC-16 (दो नामित इलाक़े) से व्यापक है। इसकी 443 किग्रा/हेक्टेयर की तुलना MCC-12 की 620 या MCC-16 की 650 से मत कीजिए। KAU 443 को वर्षा-आधारित आँकड़ा लिखता है और बाक़ी दोनों पर कोई लेबल नहीं लगाता, इसलिए हो सकता है वे बराबरी के न हों। पढ़े गए किसी स्रोत में रोग का दर्जा, तेल, सूखने की वापसी, जारी होने का साल या माता-पिता नहीं हैं, और "जल्दी" शब्द के पीछे कोई फलन-उम्र नहीं है। ICRI मायलादुम्पारा से पूछिए कि यह आपकी मौजूदा किस्म से कितने महीने पहले फलती है।
मुख्य विशेषताएँ
बुवाई और खेती
- बुवाई का समयरोपाई का सबसे अच्छा समय जून से दिसंबर (TNAU)
- दूरीMCC-40 के लिए कोई दूरी नहीं दी गई। TNAU बड़े प्रकारों के लिए 2.5 x 2 मी और छोटे प्रकारों के लिए 2 x 1.5 मी देता है, 60 x 60 x 60 सेमी के गड्ढों में। ICRI से पूछिए कि इस गोलाकार मोटी फली वाली किस्म के लिए वह कौन-सी दूरी सुझाता है।
- उर्वरकMCC-40 के लिए अलग खाद-मात्रा नहीं दी गई। TNAU 25 टन/हेक्टेयर कंपोस्ट के साथ 75 किग्रा N, 75 किग्रा P और 150 किग्रा K प्रति हेक्टेयर देता है, 2 बार में: जून-जुलाई और अक्टूबर-नवंबर।
- कटाईMCC-40 की तुड़ाई का समय नहीं दिया गया। TNAU: पकी फलियाँ हर 15 से 25 दिन में तोड़ें, चरम अक्टूबर-नवंबर में।
मिट्टी और जलवायु
मिट्टी
- उपयुक्त मिट्टी
- छाया में जंगल की दोमट मिट्टी; अम्लीय और अच्छी निकासी वाली
- pH
- 5.0 to 6.5 (TNAU)
जलवायु
- जलवायु
- KAU केरल के सभी इलायची उगाने वाले इलाक़े कहता है और बारिश या ऊँचाई की सीमा नहीं देता। इसकी 443 किग्रा/हेक्टेयर वर्षा-आधारित आँकड़ा है। TNAU आम इलायची के लिए 50 से 60% छाया माँगता है।
उपज और अवधि
पकने की अवधि
जल्दी फलने वाली (KAU), पर उम्र या महीने नहीं दिए; TNAU आम इलायची के लिए रोपाई के लगभग 2 साल बाद पहली फ़सल बताता है
अपेक्षित उपज
क्षमता वर्षा-आधारित हाल में 443 किग्रा/हेक्टेयर (KAU किस्म-तालिका)
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता और फ़सल की देखभाल पर निर्भर करती है।
कीट और रोग संबंधी बातें
प्रबंधन सुझाव
- जल्दी फलना: पहले साल जवान झुंड को खाद और पानी देते रहिए, क्योंकि कमज़ोर पौधे से ली गई जल्दी की फ़सल उसे धीमा कर देती है।
- कट्टे: केले के माहू पर वह कीटनाशक चलाएँ जो आपका KVK या मसाला बोर्ड सुझाए, और पत्ती की नसों के साथ हल्के धब्बे या धारियाँ दिखाने वाला झुंड निकाल दें।
- अझुकल: TNAU अगस्त की शुरुआत में मानसून से पहले और फिर सितंबर में 1% बोर्डो मिश्रण, 0.25% कॉपर ऑक्सीक्लोराइड या 0.2% मैंकोज़ेब के 3 छिड़काव देता है।
फ़ायदे और ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- KAU जल्दी फलने वाली कहता है, गोलाकार मोटी हरी फलियों के साथ।
- केरल के सभी इलायची उगाने वाले इलाक़ों के लिए ठीक (KAU), तीन MCC किस्मों में सबसे व्यापक सिफ़ारिश।
- वर्षा-आधारित उपज का आँकड़ा, 443 किग्रा/हेक्टेयर, जो बाक़ी दो MCC किस्मों के साथ नहीं है।
ध्यान रखने योग्य बातें
- KAU "जल्दी" शब्द के पीछे कोई फलन-उम्र नहीं देता।
- 443 वर्षा-आधारित आँकड़ा है और बाक़ी MCC किस्मों की बिना लेबल की 620 और 650 के सामने नहीं रखा जा सकता।
- पढ़े गए किसी स्रोत में रोग का दर्जा, तेल, सूखने की वापसी, जारी होने का साल या माता-पिता नहीं।
