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काली मिर्चसभी सीज़नसंकर किस्म, जड़ वाली कलमों से लगाई जाती हैअंतिम अपडेट: 19 अक्टूबर 2026

IISR Girimunda

नारायकोडी और नीलमुंडी के क्रॉस से IISR की 2004 की संकर किस्म, ऊँचे इलाक़ों और कॉफ़ी-चाय के बागानों के लिए। IISR इसे 2,880 किग्रा सूखी काली मिर्च/हेक्टेयर और 90% दाना बँधना देता है, पर पिपरीन सिर्फ़ 2.2% है।

सीज़नसभी सीज़न
पकने की अवधिबारहमासी बेल; IISR इसे मध्यम समय में पकने वाली बताता है (पहली फ़सल की उम्र नहीं दी)
अपेक्षित उपज2,880 किग्रा सूखी काली मिर्च/हेक्टेयर (IISR की तालिका); 6.14 किग्रा ताज़ी मिर्च प्रति बेल
उपयुक्त मिट्टीअच्छी निकासी वाली जंगल की दोमट / लेटराइट मिट्टी, ह्यूमस से भरपूर, अम्लीय pH 4.5–6.0

ज़रूरी तथ्य

प्रकार
संकर किस्म, जड़ वाली कलमों से लगाई जाती है
सीज़न
सभी सीज़न
पकने की अवधि
बारहमासी बेल; IISR इसे मध्यम समय में पकने वाली बताता है (पहली फ़सल की उम्र नहीं दी)
बीज दर
बीज की फसल नहीं है। हर सहारे पर जड़ वाली 2–3 कलमें लगाएँ; सहारे लगभग 3 × 3 मी की दूरी पर (लगभग 1,100 बेलें/हेक्टेयर)
अपेक्षित उपज
2,880 किग्रा सूखी काली मिर्च/हेक्टेयर (IISR की तालिका); 6.14 किग्रा ताज़ी मिर्च प्रति बेल
उपयुक्त मिट्टी
अच्छी निकासी वाली जंगल की दोमट / लेटराइट मिट्टी, ह्यूमस से भरपूर, अम्लीय pH 4.5–6.0
जारी
2004 में जारी · ICAR-IISR, कोझीकोड, केरल

इस किस्म के बारे में

IISR गिरिमुंडा काली मिर्च की संकर किस्म है, जिसे ICAR-IISR कोझीकोड ने नारायकोडी और नीलमुंडी के क्रॉस से 2004 में जारी किया। IISR इसे मध्यम समय में पकने वाली और ऊँचे इलाक़ों के लिए ठीक बताता है, और उसकी तालिका कॉफ़ी-चाय के बागान तथा केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु भी जोड़ती है। किस्म-पेज प्रति बेल 6.14 किग्रा ताज़ी मिर्च देती है, और तालिका 2,880 किग्रा सूखी काली मिर्च/हेक्टेयर। AICRP मसाला पुस्तिका 2,800 देती है। गुच्छा 9.65 सेमी लंबा है, 47 दाने और 90% दाना बँधना, 12.9 सेमी गुणा 8.6 सेमी की अंडाकार-दीर्घवृत्ताकार पत्ती पर। एक हज़ार दानों का वज़न 112 ग्राम है। पिपरीन 2.2%, ओलियोरेज़िन 9.65%, उड़नशील तेल 3.4% और सूखी निकासी 32% है।

क्या यह किस्म आपके लिए ठीक है?

