Akshaya
KAU के अनक्कयम केंद्र का 1998 का संकर (H-4-7 x K-30-1), KAU शीटों में सबसे बड़ा दाना, 11 ग्राम और 3.12 ग्राम की गिरी, पर कम छिलाई, 28.36%, जो TNAU की शीटों में सिर्फ़ प्रियंका (26.57%) से ऊपर है। कोई परीक्षण का नतीजा नहीं मिला।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- काजू
- प्रकार
- सॉफ्टवुड कलमी रोपण-सामग्री
- सीज़न
- सभी सीज़न
- पकने की अवधि
- कलमी पौधे में पहला फल लगभग 3 साल में (TNAU का फ़सल-स्तर); फूल दिसंबर से जनवरी, फल जनवरी से मार्च
- अपेक्षित उपज
- TNAU: पूरे पेड़ से 11.78 किग्रा मेवा; दाना 11 ग्राम (KAU शीटों में सबसे बड़ा), छिलाई 28.36%, W180
- उपयुक्त मिट्टी
- खराब, लैटेराइट और रेतीली तटीय मिट्टी सह लेती है
- जारी
- काजू अनुसंधान केंद्र, केरल कृषि विश्वविद्यालय, अनक्कयम (मलप्पुरम); 1998 में जारी, H-4-7 और K-30-1 का संकर (TNAU, केरल)
इस किस्म के बारे में
अक्षय काजू का संकर है, H-4-7 और K-30-1 का, जिसे 1998 में केरल कृषि विश्वविद्यालय के अनक्कयम (मलप्पुरम) काजू अनुसंधान केंद्र ने जारी किया। TNAU के अनुसार पेड़ की डालियाँ घनी हैं और शाखाएँ ज़्यादा हैं। फूल दिसंबर से जनवरी और फल जनवरी से मार्च में आते हैं। सेब पीला है और उसमें 68% रस है। दाना 11 ग्राम का है (एक किलो में 91)। गिरी 3.12 ग्राम की है और छिलाई 28.36% है। निर्यात ग्रेड W180 है और पूरे पेड़ से 11.78 किग्रा मेवा मिलता है। हमें इसका कोई परीक्षण का नतीजा या ICAR-DCR की टिप्पणी नहीं मिली। नीचे की खेती काजू की TNAU की फ़सल-स्तर की खेती है।
क्या यह किस्म आपके लिए ठीक है?
आपका ख़रीदार बड़ी गिरी पर ऊँचा भाव देता हो, तो अक्षय चुनिए। TNAU अनक्कयम का 1998 का H-4-7 और K-30-1 का संकर बताता है, 11 ग्राम का दाना (एक किलो में 91), 3.12 ग्राम की गिरी और W180 ग्रेड, जो KAU शीटों में सबसे बड़ा है, और पूरे पेड़ से 11.78 किग्रा मेवा। सौदा छिलाई का है। 28.36% पर यह प्रियंका (26.57%) के सिवा यहाँ की हर KAU किस्म से कम छिलाई वाली है, ओडिशा पत्र के बताए 28% के अंतरराष्ट्रीय मानक से बस ऊपर। ख़राब मौसम इसे उसके नीचे ला सकता है। ख़रीदार को मिलने वाली गिरी के वज़न के हिसाब से पैसे देता हो, तो धाराश्री (30.5%) या अमृता (31.58%) इससे आगे निकल सकती हैं।
मुख्य विशेषताएँ
बुवाई और खेती
- बुवाई का समयरोपाई का सबसे अच्छा समय जून से दिसंबर है (TNAU)।
- दूरी7 x 7 मीटर, यानी लगभग 204 पेड़ प्रति हेक्टेयर (TNAU का फ़सल-स्तर का आँकड़ा)।
- बुवाई विधिसॉफ़्टवुड कलमों को 45 x 45 x 45 सेमी के गड्ढों में लगाइए, जिन्हें ऊपरी मिट्टी, 10 किग्रा गोबर की खाद और 1 किग्रा नीम की खली से भरा हो (TNAU)।
- सिंचाईकाजू आम तौर पर बारानी फ़सल है। TNAU के अनुसार नई कोंपल से फल पकने तक पानी देने से उपज बढ़ती है।