- सिर्फ़ केरल के लिए सुझाई गई; कर्नाटक या तमिलनाडु का कोई नतीजा नहीं।
उपयुक्त क्षेत्र
KAU इसे केरल के सभी इलायची उगाने वाले इलाक़ों के लिए ठीक बताता है।
- केरल
MCC-40 चुनने से पहले दो लेबल पढ़िए: जल्दी और वर्षा-आधारित
KAU MCC-40 को जल्दी फलने वाली कहता है पर न उम्र देता है, न महीने, न किसी दूसरी किस्म से तुलना। केंद्र की भाषा में जल्दी का मतलब कुछ महीने या एक मौसम हो सकता है, और आम इलायची रोपाई के लगभग दो साल बाद पहली फ़सल देती है (TNAU)। इसलिए यह दावा सवाल पूछने लायक है, योजना बनाने लायक नहीं। ICRI मायलादुम्पारा से पूछिए कि पहली तुड़ाई कितनी जल्दी आती है, और किसी पड़ोसी से पूछिए जो इसे उगाता है।
दूसरा लेबल वर्षा-आधारित है। KAU की तालिका MCC-40 के 443 के पास "वर्षा-आधारित" लिखती है और MCC-12 की 620 या MCC-16 की 650 के पास कुछ नहीं। 443 को तीनों में सबसे कमज़ोर मत पढ़िए। हो सकता है वही अकेली ईमानदारी से लेबल लगी हो। आपका बाग़ सिर्फ़ बारिश पर चलता है तो 443 आपके हाल से मेल खाने वाला आँकड़ा है, और TNAU की 200 से 250 किग्रा/हेक्टेयर आम खेत-उपज इसके पास रखने लायक है।
क्या इसका बीज अपने पास रख सकते हैं?
इसे बीज से नहीं उगाते। KAU के अनुसार कम से कम 3 कल्लों वाले प्रकंद लिए जाते हैं, और चूसक की रोपाई से कट्टे फैल सकता है। जहाँ कट्टे बहुत फैला हो वहाँ KAU के अनुसार बीज से बनी पौध ज़्यादा सुरक्षित है, क्योंकि विषाणु बीज से नहीं आता। चूसक उन्हीं झुंडों से लें जिनमें पूरे मौसम मोज़ेक नहीं दिखा।
दूसरी किस्मों से तुलना
इलायची की वे सभी किस्में, जिनका पेज इस साइट पर है, एक साथ देखें। जो किस्म आप अभी देख रहे हैं, उसकी पंक्ति रंग से अलग दिखती है।
| किस्म | किसके लिए ठीक | फल कब से | उपज | राज्य |
|---|---|---|---|---|
| Appangala 2 | कट्टे वाले इलाक़े; सबसे ज़्यादा केंद्र-उपज | फूल आने से पकी फली तक 120 दिन (IISR); पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU) | औसत 927 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर; क्षमता 1,393 किग्रा/हेक्टेयर (IISR) | कर्नाटक, केरल |
| Appangala-1 (Suvasini) | मोटी फलियाँ और ज़्यादा तेल; घनी रोपाई | फूल आने से पकी फली तक 112 दिन (IISR); पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU) | औसत 745 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर; क्षमता 1,322 किग्रा/हेक्टेयर (IISR) | कर्नाटक, केरल |
| CCS-1 | जल्दी फ़सल; घनी रोपाई | जल्दी पकने वाली (KAU); पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU) | क्षमता 1,156 किग्रा/हेक्टेयर (KAU तालिका); CCS-1 नाम से औसत उपज प्रकाशित नहीं | कर्नाटक, केरल |
| ICRI-1 | दक्षिण इडुक्की के बाग जहाँ बारिश बराबर होती है और मोटी फली वाली मलबार किस्म चाहिए | जल्दी पकने वाली (KAU); पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU) | वर्षा-आधारित में 325 किग्रा और सिंचाई में 650 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर (TNAU eAgri); KAU की सूची में क्षमता 656 किग्रा/हेक्टेयर | केरल |
