मुख्य सामग्री पर जाएँ
Technical Kisanखेती, तकनीक के साथ
इलायचीसभी सीज़नप्रकंद / चूसक की रोपण-सामग्री (मैसूर प्रकार)अंतिम अपडेट: 20 अक्टूबर 2026

ICRI-2

मसाला बोर्ड के भारतीय इलायची अनुसंधान संस्थान (मायलादुम्पारा) की जारी मैसूर प्रकार की किस्म। KAU के अनुसार यह सिंचाई और ज़्यादा ऊँचाई पर अच्छा करती है, बाली मध्यम लंबी, फलियाँ लंबोतरी मोटी तोता-हरी और अझुकल को सहने वाली। सिंचाई में लगभग 760 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर, वर्षा-आधारित में 375।

सीज़नसभी सीज़न
पकने की अवधिपहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU); पकने के दिन नहीं दिए गए
अपेक्षित उपजवर्षा-आधारित में 375 किग्रा और सिंचाई में 760 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर (TNAU eAgri); KAU की सूची में क्षमता 766 किग्रा/हेक्टेयर
उपयुक्त मिट्टीदोमट

ज़रूरी तथ्य

प्रकार
प्रकंद / चूसक की रोपण-सामग्री (मैसूर प्रकार)
सीज़न
सभी सीज़न
पकने की अवधि
पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU); पकने के दिन नहीं दिए गए
अपेक्षित उपज
वर्षा-आधारित में 375 किग्रा और सिंचाई में 760 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर (TNAU eAgri); KAU की सूची में क्षमता 766 किग्रा/हेक्टेयर
उपयुक्त मिट्टी
दोमट
जारी
ICRI (मसाला बोर्ड), मायलादुम्पारा, इडुक्की, केरल ने जारी की · किसी पढ़े स्रोत में साल नहीं

इस किस्म के बारे में

ICRI-2 मैसूर प्रकार की छोटी इलायची है, जिसे मसाला बोर्ड के भारतीय इलायची अनुसंधान संस्थान (ICRI), मायलादुम्पारा, इडुक्की ने जारी किया। KAU के अनुसार यह सिंचाई में अच्छा करती है और ज़्यादा ऊँचाई के लिए ठीक है; बाली मध्यम लंबी, फलियाँ लंबोतरी, मोटी और तोता-हरी, और अझुकल रोग को सहने वाली। KAU केरल के वंडनमेडु और नेल्लियमपथी और तमिलनाडु के अन्नामलाई और मेघमलाई का नाम लेता है। TNAU की eAgri सामग्री वर्षा-आधारित में 375 किग्रा और सिंचाई में 760 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर देती है, सूखने पर 22.5% वापसी और 9% उड़नशील तेल के साथ। KAU की तालिका में क्षमता 766 किग्रा/हेक्टेयर है। किसी स्रोत में जारी होने का साल या माता-पिता नहीं।

क्या यह किस्म आपके लिए ठीक है?

बाग ज़्यादा ऊँचाई पर हो, सिंचाई हो सकती हो, और आप KAU के बताए इलाक़ों में हों (केरल के वंडनमेडु और नेल्लियमपथी, तमिलनाडु के अन्नामलाई और मेघमलाई), तो ICRI-2 चुनिए। इस समूह में मायलादुम्पारा की यही किस्म है जिसके साथ अझुकल सहने की टिप्पणी है, और यह मैसूर प्रकार की है जिसकी फलियाँ मोटी और तोता-हरी हैं। इसके आँकड़े, सिंचाई में 760 किग्रा/हेक्टेयर और वर्षा-आधारित में 375, TNAU की तालिका में तीनों ICRI किस्मों में सबसे अच्छे हैं। क़ीमत पुरानी ICRI किस्मों जैसी ही है: जारी होने का साल, माता-पिता, कट्टे या प्रकंद सड़न का दर्जा नहीं।

मुख्य विशेषताएँ

    पौध प्रकारप्रकंद / चूसक की रोपण-सामग्री (मैसूर प्रकार)
    अवधिपहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU); पकने के दिन नहीं दिए गए
    उपज क्षमतावर्षा-आधारित में 375 किग्रा और सिंचाई में 760 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर (TNAU eAgri); KAU की सूची में क्षमता 766 किग्रा/हेक्टेयर
    रोग-प्रतिरोधअझुकल फली सड़न को सहने वाली (KAU); कट्टे या प्रकंद सड़न का कोई दर्जा नहीं
    मिट्टीदोमट
    सीज़नसभी सीज़न