- उर्वरकTNAU का फ़सल-स्तर का कार्यक्रम, प्रति पेड़ प्रति साल: पहला साल 10 किग्रा गोबर की खाद, 70 ग्राम N, 40 ग्राम P और 60 ग्राम K; पाँचवें साल से 50 किग्रा खाद, 500 ग्राम N, 200 ग्राम P और 300 ग्राम K। पूर्वी तट पर नवंबर-दिसंबर में दीजिए, या जून-जुलाई और अक्टूबर-नवंबर में दो बराबर हिस्सों में।
- कटाईTNAU अक्षय में फूल दिसंबर से जनवरी और फल जनवरी से मार्च तक बताता है। सेब का प्रसंस्करण करना हो तो ताज़ा तोड़िए, और मेवे को 2 से 3 दिन धूप में 10-12% नमी तक सुखाइए।
मिट्टी और जलवायु
मिट्टी
- उपयुक्त मिट्टी
- खराब, लैटेराइट, कंकरीली या रेतीली तटीय मिट्टी सह लेती है; pH 5.0–6.5 (TNAU)
उपज और अवधि
पकने की अवधि
कलमी पौधे में पहला फल लगभग 3 साल में (TNAU का फ़सल-स्तर); फूल दिसंबर से जनवरी, फल जनवरी से मार्च
अपेक्षित उपज
TNAU: पूरे पेड़ से 11.78 किग्रा मेवा; दाना 11 ग्राम (KAU शीटों में सबसे बड़ा), छिलाई 28.36%, W180
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता और फ़सल की देखभाल पर निर्भर करती है।
कीट और रोग संबंधी बातें
फ़ायदे और ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- KAU शीटों में सबसे बड़ा दाना, 11 ग्राम, और 3.12 ग्राम की गिरी (TNAU)।
- W180 ग्रेड, शीटों में सबसे बड़ी गिरी का वर्ग।
- पूरे पेड़ से 11.78 किग्रा, धाराश्री और कनक से ऊपर।
ध्यान रखने योग्य बातें
- कम छिलाई, 28.36%, 28% के मानक के क़रीब; TNAU की KAU शीटों में सिर्फ़ प्रियंका (26.57%) इससे कम है।
- एक ही स्रोत, TNAU की शीट; कोई परीक्षण का नतीजा या DCR की टिप्पणी नहीं।
- रोग की कोई श्रेणी नहीं छपी।
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है। स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में सुझाया इलाक़ा एक से ज़्यादा हो सकता है।
- केरल
सबसे बड़ा दाना, सबसे पतला अंतर: 28.36% का मतलब
अक्षय का दाना 11 ग्राम और गिरी 3.12 ग्राम है, यानी 11 पर 3.12 से 28.36% बनता है। यह प्रियंका (26.57%) के सिवा यहाँ की हर KAU शीट से कम है, और ओडिशा पत्र 28% से ज़्यादा को स्वीकार्य अंतरराष्ट्रीय मानक कहता है। जिस पेड़ के दाने ख़राब मौसम में ज़रा पतली गिरी के आएँ, वह उस रेखा के नीचे गिर जाएगा।
हिसाब दोनों तरफ़ चलता है। प्रति 100 किलो कच्चे मेवे पर अक्षय लगभग 28.4 किलो गिरी देती है, 3.12 ग्राम की गिरी के आकार पर, जबकि धाराश्री लगभग 30.5 किलो, 2.4 ग्राम पर। प्रसंस्करणकर्ता को धाराश्री से ज़्यादा वज़न मिलता है पर अक्षय से बड़े टुकड़े, और W180 का मतलब बड़ी साबुत गिरी है। अपने ख़रीदार से पूछिए कि क्या वह उसके ज़्यादा पैसे देता है। और अपने ख़रीदार से अपने असली लॉट का भाव पूछिए। और अपने पेड़ों के छीले हुए गिरी के नमूने का वज़न कीजिए।
क्या इसका बीज अपने पास रख सकते हैं?
