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Technical Kisanखेती, तकनीक के साथ
काजूसभी सीज़नसॉफ्टवुड कलमी रोपण-सामग्रीअंतिम अपडेट: 20 अक्टूबर 2026

NRCC Selection-2

ICAR-DCR, पुत्तूर का 1989 का चयन (डिचेरला के पेड़ 2/9 से), खेती के लिए सुझाया गया। ओडिशा परीक्षण में यह सबसे अच्छे नतीजे वाली पाँच किस्मों में थी, चार तुड़ाई में 8.81 किग्रा प्रति पेड़ और 29.65 से 30.7% छिलाई के साथ।

सीज़नसभी सीज़न
पकने की अवधिकम अवधि; फूल नवंबर से जनवरी, फल फ़रवरी से मार्च (ICAR-DCR)
अपेक्षित उपजICAR-DCR: 9 किग्रा मेवा प्रति पेड़; दाना 9.3 ग्राम, छिलाई 28.6%, W210। ओडिशा परीक्षण: चार तुड़ाई में 8.81 किग्रा प्रति पेड़ (1,798 किग्रा/हेक्टेयर), 25 में चौथी
उपयुक्त मिट्टीखराब, लैटेराइट और रेतीली तटीय मिट्टी सह लेती है

ज़रूरी तथ्य

फसल
काजू
प्रकार
सॉफ्टवुड कलमी रोपण-सामग्री
सीज़न
सभी सीज़न
पकने की अवधि
कम अवधि; फूल नवंबर से जनवरी, फल फ़रवरी से मार्च (ICAR-DCR)
अपेक्षित उपज
ICAR-DCR: 9 किग्रा मेवा प्रति पेड़; दाना 9.3 ग्राम, छिलाई 28.6%, W210। ओडिशा परीक्षण: चार तुड़ाई में 8.81 किग्रा प्रति पेड़ (1,798 किग्रा/हेक्टेयर), 25 में चौथी
उपयुक्त मिट्टी
खराब, लैटेराइट और रेतीली तटीय मिट्टी सह लेती है
जारी
ICAR-DCR (पहले NRCC), पुत्तूर, 1989 में जारी, डिचेरला के पेड़ 2/9 से चयन; स्थिति: खेती के लिए सुझाई गई (ICAR-DCR)

इस किस्म के बारे में

NRCC सिलेक्शन-2 काजू का चयन है, जिसे 1989 में काजू अनुसंधान निदेशालय (पहले राष्ट्रीय काजू अनुसंधान केंद्र), पुत्तूर ने डिचेरला के पेड़ 2/9 से जारी किया। ICAR-DCR मध्यम सघन छतरी और ज़्यादा शाखाएँ, फूल नवंबर से जनवरी और फल फ़रवरी से मार्च, कम अवधि की किस्म, गुलाबी सेब। दाना 9.3 ग्राम का (एक किलो में 108) है, गिरी 2.15 ग्राम, छिलाई 28.6% और निर्यात ग्रेड W210। औसत उपज 9 किग्रा मेवा प्रति पेड़ है, और स्थिति खेती के लिए सुझाई गई। रोपण-सामग्री DCR पुत्तूर और कृषि अनुसंधान केंद्र, चिंतामणि से मिलती है। ओडिशा परीक्षण में (2008 में लगाई) इसने 2014 में 5.15 किग्रा प्रति पेड़ और चार तुड़ाई में 8.81 किग्रा दिया, छिलाई 29.65% और 30.7% के साथ।

क्या यह किस्म आपके लिए ठीक है?

DCR की सुझाई, कम अवधि की, स्वतंत्र परीक्षण वाली काजू किस्म चाहिए, तो NRCC सिलेक्शन-2 चुनिए। ICAR-DCR 1989 का चयन बताता है, मध्यम सघन छतरी, ज़्यादा शाखाएँ, गुलाबी सेब, 9.3 ग्राम का दाना (एक किलो में 108), 28.6% छिलाई और W210 ग्रेड, जो अब भी खेती के लिए सुझाई गई दर्ज है। 25 किस्मों के ओडिशा परीक्षण में इसने चार तुड़ाई में 8.81 किग्रा प्रति पेड़ दिया (1,798 किग्रा/हेक्टेयर), 25 में चौथी, BPP-8, वेंगुर्ला-7 और भास्कर के बाद। लेखकों ने इसे सबसे अच्छे नतीजे वाली पाँच किस्मों में गिना। यह काजू की ज़्यादा अच्छी दर्ज किस्मों में है। DCR के 2.15 ग्राम की गिरी के वज़न पर भरोसा मत कीजिए, क्योंकि वह उसके अपने 9.3 ग्राम के दाने और 28.6% छिलाई से मेल नहीं खाता। उन आँकड़ों से गिरी का वज़न 2.66 ग्राम बनता है।