बुवाई और खेती

  • बुवाई का समयरोपाई का सबसे अच्छा समय जून से दिसंबर (TNAU)
  • दूरीICRI-2 के लिए कोई दूरी नहीं दी गई। TNAU बड़े प्रकारों के लिए 2.5 x 2 मी और छोटे प्रकारों के लिए 2 x 1.5 मी देता है, 60 x 60 x 60 सेमी के गड्ढों में। मैसूर प्रकार के पौधे बड़े और मज़बूत होते हैं, इसलिए चौड़ी दूरी से शुरू करना समझदारी है; ICRI से पक्का कर लीजिए।
  • उर्वरकICRI-2 के लिए अलग खाद-मात्रा नहीं दी गई। TNAU 25 टन/हेक्टेयर कंपोस्ट के साथ 75 किग्रा N, 75 किग्रा P और 150 किग्रा K प्रति हेक्टेयर देता है, 2 बार में: जून-जुलाई और अक्टूबर-नवंबर।
  • कटाईICRI-2 के लिए पकने के दिन नहीं दिए गए। TNAU: पकी फलियाँ हर 15 से 25 दिन में तोड़ें, चरम अक्टूबर-नवंबर में।

मिट्टी और जलवायु

मिट्टी

उपयुक्त मिट्टी
छाया में जंगल की दोमट मिट्टी; अम्लीय और अच्छी निकासी वाली
pH
5.0 to 6.5 (TNAU)

जलवायु

जलवायु
KAU के अनुसार यह ज़्यादा ऊँचाई और सिंचाई में ठीक है। वह छाया की सलाह नहीं देता, इसलिए इलायची के आम आँकड़े के तौर पर TNAU की 50 से 60% छाया लीजिए।

उपज और अवधि

पकने की अवधि

पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU); पकने के दिन नहीं दिए गए

अपेक्षित उपज

वर्षा-आधारित में 375 किग्रा और सिंचाई में 760 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर (TNAU eAgri); KAU की सूची में क्षमता 766 किग्रा/हेक्टेयर

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता और फ़सल की देखभाल पर निर्भर करती है।

कीट और रोग संबंधी बातें

प्रबंधन सुझाव

  • अझुकल: सहनशीलता का मतलब बचाव पूरा नहीं। TNAU अगस्त की शुरुआत में मानसून से पहले और फिर सितंबर में 1% बोर्डो मिश्रण, 0.25% कॉपर ऑक्सीक्लोराइड या 0.2% मैंकोज़ेब के 3 छिड़काव देता है।
  • कट्टे: केले के माहू पर वह कीटनाशक चलाएँ जो आपका KVK या मसाला बोर्ड सुझाए, और पत्ती की नसों के साथ हल्के धब्बे या धारियाँ दिखाने वाला झुंड निकाल दें।
  • जिस झुंड में मोज़ेक दिखा हो उससे चूसक न लें।

फ़ायदे और ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • अझुकल फली सड़न को सहने वाली, जो मानसून में फलियों का सबसे बड़ा नुक़सान है (KAU)।
  • सिंचाई में 760 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर, TNAU की तालिका में ICRI किस्मों में सबसे अच्छी।
  • 9% उड़नशील तेल, ICRI-1 के 8.3% से ऊपर (TNAU eAgri)।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • सिंचाई में सबसे अच्छी; वर्षा-आधारित में 375 किग्रा/हेक्टेयर, यानी लगभग आधी।
  • KAU सिर्फ़ चार पहाड़ी इलाक़े गिनता है, इसलिए यह केरल भर की आम सिफ़ारिश नहीं।
  • पढ़े गए किसी स्रोत में जारी होने का साल, माता-पिता, कट्टे या प्रकंद सड़न का दर्जा नहीं।

उपयुक्त क्षेत्र

KAU केरल के वंडनमेडु और नेल्लियमपथी तथा तमिलनाडु के अन्नामलाई और मेघमलाई का नाम लेता है, और इसे ज़्यादा ऊँचाई के लिए ठीक बताता है।

  • केरल
  • तमिलनाडु

ICRI-2 मैसूर प्रकार की क्यों है और बाग में इसका क्या मतलब

हाल में जारी ज़्यादातर इलायची मलबार प्रकार की है, पर ICRI-2 मैसूर प्रकार की है। TNAU मैसूर प्रकार को मज़बूत पौधा बताता है और कहता है कि यह 900 से 1,200 मी की ऊँचाई पर पक्की, बराबर बँटी बारिश में अच्छा उगता है। यह KAU की इस टिप्पणी से मेल खाता है कि ICRI-2 सिंचाई और ज़्यादा ऊँचाई पर अच्छा करती है।

व्यावहारिक फ़र्क़ जगह और पानी का है। मैसूर प्रकार बड़ा पौधा है, इसलिए इसे TNAU की बड़े प्रकारों वाली चौड़ी दूरी पर लगाइए, मलबार किस्म के साथ ठूँसिए मत। सूखे महीनों में सिंचाई न हो सके तो वर्षा-आधारित उपज, 375 किग्रा/हेक्टेयर, वही संख्या है जिस पर योजना बनाइए।

क्या इसका बीज अपने पास रख सकते हैं?

