IISR Girimunda
नारायकोडी और नीलमुंडी के क्रॉस से IISR की 2004 की संकर किस्म, ऊँचे इलाक़ों और कॉफ़ी-चाय के बागानों के लिए। IISR इसे 2,880 किग्रा सूखी काली मिर्च/हेक्टेयर और 90% दाना बँधना देता है, पर पिपरीन सिर्फ़ 2.2% है।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- काली मिर्च
- प्रकार
- संकर किस्म, जड़ वाली कलमों से लगाई जाती है
- सीज़न
- सभी सीज़न
- पकने की अवधि
- बारहमासी बेल; IISR इसे मध्यम समय में पकने वाली बताता है (पहली फ़सल की उम्र नहीं दी)
- बीज दर
- बीज की फसल नहीं है। हर सहारे पर जड़ वाली 2–3 कलमें लगाएँ; सहारे लगभग 3 × 3 मी की दूरी पर (लगभग 1,100 बेलें/हेक्टेयर)
- अपेक्षित उपज
- 2,880 किग्रा सूखी काली मिर्च/हेक्टेयर (IISR की तालिका); 6.14 किग्रा ताज़ी मिर्च प्रति बेल
- उपयुक्त मिट्टी
- अच्छी निकासी वाली जंगल की दोमट / लेटराइट मिट्टी, ह्यूमस से भरपूर, अम्लीय pH 4.5–6.0
- जारी
- 2004 में जारी · ICAR-IISR, कोझीकोड, केरल
इस किस्म के बारे में
IISR गिरिमुंडा काली मिर्च की संकर किस्म है, जिसे ICAR-IISR कोझीकोड ने नारायकोडी और नीलमुंडी के क्रॉस से 2004 में जारी किया। IISR इसे मध्यम समय में पकने वाली और ऊँचे इलाक़ों के लिए ठीक बताता है, और उसकी तालिका कॉफ़ी-चाय के बागान तथा केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु भी जोड़ती है। किस्म-पेज प्रति बेल 6.14 किग्रा ताज़ी मिर्च देती है, और तालिका 2,880 किग्रा सूखी काली मिर्च/हेक्टेयर। AICRP मसाला पुस्तिका 2,800 देती है। गुच्छा 9.65 सेमी लंबा है, 47 दाने और 90% दाना बँधना, 12.9 सेमी गुणा 8.6 सेमी की अंडाकार-दीर्घवृत्ताकार पत्ती पर। एक हज़ार दानों का वज़न 112 ग्राम है। पिपरीन 2.2%, ओलियोरेज़िन 9.65%, उड़नशील तेल 3.4% और सूखी निकासी 32% है।
क्या यह किस्म आपके लिए ठीक है?
ऊँचे इलाक़े के बाग या कॉफ़ी-चाय के बागान में, जहाँ आप काली मिर्च वज़न से बेचते हैं, IISR गिरिमुंडा चुनिए। IISR इसे 2,880 किग्रा सूखी काली मिर्च/हेक्टेयर देता है, जो उसकी तालिका के सबसे ऊँचे औसतों में से है, और 6.14 किग्रा ताज़ी मिर्च प्रति बेल, 90% दाना बँधने के साथ। कमी तीखेपन में है: पिपरीन 2.2% है, जबकि श्रीकारा में 5.1%, और ओलियोरेज़िन 9.65% जबकि 13.0%। IISR इसके लिए पाद सड़न का दर्जा नहीं देता, जो IISR थेवम के पास है, इसलिए गीले ऊँचे इलाक़े में निकासी और बचाव का कार्यक्रम न छोड़ें। आपका ख़रीदार पिपरीन के हिसाब से भाव देता है तो गिरिमुंडा ग़लत चुनाव है।
मुख्य विशेषताएँ
बुवाई और खेती
- बुवाई का समयमानसून की पहली बारिश के साथ लगाएँ, लगभग मई–जून
- बीज दरबीज की फसल नहीं है। हर सहारे पर जड़ वाली 2–3 कलमें लगाएँ; सहारे लगभग 3 × 3 मी की दूरी पर (लगभग 1,100 बेलें/हेक्टेयर)