मुख्य विशेषताएँ

    पौध प्रकारसॉफ्टवुड कलमी रोपण-सामग्री
    अवधिकम अवधि; फूल नवंबर से जनवरी, फल फ़रवरी से मार्च (ICAR-DCR)
    उपज क्षमताICAR-DCR: 9 किग्रा मेवा प्रति पेड़; दाना 9.3 ग्राम, छिलाई 28.6%, W210। ओडिशा परीक्षण: चार तुड़ाई में 8.81 किग्रा प्रति पेड़ (1,798 किग्रा/हेक्टेयर), 25 में चौथी
    रोग-प्रतिरोधरोग की कोई श्रेणी नहीं छपी; ICAR-DCR के अनुसार कोई काजू किस्म चाय मच्छर कीट से सुरक्षित नहीं
    मिट्टीखराब, लैटेराइट और रेतीली तटीय मिट्टी सह लेती है
    सीज़नसभी सीज़न

बुवाई और खेती

  • बुवाई का समयरोपाई का सबसे अच्छा समय जून से दिसंबर है (TNAU)।
  • दूरी7 x 7 मीटर, यानी लगभग 204 पेड़ प्रति हेक्टेयर (TNAU का फ़सल-स्तर का आँकड़ा)।
  • बुवाई विधिसॉफ़्टवुड कलमों को 45 x 45 x 45 सेमी के गड्ढों में लगाइए, जिन्हें ऊपरी मिट्टी, 10 किग्रा गोबर की खाद और 1 किग्रा नीम की खली से भरा हो (TNAU)।
  • सिंचाईकाजू आम तौर पर बारानी फ़सल है। TNAU के अनुसार नई कोंपल से फल पकने तक पानी देने से उपज बढ़ती है।
  • उर्वरकTNAU का फ़सल-स्तर का कार्यक्रम, प्रति पेड़ प्रति साल: पहला साल 10 किग्रा गोबर की खाद, 70 ग्राम N, 40 ग्राम P और 60 ग्राम K; पाँचवें साल से 50 किग्रा खाद, 500 ग्राम N, 200 ग्राम P और 300 ग्राम K। पूर्वी तट पर नवंबर-दिसंबर में दीजिए, या जून-जुलाई और अक्टूबर-नवंबर में दो बराबर हिस्सों में।
  • कटाईICAR-DCR NRCC सिलेक्शन-2 में फूल नवंबर से जनवरी और फल फ़रवरी से मार्च तक बताता है। सेब का प्रसंस्करण करना हो तो ताज़ा तोड़िए, और मेवे को 2 से 3 दिन धूप में 10-12% नमी तक सुखाइए।

मिट्टी और जलवायु

मिट्टी

उपयुक्त मिट्टी
खराब, लैटेराइट, कंकरीली या रेतीली तटीय मिट्टी सह लेती है; pH 5.0–6.5 (TNAU)

उपज और अवधि

पकने की अवधि

कम अवधि; फूल नवंबर से जनवरी, फल फ़रवरी से मार्च (ICAR-DCR)

अपेक्षित उपज

ICAR-DCR: 9 किग्रा मेवा प्रति पेड़; दाना 9.3 ग्राम, छिलाई 28.6%, W210। ओडिशा परीक्षण: चार तुड़ाई में 8.81 किग्रा प्रति पेड़ (1,798 किग्रा/हेक्टेयर), 25 में चौथी

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता और फ़सल की देखभाल पर निर्भर करती है।

कीट और रोग संबंधी बातें

फ़ायदे और ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • ICAR-DCR अब भी इसे खेती के लिए सुझाई गई दर्ज करता है।
  • ओडिशा परीक्षण में 25 किस्मों में जमा उपज में चौथी: 8.81 किग्रा प्रति पेड़, 1,798 किग्रा/हेक्टेयर।
  • भुवनेश्वर में 29.65% और 30.7% छिलाई, जो 28% के मानक से ऊपर है।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • DCR की अपनी 28.6% छिलाई कम है, और गिरी का वज़न (2.15 ग्राम) दाने के वज़न से मेल नहीं खाता।
  • ICAR-DCR सुझाए गए राज्य नहीं देता।
  • रोग की कोई श्रेणी नहीं छपी।

उपयुक्त क्षेत्र

ICAR-DCR पुत्तूर, कर्नाटक में विकसित; ICAR-DCR राज्यों की सूची नहीं देता। ओडिशा परीक्षण में इसे भुवनेश्वर में उगाया गया।