यह बीज के पैकेट से नहीं, रोपण सामग्री से लगती है — सकर, कलम, ग्राफ़्ट या कंद। इसे पंजीकृत नर्सरी या सरकारी फ़ार्म से लीजिए, तभी पौधा सही किस्म का और रोग-मुक्त मिलेगा।
दूसरी किस्मों से तुलना
काजू की वे सभी किस्में, जिनका पेज इस साइट पर है, एक साथ देखें। जो किस्म आप अभी देख रहे हैं, उसकी पंक्ति रंग से अलग दिखती है।
| किस्म | किसके लिए ठीक | फल कब से | उपज | राज्य |
|---|---|---|---|---|
| Akshayaयही पेज | केरल के वे खेत जो गिरी के आकार के हिसाब से बेचते हैं और 28% के मानक से ज़रा ऊपर की छिलाई मंज़ूर कर सकते हैं | कलमी पौधे में पहला फल लगभग 3 साल में (TNAU का फ़सल-स्तर); फूल दिसंबर से जनवरी, फल जनवरी से मार्च | TNAU: पूरे पेड़ से 11.78 किग्रा मेवा; दाना 11 ग्राम (KAU शीटों में सबसे बड़ा), छिलाई 28.36%, W180 | केरल |
| Amrutha (H-1597) | छोटे खेत या परीक्षण, जहाँ छोटी छतरी और ऊँची छिलाई शुरुआती उपज से ज़्यादा मायने रखती है | कलमी पौधे में पहला फल लगभग 3 साल में (TNAU का फ़सल-स्तर); फूल दिसंबर से जनवरी, फल जनवरी से मार्च | TNAU: पूरे पेड़ से 18.35 किग्रा मेवा; दाना 7.18 ग्राम, छिलाई 31.58%, W210। ओडिशा परीक्षण: चार तुड़ाई में 3.07 किग्रा प्रति पेड़ (627 किग्रा/हेक्टेयर) | केरल |
| Anagha | केरल के वे खेत जो अनक्कयम के संकरों में सबसे अच्छी सूचीबद्ध उपज वाली बड़ी गिरी का दाना चाहते हैं | कलमी पौधे में पहला फल लगभग 3 साल में (TNAU का फ़सल-स्तर); फूल जनवरी से फ़रवरी, फल फ़रवरी से अप्रैल | TNAU: पूरे पेड़ से 13.73 किग्रा मेवा, तीन अनक्कयम संकरों में सबसे ज़्यादा; दाना 10 ग्राम, छिलाई 29%, W180 | केरल |
| Bhaskara | सामान्य दूरी पर टिकाऊ मेवा-उपज | कलमी पौधे में पहला फल 3 साल में | ओडिशा परीक्षण: चार तुड़ाई में 9.85 किग्रा प्रति पेड़ (7 x 7 मीटर पर 2,010 किग्रा प्रति हेक्टेयर) | कर्नाटक |
| Bhubaneswar-1 | ओडिशा के वे खेत जो स्थानीय स्रोत की, ऊँची छिलाई और मध्यम छतरी वाली किस्म चाहते हैं | कलमी पौधे में पहला फल लगभग 3 साल में (TNAU का फ़सल-स्तर); भुवनेश्वर-1 का फूल का कैलेंडर नहीं मिला | ओडिशा परीक्षण: चार तुड़ाई में 7.12 किग्रा मेवा प्रति पेड़ (1,453 किग्रा/हेक्टेयर); छिलाई 30.77% और 30.68% | ओडिशा |
| BPP-8 | पूर्वी, ओडिशा जैसे हालात के किसान जो सबसे अच्छी छपी परीक्षण-उपज वाली किस्म चाहते हैं | कलमी पौधे में पहला फल लगभग 3 साल में (TNAU का फ़सल-स्तर); BPP-8 का फूल का कैलेंडर नहीं मिला | ओडिशा परीक्षण: चार तुड़ाई में 11.86 किग्रा मेवा प्रति पेड़ (2,420 किग्रा/हेक्टेयर), 25 जारी किस्मों में सबसे अच्छी; 2014 में 6.0 किग्रा प्रति पेड़ | आंध्र प्रदेश |
| Dhana | बड़े काजू-सेब और अच्छा मेवा | कलमी पौधे में पहला फल 3 साल में | TNAU: पूरे पेड़ से 10.66 किग्रा मेवा; दाना 8.2 ग्राम, छिलाई 29.8%, W210। ओडिशा परीक्षण: चार तुड़ाई में 7.28 किग्रा प्रति पेड़ | केरल |