- दूरीअलग बाग में सहारे लगभग 3 × 3 मी की दूरी पर। अंतरफसल में मेज़बान पेड़ की दूरी के हिसाब से
- बुवाई विधिहर सहारे के उत्तर की ओर जड़ वाली 2–3 कलमें लगाएँ, जड़ के पास पलवार (मल्च) बिछाएँ, और हर नई बढ़त को सहारे से बाँधते रहें।
- सिंचाईछोटी बेलों को शुरू के सूखे मौसमों में पानी दें। जहाँ पानी मिले, फल देने वाली बेलों को गर्मी (सूखे मौसम) में सिंचाई देने से, अब बूँद-बूँद से बढ़ते चलन में, दाना काफ़ी अच्छा भरता है।
- उर्वरकहर बेल को हर साल 5–10 किग्रा गोबर की खाद और मानसून से पहले मोटी पलवार दें। पूरी बढ़ी बेल को साल में लगभग 50:50:150 ग्राम N:P2O5:K2O दो बार में दें। बहुत अम्लीय मिट्टी में चूना डालें।
- कटाईनवंबर से फरवरी तक कई बार हाथ से गुच्छे तोड़ें। सुखाने पर निकासी अच्छी होने से हरे दाने के हर किलो पर सूखी काली मिर्च ज़्यादा तौल में मिलती है।
मिट्टी और जलवायु
मिट्टी
- उपयुक्त मिट्टी
- अच्छी निकासी वाली जंगल की दोमट या लेटराइट मिट्टी, ढलान के ऊँचे हिस्से या टीले पर
- pH
- 4.5–6.0
जलवायु
- जलवायु
- IISR इसे ऊँचे इलाक़ों और कॉफ़ी-चाय के बागानों के लिए सुझाता है। छाया या बारिश के कोई आँकड़े नहीं देता।
उपज और अवधि
पकने की अवधि
बारहमासी बेल; IISR इसे मध्यम समय में पकने वाली बताता है (पहली फ़सल की उम्र नहीं दी)
अपेक्षित उपज
2,880 किग्रा सूखी काली मिर्च/हेक्टेयर (IISR की तालिका); 6.14 किग्रा ताज़ी मिर्च प्रति बेल
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता और फ़सल की देखभाल पर निर्भर करती है।
कीट और रोग संबंधी बातें
मुख्य रोग
प्रबंधन सुझाव
- IISR इस किस्म के लिए रोग का कोई दर्जा नहीं देता, इसलिए इसे किसी भी काली मिर्च की तरह रखिए: निकासी, टीले पर रोपाई और पाद सड़न का बचाव कार्यक्रम।
- बागानों में बेलों को वहाँ पहले से लगे छाया के पेड़ों पर चढ़ाइए और जड़ के पास पलवार रखिए।
फ़ायदे और ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- IISR की तालिका में 2,880 किग्रा सूखी काली मिर्च/हेक्टेयर, श्रीकारा (2,677), पंचमी (2,828) और थेवम (2,481) से ऊपर।
- प्रति बेल 6.14 किग्रा ताज़ी मिर्च और 90% दाना बँधना।
- ऊँचे इलाक़ों और कॉफ़ी-चाय के बागानों के लिए बनी।
ध्यान रखने योग्य बातें
- पिपरीन सिर्फ़ 2.2% है, जबकि श्रीकारा में 5.1%। तीखेपन का भाव देने वाला ख़रीदार कम दे सकता है।
- ओलियोरेज़िन 9.65% और सूखी निकासी 32% श्रीकारा (13.0% और 35.0%) से कम हैं।
- IISR पाद सड़न का दर्जा नहीं देता, जो थेवम और शक्ति के पास है।
उपयुक्त क्षेत्र
IISR इसे केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु के ऊँचे इलाक़ों के लिए, कॉफ़ी और चाय के बागानों समेत, सुझाता है।
- केरल
- कर्नाटक
- तमिलनाडु
ऊँचे इलाक़े की काली मिर्च: गिरिमुंडा या थेवम?