इसे बीज से नहीं उगाते। KAU के अनुसार कम से कम 3 कल्लों वाले प्रकंद लिए जाते हैं, और चूसक की रोपाई से कट्टे फैल सकता है। जहाँ कट्टे बहुत फैला हो वहाँ KAU के अनुसार बीज से बनी पौध ज़्यादा सुरक्षित है, क्योंकि विषाणु बीज से नहीं आता। चूसक उन्हीं झुंडों से लें जिनमें पूरे मौसम मोज़ेक नहीं दिखा।

दूसरी किस्मों से तुलना

इलायची की वे सभी किस्में, जिनका पेज इस साइट पर है, एक साथ देखें। जो किस्म आप अभी देख रहे हैं, उसकी पंक्ति रंग से अलग दिखती है।

किस्मकिसके लिए ठीकफल कब सेउपजराज्य
Appangala 2कट्टे वाले इलाक़े; सबसे ज़्यादा केंद्र-उपजफूल आने से पकी फली तक 120 दिन (IISR); पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU)औसत 927 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर; क्षमता 1,393 किग्रा/हेक्टेयर (IISR)कर्नाटक, केरल
Appangala-1 (Suvasini)मोटी फलियाँ और ज़्यादा तेल; घनी रोपाईफूल आने से पकी फली तक 112 दिन (IISR); पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU)औसत 745 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर; क्षमता 1,322 किग्रा/हेक्टेयर (IISR)कर्नाटक, केरल
CCS-1जल्दी फ़सल; घनी रोपाईजल्दी पकने वाली (KAU); पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU)क्षमता 1,156 किग्रा/हेक्टेयर (KAU तालिका); CCS-1 नाम से औसत उपज प्रकाशित नहींकर्नाटक, केरल
ICRI-1दक्षिण इडुक्की के बाग जहाँ बारिश बराबर होती है और मोटी फली वाली मलबार किस्म चाहिएजल्दी पकने वाली (KAU); पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU)वर्षा-आधारित में 325 किग्रा और सिंचाई में 650 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर (TNAU eAgri); KAU की सूची में क्षमता 656 किग्रा/हेक्टेयरकेरल
ICRI-2यही पेजवंडनमेडु, नेल्लियमपथी, अन्नामलाई और मेघमलाई के सिंचित, ऊँचाई वाले बागपहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU); पकने के दिन नहीं दिए गएवर्षा-आधारित में 375 किग्रा और सिंचाई में 760 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर (TNAU eAgri); KAU की सूची में क्षमता 766 किग्रा/हेक्टेयरकेरल, तमिलनाडु
ICRI-3कर्नाटक के इलायची इलाक़े जहाँ प्रकंद सड़न की चिंता हैजल्दी पकने वाली (KAU); पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU)क्षमता 790 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर (KAU किस्म-तालिका); वर्षा-आधारित या सिंचाई का अलग आँकड़ा नहींकर्नाटक
IISR Avinashप्रकंद सड़न वाले खेत और घाटियाँफूल आने से पकी फली तक 115 दिन (IISR); पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU)औसत 847 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर; क्षमता 1,483 किग्रा/हेक्टेयर (IISR)कर्नाटक, केरल
IISR Kaveriकर्नाटक के बाग जिन्हें तेल से भरी फलियाँ और कुछ सूखे से बचाव चाहिएपहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU); IISR फूल से दिन नहीं देतासिंचाई में 482 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर; नमी की कमी में 308 किग्रा/हेक्टेयर; क्षमता 562.5 किग्रा/हेक्टेयर (IISR, AICRPS 2024)कर्नाटक
IISR Manushreeसूखे दौर या कम पानी वाले बागपहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU); IISR फूल से दिन नहीं देतासिंचाई में 550 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर; नमी की कमी में 360 किग्रा/हेक्टेयर; क्षमता 1,325 किग्रा/हेक्टेयर (IISR, AICRPS 2024)केरल, कर्नाटक
IISR Vijethaकट्टे वाले खेत; मोटी फलियाँफूल आने से पकी फली तक 105 दिन (IISR); पहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU)औसत 643 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर; क्षमता 979 किग्रा/हेक्टेयर (IISR)कर्नाटक, केरल
MCC-12केरल के वे बाग़ जहाँ छायादार पेड़ कम हैं और आप नाम और रिकॉर्ड वाली वाझुक्का किस्म चाहते हैंMCC-12 की फलन-उम्र नहीं दी गई; TNAU आम इलायची के लिए रोपाई के लगभग 2 साल बाद पहली फ़सल बताता हैक्षमता 620 किग्रा/हेक्टेयर (KAU किस्म-तालिका); वर्षा-आधारित या सिंचाई का अलग आँकड़ा नहींकेरल
MCC-16केरल के कडमकुझी और उडुम्बनचोला इलाक़ों की सिंचित या गीली, दलदली इलायची ज़मीनMCC-16 की फलन-उम्र नहीं दी गई; TNAU आम इलायची के लिए रोपाई के लगभग 2 साल बाद पहली फ़सल बताता हैक्षमता 650 किग्रा/हेक्टेयर (KAU किस्म-तालिका); वर्षा-आधारित या सिंचाई का अलग आँकड़ा नहींकेरल
MCC-40केरल के वे बाग़ जो सिर्फ़ बारिश पर चलते हैं और जहाँ आप जल्दी फलने वाली वाझुक्का किस्म चाहते हैंजल्दी फलने वाली (KAU), पर उम्र या महीने नहीं दिए; TNAU आम इलायची के लिए रोपाई के लगभग 2 साल बाद पहली फ़सल बताता हैक्षमता वर्षा-आधारित हाल में 443 किग्रा/हेक्टेयर (KAU किस्म-तालिका)केरल
Mudigere-1छोटे कद का झुंड; मलनाड की पहाड़ियाँपहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU, इलायची के लिए आम तौर पर)स्रोत अलग-अलग हैं: क्षमता 1,000 किग्रा/हेक्टेयर (KAU तालिका) या 250 से 300 किग्रा/हेक्टेयर (मुडिगेरे कॉलेज की तालिका)कर्नाटक
Mudigere-2कर्नाटक की पहाड़ियाँ; प्रकाशित औसत उपजपहली फ़सल रोपाई के लगभग 2 साल बाद (TNAU, इलायची के लिए आम तौर पर)औसत 475 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर (KAU, मुडिगेरे केंद्र)कर्नाटक
Njallani (Green Gold)इडुक्की की पहाड़ियाँ; बहुत मोटी फलियाँक्लोन की रोपाई से पहली फ़सल लगभग 2 साल में (NIF)कोई आधिकारिक आँकड़ा नहीं। NIF 1,000 किग्रा/हेक्टेयर का दावा करता है; KAU के जैविक परीक्षण में 324 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर मिलीकेरल

