ICRI-3
मसाला बोर्ड के ICRI की मलबार प्रकार की किस्म, जो उसके क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, सकलेशपुर (कर्नाटक) के पास है। KAU इसे जल्दी पकने वाली, बिना रोएँ की पत्तियों वाली, लंबोतरी मोटी तोता-हरी फलियों वाली और प्रकंद सड़न को सहने वाली बताता है। KAU की सूची में क्षमता 790 किग्रा/हेक्टेयर।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- इलायची
- प्रकार
- प्रकंद / चूसक की रोपण-सामग्री (मलबार प्रकार)
- सीज़न
- सभी सीज़न
- पकने की अवधि
- जल्दी पकने वाली (KAU); पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU)
- अपेक्षित उपज
- क्षमता 790 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर (KAU किस्म-तालिका); वर्षा-आधारित या सिंचाई का अलग आँकड़ा नहीं
- उपयुक्त मिट्टी
- दोमट
- जारी
- ICRI (मसाला बोर्ड), क्षेत्रीय केंद्र सकलेशपुर, कर्नाटक · किसी पढ़े स्रोत में साल नहीं
इस किस्म के बारे में
ICRI-3 मसाला बोर्ड के भारतीय इलायची अनुसंधान संस्थान (ICRI) की मलबार प्रकार की छोटी इलायची है। KAU इसका स्रोत ICRI का क्षेत्रीय केंद्र, सकलेशपुर (कर्नाटक) बताता है। वह इसे जल्दी पकने वाली, बिना रोएँ की पत्तियों वाली, लंबोतरी मोटी तोता-हरी फलियों वाली और प्रकंद सड़न को सहने वाली किस्म कहता है। यह कर्नाटक के इलायची उगाने वाले इलाक़े के लिए बताई गई है। KAU की किस्म-तालिका में क्षमता 790 किग्रा/हेक्टेयर है। मसाला बोर्ड ICRI-3 और ICRI-8 को कर्नाटक क्षेत्र की अपनी किस्में गिनता है। पढ़े गए किसी स्रोत में वर्षा-आधारित या सिंचाई की उपज, सूखने की वापसी, तेल का प्रतिशत, जारी होने का साल या माता-पिता नहीं।
क्या यह किस्म आपके लिए ठीक है?
बाग कर्नाटक के इलायची इलाक़े में हो और प्रकंद सड़न ने पौधों को मारा हो, तो ICRI-3 चुनिए। यही ICRI किस्म है जिसे KAU प्रकंद सड़न को सहने वाली कहता है, यह जल्दी पकती है, और KAU की तालिका में इसकी क्षमता, 790 किग्रा/हेक्टेयर, तीनों ICRI किस्मों में सबसे ज़्यादा है। उसके सामने इसके आँकड़े सबसे कम हैं। पढ़े गए किसी स्रोत में वर्षा-आधारित या सिंचाई की उपज, तेल या सूखने की वापसी, जारी होने का साल या माता-पिता नहीं। और कट्टे या अझुकल का दर्जा नहीं। कट्टा मुख्य समस्या हो तो IISR की विजेता या अप्पांगला 2 वे किस्में हैं जिनका दर्जा मिला है।
मुख्य विशेषताएँ
बुवाई और खेती
- बुवाई का समयरोपाई का सबसे अच्छा समय जून से दिसंबर (TNAU)
- दूरीICRI-3 के लिए कोई दूरी नहीं दी गई। TNAU बड़े प्रकारों के लिए 2.5 x 2 मी और छोटे प्रकारों के लिए 2 x 1.5 मी देता है, 60 x 60 x 60 सेमी के गड्ढों में। सकलेशपुर के ICRI केंद्र से पूछिए कि वह कौन-सी दूरी सुझाता है।
- उर्वरकICRI-3 के लिए अलग खाद-मात्रा नहीं दी गई। TNAU 25 टन/हेक्टेयर कंपोस्ट के साथ 75 किग्रा N, 75 किग्रा P और 150 किग्रा K प्रति हेक्टेयर देता है, 2 बार में: जून-जुलाई और अक्टूबर-नवंबर।
- कटाईKAU इसे जल्दी पकने वाली कहता है पर दिन नहीं देता। TNAU: पकी फलियाँ हर 15 से 25 दिन में तोड़ें, चरम अक्टूबर-नवंबर में।
मिट्टी और जलवायु
मिट्टी
- उपयुक्त मिट्टी