IISR ने दोनों को 2004 में ऊँचे इलाक़ों और कॉफ़ी-चाय के बागानों के लिए जारी किया, इसलिए ऊँचे इलाक़े के ज़्यादातर किसान इन्हीं दोनों में से चुनेंगे। IISR के आँकड़ों में दोनों की अलग ताक़त है।
गिरिमुंडा ज़्यादा देती है: 2,880 किग्रा सूखी काली मिर्च/हेक्टेयर जबकि थेवम की 2,481, और प्रति बेल 6.14 किग्रा ताज़ी मिर्च जबकि 4.76। इसमें ओलियोरेज़िन भी ज़्यादा है, 9.65% जबकि 8.15%, और पिपरीन भी, 2.2% जबकि 1.6%। थेवम की ताक़त रोग में है: IISR इसे फाइटोफ्थोरा पाद सड़न के प्रति खेत में सहनशील बताता है, जबकि गिरिमुंडा का कोई दर्जा नहीं। थेवम के दाने भी मोटे हैं, 1,000 हरे दानों का वज़न 155 ग्राम जबकि गिरिमुंडा का 112 ग्राम।
इसलिए चुनाव उपज और जोखिम के बीच है। जहाँ आपके बागान में पाद सड़न पहले आ चुका है, वहाँ थेवम लीजिए। जहाँ निकासी अच्छी है और आप ऊँचा औसत चाहते हैं, वहाँ गिरिमुंडा लीजिए और बचाव का कार्यक्रम तैयार रखिए।
क्या इसका बीज अपने पास रख सकते हैं?
इसे बीज से नहीं उगाते। IISR कहता है कि सिर्फ़ क्लोन से बनी रोपण-सामग्री, यानी जिस बेल को आपने देखा-परखा हो उसकी जड़ वाली कलमें, इस्तेमाल करें, दानों से उगी पौध नहीं। दो किस्मों के क्रॉस के दानों से माँ-बेल जैसे पौधे नहीं मिलते।
दूसरी किस्मों से तुलना
काली मिर्च की वे सभी किस्में, जिनका पेज इस साइट पर है, एक साथ देखें। जो किस्म आप अभी देख रहे हैं, उसकी पंक्ति रंग से अलग दिखती है।
| किस्म | किसके लिए ठीक | फल कब से | उपज | राज्य |
|---|---|---|---|---|
| Arka Coorg Excel | कोडगु के बाग जो IISR की सबसे ऊँची उपज चाहते हैं | बारहमासी बेल; IISR इसे मध्यम समय में पकने वाली बताता है (पहली फ़सल की उम्र नहीं दी) | 3,267 किग्रा सूखी काली मिर्च/हेक्टेयर (IISR की तालिका); 7.15 किग्रा प्रति बेल (IISR की किस्म-पेज) | कर्नाटक |
| IISR Chandra | नई जल्दी पकने वाली संकर किस्म; लंबे गुच्छे और ऊँचा दाना बँधना | बारहमासी बेल; IISR इसे जल्दी पकने वाली बताता है (पहली फ़सल की उम्र या दिन नहीं दिए) | औसतन 2,905 किग्रा सूखी काली मिर्च प्रति हेक्टेयर (IISR की किस्म-पेज); 7.5 किग्रा हरी मिर्च प्रति बेल; क्षमता 7,815 किग्रा/हेक्टेयर | केरल, कर्नाटक |
| IISR Girimundaयही पेज | ऊँचे इलाक़ों के बाग और बागान जो वज़न पर बेचते हैं | बारहमासी बेल; IISR इसे मध्यम समय में पकने वाली बताता है (पहली फ़सल की उम्र नहीं दी) | 2,880 किग्रा सूखी काली मिर्च/हेक्टेयर (IISR की तालिका); 6.14 किग्रा ताज़ी मिर्च प्रति बेल | केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु |
| IISR Malabar Excel | ओलियोरेज़िन के लिए ऊँचे इलाक़े में छोटा परीक्षण-टुकड़ा | बारहमासी बेल; IISR इसे मध्यम समय में पकने वाली बताता है (पहली फ़सल की उम्र नहीं दी) | 1,440 किग्रा सूखी काली मिर्च/हेक्टेयर (IISR की तालिका); 2.78 किग्रा ताज़ी मिर्च प्रति बेल | केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु |
| IISR Shakthi | बारानी बाग जहाँ पाद सड़न सबसे बड़ा ख़तरा है | बारहमासी बेल; IISR इसे मध्यम समय में पकने वाली बताता है (पहली फ़सल की उम्र नहीं दी) | 2,253 किग्रा सूखी काली मिर्च/हेक्टेयर (IISR की किस्म-पेज) या 2,352 (IISR की तालिका); 5.2 किग्रा हरी मिर्च प्रति बेल | केरल, कर्नाटक |
| IISR Thevam | कॉफ़ी और चाय के बागान और ऊँचे इलाकों के बाग, जहाँ पाद सड़न मुख्य जोखिम है और वज़न तीखेपन से ज़्यादा मायने रखता है | बारहमासी बेल। पहला फल 3 साल में, पूरी उपज 7–8 साल तक, और 20–30 साल तक उपज देती है | औसतन 2,481 किग्रा प्रति हेक्टेयर सूखी काली मिर्च (IISR); 4.76 किग्रा ताज़ी प्रति बेल (KAU पुस्तिका) | केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु |
| Karimunda | घरेलू बाग और मिलवाँ बागान के उत्पादकों के लिए, जो जानी-पहचानी बेल और आसानी से मिलने वाली पौध चाहते हैं | बारहमासी बेल। पहला फल 3 साल में, पूरी उपज 7–8 साल तक, और 20–30 साल तक उपज देती है | असम के सुपारी ट्रायल में 0.98 किग्रा सूखी काली मिर्च प्रति बेल (12 में चौथे नंबर पर) | केरल, कर्नाटक |
| Panchami | केरल और दक्षिणी कर्नाटक के उत्पादकों के लिए, जो ओलियोरेज़िन पर बेचते हैं और ऐसी बेल चाहते हैं जिस पर बहुत दाने बँधें | बारहमासी बेल। पहला फल 3 साल में, पूरी उपज 7–8 साल तक, और 20–30 साल तक उपज देती है | औसतन 2,828 किग्रा प्रति हेक्टेयर सूखी काली मिर्च और 5.20 किग्रा ताज़ी प्रति बेल (IISR, KAU); असम के सुपारी ट्रायल में 0.75 किग्रा सूखी प्रति बेल | केरल, कर्नाटक |
| Panniyur-1 | उन किसानों के लिए जिनके पास खुली या हल्की छाया वाली, अच्छी निकासी की ज़मीन है, जो ज़्यादा उपज वाली हाइब्रिड चाहते हैं और पाद सड़न से बचाव का कार्यक्रम चलाएँगे | बारहमासी बेल। पहला फल 3 साल में, पूरी उपज 7–8 साल तक, और 20–30 साल तक उपज देती है | कर्नाटक के सुपारी वाले ट्रायल में 3.66 किग्रा सूखी काली मिर्च प्रति बेल (11 में सबसे ज़्यादा); असम के सुपारी वाले ट्रायल में 1.15 किग्रा प्रति बेल | केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु |
| Panniyur-2 | उन उत्पादकों के लिए जो मिलवाँ घरेलू बाग के लिए बहुत तीखी, छाया सहने वाली काली मिर्च चाहते हैं और सबसे ऊँची उपज ज़रूरी नहीं मानते | बारहमासी — तीसरे साल पहला फल, 7–8वें साल पूर्ण फलन, 20–30 साल उत्पादक | औसतन 2,570 किग्रा प्रति हेक्टेयर सूखी काली मिर्च और 4.50 किग्रा ताज़ी प्रति बेल (KAU पुस्तिका); असम के सुपारी ट्रायल में 0.55 किग्रा सूखी प्रति बेल | केरल |