  • कर्नाटक

हिसाब जाँचिए: DCR की गिरी का आँकड़ा और परीक्षण की छिलाई

छिलाई गिरी के वज़न को दाने के वज़न से भाग देने पर बनती है। ICAR-DCR NRCC सिलेक्शन-2 को 9.3 ग्राम का दाना, 2.15 ग्राम की गिरी और 28.6% छिलाई देता है। 9.3 ग्राम के दाने पर 2.15 ग्राम की गिरी 23.1% छिलाई देती है, जबकि 28.6% छिलाई से 2.66 ग्राम की गिरी बनती है। दोनों सही नहीं हो सकते। ओडिशा परीक्षण ने छिलाई सीधे नापी, 2013 में 29.65% और 2014 में 30.7%, जो 28 से 30% की छिलाई का साथ देती है और 2.15 ग्राम के आँकड़े को बेमेल बताती है।

आपके लिए यह क्यों मायने रखता है: प्रसंस्करणकर्ता गिरी के वज़न और ग्रेड पर पैसे देता है। छिलाई को लगभग 29 से 30% मानिए और ख़रीदार से अपने दानों के नमूने की जाँच माँगिए। बाक़ी आँकड़े आपस में मेल खाते हैं। एक किलो में 108 दाने 9.26 ग्राम बनते हैं, परीक्षण में दाने का वज़न 8.7 और 7.9 ग्राम रहा, और प्रति पेड़ उपज को परीक्षण की चार तुड़ाई की 8.81 किग्रा का सहारा है।

क्या इसका बीज अपने पास रख सकते हैं?

यह बीज के पैकेट से नहीं, रोपण सामग्री से लगती है — सकर, कलम, ग्राफ़्ट या कंद। इसे पंजीकृत नर्सरी या सरकारी फ़ार्म से लीजिए, तभी पौधा सही किस्म का और रोग-मुक्त मिलेगा।

दूसरी किस्मों से तुलना

काजू की वे सभी किस्में, जिनका पेज इस साइट पर है, एक साथ देखें। जो किस्म आप अभी देख रहे हैं, उसकी पंक्ति रंग से अलग दिखती है।