इस फ़सल के कैलकुलेटर

आगे के हिसाब यहाँ कर लीजिए — कितना बीज ख़रीदें, बोरा अंकुरित होगा या नहीं, खाद का ख़र्च कितना बैठेगा, और इलायची का भाव क्या चल रहा है।

सब्सिडी और सरकारी मदद

इलायची के बीज या रोपण सामग्री की लागत में मदद करने वाली योजनाएँ। नियम और आवेदन का तरीक़ा हर योजना के पेज पर है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या ICRI-2 ICRI-1 से बेहतर है?

TNAU की तालिका में ICRI-2 थोड़ी आगे है: सिंचाई में 760 के मुक़ाबले 650 किग्रा/हेक्टेयर और वर्षा-आधारित में 375 के मुक़ाबले 325, तेल 9% के मुक़ाबले 8.3%। पर दोनों अलग बागों के लिए हैं। ICRI-1 बराबर बारिश वाले दक्षिण इडुक्की की मलबार किस्म है। ICRI-2 सिंचित, ऊँचाई वाले इलाक़ों की मैसूर किस्म है।

ICRI-2 की उपज 760 है या 766 किग्रा/हेक्टेयर?

TNAU की eAgri सामग्री सिंचाई में 760 किग्रा सूखी फली/हेक्टेयर कहती है। KAU की तालिका क्षमता 766 देती है। दोनों कुछ ही किलो के फ़र्क़ पर हैं और एक ही सिंचित नतीजे की बात करती हैं, खेत के औसत की नहीं।

अझुकल सहने का मतलब क्या छिड़काव छोड़ सकते हैं?

नहीं। KAU कहता है कि ICRI-2 सहने वाली है, अछूती नहीं, और कोई प्रतिशत नहीं देता। मानसून से पहले और सितंबर में TNAU का बोर्डो या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का कार्यक्रम रखिए, और कुछ मौसम तक आपके खेत में फली सड़न कम दिखे तो ही छिड़काव घटाइए।

क्या कर्नाटक में ICRI-2 उगा सकते हैं?

पढ़े गए किसी स्रोत ने इसे कर्नाटक के लिए नहीं सुझाया। मसाला बोर्ड ICRI-2 को केरल क्षेत्र के लिए गिनता है, और KAU केरल और तमिलनाडु के चार पहाड़ी इलाक़े बताता है। कर्नाटक के लिए मसाला बोर्ड ICRI-3 और ICRI-8 गिनता है।

स्रोत: Varieties of cardamom — Kerala Agricultural University (CELKAU), Cardamom lecture, high-yielding varieties — TNAU eAgri, Research highlights, varieties by zone — Spices Board India, Cardamom — TNAU Agritech Portal. संपादकीय नीति.