| Dharasree | केरल के वे खेत जो अनक्कयम केंद्र की सघन छतरी वाली, मध्यम आकार के और अच्छी छिलाई वाले दाने की किस्म चाहते हैं | कलमी पौधे में पहला फल लगभग 3 साल में (TNAU का फ़सल-स्तर); फूल दिसंबर से जनवरी, फल जनवरी से मार्च | TNAU: पूरे पेड़ से 10.66 किग्रा मेवा; दाना 7.8 ग्राम, छिलाई 30.5%, W240 | केरल |
| Kanaka (H-1598) | वे किसान जो ऊँची छिलाई और ठीक-ठाक शुरुआती उपज चाहते हैं और खुली, ऊँची छतरी के लिए जगह दे सकते हैं | कलमी पौधे में पहला फल लगभग 3 साल में (TNAU का फ़सल-स्तर); फूल नवंबर से दिसंबर, फल दिसंबर से मार्च | TNAU: पूरे पेड़ से 12.8 किग्रा मेवा; दाना 6.8 ग्राम, छिलाई 30.58%, W280। ओडिशा परीक्षण: चार तुड़ाई में 7.16 किग्रा प्रति पेड़ (1,461 किग्रा/हेक्टेयर) | केरल |
| NRCC Selection-1 | वे किसान जिनके पास ये पेड़ पहले से हैं, या जिन्हें कोई नर्सरी यह नाम बेच रही है और जो इसका मतलब जानना चाहते हैं | कम अवधि; फूल दिसंबर से फ़रवरी, फल मार्च से अप्रैल (ICAR-DCR) | ICAR-DCR: 10 किग्रा मेवा प्रति पेड़; दाना 7.6 ग्राम, छिलाई 28.8%, W210। सिफ़ारिश से हटाई गई | कर्नाटक |
| NRCC Selection-2 | वे किसान जो कम अवधि की, DCR की सुझाई, अच्छे परीक्षण-रिकॉर्ड वाली किस्म चाहते हैं और मेवे के लिए लगाते हैं | कम अवधि; फूल नवंबर से जनवरी, फल फ़रवरी से मार्च (ICAR-DCR) | ICAR-DCR: 9 किग्रा मेवा प्रति पेड़; दाना 9.3 ग्राम, छिलाई 28.6%, W210। ओडिशा परीक्षण: चार तुड़ाई में 8.81 किग्रा प्रति पेड़ (1,798 किग्रा/हेक्टेयर), 25 में चौथी | कर्नाटक |
| Priyanka | सबसे भारी काजू-सेब, प्रसंस्करण के लिए | कलमी पौधे में पहला फल 3 साल में | TNAU: पूरे पेड़ से 17.03 किग्रा मेवा; दाना 10.8 ग्राम, छिलाई 26.57%, W180। ओडिशा परीक्षण: चार तुड़ाई में 4.15 किग्रा प्रति पेड़ | केरल |
| Sulabha | केरल के किसान जो बड़ा दाना और सघन पेड़ चाहते हैं और देर के फूल का मौसम मंज़ूर कर सकते हैं | कलमी पौधे में पहला फल लगभग 3 साल में (TNAU का फ़सल-स्तर); फूल जनवरी से फ़रवरी, फल फ़रवरी से अप्रैल | TNAU: पूरे पेड़ से 21.9 किग्रा मेवा, KAU की शीटों में सबसे ज़्यादा; दाना 9.8 ग्राम, छिलाई 29.4%, W210 | केरल |
| Ullal-3 | कर्नाटक में छोटे फूल-मौसम वाली किस्म | 3 साल में पहला फलन (कलमी) | TNAU: पूरे पेड़ से 14.7 किग्रा मेवा। ओडिशा परीक्षण: चार तुड़ाई में 8.04 किग्रा प्रति पेड़ (1,641 किग्रा प्रति हेक्टेयर) | कर्नाटक |
| Vengurla-4 | पश्चिमी तट की पुरानी, परखी हुई काजू | कलमी पौधे में पहला फल 3 साल में | TNAU: पूरे पेड़ से 17.2 किग्रा मेवा। ओडिशा परीक्षण: चार तुड़ाई में 7.68 किग्रा प्रति पेड़ | महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक |
| Vengurla-7 | मोटा मेवा, निर्यात-स्तर की गिरी के लिए | कलमी पौधे में पहला फल 3 साल में | औसतन लगभग 18.5 किग्रा/पेड़; मोटा 10 ग्राम का मेवा, W180 गिरी ग्रेड, छिलाई लगभग 30.5% | महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक |
| VRI-3 | छोटा पेड़ और W210 गिरी | कलमी पौधे में पहला फल 3 साल में | TNAU: पूरे पेड़ से 11.68 किग्रा मेवा (TNAU का दूसरा पृष्ठ 14.19 किग्रा कहता है); दाना 7.18 ग्राम, छिलाई 29.1%, W210 | तमिलनाडु |
इस फ़सल के कैलकुलेटर
आगे के हिसाब यहाँ कर लीजिए — कितना बीज ख़रीदें, बोरा अंकुरित होगा या नहीं, खाद का ख़र्च कितना बैठेगा, और काजू का भाव क्या चल रहा है।
- बीज दर कैलकुलेटरआपके काजू के खेत के लिए कितना बीज चाहिए — आपके बोरे के अंकुरण के हिसाब से सुधारा हुआ।
- बीज किस्म खोजकइस साइट की हर काजू किस्म को राज्य, सीज़न, अवधि और मिट्टी से छानिए।
- खाद कैलकुलेटरकाजू की एनपीके सिफ़ारिश को अपने खेत के हिसाब से यूरिया, डीएपी और एमओपी के बोरों में बदलिए।
- फ़सल लाभ कैलकुलेटरबीज, मज़दूरी और लागत को इस किस्म से मिलने वाली उपज के सामने रखकर देखिए।
- मंडी भाव जाँचकव्यापारी से भाव तय करने से पहले अपनी नज़दीकी मंडी में काजू का आज का रेट देखिए।
सब्सिडी और सरकारी मदद
काजू के बीज या रोपण सामग्री की लागत में मदद करने वाली योजनाएँ। नियम और आवेदन का तरीक़ा हर योजना के पेज पर है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
अक्षय के माता-पिता कौन हैं और यह कब जारी हुई?
TNAU अक्षय को H-4-7 और K-30-1 का संकर बताता है, जिसे 1998 में केरल कृषि विश्वविद्यालय के अनक्कयम (मलप्पुरम) काजू अनुसंधान केंद्र ने जारी किया।
क्या अक्षय की 28.36% छिलाई बहुत कम है?
यह 28% से ऊपर है, जिसे ओडिशा पत्र स्वीकार्य अंतरराष्ट्रीय मानक कहता है, पर बस ऊपर। यह यहाँ की छह नई KAU शीटों में सबसे कम है, जो 28.36% से 31.58% तक जाती हैं; सिर्फ़ प्रियंका, 26.57% पर, इससे कम है। अपने लॉट की छिलाई की जाँच ख़ुद कीजिए।
अक्षय या अनघा?
दोनों अनक्कयम के W180 संकर हैं। अनघा (T20 x K-30-1) ज़्यादा देती है (11.78 के मुक़ाबले 13.73 किग्रा प्रति पेड़), छिलाई ज़्यादा (28.36% के मुक़ाबले 29%) और सेब नारंगी-लाल है। अक्षय का दाना बड़ा है (10 के मुक़ाबले 11 ग्राम) और फूल जल्दी आते हैं, दिसंबर से जनवरी, जबकि अनघा के जनवरी से फ़रवरी।
क्या अक्षय को दूसरी किस्मों से ज़्यादा जगह चाहिए?
TNAU छतरी को सघन कहता है और फैलाव नहीं देता। हमें इसकी छतरी का कोई नाप नहीं मिला, क्योंकि ओडिशा परीक्षण में यह नहीं थी। TNAU की 7 x 7 मी लीजिए और चौथे से पाँचवें साल में अपने पेड़ ख़ुद नापिए।
स्रोत: Akshaya — TNAU Agritech Portal, cashew varieties, Model Profile for 1.0 ha Cashew Cultivation — NABARD/TNAU. संपादकीय नीति.