किस्मकिसके लिए ठीकफल कब सेउपजराज्य
Akshayaकेरल के वे खेत जो गिरी के आकार के हिसाब से बेचते हैं और 28% के मानक से ज़रा ऊपर की छिलाई मंज़ूर कर सकते हैंकलमी पौधे में पहला फल लगभग 3 साल में (TNAU का फ़सल-स्तर); फूल दिसंबर से जनवरी, फल जनवरी से मार्चTNAU: पूरे पेड़ से 11.78 किग्रा मेवा; दाना 11 ग्राम (KAU शीटों में सबसे बड़ा), छिलाई 28.36%, W180केरल
Amrutha (H-1597)छोटे खेत या परीक्षण, जहाँ छोटी छतरी और ऊँची छिलाई शुरुआती उपज से ज़्यादा मायने रखती हैकलमी पौधे में पहला फल लगभग 3 साल में (TNAU का फ़सल-स्तर); फूल दिसंबर से जनवरी, फल जनवरी से मार्चTNAU: पूरे पेड़ से 18.35 किग्रा मेवा; दाना 7.18 ग्राम, छिलाई 31.58%, W210। ओडिशा परीक्षण: चार तुड़ाई में 3.07 किग्रा प्रति पेड़ (627 किग्रा/हेक्टेयर)केरल
Anaghaकेरल के वे खेत जो अनक्कयम के संकरों में सबसे अच्छी सूचीबद्ध उपज वाली बड़ी गिरी का दाना चाहते हैंकलमी पौधे में पहला फल लगभग 3 साल में (TNAU का फ़सल-स्तर); फूल जनवरी से फ़रवरी, फल फ़रवरी से अप्रैलTNAU: पूरे पेड़ से 13.73 किग्रा मेवा, तीन अनक्कयम संकरों में सबसे ज़्यादा; दाना 10 ग्राम, छिलाई 29%, W180केरल
Bhaskaraसामान्य दूरी पर टिकाऊ मेवा-उपजकलमी पौधे में पहला फल 3 साल मेंओडिशा परीक्षण: चार तुड़ाई में 9.85 किग्रा प्रति पेड़ (7 x 7 मीटर पर 2,010 किग्रा प्रति हेक्टेयर)कर्नाटक
Bhubaneswar-1ओडिशा के वे खेत जो स्थानीय स्रोत की, ऊँची छिलाई और मध्यम छतरी वाली किस्म चाहते हैंकलमी पौधे में पहला फल लगभग 3 साल में (TNAU का फ़सल-स्तर); भुवनेश्वर-1 का फूल का कैलेंडर नहीं मिलाओडिशा परीक्षण: चार तुड़ाई में 7.12 किग्रा मेवा प्रति पेड़ (1,453 किग्रा/हेक्टेयर); छिलाई 30.77% और 30.68%ओडिशा
BPP-8पूर्वी, ओडिशा जैसे हालात के किसान जो सबसे अच्छी छपी परीक्षण-उपज वाली किस्म चाहते हैंकलमी पौधे में पहला फल लगभग 3 साल में (TNAU का फ़सल-स्तर); BPP-8 का फूल का कैलेंडर नहीं मिलाओडिशा परीक्षण: चार तुड़ाई में 11.86 किग्रा मेवा प्रति पेड़ (2,420 किग्रा/हेक्टेयर), 25 जारी किस्मों में सबसे अच्छी; 2014 में 6.0 किग्रा प्रति पेड़आंध्र प्रदेश
Dhanaबड़े काजू-सेब और अच्छा मेवाकलमी पौधे में पहला फल 3 साल मेंTNAU: पूरे पेड़ से 10.66 किग्रा मेवा; दाना 8.2 ग्राम, छिलाई 29.8%, W210। ओडिशा परीक्षण: चार तुड़ाई में 7.28 किग्रा प्रति पेड़केरल
Dharasreeकेरल के वे खेत जो अनक्कयम केंद्र की सघन छतरी वाली, मध्यम आकार के और अच्छी छिलाई वाले दाने की किस्म चाहते हैंकलमी पौधे में पहला फल लगभग 3 साल में (TNAU का फ़सल-स्तर); फूल दिसंबर से जनवरी, फल जनवरी से मार्चTNAU: पूरे पेड़ से 10.66 किग्रा मेवा; दाना 7.8 ग्राम, छिलाई 30.5%, W240केरल
Kanaka (H-1598)वे किसान जो ऊँची छिलाई और ठीक-ठाक शुरुआती उपज चाहते हैं और खुली, ऊँची छतरी के लिए जगह दे सकते हैंकलमी पौधे में पहला फल लगभग 3 साल में (TNAU का फ़सल-स्तर); फूल नवंबर से दिसंबर, फल दिसंबर से मार्चTNAU: पूरे पेड़ से 12.8 किग्रा मेवा; दाना 6.8 ग्राम, छिलाई 30.58%, W280। ओडिशा परीक्षण: चार तुड़ाई में 7.16 किग्रा प्रति पेड़ (1,461 किग्रा/हेक्टेयर)केरल
NRCC Selection-1वे किसान जिनके पास ये पेड़ पहले से हैं, या जिन्हें कोई नर्सरी यह नाम बेच रही है और जो इसका मतलब जानना चाहते हैंकम अवधि; फूल दिसंबर से फ़रवरी, फल मार्च से अप्रैल (ICAR-DCR)ICAR-DCR: 10 किग्रा मेवा प्रति पेड़; दाना 7.6 ग्राम, छिलाई 28.8%, W210। सिफ़ारिश से हटाई गईकर्नाटक
NRCC Selection-2यही पेजवे किसान जो कम अवधि की, DCR की सुझाई, अच्छे परीक्षण-रिकॉर्ड वाली किस्म चाहते हैं और मेवे के लिए लगाते हैंकम अवधि; फूल नवंबर से जनवरी, फल फ़रवरी से मार्च (ICAR-DCR)ICAR-DCR: 9 किग्रा मेवा प्रति पेड़; दाना 9.3 ग्राम, छिलाई 28.6%, W210। ओडिशा परीक्षण: चार तुड़ाई में 8.81 किग्रा प्रति पेड़ (1,798 किग्रा/हेक्टेयर), 25 में चौथीकर्नाटक
Priyankaसबसे भारी काजू-सेब, प्रसंस्करण के लिएकलमी पौधे में पहला फल 3 साल मेंTNAU: पूरे पेड़ से 17.03 किग्रा मेवा; दाना 10.8 ग्राम, छिलाई 26.57%, W180। ओडिशा परीक्षण: चार तुड़ाई में 4.15 किग्रा प्रति पेड़केरल
Sulabhaकेरल के किसान जो बड़ा दाना और सघन पेड़ चाहते हैं और देर के फूल का मौसम मंज़ूर कर सकते हैंकलमी पौधे में पहला फल लगभग 3 साल में (TNAU का फ़सल-स्तर); फूल जनवरी से फ़रवरी, फल फ़रवरी से अप्रैलTNAU: पूरे पेड़ से 21.9 किग्रा मेवा, KAU की शीटों में सबसे ज़्यादा; दाना 9.8 ग्राम, छिलाई 29.4%, W210केरल
Ullal-3कर्नाटक में छोटे फूल-मौसम वाली किस्म3 साल में पहला फलन (कलमी)TNAU: पूरे पेड़ से 14.7 किग्रा मेवा। ओडिशा परीक्षण: चार तुड़ाई में 8.04 किग्रा प्रति पेड़ (1,641 किग्रा प्रति हेक्टेयर)कर्नाटक
Vengurla-4पश्चिमी तट की पुरानी, परखी हुई काजूकलमी पौधे में पहला फल 3 साल मेंTNAU: पूरे पेड़ से 17.2 किग्रा मेवा। ओडिशा परीक्षण: चार तुड़ाई में 7.68 किग्रा प्रति पेड़महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक
Vengurla-7मोटा मेवा, निर्यात-स्तर की गिरी के लिएकलमी पौधे में पहला फल 3 साल मेंऔसतन लगभग 18.5 किग्रा/पेड़; मोटा 10 ग्राम का मेवा, W180 गिरी ग्रेड, छिलाई लगभग 30.5%महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक
VRI-3छोटा पेड़ और W210 गिरीकलमी पौधे में पहला फल 3 साल मेंTNAU: पूरे पेड़ से 11.68 किग्रा मेवा (TNAU का दूसरा पृष्ठ 14.19 किग्रा कहता है); दाना 7.18 ग्राम, छिलाई 29.1%, W210तमिलनाडु