| Panniyur-5 | सुपारी, नारियल या पेड़ों की छाया वाले बाग, जहाँ छाया सहने वाली, बहुत गुच्छों वाली काली मिर्च चाहिए | बारहमासी बेल। पहला फल 3 साल में, पूरी उपज 7–8 साल तक, और 20–30 साल तक उपज देती है | असम के सुपारी ट्रायल में 1.25 किग्रा सूखी काली मिर्च प्रति बेल (12 में सबसे ज़्यादा); KAU पुस्तिका में औसतन 1,107 किग्रा प्रति हेक्टेयर | केरल, कर्नाटक |
| Panniyur-6 | उन उत्पादकों के लिए जो काली मिर्च वज़न के भाव बेचते हैं और मोटे दाने और बहुत गुच्छे चाहते हैं, ज़्यादा अर्क नहीं | बारहमासी बेल। पहला फल 3 साल में, पूरी उपज 7–8 साल तक, और 20–30 साल तक उपज देती है | औसतन 2,127 किग्रा प्रति हेक्टेयर सूखी काली मिर्च और 2.30 किग्रा ताज़ी प्रति बेल (KAU पुस्तिका) | केरल |
| PLD-2 | ओलियोरेज़िन ख़रीदार; केरल के मैदान और ऊँची ज़मीन | बारहमासी बेल; IISR इसे देर से पकने वाली बताता है (पहली फ़सल की उम्र नहीं दी) | औसतन 2,475 किग्रा सूखी काली मिर्च/हेक्टेयर; क्षमता 4,731 किग्रा/हेक्टेयर; 4.97 किग्रा हरी मिर्च प्रति बेल (IISR) | केरल |
| Pournami | धीमे क्षय के इतिहास वाले बाग, और सुपारी या केले की अंतरफसल, जहाँ जड़-गाँठ सूत्रकृमि की चिंता है | बारहमासी बेल। पहला फल 3 साल में, पूरी उपज 7–8 साल तक, और 20–30 साल तक उपज देती है | औसतन 2,333 किग्रा प्रति हेक्टेयर सूखी काली मिर्च और 4.70 किग्रा ताज़ी प्रति बेल (IISR, KAU); असम के सुपारी ट्रायल में 0.85 किग्रा सूखी प्रति बेल | केरल, कर्नाटक |
| Sreekara | उन उत्पादकों के लिए जो अर्क निकालने वालों को बेचते हैं और केरल, दक्षिण कर्नाटक या तमिलनाडु में ऊँचा ओलियोरेज़िन और उड़नशील तेल चाहते हैं | बारहमासी बेल। पहला फल 3 साल में, पूरी उपज 7–8 साल तक, और 20–30 साल तक उपज देती है | औसतन 2,677 किग्रा प्रति हेक्टेयर सूखी काली मिर्च और 4.80 किग्रा ताज़ी प्रति बेल (IISR, KAU); असम के सुपारी ट्रायल में 0.70 किग्रा सूखी प्रति बेल | केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु |
| Subhakara | केरल, दक्षिण कर्नाटक और तमिलनाडु के अंतरफसल वाले बाग और ऊँचे इलाके, जहाँ वज़न और भरोसा पिपरीन से ज़्यादा मायने रखते हैं | बारहमासी बेल। पहला फल 3 साल में, पूरी उपज 7–8 साल तक, और 20–30 साल तक उपज देती है | औसतन 2,352 किग्रा प्रति हेक्टेयर सूखी काली मिर्च और 4.20 किग्रा ताज़ी प्रति बेल (IISR, KAU); असम के सुपारी ट्रायल में 1.12 किग्रा सूखी प्रति बेल (12 में तीसरे नंबर पर) | केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु |
इस फ़सल के कैलकुलेटर