| ICRI-2 | वंडनमेडु, नेल्लियमपथी, अन्नामलाई और मेघमलाई के सिंचित, ऊँचाई वाले बाग | पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU); पकने के दिन नहीं दिए गए | वर्षा-आधारित में 375 किग्रा और सिंचाई में 760 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर (TNAU eAgri); KAU की सूची में क्षमता 766 किग्रा/हेक्टेयर | केरल, तमिलनाडु |
| ICRI-3 | कर्नाटक के इलायची इलाक़े जहाँ प्रकंद सड़न की चिंता है | जल्दी पकने वाली (KAU); पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU) | क्षमता 790 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर (KAU किस्म-तालिका); वर्षा-आधारित या सिंचाई का अलग आँकड़ा नहीं | कर्नाटक |
| IISR Avinash | प्रकंद सड़न वाले खेत और घाटियाँ | फूल आने से पकी फली तक 115 दिन (IISR); पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU) | औसत 847 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर; क्षमता 1,483 किग्रा/हेक्टेयर (IISR) | कर्नाटक, केरल |
| IISR Kaveri | कर्नाटक के बाग जिन्हें तेल से भरी फलियाँ और कुछ सूखे से बचाव चाहिए | पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU); IISR फूल से दिन नहीं देता | सिंचाई में 482 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर; नमी की कमी में 308 किग्रा/हेक्टेयर; क्षमता 562.5 किग्रा/हेक्टेयर (IISR, AICRPS 2024) | कर्नाटक |
| IISR Manushree | सूखे दौर या कम पानी वाले बाग | पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU); IISR फूल से दिन नहीं देता | सिंचाई में 550 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर; नमी की कमी में 360 किग्रा/हेक्टेयर; क्षमता 1,325 किग्रा/हेक्टेयर (IISR, AICRPS 2024) | केरल, कर्नाटक |
| IISR Vijetha | कट्टे वाले खेत; मोटी फलियाँ | फूल आने से पकी फली तक 105 दिन (IISR); पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU) | औसत 643 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर; क्षमता 979 किग्रा/हेक्टेयर (IISR) | कर्नाटक, केरल |
| MCC-12 | केरल के वे बाग़ जहाँ छायादार पेड़ कम हैं और आप नाम और रिकॉर्ड वाली वाझुक्का किस्म चाहते हैं | MCC-12 की फलन-उम्र नहीं दी गई; TNAU आम इलायची के लिए रोपाई के लगभग 2 साल बाद पहली फ़सल बताता है | क्षमता 620 किग्रा/हेक्टेयर (KAU किस्म-तालिका); वर्षा-आधारित या सिंचाई का अलग आँकड़ा नहीं | केरल |
| MCC-16 | केरल के कडमकुझी और उडुम्बनचोला इलाक़ों की सिंचित या गीली, दलदली इलायची ज़मीन | MCC-16 की फलन-उम्र नहीं दी गई; TNAU आम इलायची के लिए रोपाई के लगभग 2 साल बाद पहली फ़सल बताता है | क्षमता 650 किग्रा/हेक्टेयर (KAU किस्म-तालिका); वर्षा-आधारित या सिंचाई का अलग आँकड़ा नहीं | केरल |
| MCC-40यही पेज | केरल के वे बाग़ जो सिर्फ़ बारिश पर चलते हैं और जहाँ आप जल्दी फलने वाली वाझुक्का किस्म चाहते हैं | जल्दी फलने वाली (KAU), पर उम्र या महीने नहीं दिए; TNAU आम इलायची के लिए रोपाई के लगभग 2 साल बाद पहली फ़सल बताता है | क्षमता वर्षा-आधारित हाल में 443 किग्रा/हेक्टेयर (KAU किस्म-तालिका) | केरल |
| Mudigere-1 | छोटे कद का झुंड; मलनाड की पहाड़ियाँ | पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU, इलायची के लिए आम तौर पर) | स्रोत अलग-अलग हैं: क्षमता 1,000 किग्रा/हेक्टेयर (KAU तालिका) या 250 से 300 किग्रा/हेक्टेयर (मुडिगेरे कॉलेज की तालिका) | कर्नाटक |