ऊँचे इलाक़े के बाग या कॉफ़ी-चाय के बागान में, जहाँ आप काली मिर्च वज़न से बेचते हैं, IISR गिरिमुंडा चुनिए। IISR इसे 2,880 किग्रा सूखी काली मिर्च/हेक्टेयर देता है, जो उसकी तालिका के सबसे ऊँचे औसतों में से है, और 6.14 किग्रा ताज़ी मिर्च प्रति बेल, 90% दाना बँधने के साथ। कमी तीखेपन में है: पिपरीन 2.2% है, जबकि श्रीकारा में 5.1%, और ओलियोरेज़िन 9.65% जबकि 13.0%। IISR इसके लिए पाद सड़न का दर्जा नहीं देता, जो IISR थेवम के पास है, इसलिए गीले ऊँचे इलाक़े में निकासी और बचाव का कार्यक्रम न छोड़ें। आपका ख़रीदार पिपरीन के हिसाब से भाव देता है तो गिरिमुंडा ग़लत चुनाव है।

मुख्य विशेषताएँ

    पौध प्रकारसंकर किस्म, जड़ वाली कलमों से लगाई जाती है
    अवधिबारहमासी बेल; IISR इसे मध्यम समय में पकने वाली बताता है (पहली फ़सल की उम्र नहीं दी)
    उपज क्षमता2,880 किग्रा सूखी काली मिर्च/हेक्टेयर (IISR की तालिका); 6.14 किग्रा ताज़ी मिर्च प्रति बेल
    रोग-प्रतिरोधIISR ने रोग का कोई दर्जा नहीं दिया
    मिट्टीअच्छी निकासी वाली जंगल की दोमट / लेटराइट मिट्टी, ह्यूमस से भरपूर, अम्लीय pH 4.5–6.0
    सीज़नसभी सीज़न

बुवाई और खेती

  • बुवाई का समयमानसून की पहली बारिश के साथ लगाएँ, लगभग मई–जून
  • बीज दरबीज की फसल नहीं है। हर सहारे पर जड़ वाली 2–3 कलमें लगाएँ; सहारे लगभग 3 × 3 मी की दूरी पर (लगभग 1,100 बेलें/हेक्टेयर)
  • दूरीअलग बाग में सहारे लगभग 3 × 3 मी की दूरी पर। अंतरफसल में मेज़बान पेड़ की दूरी के हिसाब से
  • बुवाई विधिहर सहारे के उत्तर की ओर जड़ वाली 2–3 कलमें लगाएँ, जड़ के पास पलवार (मल्च) बिछाएँ, और हर नई बढ़त को सहारे से बाँधते रहें।
  • सिंचाईछोटी बेलों को शुरू के सूखे मौसमों में पानी दें। जहाँ पानी मिले, फल देने वाली बेलों को गर्मी (सूखे मौसम) में सिंचाई देने से, अब बूँद-बूँद से बढ़ते चलन में, दाना काफ़ी अच्छा भरता है।
  • उर्वरकहर बेल को हर साल 5–10 किग्रा गोबर की खाद और मानसून से पहले मोटी पलवार दें। पूरी बढ़ी बेल को साल में लगभग 50:50:150 ग्राम N:P2O5:K2O दो बार में दें। बहुत अम्लीय मिट्टी में चूना डालें।
  • कटाईनवंबर से फरवरी तक कई बार हाथ से गुच्छे तोड़ें। सुखाने पर निकासी अच्छी होने से हरे दाने के हर किलो पर सूखी काली मिर्च ज़्यादा तौल में मिलती है।

मिट्टी और जलवायु

मिट्टी

उपयुक्त मिट्टी
अच्छी निकासी वाली जंगल की दोमट या लेटराइट मिट्टी, ढलान के ऊँचे हिस्से या टीले पर
pH
4.5–6.0

जलवायु

जलवायु
IISR इसे ऊँचे इलाक़ों और कॉफ़ी-चाय के बागानों के लिए सुझाता है। छाया या बारिश के कोई आँकड़े नहीं देता।

उपज और अवधि

पकने की अवधि

बारहमासी बेल; IISR इसे मध्यम समय में पकने वाली बताता है (पहली फ़सल की उम्र नहीं दी)

अपेक्षित उपज

2,880 किग्रा सूखी काली मिर्च/हेक्टेयर (IISR की तालिका); 6.14 किग्रा ताज़ी मिर्च प्रति बेल

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता और फ़सल की देखभाल पर निर्भर करती है।