- छाया में जंगल की दोमट मिट्टी; अम्लीय और अच्छी निकासी वाली
- pH
- 5.0 to 6.5 (TNAU)
जलवायु
- जलवायु
- KAU इसे कर्नाटक के इलायची इलाक़े के लिए सुझाता है और बारिश या ऊँचाई की सीमा नहीं देता। वह छाया की सलाह नहीं देता, इसलिए इलायची के आम आँकड़े के तौर पर TNAU की 50 से 60% छाया लीजिए।
उपज और अवधि
पकने की अवधि
जल्दी पकने वाली (KAU); पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU)
अपेक्षित उपज
क्षमता 790 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर (KAU किस्म-तालिका); वर्षा-आधारित या सिंचाई का अलग आँकड़ा नहीं
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता और फ़सल की देखभाल पर निर्भर करती है।
कीट और रोग संबंधी बातें
मुख्य रोग
प्रबंधन सुझाव
- प्रकंद सड़न: सहनशीलता मदद करती है पर सड़न को बुरी निकासी ही अंदर आने देती है। गड्ढे और क्यारियाँ अच्छी निकासी वाली रखिए।
- कट्टे: केले के माहू पर वह कीटनाशक चलाएँ जो आपका KVK या मसाला बोर्ड सुझाए, और पत्ती की नसों के साथ हल्के धब्बे या धारियाँ दिखाने वाला झुंड निकाल दें।
- अझुकल: TNAU अगस्त की शुरुआत में मानसून से पहले और फिर सितंबर में 1% बोर्डो मिश्रण, 0.25% कॉपर ऑक्सीक्लोराइड या 0.2% मैंकोज़ेब के 3 छिड़काव देता है।
फ़ायदे और ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- प्रकंद सड़न को सहने वाली (KAU)।
- जल्दी पकने वाली, लंबोतरी मोटी तोता-हरी फलियों के साथ (KAU)।
- क्षमता 790 किग्रा/हेक्टेयर, KAU की तालिका में तीनों ICRI किस्मों में सबसे ज़्यादा।
ध्यान रखने योग्य बातें
- तीनों ICRI किस्मों में सबसे कम आँकड़े: उपज का एक ही आँकड़ा, तेल, सूखने की वापसी, जारी होने का साल या माता-पिता नहीं।
- सिर्फ़ कर्नाटक के लिए सुझाई गई; केरल या तमिलनाडु का कोई नतीजा नहीं।
- कट्टे या अझुकल का कोई दर्जा नहीं।
उपयुक्त क्षेत्र
KAU कर्नाटक के इलायची उगाने वाले इलाक़े का नाम लेता है, और मसाला बोर्ड ICRI-3 को ICRI-8 के साथ कर्नाटक क्षेत्र के लिए गिनता है।
- कर्नाटक
ICRI-3: क्या पता है, और रोपाई से पहले क्या पूछें
तीनों ICRI किस्मों में ICRI-3 के बारे में सबसे कम लिखा है। जो स्रोत कहते हैं वह एक-सा है। ये बातें हैं: मलबार प्रकार, जल्दी पकने वाली, बिना रोएँ की पत्तियाँ, लंबोतरी मोटी तोता-हरी फलियाँ, प्रकंद सड़न को सहने वाली, कर्नाटक के लिए, ICRI के सकलेशपुर केंद्र से। KAU की तालिका में 790 किग्रा/हेक्टेयर की क्षमता।
जो नहीं कहते वही रोपण-सामग्री ख़रीदते समय काम की बात है: वर्षा-आधारित और सिंचाई की असली उपज, तेल और सूखने की वापसी, और जारी होने का साल। खेत देने से पहले सकलेशपुर केंद्र से ICRI-3 की केंद्र-उपज और वह झुंड-स्रोत पूछिए जिससे वह बेचता है। यह भी पूछिए कि कर्नाटक क्षेत्र की दूसरी किस्म ICRI-8 आपके इलाक़े को ज़्यादा सूट करेगी या नहीं।
790 को केंद्र की क्षमता मानिए, खेत का नतीजा नहीं। TNAU इलायची की आम खेत-उपज 200 से 250 किग्रा/हेक्टेयर बताता है, और ICRI-1 व ICRI-2 के सिंचाई वाले आँकड़े, 650 और 760, उससे पहले ही काफ़ी ऊपर हैं।
क्या इसका बीज अपने पास रख सकते हैं?