आगे के हिसाब यहाँ कर लीजिए — कितना बीज ख़रीदें, बोरा अंकुरित होगा या नहीं, खाद का ख़र्च कितना बैठेगा, और काली मिर्च का भाव क्या चल रहा है।
- बीज दर कैलकुलेटरआपके काली मिर्च के खेत के लिए कितना बीज चाहिए — आपके बोरे के अंकुरण के हिसाब से सुधारा हुआ।
- अंकुरण कैलकुलेटरबुवाई से पहले बोरे के 100 बीज जाँचिए और देखिए कि बीज बोने लायक है या नहीं।
- बीज किस्म खोजकइस साइट की हर काली मिर्च किस्म को राज्य, सीज़न, अवधि और मिट्टी से छानिए।
- खाद कैलकुलेटरकाली मिर्च की एनपीके सिफ़ारिश को अपने खेत के हिसाब से यूरिया, डीएपी और एमओपी के बोरों में बदलिए।
- फ़सल कैलेंडरआपके राज्य में काली मिर्च की बुवाई, निराई, सिंचाई और कटाई के महीने।
- फ़सल लाभ कैलकुलेटरबीज, मज़दूरी और लागत को इस किस्म से मिलने वाली उपज के सामने रखकर देखिए।
- मंडी भाव जाँचकव्यापारी से भाव तय करने से पहले अपनी नज़दीकी मंडी में काली मिर्च का आज का रेट देखिए।
सब्सिडी और सरकारी मदद
काली मिर्च के बीज या रोपण सामग्री की लागत में मदद करने वाली योजनाएँ। नियम और आवेदन का तरीक़ा हर योजना के पेज पर है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या मैं गिरिमुंडा को बीज से उगा सकता हूँ?
नहीं। यह संकर किस्म है और IISR कहता है कि सिर्फ़ क्लोन से बनी रोपण-सामग्री, यानी जड़ वाली कलमें, इस्तेमाल करें। संकर के दानों से माँ-बेल जैसी बेलें नहीं मिलतीं।
गिरिमुंडा का पिपरीन इतना कम क्यों है?
IISR पिपरीन 2.2% देता है, जबकि श्रीकारा में 5.1% और पौर्णमी में 5.3%, और कारण नहीं बताता। किस्म ऊँचे इलाक़ों के लिए और उपज और स्थिरता के लिए जारी हुई थी, और इसकी मिर्च हल्की है। तीखेपन से आपको बेहतर भाव मिलता है तो कोई और किस्म चुनिए।
क्या गिरिमुंडा मैदान में उगेगी?
IISR इसे ऊँचे इलाक़ों और कॉफ़ी-चाय के बागानों के लिए सुझाता है और मैदान का कोई नतीजा नहीं देता। मैदान के लिए IISR की तालिका श्रीकारा, पंचमी और पौर्णमी को केरल और दक्षिण कर्नाटक के लिए, और शक्ति को बारानी मैदान और ऊँचे इलाक़ों के लिए गिनाती है।
मैं कौन-सा उपज का आँकड़ा लूँ, 2,880 या 2,800 किग्रा/हेक्टेयर?
IISR की किस्म-तालिका 2,880 किग्रा/हेक्टेयर देती है और AICRP मसाला पुस्तिका 2,800, यानी दोनों क़रीब हैं। इनमें से कोई भी सिर्फ़ किस्मों की तुलना के लिए इस्तेमाल कीजिए। असली आँकड़ा आपके बाग की छाया, बारिश, रोग और खाद-पानी से बदलेगा।
स्रोत: IISR-Girimunda (Black Pepper) — ICAR-Indian Institute of Spices Research, Spice varieties: significant characteristics of black pepper varieties — ICAR-IISR (ITM-ABI), Improved Varieties of Black Pepper — AICRP on Spices (Pepper Research Station Panniyur), September 2025. संपादकीय नीति.