कीट और रोग संबंधी बातें

प्रबंधन सुझाव

  • IISR इस किस्म के लिए रोग का कोई दर्जा नहीं देता, इसलिए इसे किसी भी काली मिर्च की तरह रखिए: निकासी, टीले पर रोपाई और पाद सड़न का बचाव कार्यक्रम।
  • बागानों में बेलों को वहाँ पहले से लगे छाया के पेड़ों पर चढ़ाइए और जड़ के पास पलवार रखिए।

फ़ायदे और ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • IISR की तालिका में 2,880 किग्रा सूखी काली मिर्च/हेक्टेयर, श्रीकारा (2,677), पंचमी (2,828) और थेवम (2,481) से ऊपर।
  • प्रति बेल 6.14 किग्रा ताज़ी मिर्च और 90% दाना बँधना।
  • ऊँचे इलाक़ों और कॉफ़ी-चाय के बागानों के लिए बनी।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • पिपरीन सिर्फ़ 2.2% है, जबकि श्रीकारा में 5.1%। तीखेपन का भाव देने वाला ख़रीदार कम दे सकता है।
  • ओलियोरेज़िन 9.65% और सूखी निकासी 32% श्रीकारा (13.0% और 35.0%) से कम हैं।
  • IISR पाद सड़न का दर्जा नहीं देता, जो थेवम और शक्ति के पास है।

उपयुक्त क्षेत्र

IISR इसे केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु के ऊँचे इलाक़ों के लिए, कॉफ़ी और चाय के बागानों समेत, सुझाता है।

  • केरल
  • कर्नाटक
  • तमिलनाडु

ऊँचे इलाक़े की काली मिर्च: गिरिमुंडा या थेवम?

IISR ने दोनों को 2004 में ऊँचे इलाक़ों और कॉफ़ी-चाय के बागानों के लिए जारी किया, इसलिए ऊँचे इलाक़े के ज़्यादातर किसान इन्हीं दोनों में से चुनेंगे। IISR के आँकड़ों में दोनों की अलग ताक़त है।

गिरिमुंडा ज़्यादा देती है: 2,880 किग्रा सूखी काली मिर्च/हेक्टेयर जबकि थेवम की 2,481, और प्रति बेल 6.14 किग्रा ताज़ी मिर्च जबकि 4.76। इसमें ओलियोरेज़िन भी ज़्यादा है, 9.65% जबकि 8.15%, और पिपरीन भी, 2.2% जबकि 1.6%। थेवम की ताक़त रोग में है: IISR इसे फाइटोफ्थोरा पाद सड़न के प्रति खेत में सहनशील बताता है, जबकि गिरिमुंडा का कोई दर्जा नहीं। थेवम के दाने भी मोटे हैं, 1,000 हरे दानों का वज़न 155 ग्राम जबकि गिरिमुंडा का 112 ग्राम।

इसलिए चुनाव उपज और जोखिम के बीच है। जहाँ आपके बागान में पाद सड़न पहले आ चुका है, वहाँ थेवम लीजिए। जहाँ निकासी अच्छी है और आप ऊँचा औसत चाहते हैं, वहाँ गिरिमुंडा लीजिए और बचाव का कार्यक्रम तैयार रखिए।

क्या इसका बीज अपने पास रख सकते हैं?

इसे बीज से नहीं उगाते। IISR कहता है कि सिर्फ़ क्लोन से बनी रोपण-सामग्री, यानी जिस बेल को आपने देखा-परखा हो उसकी जड़ वाली कलमें, इस्तेमाल करें, दानों से उगी पौध नहीं। दो किस्मों के क्रॉस के दानों से माँ-बेल जैसे पौधे नहीं मिलते।

दूसरी किस्मों से तुलना

काली मिर्च की वे सभी किस्में, जिनका पेज इस साइट पर है, एक साथ देखें। जो किस्म आप अभी देख रहे हैं, उसकी पंक्ति रंग से अलग दिखती है।