इसे बीज से नहीं उगाते। KAU के अनुसार कम से कम 3 कल्लों वाले प्रकंद लिए जाते हैं, और चूसक की रोपाई से कट्टे फैल सकता है। जहाँ कट्टे बहुत फैला हो वहाँ KAU के अनुसार बीज से बनी पौध ज़्यादा सुरक्षित है, क्योंकि विषाणु बीज से नहीं आता। चूसक उन्हीं झुंडों से लें जिनमें पूरे मौसम मोज़ेक नहीं दिखा।
दूसरी किस्मों से तुलना
इलायची की वे सभी किस्में, जिनका पेज इस साइट पर है, एक साथ देखें। जो किस्म आप अभी देख रहे हैं, उसकी पंक्ति रंग से अलग दिखती है।
| किस्म | किसके लिए ठीक | फल कब से | उपज | राज्य |
|---|---|---|---|---|
| Appangala 2 | कट्टे वाले इलाक़े; सबसे ज़्यादा केंद्र-उपज | फूल आने से पकी फली तक 120 दिन (IISR); पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU) | औसत 927 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर; क्षमता 1,393 किग्रा/हेक्टेयर (IISR) | कर्नाटक, केरल |
| Appangala-1 (Suvasini) | मोटी फलियाँ और ज़्यादा तेल; घनी रोपाई | फूल आने से पकी फली तक 112 दिन (IISR); पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU) | औसत 745 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर; क्षमता 1,322 किग्रा/हेक्टेयर (IISR) | कर्नाटक, केरल |
| CCS-1 | जल्दी फ़सल; घनी रोपाई | जल्दी पकने वाली (KAU); पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU) | क्षमता 1,156 किग्रा/हेक्टेयर (KAU तालिका); CCS-1 नाम से औसत उपज प्रकाशित नहीं | कर्नाटक, केरल |
| ICRI-1 | दक्षिण इडुक्की के बाग जहाँ बारिश बराबर होती है और मोटी फली वाली मलबार किस्म चाहिए | जल्दी पकने वाली (KAU); पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU) | वर्षा-आधारित में 325 किग्रा और सिंचाई में 650 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर (TNAU eAgri); KAU की सूची में क्षमता 656 किग्रा/हेक्टेयर | केरल |
| ICRI-2 | वंडनमेडु, नेल्लियमपथी, अन्नामलाई और मेघमलाई के सिंचित, ऊँचाई वाले बाग | पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU); पकने के दिन नहीं दिए गए | वर्षा-आधारित में 375 किग्रा और सिंचाई में 760 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर (TNAU eAgri); KAU की सूची में क्षमता 766 किग्रा/हेक्टेयर | केरल, तमिलनाडु |
| ICRI-3यही पेज | कर्नाटक के इलायची इलाक़े जहाँ प्रकंद सड़न की चिंता है | जल्दी पकने वाली (KAU); पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU) | क्षमता 790 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर (KAU किस्म-तालिका); वर्षा-आधारित या सिंचाई का अलग आँकड़ा नहीं | कर्नाटक |
| IISR Avinash | प्रकंद सड़न वाले खेत और घाटियाँ | फूल आने से पकी फली तक 115 दिन (IISR); पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU) | औसत 847 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर; क्षमता 1,483 किग्रा/हेक्टेयर (IISR) | कर्नाटक, केरल |
| IISR Kaveri | कर्नाटक के बाग जिन्हें तेल से भरी फलियाँ और कुछ सूखे से बचाव चाहिए | पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU); IISR फूल से दिन नहीं देता | सिंचाई में 482 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर; नमी की कमी में 308 किग्रा/हेक्टेयर; क्षमता 562.5 किग्रा/हेक्टेयर (IISR, AICRPS 2024) | कर्नाटक |
| IISR Manushree | सूखे दौर या कम पानी वाले बाग | पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU); IISR फूल से दिन नहीं देता | सिंचाई में 550 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर; नमी की कमी में 360 किग्रा/हेक्टेयर; क्षमता 1,325 किग्रा/हेक्टेयर (IISR, AICRPS 2024) | केरल, कर्नाटक |
| IISR Vijetha | कट्टे वाले खेत; मोटी फलियाँ | फूल आने से पकी फली तक 105 दिन (IISR); पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU) | औसत 643 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर; क्षमता 979 किग्रा/हेक्टेयर (IISR) | कर्नाटक, केरल |