इस फ़सल के कैलकुलेटर

आगे के हिसाब यहाँ कर लीजिए — कितना बीज ख़रीदें, बोरा अंकुरित होगा या नहीं, खाद का ख़र्च कितना बैठेगा, और काजू का भाव क्या चल रहा है।

सब्सिडी और सरकारी मदद

काजू के बीज या रोपण सामग्री की लागत में मदद करने वाली योजनाएँ। नियम और आवेदन का तरीक़ा हर योजना के पेज पर है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

NRCC सिलेक्शन-2 क्या है?

ICAR-DCR (पहले NRCC), पुत्तूर का काजू का चयन, जो 1989 में डिचेरला के पेड़ 2/9 से जारी हुआ। ICAR-DCR इसे कम अवधि की, 9 किग्रा मेवा प्रति पेड़ और खेती के लिए सुझाई गई बताता है।

ओडिशा परीक्षण में NRCC सिलेक्शन-2 कैसी रही?

इसने 2014 में 5.15 किग्रा प्रति पेड़ और चार तुड़ाई में 8.81 किग्रा दिया (1,798 किग्रा/हेक्टेयर), BPP-8 (11.86), वेंगुर्ला-7 (10.32) और भास्कर (9.85) से पीछे। लेखकों ने इसे BPP-8, वेंगुर्ला-7, भास्कर और उल्लाल-3 के साथ ज़्यादातर गुणों में सबसे अच्छा गिना। 2014 में इसकी छतरी 22.82 वर्ग मीटर तक पहुँची, इसलिए इसे जगह दीजिए।

NRCC सिलेक्शन-2 या भास्कर?

दोनों ICAR-DCR की किस्में हैं और दोनों ओडिशा परीक्षण की सबसे अच्छी पाँच में थीं। भास्कर का ब्योरा उसके अपने पन्ने पर देखिए। NRCC सिलेक्शन-2 पुरानी (1989) और कम अवधि वाली किस्म है; भास्कर नई जारी की गई किस्म है, जिसकी अपनी राजपत्र अधिसूचना है। दोनों के कुछ पेड़ आज़माइए।

NRCC सिलेक्शन-2 की कलमें कहाँ से मिलेंगी?

ICAR-DCR रोपण-सामग्री का स्रोत DCR पुत्तूर और कृषि अनुसंधान केंद्र, चिंतामणि बताता है। ऐसी नर्सरी से ख़रीदिए जो मान्यता दिखा सके और मातृ-खंड का नाम बता सके; बिना लेबल के सड़क किनारे के स्टॉक से मत ख़रीदिए।

स्रोत: DCR varieties (NRCC Selection-1, NRCC Selection-2, Bhaskara) — ICAR-DCR Puttur, Tripathy, Sethi and Mukherjee, Evaluation of released cashew varieties under Odisha condition — Int. J. Bio-resource and Stress Management 6(5), 2015, Model Profile for 1.0 ha Cashew Cultivation — NABARD/TNAU. संपादकीय नीति.