किस्मकिसके लिए ठीकफल कब सेउपजराज्य
Arka Coorg Excelकोडगु के बाग जो IISR की सबसे ऊँची उपज चाहते हैंबारहमासी बेल; IISR इसे मध्यम समय में पकने वाली बताता है (पहली फ़सल की उम्र नहीं दी)3,267 किग्रा सूखी काली मिर्च/हेक्टेयर (IISR की तालिका); 7.15 किग्रा प्रति बेल (IISR की किस्म-पेज)कर्नाटक
IISR Chandraनई जल्दी पकने वाली संकर किस्म; लंबे गुच्छे और ऊँचा दाना बँधनाबारहमासी बेल; IISR इसे जल्दी पकने वाली बताता है (पहली फ़सल की उम्र या दिन नहीं दिए)औसतन 2,905 किग्रा सूखी काली मिर्च प्रति हेक्टेयर (IISR की किस्म-पेज); 7.5 किग्रा हरी मिर्च प्रति बेल; क्षमता 7,815 किग्रा/हेक्टेयरकेरल, कर्नाटक
IISR Girimundaयही पेजऊँचे इलाक़ों के बाग और बागान जो वज़न पर बेचते हैंबारहमासी बेल; IISR इसे मध्यम समय में पकने वाली बताता है (पहली फ़सल की उम्र नहीं दी)2,880 किग्रा सूखी काली मिर्च/हेक्टेयर (IISR की तालिका); 6.14 किग्रा ताज़ी मिर्च प्रति बेलकेरल, कर्नाटक, तमिलनाडु
IISR Malabar Excelओलियोरेज़िन के लिए ऊँचे इलाक़े में छोटा परीक्षण-टुकड़ाबारहमासी बेल; IISR इसे मध्यम समय में पकने वाली बताता है (पहली फ़सल की उम्र नहीं दी)1,440 किग्रा सूखी काली मिर्च/हेक्टेयर (IISR की तालिका); 2.78 किग्रा ताज़ी मिर्च प्रति बेलकेरल, कर्नाटक, तमिलनाडु
IISR Shakthiबारानी बाग जहाँ पाद सड़न सबसे बड़ा ख़तरा हैबारहमासी बेल; IISR इसे मध्यम समय में पकने वाली बताता है (पहली फ़सल की उम्र नहीं दी)2,253 किग्रा सूखी काली मिर्च/हेक्टेयर (IISR की किस्म-पेज) या 2,352 (IISR की तालिका); 5.2 किग्रा हरी मिर्च प्रति बेलकेरल, कर्नाटक
IISR Thevamकॉफ़ी और चाय के बागान और ऊँचे इलाकों के बाग, जहाँ पाद सड़न मुख्य जोखिम है और वज़न तीखेपन से ज़्यादा मायने रखता हैबारहमासी बेल। पहला फल 3 साल में, पूरी उपज 7–8 साल तक, और 20–30 साल तक उपज देती हैऔसतन 2,481 किग्रा प्रति हेक्टेयर सूखी काली मिर्च (IISR); 4.76 किग्रा ताज़ी प्रति बेल (KAU पुस्तिका)केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु
Karimundaघरेलू बाग और मिलवाँ बागान के उत्पादकों के लिए, जो जानी-पहचानी बेल और आसानी से मिलने वाली पौध चाहते हैंबारहमासी बेल। पहला फल 3 साल में, पूरी उपज 7–8 साल तक, और 20–30 साल तक उपज देती हैअसम के सुपारी ट्रायल में 0.98 किग्रा सूखी काली मिर्च प्रति बेल (12 में चौथे नंबर पर)केरल, कर्नाटक
Panchamiकेरल और दक्षिणी कर्नाटक के उत्पादकों के लिए, जो ओलियोरेज़िन पर बेचते हैं और ऐसी बेल चाहते हैं जिस पर बहुत दाने बँधेंबारहमासी बेल। पहला फल 3 साल में, पूरी उपज 7–8 साल तक, और 20–30 साल तक उपज देती हैऔसतन 2,828 किग्रा प्रति हेक्टेयर सूखी काली मिर्च और 5.20 किग्रा ताज़ी प्रति बेल (IISR, KAU); असम के सुपारी ट्रायल में 0.75 किग्रा सूखी प्रति बेलकेरल, कर्नाटक
Panniyur-1उन किसानों के लिए जिनके पास खुली या हल्की छाया वाली, अच्छी निकासी की ज़मीन है, जो ज़्यादा उपज वाली हाइब्रिड चाहते हैं और पाद सड़न से बचाव का कार्यक्रम चलाएँगेबारहमासी बेल। पहला फल 3 साल में, पूरी उपज 7–8 साल तक, और 20–30 साल तक उपज देती हैकर्नाटक के सुपारी वाले ट्रायल में 3.66 किग्रा सूखी काली मिर्च प्रति बेल (11 में सबसे ज़्यादा); असम के सुपारी वाले ट्रायल में 1.15 किग्रा प्रति बेलकेरल, कर्नाटक, तमिलनाडु