| MCC-12 | केरल के वे बाग़ जहाँ छायादार पेड़ कम हैं और आप नाम और रिकॉर्ड वाली वाझुक्का किस्म चाहते हैं | MCC-12 की फलन-उम्र नहीं दी गई; TNAU आम इलायची के लिए रोपाई के लगभग 2 साल बाद पहली फ़सल बताता है | क्षमता 620 किग्रा/हेक्टेयर (KAU किस्म-तालिका); वर्षा-आधारित या सिंचाई का अलग आँकड़ा नहीं | केरल |
| MCC-16 | केरल के कडमकुझी और उडुम्बनचोला इलाक़ों की सिंचित या गीली, दलदली इलायची ज़मीन | MCC-16 की फलन-उम्र नहीं दी गई; TNAU आम इलायची के लिए रोपाई के लगभग 2 साल बाद पहली फ़सल बताता है | क्षमता 650 किग्रा/हेक्टेयर (KAU किस्म-तालिका); वर्षा-आधारित या सिंचाई का अलग आँकड़ा नहीं | केरल |
| MCC-40 | केरल के वे बाग़ जो सिर्फ़ बारिश पर चलते हैं और जहाँ आप जल्दी फलने वाली वाझुक्का किस्म चाहते हैं | जल्दी फलने वाली (KAU), पर उम्र या महीने नहीं दिए; TNAU आम इलायची के लिए रोपाई के लगभग 2 साल बाद पहली फ़सल बताता है | क्षमता वर्षा-आधारित हाल में 443 किग्रा/हेक्टेयर (KAU किस्म-तालिका) | केरल |
| Mudigere-1 | छोटे कद का झुंड; मलनाड की पहाड़ियाँ | पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU, इलायची के लिए आम तौर पर) | स्रोत अलग-अलग हैं: क्षमता 1,000 किग्रा/हेक्टेयर (KAU तालिका) या 250 से 300 किग्रा/हेक्टेयर (मुडिगेरे कॉलेज की तालिका) | कर्नाटक |
| Mudigere-2 | कर्नाटक की पहाड़ियाँ; प्रकाशित औसत उपज | पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU, इलायची के लिए आम तौर पर) | औसत 475 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर (KAU, मुडिगेरे केंद्र) | कर्नाटक |
| Njallani (Green Gold) | इडुक्की की पहाड़ियाँ; बहुत मोटी फलियाँ | क्लोन की रोपाई से पहली फ़सल लगभग 2 साल में (NIF) | कोई आधिकारिक आँकड़ा नहीं। NIF 1,000 किग्रा/हेक्टेयर का दावा करता है; KAU के जैविक परीक्षण में 324 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर मिली | केरल |
इस फ़सल के कैलकुलेटर
आगे के हिसाब यहाँ कर लीजिए — कितना बीज ख़रीदें, बोरा अंकुरित होगा या नहीं, खाद का ख़र्च कितना बैठेगा, और इलायची का भाव क्या चल रहा है।
- बीज दर कैलकुलेटरआपके इलायची के खेत के लिए कितना बीज चाहिए — आपके बोरे के अंकुरण के हिसाब से सुधारा हुआ।
- बीज किस्म खोजकइस साइट की हर इलायची किस्म को राज्य, सीज़न, अवधि और मिट्टी से छानिए।
- खाद कैलकुलेटरइलायची की एनपीके सिफ़ारिश को अपने खेत के हिसाब से यूरिया, डीएपी और एमओपी के बोरों में बदलिए।
- फ़सल लाभ कैलकुलेटरबीज, मज़दूरी और लागत को इस किस्म से मिलने वाली उपज के सामने रखकर देखिए।
- मंडी भाव जाँचकव्यापारी से भाव तय करने से पहले अपनी नज़दीकी मंडी में इलायची का आज का रेट देखिए।
सब्सिडी और सरकारी मदद
इलायची के बीज या रोपण सामग्री की लागत में मदद करने वाली योजनाएँ। नियम और आवेदन का तरीक़ा हर योजना के पेज पर है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या ICRI-3 सच में प्रकंद सड़न को सहती है?
KAU की किस्म-तालिका इसे प्रकंद सड़न को सहने वाली कहती है और कोई प्रतिशत या परीक्षण नहीं देती। इसे केंद्र का अवलोकन मानिए। सड़न फैलेगी या नहीं, यह निकासी तय करती है, इसलिए जहाँ पानी रुकता हो वहाँ मत लगाइए।
ICRI-3 की उपज वर्षा-आधारित या सिंचाई में कितनी है?
पढ़े गए किसी स्रोत में यह बँटवारा नहीं है। KAU सिर्फ़ क्षमता, 790 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर, देता है। ICRI-1 और ICRI-2 का वर्षा-आधारित और सिंचाई वाला आँकड़ा है; ICRI-3 का नहीं। सकलेशपुर केंद्र से पूछिए।
कर्नाटक के लिए ICRI-3 या ICRI-8?
मसाला बोर्ड दोनों को कर्नाटक क्षेत्र के लिए गिनता है। KAU सिर्फ़ ICRI-3 का ब्योरा देता है। हो सके तो परीक्षण-खंड से ज़्यादा लगाने से पहले सकलेशपुर केंद्र से अपने इलाक़े पर तुलना पूछिए।
क्या ICRI-3 कट्टे को सहती है?
पढ़े गए किसी स्रोत ने ICRI-3 को कट्टे का दर्जा नहीं दिया। KAU सिर्फ़ प्रकंद सड़न की सहनशीलता लिखता है। कट्टे वाले इलाक़े के लिए IISR विजेता और अप्पांगला 2 की ओर इशारा करता है। हर हाल में सिर्फ़ उन झुंडों से चूसक लीजिए जिनमें मोज़ेक नहीं दिखा।
स्रोत: Varieties of cardamom — Kerala Agricultural University (CELKAU), Research highlights, varieties by zone — Spices Board India, Cardamom — TNAU Agritech Portal. संपादकीय नीति.