| Mudigere-2 | कर्नाटक की पहाड़ियाँ; प्रकाशित औसत उपज | पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU, इलायची के लिए आम तौर पर) | औसत 475 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर (KAU, मुडिगेरे केंद्र) | कर्नाटक |
| Njallani (Green Gold) | इडुक्की की पहाड़ियाँ; बहुत मोटी फलियाँ | क्लोन की रोपाई से पहली फ़सल लगभग 2 साल में (NIF) | कोई आधिकारिक आँकड़ा नहीं। NIF 1,000 किग्रा/हेक्टेयर का दावा करता है; KAU के जैविक परीक्षण में 324 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर मिली | केरल |
इस फ़सल के कैलकुलेटर
आगे के हिसाब यहाँ कर लीजिए — कितना बीज ख़रीदें, बोरा अंकुरित होगा या नहीं, खाद का ख़र्च कितना बैठेगा, और इलायची का भाव क्या चल रहा है।
- बीज दर कैलकुलेटरआपके इलायची के खेत के लिए कितना बीज चाहिए — आपके बोरे के अंकुरण के हिसाब से सुधारा हुआ।
- बीज किस्म खोजकइस साइट की हर इलायची किस्म को राज्य, सीज़न, अवधि और मिट्टी से छानिए।
- खाद कैलकुलेटरइलायची की एनपीके सिफ़ारिश को अपने खेत के हिसाब से यूरिया, डीएपी और एमओपी के बोरों में बदलिए।
- फ़सल लाभ कैलकुलेटरबीज, मज़दूरी और लागत को इस किस्म से मिलने वाली उपज के सामने रखकर देखिए।
- मंडी भाव जाँचकव्यापारी से भाव तय करने से पहले अपनी नज़दीकी मंडी में इलायची का आज का रेट देखिए।
सब्सिडी और सरकारी मदद
इलायची के बीज या रोपण सामग्री की लागत में मदद करने वाली योजनाएँ। नियम और आवेदन का तरीक़ा हर योजना के पेज पर है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
MCC-40 क्या है?
मसाला बोर्ड के ICRI, मायलादुम्पारा (इडुक्की) की वाझुक्का प्रकार की छोटी इलायची। KAU इसे जल्दी फलने वाली किस्म के रूप में दर्ज करता है, गोलाकार मोटी हरी फलियों वाली, केरल के सभी इलायची इलाक़ों के लिए ठीक, और वर्षा-आधारित हाल में 443 किग्रा/हेक्टेयर।
MCC-40 कितनी जल्दी फलती है?
KAU जल्दी फलने वाली कहता है और उम्र या महीने नहीं देता। आम इलायची के लिए TNAU पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद बताता है। ICRI मायलादुम्पारा से पूछिए कि MCC-40 आपकी अभी की किस्म से कितना पहले आती है।
क्या MCC-40 की उपज MCC-12 और MCC-16 से कम है?
तालिका में इसका आँकड़ा कम है (443 बनाम 620 और 650), पर KAU 443 को वर्षा-आधारित लिखता है और बाक़ी दोनों पर कोई लेबल नहीं लगाता। हो सकता है वे बराबरी के न हों, इसलिए ये संख्याएँ इसे साबित नहीं करतीं। तीनों केंद्र की क्षमताएँ हैं, खेत की उपज नहीं।
क्या MCC-40 कट्टे या फली सड़न को सहती है?
पढ़े गए किसी स्रोत ने MCC-40 को रोग का कोई दर्जा नहीं दिया। आम इलायची की तरह छिड़काव और रोगी झुंड हटाने का काम कीजिए। चूसक उन्हीं झुंडों से लीजिए जिनमें मोज़ेक नहीं दिखा। और कट्टा आपकी समस्या हो तो IISR की विजेता या अप्पांगला 2 के बारे में पूछिए। इनका दर्जा मिला है।
स्रोत: Varieties of cardamom — Kerala Agricultural University (CELKAU), Research highlights, varieties by zone — Spices Board India, Cardamom — TNAU Agritech Portal. संपादकीय नीति.