Panniyur-2उन उत्पादकों के लिए जो मिलवाँ घरेलू बाग के लिए बहुत तीखी, छाया सहने वाली काली मिर्च चाहते हैं और सबसे ऊँची उपज ज़रूरी नहीं मानतेबारहमासी — तीसरे साल पहला फल, 7–8वें साल पूर्ण फलन, 20–30 साल उत्पादकऔसतन 2,570 किग्रा प्रति हेक्टेयर सूखी काली मिर्च और 4.50 किग्रा ताज़ी प्रति बेल (KAU पुस्तिका); असम के सुपारी ट्रायल में 0.55 किग्रा सूखी प्रति बेलकेरल
Panniyur-5सुपारी, नारियल या पेड़ों की छाया वाले बाग, जहाँ छाया सहने वाली, बहुत गुच्छों वाली काली मिर्च चाहिएबारहमासी बेल। पहला फल 3 साल में, पूरी उपज 7–8 साल तक, और 20–30 साल तक उपज देती हैअसम के सुपारी ट्रायल में 1.25 किग्रा सूखी काली मिर्च प्रति बेल (12 में सबसे ज़्यादा); KAU पुस्तिका में औसतन 1,107 किग्रा प्रति हेक्टेयरकेरल, कर्नाटक
Panniyur-6उन उत्पादकों के लिए जो काली मिर्च वज़न के भाव बेचते हैं और मोटे दाने और बहुत गुच्छे चाहते हैं, ज़्यादा अर्क नहींबारहमासी बेल। पहला फल 3 साल में, पूरी उपज 7–8 साल तक, और 20–30 साल तक उपज देती हैऔसतन 2,127 किग्रा प्रति हेक्टेयर सूखी काली मिर्च और 2.30 किग्रा ताज़ी प्रति बेल (KAU पुस्तिका)केरल
PLD-2ओलियोरेज़िन ख़रीदार; केरल के मैदान और ऊँची ज़मीनबारहमासी बेल; IISR इसे देर से पकने वाली बताता है (पहली फ़सल की उम्र नहीं दी)औसतन 2,475 किग्रा सूखी काली मिर्च/हेक्टेयर; क्षमता 4,731 किग्रा/हेक्टेयर; 4.97 किग्रा हरी मिर्च प्रति बेल (IISR)केरल
Pournamiधीमे क्षय के इतिहास वाले बाग, और सुपारी या केले की अंतरफसल, जहाँ जड़-गाँठ सूत्रकृमि की चिंता हैबारहमासी बेल। पहला फल 3 साल में, पूरी उपज 7–8 साल तक, और 20–30 साल तक उपज देती हैऔसतन 2,333 किग्रा प्रति हेक्टेयर सूखी काली मिर्च और 4.70 किग्रा ताज़ी प्रति बेल (IISR, KAU); असम के सुपारी ट्रायल में 0.85 किग्रा सूखी प्रति बेलकेरल, कर्नाटक
Sreekaraउन उत्पादकों के लिए जो अर्क निकालने वालों को बेचते हैं और केरल, दक्षिण कर्नाटक या तमिलनाडु में ऊँचा ओलियोरेज़िन और उड़नशील तेल चाहते हैंबारहमासी बेल। पहला फल 3 साल में, पूरी उपज 7–8 साल तक, और 20–30 साल तक उपज देती हैऔसतन 2,677 किग्रा प्रति हेक्टेयर सूखी काली मिर्च और 4.80 किग्रा ताज़ी प्रति बेल (IISR, KAU); असम के सुपारी ट्रायल में 0.70 किग्रा सूखी प्रति बेलकेरल, कर्नाटक, तमिलनाडु
Subhakaraकेरल, दक्षिण कर्नाटक और तमिलनाडु के अंतरफसल वाले बाग और ऊँचे इलाके, जहाँ वज़न और भरोसा पिपरीन से ज़्यादा मायने रखते हैंबारहमासी बेल। पहला फल 3 साल में, पूरी उपज 7–8 साल तक, और 20–30 साल तक उपज देती हैऔसतन 2,352 किग्रा प्रति हेक्टेयर सूखी काली मिर्च और 4.20 किग्रा ताज़ी प्रति बेल (IISR, KAU); असम के सुपारी ट्रायल में 1.12 किग्रा सूखी प्रति बेल (12 में तीसरे नंबर पर)केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु

इस फ़सल के कैलकुलेटर

आगे के हिसाब यहाँ कर लीजिए — कितना बीज ख़रीदें, बोरा अंकुरित होगा या नहीं, खाद का ख़र्च कितना बैठेगा, और काली मिर्च का भाव क्या चल रहा है।

सब्सिडी और सरकारी मदद

काली मिर्च के बीज या रोपण सामग्री की लागत में मदद करने वाली योजनाएँ। नियम और आवेदन का तरीक़ा हर योजना के पेज पर है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या मैं गिरिमुंडा को बीज से उगा सकता हूँ?

नहीं। यह संकर किस्म है और IISR कहता है कि सिर्फ़ क्लोन से बनी रोपण-सामग्री, यानी जड़ वाली कलमें, इस्तेमाल करें। संकर के दानों से माँ-बेल जैसी बेलें नहीं मिलतीं।

गिरिमुंडा का पिपरीन इतना कम क्यों है?

IISR पिपरीन 2.2% देता है, जबकि श्रीकारा में 5.1% और पौर्णमी में 5.3%, और कारण नहीं बताता। किस्म ऊँचे इलाक़ों के लिए और उपज और स्थिरता के लिए जारी हुई थी, और इसकी मिर्च हल्की है। तीखेपन से आपको बेहतर भाव मिलता है तो कोई और किस्म चुनिए।

क्या गिरिमुंडा मैदान में उगेगी?

IISR इसे ऊँचे इलाक़ों और कॉफ़ी-चाय के बागानों के लिए सुझाता है और मैदान का कोई नतीजा नहीं देता। मैदान के लिए IISR की तालिका श्रीकारा, पंचमी और पौर्णमी को केरल और दक्षिण कर्नाटक के लिए, और शक्ति को बारानी मैदान और ऊँचे इलाक़ों के लिए गिनाती है।

मैं कौन-सा उपज का आँकड़ा लूँ, 2,880 या 2,800 किग्रा/हेक्टेयर?

IISR की किस्म-तालिका 2,880 किग्रा/हेक्टेयर देती है और AICRP मसाला पुस्तिका 2,800, यानी दोनों क़रीब हैं। इनमें से कोई भी सिर्फ़ किस्मों की तुलना के लिए इस्तेमाल कीजिए। असली आँकड़ा आपके बाग की छाया, बारिश, रोग और खाद-पानी से बदलेगा।

स्रोत: IISR-Girimunda (Black Pepper) — ICAR-Indian Institute of Spices Research, Spice varieties: significant characteristics of black pepper varieties — ICAR-IISR (ITM-ABI), Improved Varieties of Black Pepper — AICRP on Spices (Pepper Research Station Panniyur), September 2025. संपादकीय नीति.